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Tuesday, March 7, 2023

Webinar on Diversity, Inclusion, Mutual Respect

The Vivekananda Kendra Institute of Culture as its first initiative organised a Webinar on 7 march 2023 from 5.00 to 7.30 PM on the Cisco Webex platform. The webinar was participated by 262 participants from across the country as well as a few from abroad and also many through the VKIC Youtube channel.

The webinar started with Mangalacharan, after which Shri Dipankar Mahanta, Joint Secretary, VKIC welcomed all the participants from across the country and abroad, the invited speakers for the webinar and Pujya Swami Paramatmananda Maharaj, the Chief Guest of the webinar. This was followed by a power point presentation made by Shri Vinayak Ji on the Working Group (WG), the salient features of the concept note made on the theme, the various sub-themes, the progress made by the WG in organising the consultations amongst CSO’s thus far and how the WG has planned to take the various consultations forward across the country to finally arrive at the recommendations which will finally go to frame the policy pack of the C20.

After the brief background on the theme and the WG, the speakers were invited to share their views on the webinar. The speakers who spoke on the occasion were -

  • Ma. Nivedita Raghunath Bhide, Member, Steering Committee, C20 and the Vice-President, Vivekananda Rock Memorial & Vivekananda Kendra Kanyakumari. Watch the video
  • Dr. Shashi Bala, International Advisory Committee, C20 and the President, International Council of Cultural Studies, India. Watch the Video
  • Dr. Joram Begi, National Co-ordinator, C20 and the Chairman, Vivekananda KendraInstitute of Culture (VKIC). Watch the Video
  • R. Ramakrishnan, Co-founder of aXYKno Capital Services Pvt. Ltd. Eartha & Mackintosh Global Partners. Watch the Video
  • Prof. Bhagat Oinam, Director, Jawaharlal Nehru Institute of Advance Study & Chairperson, Centre for Philosophy, JNU, New Delhi. Watch the Video
  • Swami Paramatmanandaji, Founder of Arsha Vidya Mandir, Convener and Secretary of the General- Hindu Dharma Acharya Sabha. Watch the Video

Wednesday, April 13, 2022

"विवेक चेतना" परिसंवाद - "ध्यास राष्ट्र पुनर्निर्मान का"



 विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी,महाराष्ट्र प्रांत के *विवेक चेतना* उपक्रमतहत  एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया  जिसका अंतिम चरण रविवार दिनांक 14 नवंबर 2021 को पूर्ण हुआ। डा. श्री. गिरीश बापट, संचालक ज्ञान प्रबोधिनी पूना एवं सुश्री.  निवेदितादीदी भिडे, (पद्मश्री पुरस्कृत) राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के मार्गदर्शक शब्दोंसे संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का प्रारंभ विवेकानंद केंद्र की परंपरानुसार प्रार्थना से हुआ। कु. रिद्धीने प्रस्तावना संक्षेपमें परंतु स्पष्टता से की। पश्चात "नवचैतन्य हिलोरे लेता" यह गीत अनया दंडवतेने सभी युवाओं को उत्साहित करनेवाले स्वर में प्रस्तुत किया। दोनो वक्ता का परिचय देने की औपचारिकता पूर्ण हुई| उनका वास्तविक परिचय उनके वक्तव्य के प्रत्येक शब्दसे अधिक प्रगटीत हुआ।

प्रथम वक्ता डा.गिरीशजी बापट ने अपने वक्तव्य का प्रारंभ माननीय एकनाथ जी के "सेवा साधना" इस ग्रंथ के एक वाक्य से किया। आपने कहा - प्रत्येक युवक किसी न किसी प्रेरणासे घर के बाहर कदम रखता है। यह प्रेरणा करुणासे  जन्मी हो तो सेवा, सहयोग के रूप में कार्यरत होती है। जिन दुःखी,आर्त, दीन, रोगी, अनपढोकी सेवा होती है वह परमेश्वर की पूजा के रूप में करना आध्यात्मिक प्रेरणा होगी। उनका विषय "राष्ट्र सेवा युवाओं के लिए उत्तम करियर" ऐसा था। वर्तमान भौतिकवादी युग में करियर अर्थार्जन का ही एक रूप है, यही भाव है। ऐसे समय में आपने राष्ट्र सेवा करियर बन सकती है यह विचार बहुत सशक्त रूप से युवाओं के सामने रखा।

समाज या राष्ट्र के लिए क्या व कैसे करना यह उन्होंने बहुत छोटे- छोटे उदाहरण देते हुए बताया। सेवा का कार्य यह गड्ढे या दलदल को भरने जैसा है, यह भराव बहुत महत्त्वपूर्ण है; उसी पर एक सशक्त इमारत खड़ी हो सकती है । यह इमारत खड़ी करना यह गतिशील, उद्यमशील लोग करते हैं इसके लिए आपने "एक्सेल उद्योग समूह" के कांति भाई श्रॉफ,का कछ की दीमा पर उद्योग डालना या डॉ.वसन्त गोवारीकर ने विक्रम साराभाई की विनति पर भारत में आकर उनके संशोधन का लाभ राष्ट्र को  देने की बात स्वीकारना; तंत्रक्षेत्र के उद्योजक श्री सालुंके का अपने गांव में "पानी पंचायत" के माध्यम से विकास करना - ऐसे उदाहरण रखे। ‘युवकों ने वर्तमान में समाज में ग्रामीण क्षेत्र में घुल मिलकर वहां की छोटी-छोटी समस्याएं जैसे - प्रदूषण, पानी, पर्यावरण इनको समझकर जनजागरण करना एवं उस आधार पर उद्योग का विचार करना अथवा ऐसे क्षेत्र में इस राष्ट्रभाव से कार्यरत किसी उद्योजक के साथ जुड़कर नौकरी के रूप में सेवा करना भी राष्ट्र सेवा होती है’ यह विचार स्पष्ट किया एवं इसके लिए युवकों को सहज और सरल रूप से मार्गदर्शन करते हुए प्रेरित किया की ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्व-रोजगार हेतु आवश्यक कौशलों में प्रशिक्षित करना भी राष्ट्र सेवा होगी। यह प्रशिक्षण आपका करियर हो सकता है यह भी दृष्टिकोन दिया। उस पश्चात उन्होंने प्रश्नों के उत्तर देते हुए एक प्रश्न का बहुत ही समाधानकारक उत्तर दिया। प्रश्न था - "जब सम्पूर्ण विश्व एक हो रहा है, ग्लोबलाइजेशन है तब हम विश्व का विचार करें यह उचित होगा या राष्ट्र का?"  तब उनका कहना था कि, कोविड ने हमें पहले स्वयं का बचाव करना सिखाया है, पहले स्वयं को सुरक्षित करूं। स्वयं के राष्ट्र को सक्षम करो, स्वयं के राष्ट्र का विकास करो फिर विश्व की भी बात  हम निश्चित रूप से कर सकते हैं और करेंगे।

