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Monday, January 12, 2026

स्वामी विवेकानन्द की 163वीं जन्म जयंती समारोह - जोधपुर

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, राजस्थान प्रांतशाखा जोधपुर द्वारा वीर योद्धा सन्यासी व भारत की युवा शक्ति प्रेरणा स्त्रोत स्वामी विवेकानन्द की 163वीं जन्म जयंती समारोह उत्साह पूर्वक मनाया गया।

कुडी भगतासनी में मुख्य अतिथि श्री सोहनलाल सारण की उपस्थिति रहीविवेकानन्द केन्द्र के जीवनव्रती शिवपूजन भैया ने राउमावि कुडी भगतासनी सेक्टर में स्वामी विवेकानन्द जयन्ती पर विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये। आज का युवा स्वामी विवेकानन्द के व्यक्तित्व से प्रेरित हो स्वयं के जीवन में सफलता प्राप्त करने के साथ साथ राष्ट्र का भविष्य भी संवार रहा है।

केन्द्र के  व्यवस्था प्रमुख श्री एन.के. प्रजापत ने बताया की समारोह की शुरूआत प्रातः काल शहर के संवित सर्कल पर स्वामी विवेकानन्द की विराट प्रतिमा पर युवाओं द्वारा स्वामीजी को पुष्पांजलि व राष्ट्रभक्ति गीतों के माध्यम से हुई। इस अवसर पर हम है सूपत भारत के... स्वामीजी की जीवनगाथा आदि देशभक्ति-समूह गान ने वातावरण को विवेकानन्द मय कर दिया। युवाओं के जोश व उत्साह पूर्ण नारों से सर्द सुबह में भावनाओं की गर्माहट का अलौकिक अनुभव हुआ।

विवेकानन्द केन्द्र के युवा प्रमुख श्री मनीष राठौड़ के अनुसारस्वामी विवेकानन्द की जयन्ती के उपलक्ष्य में जोधपुर जिले के विभिन्न विद्यालयों में उत्साहपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शास्त्री नगर स्थित राउमावि विशिष्ट पूर्व विद्यालयश्रीमती सरला गर्ग राउबामावि और श्रीरामस्वरूप गणेशीदेवी चिल्का राउमावि सहित कुड़ी भगतासनीबासनीदेवनगर एवं बालेसर के सीनियर विद्यालयों में छात्र-छात्राओं ने सामूहिक सूर्य नमस्कार का अभ्यास कर स्वामी विवेकानंद के विचारों के साथ अपनी भावांजलि अर्पित की।

इस दौरान बासनी विद्यालय में प्रिंसिपल श्री अनिल ललवानी ने विद्यार्थियों को संबोधित कियाजबकि विस्तार प्रमुख विनीत कपूर ने ध्यान का अभ्यास कराया। राजकीय विशिष्ट पूर्व विद्यालय में व्याख्याता श्री अजय शर्मा ने स्वामीजी के बचपन के प्रेरक संस्मरण सुनाए और छात्रा छवि खींची ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्री संजय देव द्वारा सांस्कृतिक स्वाध्याय प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरित किए गए और सह नगर प्रमुख श्री श्याम मालवीय ने गीतों के माध्यम से देशभक्तिपूर्ण वातावरण निर्मित किया। बालेसर के देवनगर विद्यालय में भी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री पंकज व्यासश्री गौरव शर्मा, श्री भगवान भैयाश्री प्रकाश चौहान और श्री मोहित भैया जैसे कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा।

Sunday, June 22, 2025

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के काउंटडाउन कार्यक्रम – जोधपुर


11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 की पूर्व तैयारी के अंतर्गत आज जोधपुर में काउंटडाउन कार्यक्रम का आयोजन बड़े उत्साह और समर्पण के साथ संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम केंद्रीय संचार ब्यूरो, क्षेत्रीय कार्यालय जोधपुर एवं विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, जोधपुर शाखा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में ए.एन.एम. ट्रेनिंग सेंटर, सीएमएचओ स्टॉफ सहित बड़ी संख्या में योग प्रेमियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर योग की गहराई, उसकी वैज्ञानिकता और दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता को न केवल अनुभव किया, बल्कि उसे अपनाने का संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत तीन ओंकार और शांति पाठ के साथ हुई, जिससे वातावरण में शांति और एकाग्रता का संचार हुआ। मुख्य अतिथि श्री के. आर. सोनी, क्षेत्रीय प्रचार सहायक, एवं विशिष्ट अतिथि श्री आशीष शर्मा, क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, केंद्रीय संचार ब्यूरो ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

योग सत्र का नेतृत्व योगाचार्य प्रेम रतन जी ने किया, जिन्होंने सूक्ष्म व्यायाम, ताड़ासन, त्रिकोणासन, वज्रासन, भुजंगासन आदि को सरलता से करवा कर प्रतिभागियों को योग से स्वास्थ्य लाभ की ओर प्रेरित किया। योगिनी इंदु जी द्वारा कराए गए अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भ्रामरी जैसे प्राणायामों से मानसिक शांति और आंतरिक शुद्धि का अनुभव हुआ।

कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ, जिसमें सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेताओं को स्मृति चिन्ह और पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया।

विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता शिवपूजन जी ने योग को जीवनशैली में अपनाने की प्रेरणा दी और कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक और सामाजिक समरसता का भी माध्यम है।

कार्यक्रम के अंत में विवेकानंद केंद्र जोधपुर के व्यवस्था प्रमुख एन. के. प्रजापत ने बताया कि 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अंतर्गत आगामी सप्ताह से गीता भवन में विशेष योग, प्राणायाम एवं ध्यान शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय योग प्रोटोकॉल के अनुसार अभ्यास कराया जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन योग एक्सपर्ट श्याम मालवीय ने किया। इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के कार्यकर्ता गौरव कुमार शर्मा, विनीत कपूर, राज भूतड़ा, अनिता बोराणा, मनीष राठौड़, दिव्यांशा लिंबा, हिमांशु परिहार, अनमोल शर्मा, तरुण दैय्या, प्रकाश भाटी, अंबालाल जेदिया, एवं प्रकाश सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इस सफल आयोजन ने जोधपुर में योग के प्रति जनमानस को प्रेरित किया और ‘स्वस्थ भारत – समर्थ भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सार्थक पहल की।


