Tuesday, October 13, 2020

Universal Brotherhood Day Celebration at Gaya, Bihar


 Vivekananda Kendra Kanyakumari, Branch-Gaya celebrated  Universal Brotherhood Day on 11 sept. On this occasion a Vimarsh was organised on the topic "Bhartiya Sanskrit me Vishwa Vandhutwa ki Avdharna aur iski prasangikta".  Programme started with 3 Omkaras and Shanti path followed by patriotic song. Dr V K Karan Nagar Sanchalak welcomed all present and introduced Dr Radhanand Singh the main speaker. Prof Arun kr Prasad Say Nagar Sanchalak gave Introductory lecture on the  topic. Later on The chief speaker Dr Radhanand Singh, eminent scholar and literature  elaborated in detail the topic of the day and quoting Upanishads and lectures of Swami ji at Chicago world Parliament of religions on 11th September and later on by his total 6 lectures stressed the relevance of concept of Vadudhaiv Kutumbakam even today.  Vote of thanks was given by SMT Veena Gupta Nagar Pramukh. Programme concluded with shanti mantra.


भारतीय संस्कृति की देन : विश्वबंधुत्व




 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-पटना के द्वारा विश्वबंधुत्व दिवस के सुअवसर पर ऑनलाइन विमर्श का आयोजन आज दिनाँक :- 11/09/2020 को संध्या 5 बजे किया गया। यह कार्यक्रम ऑनलाइन गूगल मीट पर किया गया। जिसके मुख्य वक्ता श्री अभयानंद जी(IPS) , पूव महानिदेशक, बिहार रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ तीन ओम कर पार्थना ओर गीत के माध्यम से हुआ। फिर विवेक वाणी के पश्चात मुख्य वक्ता का उद्बोधन शुरू हुआ।

मुख्य वक्ता श्री अभयानंद जी ने कहा विश्व बंधुत्व को मनुष्य के खुद की शरीर की बनाबट से जोड़ बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के शरीर के अंग आपस मे एक दूसरे से समंजयस्य स्थापित करके रखते है तभी हमारा शरीर अच्छे से काम करती है। सामाजिक कटुता को दूर करने के लिए उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम हमें अपने अंदर के कटुता को खत्म करना होगा। उन्होंने बताया कि सिर्फ सरकार को कोसने से कुछ नही होगा। हमे अपने स्तर से समाज मे सेवा देने होगा।

कार्यक्रम विषयवस्तु सामान्य जान को विश्वबंधुत्व की संकल्पना समझना रहा जो कि सार्थक रहा।  
कार्यक्रम समापन धन्यवाद ज्ञापन, आगमिक सूचना एवं शांति मंत्र से हुआ।

विश्व बंधुत्व ही हमारी संस्कृति का आधार

 6 सितंबर विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा भागलपुर के द्वारा मासिक विमर्श के कार्यक्रम में वर्तमान काल मैं विश्व बंधुत्व को प्रसांगिकता विषय पर ऑनलाइन विमर्श का आयोजन किया गया ये विमर्श विशेष शिलास्मारक के 50 वर्ष पूर्ण होने एवं विश्व बंधुत्व दिवस के संदर्भ में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ तीन ओंकार प्रार्थना से हुआ उसके उपरांत गीत हुआ । कार्यक्रम में नगर प्रमुख प्रो.राज भूषण प्रसाद ने केंद्र परिचय देते हुए कहा कि विवेकानंद केंद्र अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन है जिसका लक्ष्य है मनुष्य निर्माण से राष्ट्र का पुनरुत्थान नगर संपर्क प्रमुख नमन मिश्रा जी ने एक भारत विजय भारत का परिचय देते हुए कहा कि विवेकानंद शिलास्मारक पूरे विश्व में एक राष्ट्रीय स्मारक के रूप में कार्य कर रहा है पूरे देश को एकता और विजय का संदेश दे रहा है। मुख्य वक्ता प्रो० नंद कुमार यादव जी(पूर्व कुलपति झारखण्ड विश्वविद्यालय,राँची) ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी जी का विचार परमाणु बम से भी शक्तिशाली है जो पूरे विश्व को भाईचारा और बंधुत्व का संदेश देता है जिस प्रकार स्वामी विवेकानंद ने दूसरे देश मे जाकर बंधुत्व का संदेश दिया आज उसी विचार को जीवंत करने की आवश्यकता है,बंधुत्व का विचार ही इस राष्ट्र को सर्वोपरि बनाएगा।



ऑनलाइन विमर्श विवेकानन्द शिलास्मारक "पत्थर में प्रगटे प्राण"


  दिनांक 2 सितंबर,2020 विवेकानन्द शिला स्मारक के 50वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी,शाखा-रांची द्वारा विवेकानन्द शिला स्मारक "पत्थर में प्रकटे प्राण" विषय पर ऑनलाइन विमर्श का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत तीन ओंकार प्रार्थना व गीत से हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉo पुरुणेंदु शेखर दास,सह संचालक, डिब्रूगढ़ विभाग, आसाम प्रांत,विवेकानंद केंद्र थे। मुख्य वक्ता के तौर पर माo  प्रवीण दाभोलकर, अखिल भारतीय संयुक्त महासचिव, विवेकानंद केंद्र थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉo पुरुणेंदु शेखर दास ने कहा कि विवेकानंद शिलास्मारक इस देश की धरोहर है। विवेकानंद शिलास्मारक और विवेकानंद केंद्र भारत को विजयी बनाने के लिए कार्यरत है।

कार्यक्रम में देश विदेश से लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माननीय प्रवीण दाभोलकर जी ने कहा  कि

    विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन, दिल्ली ओर विवेकानंद केंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ कल्चर, गौहाटी भारत के निर्माण के पथ पर कार्यरत है।
    "Finding the opportunity in the challenging situation" का विचार रांची नगर के कार्यकर्ताओ ने किया और आज हम इस माध्यम से मिल रहे है।
    विवेकानन्द शिल्स्मारक का उद्घाटन उस समय के वर्तमान राष्ट्रपति जी के द्वारा हुआ।
    स्वामी ने हमसा बताया की "मनुष्य निर्माण के द्वारा राष्ट्र पुनरूथान" एवं "शिव भावे जीव सेवा" भारत के पुनर्निर्माण के लिए दो मार्ग।
    विवेकानन्द शिला स्मारक की निर्मिती भारतवासियों के आत्मविश्वास को बढाने में बड़ी भूमिका रही।
    श्रोताओं के प्रश्नों मा० एकनाथजी, संघ के सरकरावाहा रहे लेकिन फिर विवेकानन्द केंद्र की आवश्यकता क्यों पारी,  जबाब देते उन्होनों कहा की "जातो मत ततो पथ" ध्येय के प्राप्त करने के लिए जितने प्रकार के लोग के  विचारो होगे उतने मार्ग उपलब्ध है, यही हमरी संस्कृति की परम्परा और विशेषता है।  


कार्यक्रम के अंत में 15 मिनट के प्रश्नोत्तरी के द्वारा श्रोताओं के विभिन्न प्रश्नों का उत्तर व संदर्भ समझाया गया। कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ हुआ। ऑनलाइन विमर्श कार्यक्रम में लगभग 80 लोगो ने भाग लिया।




"कोविड-19 में युवाओ की मनःस्थिति एवं दिशा" विषय पर ऑनलाइन विमर्श


    विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-रांची के द्व्रारा "कोविड-19 में युवाओ की मनःस्थिति एवं दिशा" विषय पर ऑनलाइन विमर्श का आयोजन किया गया।  इस विमर्श में दो मुख्य वक्ताओ ने अपने विचरो से श्रोताओं का मार्गदर्शन किया।

प्रथम वक्ता डॉ नीतीश प्रियदर्शी,  सहायक प्रोफेसर, भू-विज्ञान  विभाग, रांची विश्वविद्यालय के विचार

• आत्महत्या जैसे चीज प्रकृत्ति के नियम के विरुद्ध है।
•  समय से अनुसार अपने को परिवर्तित करना।
• अगर पृथ्वी को डिप्रेसन हो गया तो हमरा क्या होगा, इसलिए हमें भी पृथ्वी की तरह सहनसील बने।
• जो व्यक्तो, समाज, राष्ट्र निष्क्रिय हो जाता है उसका विनाश प्रारम्भ हो जाता है। जैसे :- डाइनासोर
• अगर आप निष्क्रिय होंगे तो प्रकृति आपको नष्ट कर द्वगी।
• जिस प्रकार नदी का पानी रुकने पर वो पानी खराब हो जाती है।
• हमसे अपने आप को  व्यस्त रखे ।
• प्रकृति में सब गतिमान है। हम क्यो रुके।
• जब हम प्रकृति सैट छेड़-छाड़ करते है तभी हम कोरोना जैसे महामारी से जूझना पड़ रहा है।

द्वितीया  वक्ता  श्री प्रदीप हज़ारी, कृषि विभाग के विशेष सचिव, झारखण्ड सरकार के विचार

मेरे चार प्रश्न है कि  इस लॉकडाउन में
1. क्या ऐसा कुछ विचित्र हुआ है?
2. अगर हुआ है तो कितना विचित्र हुआ है?
3. क्या यह चुनौती बन कर आई है?
4. तो क्या यह अवसर बन कर आई है?

"एक चुनौती एक अवसर नही बल्कि हज़ारो अवसर ले कर आती है"


• कोरोना काल को एक अवसर के तरह लें। जो हज़ारो अवसर हर आयु वर्ग के लिए लाया है।
• अगर हम अनुशासित होते तो कोरोना हमारे पास नही आती।
• कोरोना काल मे खुद से चार प्रश्न पूछिये।
1. क्या हम डर में जी रहे रहे?
2. क्या हम डिप्रेशन में जी रहे है?
3. क्या हम अकेलापन महसूस कर रहे है?
4. क्या हम वोर महसूस कर रहे है?
• दर किस बात का है:- इन्फेक्शन हो जाएगा इसका या हमारी व्यापार, पढ़ाई, कैरियर खत्म हो जाएगा। पहले अपने दर तो समझिए। और उसको अवसर बनाये।
• सरकार के गाइड लियॉन को फॉलो करें।

• आज से तीन महीना पहले मोबाइल, लैपटॉप को समय नष्ट करना का साधन माना जाता था लेकिन आज वही उपक्रम आपके लिए उपयोगी है, लेकिन उसमें भी हमे अनुशासन का ध्यान रखना पड़े गा।
• कोरोना काल मे एक चिंता है विषय रहा जो कि है प्रवाशी मजदूर। लेकिन मैंने ऐसे भी मजदूरों को देख जो कि कोरोना काल के पहले इडली भेज करता था कोरोना काल में बंद हो गया तो उसने मछली बेचना शुरू किया । क्योंकि मछली पर सरकार का रोक नही था। यानी उसने कोरोना काल को अवसर के रूप में लिया और भी बहुत सारी ऐसे मजदूर जो कि खेतो में अच्छी फसल उगाने में लग गए।

 

कार्यक्रम का संचालन श्री राजेश अग्रवाल, सह नगर संयोजक द्वारा हुआ। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए  श्रेयांश भारद्वाज जी ने वक्ता ओर स्रोता को धन्यवाद दिया।
 कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र से हुआ।