दूसरी वक्ता विवेकानन्द केन्द्र की सभी की आदरणीय मा. निवेदिता ताई भिड़े (पद्मश्री विभूषित) थीl विषय था "ध्यास -राष्ट्र पुनर्निर्माण का"l यह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण क्या होता है और क्यों यह उन्होंने बहोत ही सहज और सरल शब्दों में स्पष्ट कर दिया।क्योंकि यह पुनर्निर्माण जब तक समझ में नहीं आता तब तक इस पर चिन्तन संभव नहीं है। पुनर्निर्माण किस आधार पर हो तो ताई ने बताया, कि हमारा राष्ट्र सनातन राष्ट्र है। प्राचीन काल से विज्ञान का आधार लेते हुए सृष्टि और इस निसर्ग के साथ रह कर, पर्यावरण का ,सृष्टि का बिना शोषण किए, समाज के किसी व्यक्ति का बिना शोषण किए एक उन्नत राष्ट्र था। इस प्रकार 'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया' का भाव व्यवहार में ला कर हम उत्कर्ष कर सकते हैं यह दिखाने वाला राष्ट्र था। परन्तु गत कुछ सदियों से यह हमारा स्वत्व जान बूझ कर नष्ट करने के प्रयास होते रहे l अतः इस विचार का, इस कृति की पुनर्स्थापना, पुनर्जागरण राष्ट्रीय पुनर्निर्माण है। व्यक्ति या मनुष्य को कितना भी विकसित कर दें उसका निर्माण हो जाए परन्तु उसमें राष्ट्रबोध नहीं होगा तो राष्ट्र का निर्माण नहीं होगा। इसका मुख्य आधार होगा राष्ट्र का आत्मनिर्भर होना। उस राष्ट्र का स्वत्व प्रत्येक क्षेत्र में प्रकट हो इसका ध्यास, यह जिद राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति को होना चाहिए। इस हेतु संवेदनशील मन की आवश्यकता होगी। वह संवेदना मैं करता हूं के भाव के साथ नहीं वरन परमेश्वर की सेवा भावसे सामने आए।

आत्मनिर्भरता के लिए स्वयं उद्योजक क्षेत्र में जाना अथवा राष्ट्र सेवा की दृष्टि से जो उद्योग हैं उनमें अपनी सेवाएं देना यह भी एक बात होती है, साथ ही वर्तमान के साथ चलने की भी आवश्यकता को समझना चाहियेl हमें अपडेट रहना आवश्यक है और इस राष्ट्र सेवा के ध्यास के लिए हम ऐसे क्षेत्रों में जाकर कार्य करें जहां राष्ट्र की वहां के  व्यक्तियों की उनकी आवश्यकताओं की उनके दुखों का हमें ज्ञान हो सके।

साथ ही उसके लिए आवश्यक हिम्मत ,आत्मविश्वास, मन की शक्ति आवश्यक है। प्रारम्भ में अपयश आये तो उसका सामना करने का  धैर्य,उससे पार जाने की  तैयारी भी होनी चाहिए। इसीलिए ताई ने युवकों को आह्वाहन दिया कि आने वाला वर्ष भारत का "स्वराज्य ७५" है। तब हमें पुनः विवेकानन्द की हिन्दू राष्ट्र जागो, अथवा गांधीजी के राम राज्य या महर्षि अरविन्द ने अंत में जो कहा था -" सनातन राष्ट्रधर्म यह इस राष्ट्र की  राष्ट्रीयता है , तो उसके संरक्षण की दृष्टि से और संवर्धन की दृष्टि से कार्य करना होगा।" इसका एक मार्ग विवेकानन्द केन्द्र में एक वर्ष तक अपनी सेवा देने का प्रयास हो सकता है।

निवेदिता ताई ने सभी प्रश्नों के बहुत ही समर्पक और मार्गदर्शक ऐसे उत्तर देते हुए वक्तव्य का समापन किया। पश्चात् अमोल अहिरे जी ने आभार प्रदर्शन की औपचारिकता की और अंत में केन्द्र प्रार्थना "सर्वे भवन्तु "  से कार्यक्रम का समापन हुआ ।

इस आनलाईन कार्यक्रम मे महाराष्ट्र प्रांत के प्रमुख अभय बापट, प्रांत संघटक सुश्री सुजाता दीदी दलवी एवं सभी नगरो के कार्यकर्ता और सहभागी उपस्थित थेl कुल उपस्थिती 560 के आसपास रही l

Tuesday, April 12, 2022

Vivek Chetana Webinar - Maharashtra Prant



 On 10th October 2021 Vivekananda Kendra Kanyakumari, Maharashtra Prant organised Vivek Chetana's third phase endeavor. Topic was ‘Development through Service’.  Sushri. Bharatitai Thakur and Shri. Prasad Chikshe were the Honorable key note speakers who enlightened the listeners. Program was organised online on YouTube at 10 o'clock. It was a two hours' program.  523 people watched it online.

Bhartitai explained how the N.A.R.M.A.D.A. was established and the difficulties she faced when she went to work for that area. She said, “When you work, people trust you. Now children from Narmadalaya themselves create their rooms, their furniture and they have been taught many Stotras as they wished!” Bhartitai told that she always keeps ‘Seva Sadhana’ the book of Mananiya Eknathji and she regards this book as the Bhagavad Gita for her mission. She suggested to keep the book with oneself who wants to extend service for the noble cause.

Prasadji Chikshe also delivered the lecture on ‘Self-development through service’. He believes in the idea that when you serve, then only you know thyself. Service is a mirror of your qualities and the merits which you bear. He explained it with a couple of incidents of services he extended. He appealed youngsters to invest at least two years of their life for the cause of selfless service towards the nation.

Both the speakers answered the questions raised by viewers. Vedvati Kher compered the program. Geet, Vivekvani, Introductions and Vote of Thanks were given by Kendra Karyakartas.

Universal Brotherhood Day - Baleswar - Odisha



 Universal Brotherhood Day was successfully observed on the virtual mode today .In this meetingthe guest was professor Arun Ranjan Mishra , No. Of participants were 196.
Honorable speaker enlightening to all the participants by his words .some of the key points of his speech are :
1. Swami vivekananda was the prominent founder of National movement
2.swami vivekananda was an orator by divine right and undoubtedly the greatest figure at the Parliament.
3.we all have seen swamiji in photo, statue and also we all have read his lifehistory in many books,  but we were not following his path,character,personality in this today's world . For the development of ourself as well as for our  country we all should follow his path.


