विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, हिमाचल प्रान्त, शाखा-कांगड़ा द्वारा 16 से 18 मार्च 2026 तक रेनबो इंटरनेशनल स्कूल, नगरोटा बगवां में तीन दिवसीय 'समर्थ शिक्षक समर्थ भारत' शिक्षक उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। 10 समर्पित कार्यकर्ताओं की आयोजन टीम के नेतृत्व में इस कार्यशाला को दो बैचों में विभाजित किया गया, जिसमें कुल 69 शिक्षकों (प्रथम बैच में 46 और द्वितीय में 23) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की आंतरिक क्षमताओं का विकास और उन्हें राष्ट्र निर्माण के प्रति उत्तरदायी बनाना था।
यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से तीन चरणों में संपन्न हुआ:
- प्रेरणा से पुनरुत्थान: बौद्धिक खेलों और समूह चर्चाओं के माध्यम से शिक्षकों को प्रेरित किया गया।
- यौगिक व्यायाम: शारीरिक व मानसिक सुदृढ़ता हेतु शिथिलीकरण, सूर्य नमस्कार, सूक्ष्म व्यायाम (विशेषकर स्टाफ रूम में अभ्यास योग्य) और प्राणायाम का सत्र आयोजित हुआ।
- बौद्धिक सत्र (PPT प्रेजेंटेशन):
- प्रथम दिवस: पंजाब-हरियाणा प्रांत संगठक आदरणीय प्रांजलि दीदी ने 'शिक्षक होने पर गर्व' विषय पर उद्बोधन दिया।
- द्वितीय दिवस: उत्तर प्रांत सह संगठक आदरणीय लोकेश जी केसरे ने 'अंतर्निहित दिव्यता का प्रगटीकरण एवं रचनात्मक प्रतिसाद' पर प्रकाश डाला।
- तृतीय दिवस: विवेकानंद केंद्र के महासचिव माननीय भानुदास धाकरस जी ने 'संपूर्ण उत्तरदायित्व और पूर्णता' का मंत्र दिया।
उद्घाटन सत्र में श्री चंद्र शेखर डोगरा जी का मार्गदर्शन मिला, जबकि 'प्रेरणा से पुनरुत्थान' सत्रों का कुशल संचालन श्री चंदन भैया, श्री कन्हैया भैया, सुमित्रा दीदी और बलवीर जी द्वारा किया गया।
18 मार्च को आयोजित समापन समारोह का प्रारंभ 'तीन ओंकार' प्रार्थना और दीप प्रज्वलन से हुआ। विवेकानंद केंद्र हिमाचल विभाग संगठक श्री बलवीर कुशवाह जी द्वारा इस तीन दिवसीय कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
सुमित्रा साहू दीदी द्वारा गीत ' निर्माणों के पावन युग में ' लिया गया। इस अवसर पर रेनबो इंटरनेशनल स्कूल के संचालक श्री छवि कश्यप जी ने जीवन मूल्यों की महत्ता पर जोर देते हुए 'निर्माणों के पावन युग में' गीत को विद्यालय की प्रार्थना में शामिल करने का संकल्प लिया। यह गीत हमें याद दिलाता रहेगा कि हम कहां है? जिस तरह से जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति से परिचय कराया था । उसे तरह यह गीत भी हमारी क्षमता, हमारे जीवन मूल्य को याद दिलाता रहेगा । उन्होंने कहा कि रामायण, महाभारत और उपनिषद हमारे मूल्यों के आधार हैं, जिन्हें वैश्विक दृष्टि के साथ अपनाना अनिवार्य है। हम भी अपनी इन जड़ों को अवश्य मजबूत करे ।
अगले वर्ष 2027 में स्कूल के 25 वर्ष हो जाएंगे ।इस आधार पर हमारे स्कूल में इस वर्ष value System को मज़बूत करने पर जोर दिया जाएगा । और यह जीवन मूल्य स्वामी विवेकानंद के विचारों , उनके आदर्शों पर आधारित हो । अंत में उन्होंने केंद्र के सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद कहा जो स्कूल में यह समर्थ शिक्षक समर्थ भारत कार्यशाला कर रहे है ।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के महासचिव माननीय भानुदास जी का मार्गदर्शन रहा । उन्होंने कहां की जब भी हम विद्यालय आएं भगवद्गीता के तीसरे अध्याय का २१वां श्लोक
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।
का ध्यान, चिंतन - मनन अवश्य करें । हम श्रेष्ठ बने और विद्यार्थियों को भी अपने से श्रेष्ठ बनाने का प्रयत्न करे । और को भी श्रेष्ठ बनाने का प्रयत्न करे ।ऐसा करने से राष्ट्र श्रेष्ठ बनेगा । इस कार्यशाला का यही उद्देश्य है। शिक्षकों को 'श्रेष्ठ' बनने और विद्यार्थियों को भी श्रेष्ठ बनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के शिकागो संघर्ष और उनके राष्ट्र-प्रेम के उदाहरण देकर शिक्षकों को त्याग और सेवा का मार्ग दिखाया। उन्होंने रेनबो इंटरनेशनल स्कूल के संचालक को धन्यवाद दिया कि विवेकानंद केंद्र को यह कार्यशाला करने हेतु अवसर प्रदान किया तथा सभी शिक्षकों को कन्याकुमारी आने हेतु आमंत्रण दिया ।
पारंपरिक हिमाचली टोपी , शॉल द्वारा केंद्र के सभी कार्यकर्ताओं का रेनबो इंटरनेशनल स्कूल द्वारा सम्मान किया गया । समापन कार्यक्रम का संचालन विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा - कांगड़ा के सह नगर प्रमुख श्री विवेक शर्मा जी द्वारा किया गया ।
अंत में विवेकानंद केंद्र कांगड़ा के संचालक डॉ. अशोक कुमार जी द्वारा इस कार्यशाला के सफल आयोजन हेतु विद्यालय, विद्यालय प्रशासन, केंद्र के सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया गया ।तथा शांति मंत्र के साथ समापन किया गया ।