Showing posts with label Ajmer. Show all posts
Showing posts with label Ajmer. Show all posts

Tuesday, March 28, 2023

Yoga Satra - Ajmer

एक विचार लो। उसे अपना जीवन बना लो। उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो, उस विचार को जीओ। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूबो दो और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है। स्वामी विवेकानन्द के इस विचार से विश्व में महान व्यक्तित्वों का निर्माण हुआ है। कार्य करते समय केवल कार्य का चिंतन करना और परिणाम को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने का भाव रखना ही जीवन में न केवल सफलता प्राप्त होती है अपितु चिंता एवं तनाव भी दूर रहता है। उक्त विचार विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी राजस्थान के प्रान्त कार्यपद्धति प्रमुख डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर के बी.एस.सी. बीएड के विद्यार्थियों को त्रिदिवसीय योग सत्र के समापन के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने व्यक्तित्व के पांच आयामों की व्याख्या करते हुए कहा कि हमारे अस्तित्व के पांच भाग होते हैं जिसमें पहला शरीर होता है तथा दूसरा उसे चलाने वाली ऊर्जा जिसे प्राण कहते हैं। तीसरा इस प्राण का स्रोत मन होता है तथा चैथा मन को दिशा देने वाली शक्ति बुद्धि होती है। पांचवा और अंतिम आयाम इन चारों के योग से बनता है जिसे आनन्द कहते हैं और यही योग का अंतिम लक्ष्य है। 

इस योग सत्र में विद्यार्थियों को श्वसन के अभ्यासों के साथ ही शिथिलीकरण अभ्यास सिखाए गए तथा बीजमंत्रों के साथ सूर्यनमस्कार का अभ्यास सिखाया गया। इसके अतिरिक्त मन को शांत रखने के लिए आसन कराए गए तथा कपालभाति क्रिया, नाड़ी शुद्धि प्राणायाम एवं भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास भी कराया गया। विवेकानन्द केन्द्र अजमेर के युवा प्रमुख अंकुर प्रजापति ने अभ्यासों का प्रदर्शन किया तथा सत्र समन्वयक प्रो0 आयुष्मान गोस्वामी रहे।

Tuesday, February 28, 2023

Yoga Parichay Satra - Ajmer

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा द्वारा आज 28 फरवरी 2023 को क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान अजमेर के M.Ed एवं B.Ed कक्षा के विद्यार्थियों के लिए  योग परिचय सत्र का आयोजन किया गया। इस योग परिचय सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों में नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों में योग शिक्षा का जुड़ाव एवं उसके प्रैक्टिकल एप्लीकेशन को लेकर के रहा।
प्रांत कार्यपद्धति प्रमुख डॉ स्वतंत्र शर्मा ने उपस्थित 78 विद्यार्थियों को प्रारंभिक श्वसन के अभ्यास एवं लूजनिंग प्रैक्टिस इसके अभ्यास कराए। इसके उपरांत लघु शवासन के अभ्यास के साथ योग एक जीवन पद्धति एवं उसके विभिन्न आयामों को लेकर सूक्ष्म चर्चा की।
योग केवल शारीरिक अभ्यास ना होकर मन को शांत करने की क्रिया है तथा योग अर्थात जोड़ना अर्थात एक रूप हो जाना। व्यष्टि से समष्टि तक जोड़ने की प्रक्रिया योग है तथा योग का आचरण हमारी भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है इस मंत्र को भविष्य के राष्ट्र निर्माता होने के नाते एक शिक्षक को जानना बहुत आवश्यक है।
इन विचारों के साथ ही योग परिचय सत्र में विद्यार्थियों ने अपना उत्साह प्रदर्शित किया और आगामी मार्च-अप्रैल और मई में विशेष योग सत्रों के आयोजनों को लेकर योजना बनाने का भी संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर शिक्षा अधिष्ठाता प्रोफेसर आयुष्मान गोस्वामी का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ। व्यवहारिक प्रशिक्षण में युवा प्रमुख  श्रीअंकुर प्रजापति का सहयोग रहा