AGENDA:
6:00 -6:05 -- santi patha - Sangita
6:05--6: 10-- Introduction of Guest & welcome speech - Niranjan sir
6:10-6:15-- song--Bijaylaxmi Didi
6:15-7:15--Speech-- prof.Arun Ranjan Mishra
7:15 -7:25- shradha jyanpan- premananda piri
7:25--7:30-- santi mantra & Kendra parthana-- Priti

Universal BrotherHood Day - Baripada - Odisha


 Universal Brotherhood Day, 2021 has been observed by Vivekananda Kendra Kanyakumari, Branch-Baripada(Odisha Pranta)on virtual mode in the evening on 11th September, 2021in which the attendance was 53.Mananiya Anil Kumar Kar, Odisha Pranta Pramukh of VKK was the chief speaker on the occasion.The key points of his address is as follows:
(1)Swami Vivekananda's response address to the welcome address in World Parliament of Religions in Chicago on 11th September, 1893 is memorable for India  & the Hindus in particular & the world at large.
(2)In his address Swamiji emphasized on Universal tolerance & acceptance & harmony of all religions which are the essence of Sanatan Vedic religion & glorious Indian pluralistic culture
(3)His message for India:-to be proud of your own religion & culture & his message for the world:-to adopt inclusive approach for universal fraternity
(4)Although 11th September address of Swamiji is popularly known as Chicago address but the lecture delivered on 19th November on Paper On Hinduism is most significant.
(5)We celebrate UB Day to be enriched with our glorious culture & our responsibility to fulfill the mission of our race that we have forgotten.

Universal BrotherHood Day




 Universal Brotherhood Day on-line programme was celebrated by Brahmapur Vivekananda kendra in the evening of 11th September 2021.The program was initiated by Sushree Niyati Sahu with Aikya mantra and geet. Prof. Kishore Chandra Raut, the convener of the kendra introduced the guest Dr. Bibhudatta Achari, the Deputy Commissioner of Commercial Tax &GST of Phulbani district. Dr. Achari in his deliberation addressed the youth especially to adopt the values of Swami Vivekanand. He also asserted to adopt the idea of "Vasudev Kutunbakam" to signify the meaning of universal brotherhood. Dr. Gopal Krishna Panigrahy, Nagar pramukh of the kendra enlightened the purpose and activities of the kendra. At the end Mr. Bipra Charan Rath thanked everyone  for their presence in the google meet. Sushree Renuka, Jeevanbrathi of the kendra assisted in organising the event successfully.

Universal BrotherHood Day - Kendujhar - Odisha




 Vivekananda Kendra Kanyakumari, Kendujhar Branch organized “Universal Brotherhood Day” on 11th Sept 2021 in virtual mode to commemorate the great historical speech delivered by Swami Vivekananda at Chicago in 1893 with dissemination of Swamiji’s vision to all parts of the country. Meeting started with three Omkar and Shanti path by Ayush.Sister Sanchita readout Swamiji’s speech in clear and loud voice. Adaraniya Varsha didi recited a patriotic song. Prof Sri Sandeep kumar Chand,Nagar Pramukh,Baripada as Chief Speaker delivered his speech focusing “Brotherhood and human society”. His speech covered Swamiji’s vision of the great India to conquer whole world with the spirit of spirituality as feeling of oneness. Most of participants out of attended 90 eagered to know in details by putting questions. He also explained in lucid way. Prahallad Bhai, Shikhyarti Karyakarta extended his talk on “Kendra Parichaya” and also invited enthusiastic new comers to join our programmes.Atlast Vyavastha Pramukh Sri Ranjan bhai, extended his vote of thanks to all .Then the meeting was over with  Shanti mantra

Tuesday, November 9, 2021

हिम्मत कभी ना हारो ! कार्यशाला संपन्न - विवेकानंद केंद्र जोधपुर विभाग




 "विजेता कभी हिम्मत नहीं हारते" : दीपक खैरे

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी  जोधपुर विभाग की ओर से आयोजित वर्चुअल कार्यशाला "हिम्मत कभी ना हारो" को संबोधित करते हुए जीवनव्रति दीपक खैरे ने कहा कि सपने राजाओं की तरह सामाजिक और राष्ट्रीय हित में देखना चाहिए, भिखारियों की तरह मात्र व्यक्तिगत हित मे नहीं । सपने साकार करने के लिए सतत प्रयत्नशील रहें हिम्मत कभी ना हारे । विजेता कभी प्रयत्न छोड़ते नहीं, जो प्रयत्न छोड़ते हैं वह विजेता होते नहीं ।

उन्होंने आगे कहा कठिनाइयों, गलतियों, विलंब से हतोत्साहित न हों, कठिनाइयों को अवसर में बदलें। योजनाएं बदलें पर ध्येय ना बदलें।  सकारात्मक विचारों और साथियों के साथ रहें, निषेधात्मक विचारों और लोगों से दूर रहें।

इस वर्चुअल कार्यशाला की संयोजिका विश्वा शर्मा ने बताया कि इस कार्यशाला में 55 लोग सहभागी हुए। जीवन की समस्याओं को सुलझाने वाली ऐसी प्रेरक कार्यशालाओं का नियमित आयोजन करने का अनेक सहभागियों  ने आग्रह किया। अगली कार्यशाला 22 अगस्त को होगी।

कार्यक्रम का संचालन लिच्छा राम ने किया और कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रेमरतन सोतवाल,मगराज चौधरी, हरि का योगदान रहा।

Saturday, July 31, 2021

संघर्ष टालें समस्या सुलझाएं विषय पर वर्चुअल कार्यशाला सम्पन्न




 संवाद से समस्याएं सुलझाएं : डॉ.दिव्या जोशी

विवेकानंद केंद्र जोधपुर विभाग द्वारा आयोजित वर्चुअल कार्यशाला "संघर्ष  टाले, समस्या सुलझाएं" में सहभागियों को संबोधित करते हुए डॉ.दिव्या जोशी, एसोसिएट प्रोफेसर, डूंगर कॉलेज  बीकानेर , ने खुले मन से संवाद द्वारा  समस्याओं और संघर्षों को सुलझाने का सुझाव दिया।