Wednesday, March 22, 2023

नवसंवत्सर 2080 - जोधपुर शाखा

विवेकानंद केंद्र जोधपुर शाखा द्वारा आयोजित नवसंवत्सर 2080 के स्वागत कार्यक्रम में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. नवनीत दाधीच, सहायक प्राध्यापक - डॉ राधाकृष्णन आयुर्वेद महाविद्यालय करवड़,जोधपुर -  ने उपस्थित योग साधकों को आयुर्वेद के स्वास्थ्य के नियमों की जानकारी देते हुए नए वर्ष में भारतीय संस्कृति के आयुर्वेद पर आधारित अनुशासित मिताहार का संकल्प लेने का आवाहन किया। डॉ. दाधीच  ने "भारतीय संस्कृति और आयुर्वेद" इस विषय पर मार्गदर्शन देते हुए बताया कि भारत का आयुर्वेद स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है। यह जानकारी विवेकानंद केंद्र के संपर्क प्रमुख पंकज व्यास ने दी। कार्यक्रम का प्रारंभ नव वर्ष निमित्त तिलक कर ओमकार प्रार्थना के पश्चात सह युवा प्रमुख संजय देव द्वारा  वक्ता परिचय से हुआ। डॉ. दाधीच के प्रेरक मार्गदर्शन के लिए विभाग प्रमुख प्रेम रतन सोतवाल ने स्मृति चिन्ह और साहित्य देकर धन्यवाद ज्ञापन दिया।  कार्यक्रम में प्रकल्प संगठक दीपक खैरे, युवा प्रमुख श्याम मालवीय, कार्य पद्धति प्रमुख गौरव शर्मा, योग वर्ग प्रमुख भगवान पंवार, स्वाध्याय प्रमुख हिम्मत सिंह, आईटी प्रमुख अनमोल शर्मा, नगर समिति सदस्य प्रकाश भाटी, रवि गुप्ता,साहित्य मनीष राठौड़, तरुण जी, अंबालाल, अमिता बोहरा, अनीता बोराणा, आयुषी भूतड़ा उपस्थित थे।

Wednesday, June 8, 2022

Personality Development Camp - Jodhpur




 संस्कार वह प्रक्रिया है जो बाल मन को सम्पूर्ण जीवन का आधार प्रदान करती है। शिविर में दिए गए संस्कार शिविरार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी। ये विचार विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा जोधपुर द्वारा आयोजित आवासीय व्यक्तित्व विकास के समापन समारोह पर  मुख्य व्यक्ता राजस्थान प्रान्त संगठक सुश्री प्रांजलि येरिकर ने  व्यक्त किये।


शिविर प्रतिवेदन पढ़ते हुए शिविर प्रमुख एन. के. प्रजापत ने बताया कि शिविर के विभिन्न कार्यक्रम नन्हें बालक बालिकाओ के व्यक्तित्व व संस्कार निर्माण में सहयोगी होंगे। शिविर में कुल 147 बालक-बालिकाओं सहभाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के विभाग संचालक सी.पी. अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान समय मे बालको की न केवल दिन चर्या अव्यवस्थित हुई है वरन भोजन की पौष्टिकता भी समाप्त हो गई है, इस लिए नियमित आहार विहार की आवश्यकता है। केंद्र का यह शिविर उन्हें सही दिशा  प्रदान करता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विभाग प्रमुख प्रेम रतन सोतवाल व एम.एल. तंवर थे। शिविर के अनुभव सुनाते हुए शिविरार्थी दामिनी, हरेंद्र, सारांश गोयल व खुशाली  ने बताया कि शिविर में बहुत सारी नई बाते सीखी है, जिनका घर पर भी पालन करते रहेंगे।


शिविरार्थियों ने इस दौरान गीता पठन, सूर्यनमस्कार व नाटक का मंचन किया। शिविर गीत "हम है सपूत भारत के" गाकर शिविरार्थियों ने उत्साह प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में जोधपुर शाखा के जीवनव्रती दीपक खैरे व्यवस्था प्रमुख महेश बोहरा, हरि भैया, श्याम मालवीय, विनीत कपूर, मेहुल अरोड़ा, अनमोल आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नगर प्रमुख डॉ अमित व्यास ने किया।


*युवा प्रेरणा शिविर का आरंभ*
इस अवसर पर कक्षा 10वी से ऊपर के युवाओं-युवतियों के लिए चार दिवसीय युवा प्रेरणा शिविर का शुभारंभ हुआ जो कि 26 मई तक चलेगा। संवित धाम आश्रम, दईजर में आयोजित इस प्रेरणा शिविर में पर्सनलिटी डेवलपमेंट की विभिन्न गतिविधियों का आयोजन होगा।

Thursday, May 12, 2022

New Year Celebration - Jodhpur


 नव वर्ष का उत्साह और ऊर्जा के साथ स्वागत
 
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा जोधपुर द्वारा नव वर्षाभिनंदन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन युवा प्रमुख श्याम मालवीय ने किया। ओंकार और प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सभी ने एक दूसरे को तिलक लगाया और मौली बांधी, एक दूसरे को भगवा दुपट्टा पहनाया। उसके बाद केंद्र कार्यकर्ता राज भूतड़ा ने सभी कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। उसके पश्चात ब्यावर के युवा प्रमुख रितेश भैया ने यह कल कल छल छल बहती क्या कहती गंगा धारा गीत गाया।

गीत के पश्चात मुख्य वक्ता विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती  दीपक खैरे का उद्बोधन हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होंने यह बताया कि तिलक लगाना अपने मनुष्यत्व को जागृत करना, स्वयं को मनुष्य होने का एहसास दिलाना, और अपने अंदर छुपी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने का प्रतीक है। एक दूसरे को मौली पहनाना एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य करने का संदेश लाना है जो समाज में एक दूसरे से जुड़ कर इस राष्ट्र के लिए राष्ट्र पुनरुत्थान का कार्य करना है। उद्बोधन के पश्चात सभी ने समाज के लिए कार्य करने का संकल्प लिया और भारत मां के समक्ष अपने संकल्प को दोहरा कर माता के चरणों में पुष्पांजलि की। इसके साथ सर्वे भवंतु सुखिनः की कामना करते हुए प्रार्थना कर कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में उपस्थितों की संख्या 30 रही।

विवेकानंद केंद्र जोधपुर के विभाग संचालक चंद्र प्रकाश अरोड़ा, विभाग प्रमुख प्रेम रतन सोतवाल, योग प्रमुख पंकज व्यास, साहित्य सेवा प्रमुख अनमोल शर्मा, हरि , गजेश भूतड़ा ,प्रिया अग्रवाल, अनीता बोराणा, प्रकाश भाटी, विनीत कपूर, भगवान पंवार,मनीष चौहान कार्यकर्ता गण कार्यक्रम में उपस्थित थे।