Tuesday, June 22, 2021

Personality Development Camp - Ajmer


 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, अजमेर विभाग द्वारा दिनांक 2 से 6 जून, 2021 तक आयोजित किए गया व्यक्तित्व विकास शिविर के समापन समारोह का आयोजन दिनांक 6 जून 2021 को समय 6:00 से 7:00 बजे तक ऑनलाइन किया गया।     कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं सहित अभिभावकों ने भाग लिया।  5 दिवसीय शिविर के दौरान आयोजित की गई विभिन्न गतिविधियों का चित्रण बच्चो द्वारा मंत्र उच्चारण, सूर्य नमस्कार, गीत एवं गीता पठन के साथ-साथ खेल खिलाकर किया गया। कार्यक्रम में शिविर में भाग लेने वाले बालक बालिकाओं एवं उनके अभिभावकों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किए गए अभिभावकों द्वारा शिविर को बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी बताते हुए कहा कि इन शिविरों के माध्यम से ही बच्चों का  चहुमुखी विकास तो होगा ही साथ ही साथ पुरातन संस्कृति, धर्म, संस्कारों के साथ - साथ राष्ट्रभक्ति की भावना का बीजारोपण भी होगा। जो कि उनके सुनहरे भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है और इस शिविर में दी जा रही शिक्षा बच्चों को बेहतर मनुष्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाल मनोवैज्ञानिक सुचित्रा वी मोरे दीदी ने मुंबई से बच्चों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को विभिन्न सर्जनात्मक कार्यों में व्यस्त रखना अत्यंत आवश्यक है इसीलिए केंद्र द्वारा इस शिविर के माध्यम से बच्चों को विभिन्न गतिविधियों में जोड़ा गया जिससे उनका मानसिक ,बौद्धिक, शारीरिक और अध्यात्मिक विकास हो सके और उनकी मानसिक स्थिति भी सुदृढ़ हो। कार्यक्रम में राजस्थान प्रांत के प्रांत प्रशिक्षक प्रमुख डॉ स्वतंत्र कुमार शर्मा ने कहा कि हमारा आने वाला समय और भी कठिन होगा ऐसे में बच्चों का धर्म और संस्कृति  से पोषित होना अत्यंत आवश्यक है आज हम धर्म को बचाएंगे तो आने वाले समय में धर्म हमारे बच्चों की रक्षा करेगा उन्होंने कहा कि बच्चे माता-पिता का अनुसरण करते हैं अतः अभिभावकों को भी अपने व्यवहार और दिनचर्या में परिवर्तन लाना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में राजस्थान प्रांत के विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित रहे कार्यक्रम की कुल संख्या 86 रही।

Thursday, May 28, 2020

VK Ajmer Corona Relief Work

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा द्वारा आज दिनांक 4 मई तक कोरोना वायरस के कारण दीन एवं आर्त जनों हेतु सेवा प्रकल्प के तहत राशि 76907/-  रुपयों का एकत्रीकरण विवेकानंद केंद्र के दायित्ववान कार्यकर्ताओं एवं हित चिंतकों के माध्यम से किया गया है।
इस राशि से निम्नांकित प्रकार राशन किट तैयार किया जा रहा है और विवेकानंद केंद्र के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए सर्वे के आधार पर जरूरतमंद परिवारों को यह किट वितरित किया जा रहा है।
विवेकानंद केंद्र अजमेर के दायित्व वान कार्यकर्ताओं एवं हित चिंतकों द्वारा  नर सेवा नारायण सेवा हेतु प्रदत्त सहयोग राशि से कार्य शुरू हो गया है
अब तक 25 परिवारों तक सामग्री वितरित की जा चुकी है
आगे किट बनाने का काम जारी है और सर्वे के अनुसार परिवारों में राहत सामग्री किट दो-तीन दिन में पूर्ण वितरित होने की संभावना है।