डॉ.जोशी ने समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित बिंदु बताएं। हमें स्वीकार करना चाहिए कि हमें कुछ बातें परेशान कर रही है। सकारात्मक दृष्टिकोण हमेशा लाभदायक होता है इसे बनाए रखें। व्यक्ति समस्या और संघर्ष से बड़ा होता है। जीवन के द्वंदो को स्वीकार कीजिए और उसे स्वभाविक समझिए, यह विश्वास रखिए सब कुछ अच्छा है और सब कुछ अच्छा ही होगा।

युवा कार्यशाला की संयोजिका विश्वा शर्मा ने बताया कि इस कार्यशाला के लिए 161 लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ एवं उपस्थिति 45 रही। विवेकानंद केंद्र जोधपुर विभाग इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन हर 15 दिनों मे करता है। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवा वर्ग को उनके सम्मुख उपस्थित प्रासंगिक समस्याओं और चुनौतियों का सफलतापूर्वक प्रतिसाद देने के लिए सक्षम बनाना है। इससे कई लोग लाभान्वित होते हैं और अपना सकारात्मक अनुभव साझा करते हैं।

इस कार्यशाला का संचालन वैभव सारस्वत ने किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यकर्ता लिच्छा राम, मगराज चौधरी, गौरी सारस्वत, पुष्पलता, सौरभ आदि का सहयोग रहा।

Saturday, July 24, 2021

"व्यक्तित्व विकास मे आत्मवलोकन की भूमिका " पर आधारित वेबिनार संपन्न - जोधपुर



 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी  जोधपुर विभाग द्वारा २० जून २०२१ को "व्यक्तित्व विकास मे आत्मवलोकन की भूमिका " पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में मुख्य वक्त के रूप में डॉ बेला भनोट, शिक्षाविद एवं पूर्व  प्रधानाचार्य, डूंगर कॉलेज बीकानेर का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ ।

वेबिनार का विधिवत प्रारम्भ तीन ओमकार प्रार्थना से हुआ।  गीत और विवेक वाणी का वचन के पश्चात वेबिनार की मुख्या वक्ता डॉ बेला भनोट जी का उद्बोधन प्रारम्भ हुआ  ।
डॉक्टर बेला भनोट ने आत्मावलोकन से होने वाले मानसिक तथा आध्यात्मिक परिवर्तन का महत्व बताया।आत्मावलोकन के अर्थ तथा महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि   किसी कार्य को करने या होने के बाद उसके करने में हमारे द्वारा अपनाई गई क्रिया और विचार पद्धति का विश्लेषण बहुत आवश्यक है। इसलिए हमें अपने बुद्धि, चिंतन एवं आत्म अवलोकन से अपने जीवन को प्रकाशित करने का निरंतर प्रयास करना चाहिए।

वेबिनार में उपस्थित संख्या ४५ रही। बीकानेर कार्र्यस्थन की संयोजिका डॉ दिव्या जोशी ने धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात सूचना देते हुए कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र के साथ किया ।

एक दिवसीय हस्त मुद्रा तथा प्राणायाम पर राष्ट्रीय वेबीनार 20 जून 2021 को संपन्न - बीकानेर



 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी बीकानेर शाखा द्वारा सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष में 1 दिन पूर्व 20 जून 2021  हस्त मुद्रा तथा प्राणायाम पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया।  वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में जाने माने योग गुरु तथा मुद्रा विज्ञान विशेषज्ञ श्री शिवादित्य पुरोहित ने ऑनलाइन माध्यम से बहुत ही सारगर्भित उद्बोधन से युवाओं को लाभान्वित किया। श्री शिवादित्य पुरोहित ने हस्त मुद्रा तथा प्राणायाम की बारीकियों पर चर्चा की । उन्होंने मुद्रा विज्ञान तथा इससे शारीरिक मानसिक तनाव और स्वास्थ्य के बारे में भी विस्तार से बताया। ।वेबीनार  में  लगभग 300 लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया । वेबीनार में भागीदारी  बिल्कुल निशुल्क रखी गई थी ।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी बीकानेर द्वारा पिछले 10 महीनों से नियमित योग वर्ग का संचालन किया जा रहा है ।इसी क्रम में सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन बीकानेर कार्यकर्ताओं द्वारा 51 सूर्य नमस्कार करवाए गए ।जिसमें ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों माध्यम से युवाओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए 51 सूर्य नमस्कार किए ।इस कार्यक्रम के दौरान युवाओं की उपस्थिति ऑफलाइन 21 ऑनलाइन 14 रही।

Discourse on Raja Yoga organised by Paschimbanga Prant


 Vivekananda Kendra Kanyakumari, Paschimbanga Prant has conducted a series of Five Discourses on the four paths of Yoga and their synthesis in commemoration of the 7th International Day of Yoga through Webex & YouTube Live.

On 19th June Shri S. Sridharan Ji (Member, Board of Trustees, Krishnamacharya Yoga Mandiram, Chennai) gave a talk on Raja Yoga' (3rd Discourse). It started with the welcome speech by Supriya Chandra followed by Shanti Path.
A brief introduction of the speaker was given by Ma. Debasish Lahiri (Sanchalak,Eknath Vibhag). Thereafter, Shri S. Sridharanji presented a crisp exposition on Raja Yoga. With warm gratitude expressed to Swami Atmapriyananda ji Maharaja and his Guru, Sri S. Sridharanji commenced his discourse on Raja Yoga. At the outset, he recited the prayer of Patanjali and this he followed with a prayer composed by him in reverence of Swami Vivekananda and two of his other Teachers.

Sridharanji drew extensively from Patanjali’s Yoga sutra and Swami Vivekananda’s Raja Yoga to place the context, the origin of Yoga, its approach, the essential message, specialty among the various Yoga forms, the need and use of commentaries of Yoga Sutra, etc. He entered into an elaborate elucidation of the origin of the Yoga, hence spoke at length about the Vedas and essence of Upanishads. In his extraordinary discussion, he covered areas such as the science of Raja Yoga, practice as the foremost path to realization, control of the psychic prana, and concentration and meditation. The clarity and precision of the talk on such a significantly solemn topic was remarkable.
 
The program concluded with a vote of thanks by Ma. Debasish Lahiri (Sanchalak,Eknath Vibhag) followed by Santi Mantra. The whole program was conducted by Ma.Nirmalya Bhattacharya (Sah Prant Sanchalak, Paschimbanga Prant).

Total Participants -196 .

Tuesday, June 22, 2021

Discourse on Karma Yoga organised by Paschimbanga Prant


 Vivekananda Kendra Kanyakumari, Paschimbanga Prant

To commemorate the 7th International Day of Yoga, we have organised 5 discourses. The event was inaugurated on 10th June 2021 through Webex & Youtube Live.