Saturday, April 16, 2022

Dainik Yoga Abhyaas - Jodhpur



 विवेकानंद केंद्र के जोधपुर के गीता भवन कार्यालय में प्रतिदिन सुबह 6:30 से 7:30 तक योगाभ्यास होता है। इसमें शिथिलीकरण, सूर्य नमस्कार, आसन और प्राणायाम के नियमित अभ्यास होते हैं और साप्ताहिक ध्यान का अभ्यास भी होता है। विवेकानंद केंद्र के योग वर्ग प्रमुख पंकज व्यास ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 20 साधक इसमें सहभागी होते हैं और स्वास्थ्य लाभ करते हैं। विवेकानंद केंद्र के विभाग प्रमुख प्रेम रतन सोतवाल ने कहा कि विवेकानंद केंद्र की योग गतिविधियां पिछले दो दशकों से गीता भवन में निरंतर चल रही है और अनेकों ने इसका लाभ उठाया है। जीवनव्रति दीपक खैरे ने कहा कि विवेकानंद केंद्र राजस्थान के अनेक शहरों में नियमित रूप से इस तरह के योग वर्गों का आयोजन करता है। ‌युवा प्रमुख शाम मालवीय ने कहा कि विवेकानंद केंद्र समय-समय पर जोधपुर शहर के विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर योग सत्रों का आयोजन करता है जिससे कि अधिकाधिक लोगों को इसका लाभ मिले। राज भूतड़ा ने बताया कि वे पिछले 5 वर्षों से केंद्र के योग वर्ग में आ रही है और इससे जीवन में अनुशासन लाने और स्वस्थ रहने में उन्हें बहुत मदद मिलती है। जुगल किशोर अग्रवाल ने बताया के योग से जीवन में आनंद प्राप्त होता है और वे पिछले 5 वर्षों से नियमित योगाभ्यास करते हैं। अनीता बोराना दीदी ने बताया कि वह वजन कम करने के लिए नियमित आती है और उसका उन्हें लाभ भी प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को भी नियमित रूप से योगाभ्यास करना चाहिए। प्रिया अग्रवाल बताया कि उन्हें यहां योग सीखने और सिखाने में मदद मिलती है। नियमित अभ्यासी प्रकाश भाटी, भगवान पंवार, विनीत कपूर, अनुराधा दीदी, मनीष चौहान ने इस योग वर्ग को अत्यंत लाभप्रद बताया और सभी को इसमें सहभागी होने का आह्वान किया।

Wednesday, April 13, 2022

Sadhana Diwas - Jodhpur


 विवेकानंद केंद्र के संस्थापक माननीय श्री एकनाथजी रानाडे की 107 वी जयंती 'साधना दिवस' 19 नवंबर 2021 को गीता भवन, जोधपुर में आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में जोधपुर के 14 सेवाभावी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता  श्री अरविंद भट्ट ने कहा कि एकनाथजी सभी समविचारी संगठनों को साथ लेकर, मिलकर काम करने में विश्वास करते थे। और यही समय की आवश्यकता है।

विवेकानंद केंद्र राजस्थान प्रांत संगठक सुश्री पांजलि दीदी ने कहा,-"एकनाथजी सेवा को ही साधना मानते थे। उनका संपूर्ण जीवन 'कठिनाइयों को अवसर में बदलने' और 'सभी समविचारी व्यक्तियों और बिखरी आध्यात्मिक शक्तियों को देश हित में एकत्र लाने में लगा।'

कार्यक्रम में तीन बातों पर सहमति बनी - सभी सहभागी संगठनों के प्रतिनिधि एक दूसरे के कार्यक्रमों में उपस्थित रहेंगे, प्रत्येक वर्ष कम से कम एक कार्यक्रम सब साथ मिलकर आयोजित करेंगे और ऐसी बैठक नियमित रूप से सभी संगठनों के कार्यालयों में आयोजित की जाएगी।

कार्यक्रम में गायत्री परिवार से प्रमोद बारचे, घनश्याम आचार्य, सोहन लाल पटेल, आर्ट ऑफ लिविंग से गजेंद्र गहलोत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चोखा नगर से टीकमचंद, विद्या भारती से चेतन प्रकाश सेन, भारत विकास परिषद से रामकिशन भूतड़ा, स्वदेशी जागरण मंच से अनिल कुमार वर्मा, अधिवक्ता परिषद से अविन छंगानी, सेवा भारती समिति से अशोक कुमार अग्रवाल, अंतरराष्ट्रीय योग समिति से गजेंद्र सिंह, इंद्र प्रकाश दाहिया, विवेकानंद केंद्र से चंद्र प्रकाश अरोड़ा, प्रेम रतन सोतवाल, दीपक खैरे, सन टु ह्मुमेन से राकेश गर्ग, एनिमल होम से सुधीर शारडा, भारतीय शिक्षण मंडल से दिव्यांश बाजपेई उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित व्यास ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में महेश बोहरा, श्याम मालवीय, विश्वा शर्मा, हैपन कुमार, गौरव शर्मा और अनमोल शर्मा का सहयोग प्राप्त हुआ।

Tuesday, November 9, 2021

हिम्मत कभी ना हारो ! कार्यशाला संपन्न - विवेकानंद केंद्र जोधपुर विभाग




 "विजेता कभी हिम्मत नहीं हारते" : दीपक खैरे

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी  जोधपुर विभाग की ओर से आयोजित वर्चुअल कार्यशाला "हिम्मत कभी ना हारो" को संबोधित करते हुए जीवनव्रति दीपक खैरे ने कहा कि सपने राजाओं की तरह सामाजिक और राष्ट्रीय हित में देखना चाहिए, भिखारियों की तरह मात्र व्यक्तिगत हित मे नहीं । सपने साकार करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहें हिम्मत कभी ना हारे । विजेता कभी प्रयत्न छोड़ते नहीं, जो प्रयत्न छोड़ते हैं वह विजेता होते नहीं ।

उन्होंने आगे कहा कठिनाइयों, गलतियों, विलंब से हतोत्साहित न हों, कठिनाइयों को अवसर में बदलें। योजनाएं बदलें पर ध्येय ना बदलें।  सकारात्मक विचारों और साथियों के साथ रहें, निषेधात्मक विचारों और लोगों से दूर रहें।

इस वर्चुअल कार्यशाला की संयोजिका विश्वा शर्मा ने बताया कि इस कार्यशाला में 55 लोग सहभागी हुए। जीवन की समस्याओं को सुलझाने वाली ऐसी प्रेरक कार्यशालाओं का नियमित आयोजन करने का अनेक सहभागियों  ने आग्रह किया। अगली कार्यशाला 22 अगस्त को होगी।

कार्यक्रम का संचालन लिच्छा राम ने किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रेमरतन सोतवाल,मगराज चौधरी, हरि का योगदान रहा।