Wednesday, January 22, 2020

विवेकानंद केंद्र अजमेर में मैदानी खेल कार्यशाला का आयोजन

आज बच्चों में मोबाइल टीवी और सोशल मीडिया के प्रति इतनी सक्रियता हो चुकी है कि उन्हें बाहर के मैदानी खेल खेलने में रुचि ही नहीं बची जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है। बच्चों को कम से कम दो घंटा मैदानी खेल अवश्य खेलने चाहिए क्योंकि इससे हमारा शरीर एवं मन तरोताजा बनता है जिससे हमारे मस्तिष्क की क्षमता जैसे एकाग्रता, स्मरणशक्ति आदि का विकास होता है। आज यदि हमें कैंसर जैसी बीमारियों से बचना है तो मोबाइल के रेडिएशन से दूर रहना होगा और स्वामी विवेकानंद के विचारों का अनुसरण करते हुए अपने जीवन को उन्नत और श्रेष्ठ बनाने की दिशा में काम करना होगा। उक्त विचार पार्षद कीर्ति हाड़ा ने अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा अजमेर द्वारा पांच दिवसीय आउटडोर विण्टर कैंप के समापन समारोह में धौला भाटा स्थित महाराणा प्रताप सामुदायिक भवन में व्यक्त किए। केन्द्र के युवा प्रमुख अंकुर प्रजापति के अनुसार इस पांच दिवसीय कैंप में बच्चों को आदर्श दिनचर्या, पर्यावरण संरक्षण, संतुलित आहार और श्रेष्ठ जीवन तथा एक भारत विजयी भारत की संकल्पना क्रमशः अखिल शर्मा, शुभ्रा यादव, रजनी यादव ने ली। कार्यालय प्रमुख कुलदीप कुमावत ने बताया कि बच्चों को सूर्यनमस्कार एवं आसनों के अतिरिक्त विभिन्न खेल जैसे मगरमच्छ दौड़, किसान लोमड़ी, सुरंग दौड़, चरण स्पर्श आदि  खिलाए गए। इस संपूर्ण कैंप के दौरान कैलाश, राकेश, समृद्धि शर्मा का सहयोग रहा। कैंप में 35 बच्चों ने सहभागिता की।

अजमेर मे किशोरी विकास कार्यशाला

संस्कारवान एवं सशक्त नारी ही समर्थ समाज और  विकसित राष्ट्र का आधार हो सकती है। इसके लिए देश के प्राचीन गौरव और संस्कारों के प्रति निष्ठा एवं आधुनिक समाज व्यवस्था के साथ तालमेल सीखने की आवश्यकता है। भारतीय जीवन में स्त्री ही मूल्यों एवं परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने की महत्वपूर्ण कड़ी है किंतु फैशन की चकाचैंध में उसका यह नैसर्गिक गुण प्रकट नहीं हो पा रहा है। वर्तमान सिनेमा, टीवी धारावाहिकों एवं विज्ञापनों में स्त्री का जो स्वरूप प्रदर्शित किया जाता है वह धीरे-धीरे समाज का रोल मॉडल बनता जा रहा है और प्राचीन भारतीय रोल मॉडल जिनमें सीता, सावित्री, मैत्रेयी, गार्गी, रानी लक्ष्मी बाई और सिस्टर निवेदिता जैसे चरित्रों को विस्मृत होते जा रहे हैं जिसके कारण वर्तमान पीढ़ी संस्कारों से दूर हो रही है। वर्तमान में सोशल मीडिया जहां किशोरियों को अपने परिवार से अलग-थलग कर रहा वहीं इस एकाकीपन को दूर करने के लिए वह कुत्सित षड्यंत्रों का शिकार हो जाती हैं और ऐसे अपराधों की संख्या आज बढ़ती जा रही है। विवेकानंद केंद्र किशोरियों को न केवल आत्म सम्मान से जीने का मार्गदर्शन दे रहा है अपितु उन्हें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियों के बारे में अवगत कराते हुए उनके सर्वांगीण विकास का प्रशिक्षण किशोरी विकास शिविरों के माध्यम से देने का प्रयास कर रहा है। उक्त विचार विवेकानंद केंद्र की प्रांत संगठक प्रांजलि येरीकर द्वारा राजकीय बालिका विद्यालय आदर्श नगर में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा द्वारा आयोजित किशोरी विकास शिविर के अवसर पर व्यक्त किए गए।

इस अवसर पर जानकारी देते हुए केंद्र की सहनगर प्रमुख बीना रानी ने बताया कि किशोरी विकास शिविर में उपस्थित छात्राओं को व्यक्तिगत हाइजीन, विधिक साक्षरता तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान की गई। इसके साथ ही खेल खेल में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। किशोरी विकास शिविर के अवसर पर ग्रामीण सामाजिक विकास संस्थान के निदेशक रूपेश शुक्ला, डॉ नेहा कोटिया, शेफाली शर्मा, याशिका यादव और शेफाली सांखला ने भी अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर प्राचार्या शांता भिरयानी ने भी मार्गदर्शन प्रदान किया।