Ma.Nivedita Bhide (All India Vice President, Vivekananda Kendra Kanyakumari) gave a talk on 'Karma Yoga' (1st Discourse). It started with the welcome speech  by Shri.Ramesh Kumar Saraogi followed by Shanti Path.

Ma.Nivedita Didi began with the proposition of all the Yogas to be interconnected and stated that Karma is something that we cannot avoid. Even not doing is Karma. She shared the spectrum of meanings of Karma and then elaborately discussed on the seven significant points of Karma: Karyam Karma Smacharet, Lokasangraha, Satatam Karyam, Choice of Action, No Expectation of Results (as Ishwara can propose better results), Prasad Buddhi and to stay Here and Now. She finally concluded by claiming that Nishkama Karma, with Akarta bhava, can lead us to realize the Nitya, Suddha, Mukta Jiva that we are.

It was concluded with vote of thanks by Shri Rajarshi Halder followed by Shanti Mantra. The whole progamme was conducted by Ma.Nirmalya Bhattacharya (Sah Prant Sanchalak).

Total Participation - 342

Personality Development Camp - Ajmer


 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, अजमेर विभाग द्वारा दिनांक 2 से 6 जून, 2021 तक आयोजित किए गया व्यक्तित्व विकास शिविर के समापन समारोह का आयोजन दिनांक 6 जून 2021 को समय 6:00 से 7:00 बजे तक ऑनलाइन किया गया।     कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं सहित अभिभावकों ने भाग लिया।  5 दिवसीय शिविर के दौरान आयोजित की गई विभिन्न गतिविधियों का चित्रण बच्चो द्वारा मंत्र उच्चारण, सूर्य नमस्कार, गीत एवं गीता पठन के साथ-साथ खेल खिलाकर किया गया। कार्यक्रम में शिविर में भाग लेने वाले बालक बालिकाओं एवं उनके अभिभावकों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किए गए अभिभावकों द्वारा शिविर को बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी बताते हुए कहा कि इन शिविरों के माध्यम से ही बच्चों का  चहुमुखी विकास तो होगा ही साथ ही साथ पुरातन संस्कृति, धर्म, संस्कारों के साथ - साथ राष्ट्रभक्ति की भावना का बीजारोपण भी होगा। जो कि उनके सुनहरे भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है और इस शिविर में दी जा रही शिक्षा बच्चों को बेहतर मनुष्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाल मनोवैज्ञानिक सुचित्रा वी मोरे दीदी ने मुंबई से बच्चों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को विभिन्न सर्जनात्मक कार्यों में व्यस्त रखना अत्यंत आवश्यक है इसीलिए केंद्र द्वारा इस शिविर के माध्यम से बच्चों को विभिन्न गतिविधियों में जोड़ा गया जिससे उनका मानसिक ,बौद्धिक, शारीरिक और अध्यात्मिक विकास हो सके और उनकी मानसिक स्थिति भी सुदृढ़ हो। कार्यक्रम में राजस्थान प्रांत के प्रांत प्रशिक्षक प्रमुख डॉ स्वतंत्र कुमार शर्मा ने कहा कि हमारा आने वाला समय और भी कठिन होगा ऐसे में बच्चों का धर्म और संस्कृति  से पोषित होना अत्यंत आवश्यक है आज हम धर्म को बचाएंगे तो आने वाले समय में धर्म हमारे बच्चों की रक्षा करेगा उन्होंने कहा कि बच्चे माता-पिता का अनुसरण करते हैं अतः अभिभावकों को भी अपने व्यवहार और दिनचर्या में परिवर्तन लाना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में राजस्थान प्रांत के विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित रहे कार्यक्रम की कुल संख्या 86 रही।

मधुर व्यक्तित्व (Pleasing Personality) पर आयोजित वेबिनार सम्पन्न



नमस्कार।
विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी जोधपुर विभाग द्वारा आयोजित युवा- एक व्यक्तित्व विकास ई- कार्यशाला के अंतर्गत आज रविवार,  दिनांक 6 जून,2021 को वेबिनार का आयोजन वेबएक्स पर किया गया। वेबिनार का विषय प्लीसिंग पर्सनालिटी रखा गया था। वेबिनार के मुख्य वक्ता विख्यात पर्सनालिटी गुरु श्री अरविन्द जी भट्ट रहे।


कार्यक्रम का प्रारंभ तीन ॐ कार प्रार्थना से  श्री श्याम मालवीय जी द्वारा किया गया। तत्पश्चात मुख्य वक्ता श्री अरविन्द जी भट्ट का  परिचय  युवा कार्यकर्ता सुश्री कनिका बिरला द्वारा दिया गया। प्रेरणादायी गीत कोई चलता पदचिन्हों पर जोधपुर नगर कार्यपद्धति प्रमुख श्री हैप्पन कुमार द्वारा लिया गया। विवेक वाणी का वाचन बीकानेर कार्यस्थान व्यवस्था प्रमुख श्री वैभव सारस्वत द्वारा किया गया। इसके पश्चात श्री अरविन्द जी भट्ट का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

व्याख्यान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:- 


श्री अरविन्द जी भट्ट ने अपना वक्तव्य प्रारम्भ करते हुए कहा कि प्रत्येक युग में अलग अलग युगपुरुष हुए हैं और उन्हें अलग अलग विशेषणों से बुलाया जाता है जैसे सतयुग में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, त्रेता में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एवं द्वापर में जन्मे मधुर, मनोहारी, मनोग्राही व्यक्तित्व भगवान् श्री कृष्ण हैं। 


उन्होंने personality शब्द को परिभाषित करते हुए कहा कि अंग्रेज़ो के अनुसार personality यह शब्द अंग्रेजी के persona से  निकला है जिसका अर्थ होता है मुखौटा,जो पूर्ण रूप से असत्य है परंतु वर्तमान में स्वीकार्य है। समाज में जो व्यक्ति देखने में जैसा लगता है उसे वैसा ही माना जाता है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने अष्टावक्र और महात्मा गाँधी का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अंग्रेजी परिभाषा External पर्सनालिटी (बाहरी व्यक्तित्व) की है। व्यक्तित्व केवल बाह्य नहीं होता बल्कि अधिकांशतः आंतरिक होता है। प्रत्येक व्यक्ति में कोई ना कोई गुण होता है जिसे पहचानकर उसे उत्कर्ष पर ले जाएं जहाँ जब भी उस विशिष्ट गुण की बात हो तो हमारा नाम आये और यदि हमारी चर्चा हो तो उस विशिष्ट गुण की चर्चा हो। वह आंतरिक रूप से मधुर व्यक्तित्व है।

मधुर व्यक्तित्व समायोजन होता है-

Earning and organization of Physical, Psychological, Emotional, Intellectual and Spiritual Qualities As Presented to others.