Monday, August 23, 2021

ह्रदय से पवित्र व्यक्तियों को ईश्वर अपना शिष्य बनाते हैं : प्रोफेसर ओपीएन कल्ला ।




 ह्रदय से पवित्र व्यक्तियों को ईश्वर अपना शिष्य बनाते हैं : प्रोफेसर ओपीएन कल्ला

सुप्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर ओपीएन कल्ला जी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विवेकानंद केंद्र जोधपुर द्वारा आयोजित वर्चुअल व्याख्यान में सहभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिनके हृदय पवित्र होते हैं उन्हें ईश्वर अपना शिष्य चुनते हैं। और यही शिष्य आगे चलकर गुरु बनते हैं। प्रोफेसर कल्ला ने ह्रदय की पवित्रता को सर्वाधिक महत्व दिया। अनेक वैज्ञानिकों के जीवन के उदाहरण देते हुए उन्होंने उनकी सफलता का रहस्य उनके हृदय की पवित्रता बताया। प्रोफ़ेसर कल्ला जी ने यह विश्वास जताया कि आज उनके व्याख्यान सुनने वालों में अनेक भावी वैज्ञानिक भी होंगे।
इस व्याख्यान का लगभग 55 सहभागीयों ने लाभ उठाया।
कार्यक्रम का संचालन मगराज भैया ने किया, नगर प्रमुख डॉ अमित व्यास ने केंद्र परिचय, विभाग प्रमुख श्री प्रेम रतन जी ने वक्ता परिचय और विवेकानंद केंद्र हिंदी प्रकाशन विभाग प्रमुख श्री अशोक माथुर जी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। हरि भैया, विश्वा शर्मा, पंकज व्यास का सहयोग प्राप्त हुआ।

Saturday, July 31, 2021

संघर्ष टालें समस्या सुलझाएं विषय पर वर्चुअल कार्यशाला सम्पन्न




 संवाद से समस्याएं सुलझाएं : डॉ.दिव्या जोशी

विवेकानंद केंद्र जोधपुर विभाग द्वारा आयोजित वर्चुअल कार्यशाला "संघर्ष  टाले, समस्या सुलझाएं" में सहभागियों को संबोधित करते हुए डॉ.दिव्या जोशी, एसोसिएट प्रोफेसर, डूंगर कॉलेज  बीकानेर , ने खुले मन से संवाद द्वारा  समस्याओं और संघर्षों को सुलझाने का सुझाव दिया।

डॉ.जोशी ने समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित बिंदु बताएं। हमें स्वीकार करना चाहिए कि हमें कुछ बातें परेशान कर रही है। सकारात्मक दृष्टिकोण हमेशा लाभदायक होता है इसे बनाए रखें। व्यक्ति समस्या और संघर्ष से बड़ा होता है। जीवन के द्वंदो को स्वीकार कीजिए और उसे स्वभाविक समझिए, यह विश्वास रखिए सब कुछ अच्छा है और सब कुछ अच्छा ही होगा।

युवा कार्यशाला की संयोजिका विश्वा शर्मा ने बताया कि इस कार्यशाला के लिए 161 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ एवं उपस्थिति 45 रही। विवेकानंद केंद्र जोधपुर विभाग इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन हर 15 दिनों मे करता है। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवा वर्ग को उनके सम्मुख उपस्थित प्रासंगिक समस्याओं और चुनौतियों का सफलतापूर्वक प्रतिसाद देने के लिए सक्षम बनाना है। इससे कई लोग लाभान्वित होते हैं और अपना सकारात्मक अनुभव साझा करते हैं।

इस कार्यशाला का संचालन वैभव सारस्वत ने किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यकर्ता लिच्छा राम, मगराज चौधरी, गौरी सारस्वत, पुष्पलता, सौरभ आदि का सहयोग रहा।

प्राणायाम सत्र संपन्न : विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा जोधपुर




 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा जोधपुर, राजस्थान प्रांत द्वारा 11 जुलाई से 15 जुलाई तक प्राणायाम सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र ऑनलाइन गूगल मीट पर तथा ऑफलाइन केंद्र परिसर भवन में किया गया। इस कार्यक्रम में ऑनलाइन तथा ऑफलाइन 52 अभ्यासियो  ने भाग लिया जो 15 से 70 वर्ष आयु के थे।

प्रथम दिन कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। शिथिलीकरण की क्रियाओं का अभ्यास श्याम मालवीय तथा पंकज व्यास द्वारा कराया गया । दीपक जी द्वारा शरीर में प्राण क्या है ? प्राणायाम क्या है?  इस विषय को समझाया गया। प्रेम रतन जी द्वारा कपालभाति , खंडिय और पूर्ण योगिक श्वसन का अभ्यास कराया गया।

सत्र के दूसरे दिन श्याम मालवीय और जुगल किशोर अग्रवाल ने श्वसन क्रियाओं का अभ्यास, व्याघ्र श्वसन तथा लघु शवासन कराया। दीपक जी द्वारा पंचकोश का विस्तृत वर्णन और प्रेम रतन जी द्वारा चंद्र अनुलोम विलोम,चंद्र भेदन,सूर्य भेदन, नाड़ी शोधन  का अभ्यास कराया गया।

सत्र के तीसरे दिन श्याम मालवीय और जुगल किशोर अग्रवाल  ने श्वसन अभ्यास,   ॐ  कार उच्चारण के साथ शशांक आसन श्वसन कराया गया। दीपक खैरे जी द्वारा पंचप्राण का विस्तृत वर्णन किया गया । प्रेम रतन जी द्वारा भस्त्रिका, भ्रामरी का भी अभ्यास कराया गया।

चौथे दिन के सत्र में श्याम मालवीय और  जुगल किशोर अग्रवाल ने श्वसन  अभ्यास को मंत्रों के साथ कराया । दीपक जी द्वारा कोविड  महामारी को ध्यान में रखते हुए अधोमुख  श्वसन की जानकारी हरि भैया के  डेमो के साथ दी गई । प्रेम रतन जी द्वारा उज्जायी , शीतली, शीतकारी का अभ्यास कराया गया।

सत्र के समापन दिवस 15 जुलाई को मुख्य अतिथि और वक्ता जोधपुर नगर संचालक अशोक दानी जी ने सहभागियों को  स्वयं को स्वस्थ रखते हुए राष्ट्र को भी स्वस्थ रखने का आव्हान किया । इसके पूर्व राज भूतड़ा द्वारा सत्र परिचय व नगर प्रमुख डॉ अमित व्यास जी द्वारा केंद्र परिचय, श्याम मालवीय द्वारा  सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। उसके पश्चात सभी सहभागियों ने अपना अनुभव साझा किया। केंद्र प्रार्थना के पश्चात अल्पाहार रखा गया।

Saturday, July 24, 2021

"व्यक्तित्व विकास मे आत्मवलोकन की भूमिका " पर आधारित वेबिनार संपन्न - जोधपुर



 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी  जोधपुर विभाग द्वारा २० जून २०२१ को "व्यक्तित्व विकास मे आत्मवलोकन की भूमिका " पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में मुख्य वक्त के रूप में डॉ बेला भनोट, शिक्षाविद एवं पूर्व  प्रधानाचार्य, डूंगर कॉलेज बीकानेर का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ ।

वेबिनार का विधिवत प्रारम्भ तीन ओमकार प्रार्थना से हुआ।  गीत और विवेक वाणी का वचन के पश्चात वेबिनार की मुख्या वक्ता डॉ बेला भनोट जी का उद्बोधन प्रारम्भ हुआ  ।
डॉक्टर बेला भनोट ने आत्मावलोकन से होने वाले मानसिक तथा आध्यात्मिक परिवर्तन का महत्व बताया।आत्मावलोकन के अर्थ तथा महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि   किसी कार्य को करने या होने के बाद उसके करने में हमारे द्वारा अपनाई गई क्रिया और विचार पद्धति का विश्लेषण बहुत आवश्यक है। इसलिए हमें अपने बुद्धि, चिंतन एवं आत्म अवलोकन से अपने जीवन को प्रकाशित करने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।

वेबिनार में उपस्थित संख्या ४५ रही। बीकानेर कार्र्यस्थन की संयोजिका डॉ दिव्या जोशी ने धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात सूचना देते हुए कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ किया ।

Tuesday, June 22, 2021

मधुर व्यक्तित्व (Pleasing Personality) पर आयोजित वेबिनार सम्पन्न



नमस्कार।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी जोधपुर विभाग द्वारा आयोजित युवा- एक व्यक्तित्व विकास ई- कार्यशाला के अंतर्गत आज रविवार,  दिनांक 6 जून,2021 को वेबिनार का आयोजन वेबएक्स पर किया गया। वेबिनार का विषय प्लीसिंग पर्सनालिटी रखा गया था। वेबिनार के मुख्य वक्ता विख्यात पर्सनालिटी गुरु श्री अरविन्द जी भट्ट रहे।


कार्यक्रम का प्रारंभ तीन ॐ कार प्रार्थना से  श्री श्याम मालवीय जी द्वारा किया गया। तत्पश्चात मुख्य वक्ता श्री अरविन्द जी भट्ट का  परिचय  युवा कार्यकर्ता सुश्री कनिका बिरला द्वारा दिया गया। प्रेरणादायी गीत कोई चलता पदचिन्हों पर जोधपुर नगर कार्यपद्धति प्रमुख श्री हैप्पन कुमार द्वारा लिया गया। विवेक वाणी का वाचन बीकानेर कार्यस्थान व्यवस्था प्रमुख श्री वैभव सारस्वत द्वारा किया गया। इसके पश्चात श्री अरविन्द जी भट्ट का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

व्याख्यान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:- 


श्री अरविन्द जी भट्ट ने अपना वक्तव्य प्रारम्भ करते हुए कहा कि प्रत्येक युग में अलग अलग युगपुरुष हुए हैं और उन्हें अलग अलग विशेषणों से बुलाया जाता है जैसे सतयुग में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, त्रेता में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एवं द्वापर में जन्मे मधुर, मनोहारी, मनोग्राही व्यक्तित्व भगवान् श्री कृष्ण हैं। 


उन्होंने personality शब्द को परिभाषित करते हुए कहा कि अंग्रेज़ो के अनुसार personality यह शब्द अंग्रेजी के persona से  निकला है जिसका अर्थ होता है मुखौटा,जो पूर्ण रूप से असत्य है परंतु वर्तमान में स्वीकार्य है। समाज में जो व्यक्ति देखने में जैसा लगता है उसे वैसा ही माना जाता है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अष्टावक्र और महात्मा गाँधी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अंग्रेजी परिभाषा External पर्सनालिटी (बाहरी व्यक्तित्व) की है। व्यक्तित्व केवल बाह्य नहीं होता बल्कि अधिकांशतः आंतरिक होता है। प्रत्येक व्यक्ति में कोई ना कोई गुण होता है जिसे पहचानकर उसे उत्कर्ष पर ले जाएं जहाँ जब भी उस विशिष्ट गुण की बात हो तो हमारा नाम आये और यदि हमारी चर्चा हो तो उस विशिष्ट गुण की चर्चा हो। वह आंतरिक रूप से मधुर व्यक्तित्व है।

मधुर व्यक्तित्व समायोजन होता है-

Earning and organization of Physical, Psychological, Emotional, Intellectual and Spiritual Qualities As Presented to others.

श्री अरविन्द जी कहते हैं कि केवल गुणों का अर्जन और समायोजन पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका समाज के समक्ष प्रकटीकरण/प्रस्तुतिकरण आवश्यक है। उन्होंने गुणों के प्रदर्शन और प्रस्तुतिकरण में भी अंतर बताया। 

श्री अरविन्द जी आगे कहते हैं कि प्रस्तुतिकरण में आने वाली कठिनाई मुख्यतः शर्म (Shyness) है।
 Shyness के 4 स्तर होते हैं-


1.सामान्य 2.अत्यधिक। इनमे व्यक्ति यह सोचता है कि MKK मैं कैसे करूँ?, मैं क्या करूँ? मैं कैसे करूँगा?
सामान्य shyness सभी के साथ होती है जो कि स्वाभाविक है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं लार्ड चर्चिल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे भी जब भाषण देने जाते तो पहले कुछ मिनट वे भी नार्मल shyness का अनुभव करते थे। Extreme या अत्यधिक shyness में व्यक्ति स्वयं पर संदेह होने लगता है यह  उस पर हावी रहती है।

3.Social (सामाजिक) shyness में अकेले में व्यक्ति अच्छा करता है जबकि लोगों के सामने करने में संकोच होता है। ऐसे व्यक्ति LKK - लोग क्या कहेंगे के शिकार होते हैं। 


4. Severe Social Phobia:- 
इसमें व्यक्ति MKK+LKK का शिकार होता है। नकारत्मकता हावी रहती है। 
इस से तुरंत बाहर निकलना चाहिए। 
जिसके लिये deep breathing का अभ्यास जो कि ध्यान की प्रारंभिक अवस्था है, योगाभ्यास आदि करना चाहिए। जो कि रिसर्च में वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।