श्री अरविन्द जी कहते हैं कि केवल गुणों का अर्जन और समायोजन पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका समाज के समक्ष प्रकटीकरण/प्रस्तुतिकरण आवश्यक है। उन्होंने गुणों के प्रदर्शन और प्रस्तुतिकरण में भी अंतर बताया। 

श्री अरविन्द जी आगे कहते हैं कि प्रस्तुतिकरण में आने वाली कठिनाई मुख्यतः शर्म (Shyness) है।
 Shyness के 4 स्तर होते हैं-


1.सामान्य 2.अत्यधिक। इनमे व्यक्ति यह सोचता है कि MKK मैं कैसे करूँ?, मैं क्या करूँ? मैं कैसे करूँगा?
सामान्य shyness सभी के साथ होती है जो कि स्वाभाविक है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं लार्ड चर्चिल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे भी जब भाषण देने जाते तो पहले कुछ मिनट वे भी नार्मल shyness का अनुभव करते थे। Extreme या अत्यधिक shyness में व्यक्ति स्वयं पर संदेह होने लगता है यह  उस पर हावी रहती है।

3.Social (सामाजिक) shyness में अकेले में व्यक्ति अच्छा करता है जबकि लोगों के सामने करने में संकोच होता है। ऐसे व्यक्ति LKK - लोग क्या कहेंगे के शिकार होते हैं। 


4. Severe Social Phobia:- 
इसमें व्यक्ति MKK+LKK का शिकार होता है। नकारत्मकता हावी रहती है। 
इस से तुरंत बाहर निकलना चाहिए। 
जिसके लिये deep breathing का अभ्यास जो कि ध्यान की प्रारंभिक अवस्था है, योगाभ्यास आदि करना चाहिए। जो कि रिसर्च में वैज्ञानिकों द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।

आगे श्री अरविन्द जी कर्मयोगी श्री कृष्ण के मधुर व्यक्तित्व के बारे में कहते हैं कि वे कितने आत्मविश्वासी और निसंकोची हैं। उनकी स्तुति में गाये जाने वाला मधुराष्टकं उनके मधुर व्यक्तित्व के बारे में बताता है।


बाहरी व्यक्तित्व में सम्मिलित हैं


अधरं मधुरं, नयनं मधुरं- जो श्यामवर्णी हैं उनके होंठ मधुर उनके नयन मधुर। 
हसितं मधुरं - उनकी सौम्य मुस्कान है।महावीर जैन, महात्मा बुद्ध की मूर्तियों ओर भी सदैव सौम्य मुस्कान रहती है।
वलितं मधुरं- शयन कला मधुर,
वसनं मधुरं- देश-काल-परस्थिति के अनुसार वस्त्रों का चयन मधुर।
गमनं मधुरं- सिंह जैसी चाल है
वचनं मधुरं- मधुर शब्द बोलते हैं।

श्री कृष्ण का आंतरिक व्यक्तित्व 


वदनं मधुरं- सोच मधुर है, 
हृदयं मधुरं- दयालु हैं
चरितं मधुरं- महान चरित्र, अहंकारशून्य व्यक्ति, स्वयं ने कभी राजमुकुट धारण नहीं किया, मोर मुकुट में रहे। महाभारत के युद्ध में पांडवों की विजय का श्रेय स्वयं कभी नहीं लिया, शिशुपाल प्रसंग आदि उदहारण हैं।
गीतं मधुरं- बांसुरी बजाते हैं,
पीतं मधुरं- दुग्ध पदार्थ पीते हैं
भुक्त मधुरं- योग्य भोजन करते हैं।
शमितं मधुरं- सकारत्मक आलोचना करते हैं,
दमितं मधुरं- जिसका नाश किया उसे मोक्ष दिया।
दृष्टम मधुरं- Pleasing eye  contact है।
शिष्टम मधुरं- विनम्र हैं- गांधारी के श्राप का वरण कर समाज को सन्देश दिया कि अगर अपराध किया है तो दंड भुगतना ही होगा चाहे परमात्मा हो या परात्पर।
गोपी मधुरा, गोपा मधुरा- उनके केवल मित्र हैं उसमें जाति और लिंग भेद नहीं है।
मधुराधिपते रखिलं मधुरं।।

 

अंत मे सभी प्रतिभागियों को आगामी कार्यक्रम के लिए सूचना प्रदान की गई। शांति मंत्र पुष्पलता दीदी, कार्यपद्धति प्रमुख बीकानेर कार्यस्थान द्वारा लेकर कार्यक्रम का समापन किया गया। सम्पूर्ण वेबिनार का सञ्चालन श्री मेहुल अरोड़ा, युवा कार्यकर्ता जोधपुर नगर द्वारा किया गया। 


वेबिनार में कुल पंजीकरण 221 हुए एवं उपस्थित संख्या 125 रही। वेबिनार में श्री चंद्र प्रकाश अरोड़ा, श्री अशोक खंडेलवाल, सुश्री प्रांजलि येरिकर, श्री दीपक खैरे,  श्री प्रेम रतन सोतावाल,श्री अशोक दानी, डॉ दिव्या जोशी, डॉ अमित व्यास, श्री तरुण राठी आदि उपस्थित रहे।

धन्यवाद
विश्वा शर्मा
संयोजिका- युवा एक व्यक्तित्व विकास कार्यशाला

 

Thursday, June 17, 2021

Matha Nirmatha




 Vivekananda Kendra Godavari organised 'Matha Nirmata' an event on Mother's day by Mananeeya Sujatha Didi, Telugu Prant Sanghatak. The event took place on 14th May 2021 evening 7.00 - 8.30 PM through Google Meet. Totally 77 were present in the event.

The objective of the event is to understand mother's quality of unconditional love towards their children. Importance of Women in Hindu Dharma and different cultures through Great Mothers like Sita Devi, Kunti Devi, Droupadi from Puranas. Motherly emotions of Sister Nivedita were presented through her Works. Such Motherly emotions not only exist in Women but even in Men like Swami Vivekananda and Maa Eknathji, with their selfless and unconditional love towards the nation, lifted up the spirtits of our Dharmic practices and love towards our Nation were presented.

Bharat Mata ki Jai

युवा- एक व्यक्तित्व विकास ई - कार्यशाला सम्पन्न



विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, जोधपुर विभाग, राजस्थान द्वारा दिनांक 24 मई से 28 मई 2021 तक "युवा" - पंचदिवसीय व्यक्तित्व निर्माण ई-कार्यशाला का आयोजन सायं 6.00 बजे से 7.30 बजे तक  किया गया। यह कार्यशाला ऑनलाइन Webex पर आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम में 243 सहभागीयों ने पंजीयन किया। यह सहभागी राजस्थान प्रांत के बाहर भारत के अन्य राज्यों से भी और 16 से 69 वर्ष आयु के रहे। इसके पंजीयन हेतु रुपए 25 का नाम मात्र शुल्क रखा गया।

कार्यशाला के प्रथम दिवस 24 मई 2021 को विवेकानंद केंद्र राजस्थान प्रांत के प्रांत प्रमुख श्री भगवान सिंह जी चौहान जी ने आशीर्वचन दिए। 'व्यक्तित्व निर्माण का मंत्र' इस विषय पर प्रसिद्ध प्रेरक वक्ता और व्यक्तित्व निर्माण विशेषज्ञ श्री अरविंद भट्ट ने सहभागीयों को संबोधित किया। इस संबोधन के अलावा उस दिन के कार्यक्रम में गीत, विवेकवानी, खेल और टेक होम पॉइंट्स भी रहे।

कार्यशाला के द्वितीय दिवस 25 मई 2021 को मुख्य अतिथि जोधपुर विभाग संचालक डॉ. हनुमान प्रसाद व्यास जी ने आशीर्वचन दिए। 'एकाग्रता' इस विषय पर विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती और विवेकानंद केंद्र हिंदी प्रकाशन विभाग के प्रकल्प संगठक श्री दीपक खैरे ने सहभागीयों को मार्गदर्शन दिया। गीत, विवेकवानी, खेल और ओमकार ध्यान का अभ्यास हुआ।

कार्यशाला के तृतीय दिवस 26 मई 2021 को मुख्य अतिथि विवेकानंद केंद्र राजस्थान प्रांत के प्रांत समिति के सदस्य श्री चंद्रप्रकाश अरोरा जी ने आशीर्वचन दिए। बीकानेर कार्यस्थान की संयोजिका डॉ. दिव्या जोशी ने 'आत्मविश्वास' इस विषय पर मार्गदर्शन दिया। विवेकवाणी, खेल, गीत और टेक होम पॉइंट्स इस सत्र में लिए गए।

कार्यशाला के चतुर्थ दिवस 27 मई 2021 को  मुख्य अतिथि श्री अशोक खंडेलवाल - विवेकानंद केंद्र राजस्थान प्रांत के प्रांत संपर्क प्रमुख - के आशीर्वचन से प्रारंभ हुआ। जोधपुर के नगर प्रमुख डॉ अमित व्यास ने 'समय प्रबंधन' पर सहभागीयों को संबोधित किया। विवेकवाणी, गीत, खेल और टेक होम पॉइंट्स हुए।

कार्यशाला के पंचम - अंतिम दिन - 28 मई 2021 को विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की राष्ट्रव्यापी गतिविधियों को वीडियो के माध्यम से दर्शाया गया और स्थानीय गतिविधियों के विषय में जोधपुर के विभाग प्रमुख श्री प्रेम रतन सोतवाल जी ने जानकारी दी।

राजस्थान प्रांत के प्रशिक्षण प्रमुख डॉ स्वतंत्र शर्मा जी ने आशीर्वचन दिए। विवेकानंद केंद्र राजस्थान प्रांत की प्रांत संगठक जीवनव्रती सुश्री प्रांजली येरिकर ने 'टीम वर्क' इस विषय पर सहभागीयों को मार्गदर्शन दिए। इस अंतिम दिन के सत्र में सहभागीयों ने उनके अनुभव कथन कहे। सत्र के अंत में बीकानेर कार्यस्थान संयोजिका डॉ. दिव्या शर्मा दीदी ने आगामी कार्यक्रमों की सूचना दी। सारे सहभागीयों का एक ऑनलाइन ग्रुप फोटो लेने और शांति मंत्र के पश्चात कार्यशाला पूर्ण हुई।

इस ऑनलाइन कार्यशाला की संयोजिका सुश्री विश्वा शर्मा थी। कार्यशाला के आयोजन में श्री हैपन कुमार, श्री तरुण राठी, श्री मेहुल अरोड़ा , सुश्री पुष्पलता  , सुश्री कनिका बिरला, श्री वैभव सारस्वत, श्री सौरभ कुमार  और श्री लिच्छाराम की सक्रिय सहभागिता रही।

विवेकानंद केंद्र मध्यप्रांत द्वारा आयोजित "युवा संवाद - I"


 विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष में 12 जनवरी 2021 को सायं 5 से 6:30 "युवा संवाद" कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमे कुल 83 युवा ऑनलाइन जुड़े l युवा संवाद में छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के तथा विदेश में अध्ययन कर रहे  युवा ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से संवाद किए l इस संवाद का मुख्य उद्देश्य युवा अपने शिक्षा एवं कार्यों द्वारा देश के लिए कैसे योगदान दे रहे हैं एवं देना चाहते हैं और आगे क्या करना चाहते हैं ? इस बारे में युवाओं द्वारा किये जा रहे, वर्तमान के कार्य एवं भविष्य की इमेजिनेशन को अन्य युवाओं के साथ साझा करना था l

             सफलता से सार्थकता की ओर युवाओं को ले जाने के लिए इस कार्यक्रम में कृषि, पक्षी विज्ञान, एरो स्पेस, खेल, पत्रकारिता  आदि के जैसे  महत्वपूर्ण और रोचक विषयों पर संवाद हुआ  l इन रोचक क्षेत्रों मे अध्ययन के लिए योजना कैसे बनाये ?  स्वयं उस क्षेत्र के युवाओं से कार्यक्रम में जुड़े अन्य युवाओं ने लाइव जाना एवं अपने मन में उठ रहे प्रश्नों को भी पूछे ।

कार्यक्रम का प्रारंभ तीन ओंकार एवं प्रार्थना से हुआ जिसे राहुल जी ने लिया l तत्पश्चात गीत अरुण जी द्वारा प्रस्तुत किया गया एवं कार्यक्रम का संक्षिप्त एवं सारगर्भित भूमिका बताते हुए मोहन जी ने कहा स्वामी विवेकानंद का विश्वास आधुनिक युवा पीढ़ी में था, उसी से हमारे कार्यकर्ता निकलेंगे इसलिए यह युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया l युवा उर्जा से भरा होता है इसलिए उसे लगातार प्रेरणा की जरूरत होती है l  लक्ष्मी दीदी द्वारा विवेक वाणी बोलने के पश्चात युवाओं से संवाद प्रारंभ हुआ l