आगे श्री अरविन्द जी कर्मयोगी श्री कृष्ण के मधुर व्यक्तित्व के बारे में कहते हैं कि वे कितने आत्मविश्वासी और निसंकोची हैं। उनकी स्तुति में गाये जाने वाला मधुराष्टकं उनके मधुर व्यक्तित्व के बारे में बताता है।


बाहरी व्यक्तित्व में सम्मिलित हैं


अधरं मधुरं, नयनं मधुरं- जो श्यामवर्णी हैं उनके होंठ मधुर उनके नयन मधुर। 
हसितं मधुरं - उनकी सौम्य मुस्कान है।महावीर जैन, महात्मा बुद्ध की मूर्तियों ओर भी सदैव सौम्य मुस्कान रहती है।
वलितं मधुरं- शयन कला मधुर,
वसनं मधुरं- देश-काल-परस्थिति के अनुसार वस्त्रों का चयन मधुर।
गमनं मधुरं- सिंह जैसी चाल है
वचनं मधुरं- मधुर शब्द बोलते हैं।

श्री कृष्ण का आंतरिक व्यक्तित्व 


वदनं मधुरं- सोच मधुर है, 
हृदयं मधुरं- दयालु हैं
चरितं मधुरं- महान चरित्र, अहंकारशून्य व्यक्ति, स्वयं ने कभी राजमुकुट धारण नहीं किया, मोर मुकुट में रहे। महाभारत के युद्ध में पांडवों की विजय का श्रेय स्वयं कभी नहीं लिया, शिशुपाल प्रसंग आदि उदहारण हैं।
गीतं मधुरं- बांसुरी बजाते हैं,
पीतं मधुरं- दुग्ध पदार्थ पीते हैं
भुक्त मधुरं- योग्य भोजन करते हैं।
शमितं मधुरं- सकारत्मक आलोचना करते हैं,
दमितं मधुरं- जिसका नाश किया उसे मोक्ष दिया।
दृष्टम मधुरं- Pleasing eye  contact है।
शिष्टम मधुरं- विनम्र हैं- गांधारी के श्राप का वरण कर समाज को सन्देश दिया कि अगर अपराध किया है तो दंड भुगतना ही होगा चाहे परमात्मा हो या परात्पर।
गोपी मधुरा, गोपा मधुरा- उनके केवल मित्र हैं उसमें जाति और लिंग भेद नहीं है।
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।

 

अंत मे सभी प्रतिभागियों को आगामी कार्यक्रम के लिए सूचना प्रदान की गई। शांति मंत्र पुष्पलता दीदी, कार्यपद्धति प्रमुख बीकानेर कार्यस्थान द्वारा लेकर कार्यक्रम का समापन किया गया। सम्पूर्ण वेबिनार का सञ्चालन श्री मेहुल अरोड़ा, युवा कार्यकर्ता जोधपुर नगर द्वारा किया गया। 


वेबिनार में कुल पंजीकरण 221 हुए एवं उपस्थित संख्या 125 रही। वेबिनार में श्री चंद्र प्रकाश अरोड़ा, श्री अशोक खंडेलवाल, सुश्री प्रांजलि येरिकर, श्री दीपक खैरे,  श्री प्रेम रतन सोतावाल,श्री अशोक दानी, डॉ दिव्या जोशी, डॉ अमित व्यास, श्री तरुण राठी आदि उपस्थित रहे।

धन्यवाद
विश्वा शर्मा
संयोजिका- युवा एक व्यक्तित्व विकास कार्यशाला

 

Thursday, February 11, 2021

Geeta Jayanti - Jodhpur


 विवेकानंद केंद्र जोधपुर गीता भवन में गीता जयंती का कार्यक्रम संपन्न हुआ। दैनिक जीवन में गीता और गीता जयंती का पत्र वाचन।

Wednesday, January 22, 2020

जोधपूर में विमर्श का अयोजन

समाज में समय-समय पर जो विकृतियां आ जाती है, उसके निवारण का उपाय आध्यात्म ही है। न्यायपालिका व कार्यपालिका की कार्य प्रणाली विज्ञान और आध्यात्म के सामांजस्य पर ही निर्भर करती है। कालान्तर में समाज में उत्पन्न विकृतियों के निवारण हेतु कानूनी उपायों के साथ साथ समाज में जीवन मूल्यों की पुनः प्रतिस्थापना भी आवश्यक है। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश श्री पुष्पेन्द्र सिंह भाटी विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा जोधपुर द्वारा आयोजित ‘‘सामाजिक विकृतियां, कानून एवं आध्यात्म” विषयक विमर्श कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
श्री भाटी ने बताया कि वस्तुतः समाज कानूनों के निर्माण की भूमिका निभाता हैं। समाज निरन्तर परिवर्तनशील है, अतः न्यायपालिका के निर्णय भी तदनुसार परिवर्तित व परिवर्धित होते रहते है। वर्तमान में भारत में 70 प्रतिशत जनसंख्या युवा है, जिनके समक्ष सबसे बड़ी चुनौती इन्टरनेट के सदुपयोग को लेकर है। भारतीय परिवार के संस्कारों से ही वर्तमान सामाजिक विकृतियों को दूर किया जा सकता है।

न्यायाधीश श्री भाटी ने बताया कि समाज में समरसता, संस्कारशीलता व उच्च आदर्शों को स्थापित करने के लिये विमर्ष जैसे विचारषील व चर्चात्मक कार्यक्रमों की महत्ती आवष्यकता है। सदन में उपस्थित छात्राओं को इंगित करते हुए श्री भाटी ने कहा कि वर्तमान में छात्राएं व महिलाएं अपनी आन्तरिक शक्ति को पहचाकर समाजिक कंटको व दुष्कर्मियों से निपटने के लिये स्वयंसिद्धा बने। समाजिक विकृतियों को सुधारने के लिये कानून और आध्यात्म में सामांजस्य आवश्यक|

मुख्य अतिथी के रूप में केन्द्रीय जल शक्ति केबिनेट मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द के आदर्षों पर चलकर ही सामाजिक विकृतियों पर विजयी पाई जा सकती है। श्री शेखावत ने बताया कि जिस गति से समाज को क्षरण करने की ताकतें मजबूत हो रही है, उससे दुगुनी गति से समाज केे रचनात्मक कार्यों को बढावा देना होगा। तभी हम हमारे संस्कार, संस्कृति, समाज व देष की रक्षा कर पायेंगे।

जल शक्ति मंत्री श्री शेखावत ने पीने के पानी की सीमितता व प्रदूषण के संकट के बारे में बताते हुए कहा कि जल को जगदीष मान कर इसका समुचित प्रबन्धन व संचयन वर्तमान समय की  महत्ती आवश्यकता है। इस अवसर पर न्यायाधीश श्री पुष्पेन्द्र सिंह भाटी व केन्द्रीय जल शक्ति केबिनेट मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के कर कमलों द्वारा विवेकानन्द केन्द्र हिन्दी प्रकाषन विभाग द्वारा प्रकाशित स्वामी विवेकानन्दजी की जीवनी ‘स्वामी विवेकानन्द: समग्र जीवन दर्षन‘ का विमोचन भी किया गया। योद्धा सन्यासी स्वामी विवेकानन्दजी की इस जीवनी विमोचन के अवसर पुस्तक के अनुवादक श्री महावीर प्रसाद जैन ने पुस्तक परिचय दिया।

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी राजस्थान प्रान्त के प्रान्त प्रमुख श्री भगवान सिंह ने विवेकानन्द केन्द्र का परिचय देते हुए विवेकानन्द शिला स्मारक के 50 वर्ष पूरे होने पर ‘एक भारत विजयी भारत’ अभियान के बारे में बताया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में विवेकानन्द केन्द्र हिन्दी प्रकाषन विभाग के प्रमुख अशोक माथुर ने अतिथियों का स्वागत कर उनका परिचय दिया। स्टील भवन में आयोजित इस विमर्श कार्यक्रम में प्रान्त संगठक प्रांजलि येरिकर, हिन्दी प्रकाशन के प्रकल्प संगठक श्री दीपक खैरे, प्रान्त समिति सदस्य अशोक खण्डेलवाल, यादवराज कुमावत, प्रेमरतन सोतवाल, चन्द्र प्रकाश अरोड़ा, मोहनलाल तंवर, महेश बोहरा, भूपेन्द्र जोषी, हरि, मघराज, श्याम मालवीय, सुषील, हिमांषु, गोपाल, लिच्छाराम, विष्वा, पूनम, गोमती सहित बड़ी संख्या में गणमान्य प्रबुधजनों व विद्यालयी छात्राओं ने सहभाग लिया। कार्यक्रम का संचालन के.के. बोराणा ने किया।

भगवत गीता युवाओं का ग्रंथ है

भगवत गीता का पारायण युवावस्था से ही प्रारंभ होना चाहिए। गीता में जीवन जीने की कला भगवान श्रीकृष्ण ने बताई है, और यह हर व्यक्ति को अपने युवा काल में ही ज्ञात होनी चाहिए। भगवत गीता में आज के व्यक्तिगत और सामाजिक हर समस्या का समाधान है। उक्त विचारों से युक्त विवेकानंद केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्षा पद्मश्री निवेदिता भिड़े का पत्र आज गीता जयंती के उपलक्ष पर विवेकानंद केंद्र, गीता भवन, जोधपुर में पढ़ा गया। इसके पहले संपूर्ण भगवत गीता का पारायण किया गया। 18 अध्यायों के 700 श्लोकों का सामूहिक परायण 30 से भी अधिक सहभागीयों ने, जिसमें युवा बड़ी संख्या में शामिल थे, ने किया। भगवत गीता के उपदेशों को जीवन में उतार कर विवेकानंद केंद्र के संस्थापक एकनाथजी रानाडे ने विवेकानंद शिला स्मारक का निर्माण आज से 50 वर्ष पूर्व सफलतापूर्वक किया था। इस गीता प्रेरित घटना का भी स्मरण इस उपलक्ष में किया गया। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र के प्रांत समिति के सदस्य श्री चंद्र प्रकाश अरोड़ा, विभाग प्रमुख श्री प्रेम रतन सोतवाल, संपर्क प्रमुख श्री गिरीश सोनी, प्रकल्प संगठक श्री दीपक खैरे, केंद्र के अनेक कार्यकर्ता, योग शिक्षक और शुभचिंतक उपस्थित थे।

Saturday, December 7, 2019

Ganesh Visarjan Jodhpur

जोधपुर, 12 सितम्बर : विवेकानन्द केन्द्र हिन्दी प्रकाशन विभाग की ओर से साहित्य से निर्मित “साहित्य राजा श्रीगणेश” की प्रतिमा का अनंत चतुर्दशी को विसर्जन किया गया। उल्लेखनीय है कि इस साहित्य राजा की प्रतिमा को बनाने के लिए  “कर्मयोग” नामक पुस्तिका के 50 प्रतियों तथा एक केन्द्र भारती मासिक पत्रिका का उपयोग किया गया था। जिस तरह इस प्रतिमा को साहित्य से निर्मित किया गया उसी तरह इसका विसर्जन भी अनोखे ढंग से किया गया। प्रतिमा के उपयोग में लायी गई पुस्तकों को लोगों को वितरित कर इसका विसर्जन किया गया। विसर्जन यानी विशेष ढंग से जिसका सृजन होता है।

ज्ञात हो कि इस साहित्य राजा गणपति की ग्यारह दिनों तक नित्य पूजा-अर्चन होता रहा। इस अवसर पर केन्द्र के कार्यकर्ता साहित्य राजा के दर्शन के लिए आते रहे। 10 सितम्बर को सत्यनारायण की कथा का आयोजन भी किया गया, वहीं 7 सितम्बर को भजन संध्या का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

Saturday, September 24, 2016

कर्म ही पूजा, इस ध्येय मार्ग पर चलें

विश्व बन्धुत्व दिवस समारोह में कन्याकुमारी केन्द्र की राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव का सम्बोधन

जोधपुर 11 सितम्बर। विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुश्री रेखा दवे ने युवा पीढ़ी से देश सेवा में योगदान का आव्हान करते हुए कहा है कि कोई कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, हर कार्य समर्पण भाव से करना चाहिए।  विवेकानन्द केन्द्र की जोधपुर शाखा द्वारा आज स्थानीय गीता भवन में आयोजित विश्व बन्धुत्व दिवस समारोह की अध्यक्षता कर रहीं सुश्री रेखा दवे ने कहा कि एक समय था जब यह कहा जाता था कि पढ़ोगे नहीं तो किसान बनोगे। लोग किसानी के कार्य को छोटा मानते थे। आज भी पढ़े-लिखे और पैसे वालों को ही बड़ा आदमी माना जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है, कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अभी भी पढ़-लिख कर लोग डाक्टर, इंजीनियर, आईएएस बनना चाहते हैं, पर सब व्यक्ति डाक्टर-इंजीनियर नहीं हो सकते। उन्होंने आव्हान किया कि जिसे जो बनना है वह बने, पर उन पर हमारे विचार थोपे नहीं जाएं। स्वामी विवेकानन्द को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आगे बढ़ेगा यह हमारा ही नहीं हम सब का स्वप्न है। उन्होंने बताया एक समय था जब अरूणचल प्रदेश में कार्यकर्ताओं को विषम परिस्थितियों में कार्य करना पड़ा। आज वहां विवेकानन्द केन्द्र के 36 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। तमिलनाडु, केरल के साथ ही अंडमान निकोबार दीप समूह और कई अन्य राज्यों तक अब केन्द्र का विस्तार हो गया है।