कार्यक्रम का संचालन यतेन्द्र जी ने किया l युवाओं से संवाद -  भोपाल विभाग सह युवा प्रमुख रमेश जी, सौरभ डोंगरे जी एवं  बिलासपुर शाखा नगर युवा प्रमुख आशुतोष शुक्ल जी ने किया l


संवाद के दौरान युवाओं द्वारा कही गयी बातें -


राष्ट्र प्रकाश साहू जी ने युवाओं से कहा हम अपने खेतों में गोवंश के गोबर से जैविक खेती करते हैं एवं गोमूत्र से उसका कीट नियंत्रक, गोनाइल, जो कि फिनाइल की तरह कार्य करता है इसका निर्माण एवं प्रशिक्षण का कार्य करते हैं l जिससे हमारे देश का पैसा, हमारे देश में रहेगा एवं हमें केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों से मुक्ति मिलेगी l

अर्जुन शर्मा जी हॉकी के खिलाड़ी हैं, उन्होंने कहा खेल एवं जीवन दोनों में लगन के साथ ही ईमानदारी भी जरूरी है, किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए निरंतरता आवश्यक है, इसका कोई शॉर्टकट नहीं है l हार्ड वर्क करना पड़ता है, तभी अपना टारगेट अचीव कर पाएंगे l प्रोफेशन में फोकस जरूरी है l तन के साथ मन का भी समन्वय आवश्यक है l खेल में देश को जो प्रजेंट करना भी देश की एक बड़ी सेवा है l

तेजस जी ने बताया यू.एस. में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं इन्होंने कक्षा ग्यारहवीं से ही इसकी तैयारी की थी । उन्होंने युवाओं को कहा हमेशा सपने देखें एवं लक्ष्य ऊंचा रखें । किसी कार्य को करने से पहले मन में झिझक होती है, बाद में वह दूर हो जाती है । इनका उद्देश्य है विदेश में अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त करके देश में वापस आकर भारत के लिए कुछ कर सकूं ।

दिव्यांश द्विवेदी जी ने बताया वे आईआईटी बीएचयू में अध्ययनरत हैं, उन्होंने कक्षा दसवीं में 10 में से 10 सीजीपीए हासिल किया था एवं प्रथम प्रयास में ही आईआईटी एंट्रेंस एग्जाम क्रैक किया, उन्होंने युवाओं से कहा स्वामी विवेकानंद के संदेश को ध्यान में रखकर जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो, रुके नहीं ।

विशाल गीते जी ने बताया वे पक्षी विज्ञान की पढ़ाई कर रहे हैं l इस रोचक विषय से संबंधित विभिन्न पक्षियों के बारे में एवं उनके प्रभाव से संबंधित तथ्यों के बारे में युवाओं को बताया । उन्होंने कहा पक्षी सीधे खेतों एवं फसलों से जुड़े होते हैं, इसलिए पक्षियों की सेवा करके भी देश की सेवा की जा सकती है । अकेले का पहचान बनाने की अपेक्षा समाज में सभी लोगों के साथ चलना चाहिए l

हार्दिक दवे जी ने बताया वे पत्रकारिता से जुड़े हैं l उन्होंने कहा अनुभव जरूर पुराने लोगों के पास है किंतु नए आइडिया एवं लोगों तक तत्परता से विचार संप्रेषण की कला युवाओं के पास अधिक है । आज के समय में राष्ट्रवादी पत्रकारिता की आवश्यकता अधिक है । वर्तमान में युवाओं में भटकाव की समस्या अधिक है, जिस पर स्वामी विवेकानंद जी ने भी ध्यान दिया था, अतः सूचनाओं का सही आदान प्रदान करने की आवश्यकता है l यह काम सही पत्रकारिता से ही हो सकता है, इसलिए पत्रकारिता देश के हित को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए । अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए टीवी पर डिपेंड रहना ही जरूरी नहीं है, कई वेबसाइट, पोर्टल, सोशल मीडिया साइट, यूट्यूब, फेसबुक आदि हैं, जिनके माध्यम से हम अपने विचार लोगों तक पहुंचा सकते हैं ।
                                        युवाओं से संवाद होने के पश्चात सभी युवाओं ने अपने मन में उठ रहे प्रश्न पूछे एवं कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं द्वारा ही उसका उत्तर दिया गया l  विवेकानंद केंद्र दिल्ली के युवा प्रमुख निखिल जी युवाओं से हुए संवाद का सम-अप किये एवं संजय पवार जी ने सभी का आभार व्यक्त किया l सर्वे भवन्तु के साथ "युवा संवाद - I" कार्यक्रम का समापन हुआ l

Wednesday, June 16, 2021

Bhajan Sandhya - Thiruvananthapuram - Kerala



 As part of the regular Bhajan Sandhya on all Purnima Days by Vivekananda Kendra- Kerala Vibhag, this time the lead was taken up by Thiruvananthapuram Branch on Jan 28th Thursday from 6:30 pm to 7:30 pm.

Participants: 20

Bhajan Sandhya was charged with extremely soothing and calming devotional songs.

The details as follows:
Anchoring  :- Ku. Athira
Omkar & Stavan  :- Sutapa Didi
1. Guru :- Ku. Rituparna Didi
2. Ganesh :- Ramya ji
3. Shiva    :- Ku. Sreelakshmi ji
4. Devi      :- Pushpavati ji
5. Ram   :- Smt. Priya Bhattacharya ji
6. Krishna:- Smt. Athira ji
7. Ayyappa:- Asritha ji
8. Nirvanashatakam:- Kalyani Didi
9. Meditation & Shanthi Mantra :- Radha Didi
10. Kendra Prarthana:- Sutapa Didi

Thursday, May 6, 2021

स्वामी विवेकानंद को जानो - Webinar - Delhi


 विवेकानंद केंद्र , दिल्ली विभाग द्वारा "स्वामी विवेकानंद को जानो " विषय पर पांच दिवसीय वेबिनार ( 6-10 जनवरी 2021 तक शाय 6-7 बजे ) चल रहा है।
आज इसी के अंतर्गत श्री मानस भैया जी को सुनना हुआ ।
स्वामी जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर नजर डालते हुए एक युवा के अंदर जो सेवा , तप , त्याग का गुणः होना चाहिए , उसे समझाया।

All Participants where from Delhi University and JNU