कन्या कुमारी में स्वामी विवेकानन्द के शिला स्मारक के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्माण के लिए केन्द्र और राज्य सरकार के साथ ही आमजन ने भी समर्पण भाव से सहयोग किया और इस कार्य को एकनाथजी ने साकार रूप दिया। स्मारक का कार्य पूरा होने पर विवेकानन्द केन्द्र की स्थापना की गई। इस केन्द्र के माध्यम से देश सेवा के लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जाता है। जीवनवृत्ति कार्यकर्ताओं के साथ ही देश कार्य में स्थानीय कार्यकर्ताओं का भी महत्व है। उन्होंने कहा केन्द्र के कार्यकर्ता सन्यासी नहीं हैं लेकिन वे देश के लिए सन्यासियों जैसा ही कार्य कर रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से इस कार्य को और आगे ले जाना

समारोह के मुख्य अतिथि एवं देश के सुप्रसिद्ध इसरो संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो0 ओ0पी0एन0 कल्ला ने अपने सम्बोधन में कहा कि विज्ञान की अंतिम परिणिति अध्यात्म है। स्वामी विवेकानन्द ने अमेरिका मंे आयोजित धर्म सभा में भारत को इसी अध्यात्म के बल पर गौरवशाली स्थान दिलाया। उन्होंने कहा कि स्वामीजी के पहले दो शब्द बहनो-भाईयो ने पूरी सभा को ऐसा सम्मोहित किया कि उसके बाद लोग उनके हर भाषण को सुनना चाहते थे। उन्होंने वहां अलग-अलग सत्रों में सभा को आधादर्जन बार सम्बोधित किया और हर सम्बोधन मंे उन्होंने भारतीय संस्कृति को अलग-अलग स्वरूप में प्रस्तुत किया, जिसकी काफी प्रशंसा हुई। धर्म सभा के आयोजन का उद्देश्य ईसाई धर्म को श्रेष्ठ और अन्य धर्मों को निम्न साबित करने का था, लेकिन विवेकानन्दजी ने वहां भारत की श्रेष्ठता साबित कर धर्म के संकीर्ण दायरे से बाहर आने का भी आव्हान किया।

समारोह में उपस्थित केन्द्रीय जांच ब्यूरो -सीबीआई- के पूर्व पुलिस उप महानिदेशक अतुल कुमार माथुर ने अपने सम्बोधन में कहा कि विवेकानन्द के उद्देष्यों को युवा अपने जीवन में उतारें। उन्होंने कहा कि जब वे जोधपुर में पुलिस अधीक्षक के पद पर थे तब युवाओं के लिए काफी कार्य किया, उसे भी आगे ले जाने की जरूरत है।

प्रारंभ में अतिथियों द्वारा स्वामी विवेकानन्द और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। विवेकानन्द केन्द्र की जोधपुर शाखा के नगर संचालक महेन्द्र लोढ़ा ने अपने स्वागत भाषण में केन्द्र की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए युवाओं को केन्द्र से जुड़ने का आव्हान किया। इस से पूर्व मंच पर आसीन मुख्य अतिथि प्रो0 ओ0पी0एन0 कल्ला का चन्द्रप्रकाश अरोड़ा, कार्यक्रम की अध्क्षता कर रही सुश्री रेखा दवे का श्रीमती कौशल्या माहेश्वरी, सहप्रांत संचालक भवानीलाल माथुर का प्रेमरतन प्रजापत तथा नगर संचालक महेन्द्र लोढा का मोहनलाल तंवर ने श्रीफल व स्मृति स्वरूप केन्द्र का साहित्य भेंट कर स्वागत किया। केन्द्र के कार्यकर्ता मनोज भादू ने शांति मंत्र का पाठ किया। अंत में सहप्रांत संचालक भवानीलाल माथुर ने आभार प्रकट किया। शांतिपाठ के साथ समारोह का समापन हुआ।   

Tuesday, September 13, 2016

युवा अपने सामर्थ को पहचानें

विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित होगी विवेकानन्द की प्रतिमा

जोधपुर 4 सितम्बर। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति श्री आर0पी0 सिंह ने कहा है कि स्वामी विवेकानंद का पूरा जीवन और चिंतन सकारात्मक एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण था। श्री सिंह ने युवाओं से आव्हान् किया कि वे भी स्वामीजी की तरह अपने सामर्थ को पहचानें, तभी भारत की तस्वीर बदलेगी।  

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की जोधपुर साखा द्वारा शहर के सभी महाविद्यालयों में 11 सितम्बर को विश्व बंधुत्व दिवस पर आयोजित की जाने वाली ‘‘उठो ! जागो ! युवा प्रेरणा प्रतियोगिता-2016’‘ के पोस्टर का आज विमोचन करते हुए श्री सिंह ने कहा कि यह आयोजन युवाओं को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा यदि युवा दिशाहीन होगा तो उसका नुक्सान न केवल स्वयं युवाओं बल्कि देश को भी होगा। निराशा और कुंठाएं व्यक्ति को दिशाहीन करती हैं, ऐसे युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद का जीवन एक आदर्श जीवन कहा जा सकता है। स्वामी विवेकानंद उन महापुरूषों में से एक हैं, जिन्होंने भारत को एक नई दिशा दी। उनके सिद्धांत और विचार आज भी प्रासंगिक हैं। प्रतियोगिता के आयोजन को प्रशंसनीय बताते हुए श्री सिंह ने विवेकानन्द केन्द्र के आयोजकों को बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्दजी की एक प्रतिमा जल्दी ही विश्वविद्यालय के नए परिसर में स्थापित की जाएगी।

कुलपति निवास पर विमोचन समारोह में विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी की जोधपुर शाखा के नगर संचालक श्री महेन्द्र लोढ़ा, प्रांत व्यवस्था प्रमुख श्री चन्द्रप्रकाश अरोड़ा, नगर प्रमुख श्री प्रेमरतन प्रजापति और सर्वश्री विपुल कुमार दास, डा0 अमित व्यास, कृष्ण कन्हैया बोराना, आलोक पांडे, सुशील लुहार, नैमीचन्द बारूपाल, रमेश ठाकुर के साथ जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की उपाध्यक्ष सुश्री प्रियंका ढांका, पूर्व उपाध्यक्ष डा0 अर्चना भगासरा एवं छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष डा0 विनोद भगासरा भी उपस्थित थे।