भगवद्गीता का संदेश है युद्ध करो

विवेकानंद केंद्र का गीता जयन्ती महोत्सव संपन्न | प्रत्येक मनुष्य के जीवन में आंतरिक तथा बाहरी युद्ध हो रहा है। इसमें विजयी होने के लिए आज कृष्ण का संदेश देने का कार्य भगवद्गीता ़द्वारा हो सकता है। गीता के द्वारा मोह दूर हो सकता है साथ ही पुरूषार्थ जागरण भी संभव है। गीता का प्रासंगिक संदेश समाजोत्थान के लिए व्यक्ति तटस्थ न होकर आक्रामक बने तभी भारत विजयी हो सकता है। महाभारत के युद्ध में भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को युद्ध करने के लिए प्रेरित किया जाना केवल धर्म स्थापना ही न होकर अच्छे लोगों के रक्षण तथा दुष्टों के विनाश के लिए भी था। आज समाज में बढ़ती हुई विकृतियों को दूर करने के लिए भले ही हमारे पास कृष्ण न हों किंतु युवाओं के रूप में अर्जुनों की कमी नहीं है। हमें केवल उन्हें संस्कार एवं मूल्य परक शिक्षा देनी होगी जो भगवद्गीता के माध्यम से ही संभव हो सकती है। केवल गीता के अध्ययन से ही यह संभव नहीं होगा बल्कि गीता के संदेश को आचरण में उतारने हेतु युवाओं को प्रशिक्षित करना होगा। समाज को संस्कारवान एवं चरित्रवान युवा देने का कार्य आज विवेकानन्द केन्द्र पूरे भारतवर्ष में कर रहा है। उक्त विचार विवेकानंद केंद्र कीे जीवनव्रती कार्यकर्ता एवं प्रान्त संगठक प्रांजलि येरीकर ने होटल आराम वैशाली नगर में आयोजित गीता जयन्ती महोत्सव के अवसर पर व्यक्त किए।

नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर गीता पर आधारित प्रश्नोत्तरी का संचालन महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के योग विभाग के डाॅ0 लारा शर्मा ने किया। इस अवसर पर विजेतागण के बालकिशन ईणानी, कुशल उपाध्याय, राधा राठी, समीर शर्मा, को कर्मयोग की पुस्तक नगर संचालक डाॅ0 श्याम भूतड़ा ने भेंट की। डाॅ0 अनिता खुराना ने कर्मयोग श्लोक संग्रह का सस्वर वाचन किया तथा विवेकानन्द केन्द्र की उपाध्यक्ष पदम्श्री निवेदिता भिड़े द्वारा प्रेषित गीता जयन्ती पत्र का वाचन भी हुआ।

इससे पूर्व प्रातः 6.00 बजे विवेक योग संगम के तहत सुभाष उद्यान में आसन, प्राणायाम, सूर्यनमस्कार तथा क्रीड़ा योग का आयोजन भी हुआ।

मयूर स्कूल में विद्यार्थी व्यक्तित्व विकास कार्यशाला संपन्न

अच्छी आदतें ही श्रेष्ठ स्वभाव का आधार - विवेकानन्द शिला स्मारक के 50वें वर्ष के अवसर पर हुआ आयोजन

बचपन से जिन संस्कारों को मानव अपनी आदतों में ढाल लेता है वही संस्कार उसका स्वभाव बन जाते हैं। अच्छी आदतों को किशोरावस्था में ही अंगीकार कर लिया जाता है तो पूरा जीवन सफल और प्रभावी हो जाता है। जीवन में प्रोएक्टिव होना अर्थात पहल करना। जब हम अंतिम लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए कार्य करना सीखने लगते हैं तो  कार्य की समझ, दूसरों के दृष्टिकोण का अनुभव तथा समूह में मिलकर कार्य करने जैसे गुण स्वमेव ही विकसित होने लगते है। स्वामी विवेकानन्द ने इसी को मनुष्य में छिपे हुए देवत्व के प्रगटीकरण का मार्ग बताया है। उक्त विचार विवेकानन्द केन्द्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता दीपक खैरे ने विवेकानन्द शिला स्मारक के 50 वें वर्ष के अवसर पर मयूर स्कूल में आयोजित विद्यार्थी संपर्क कार्यशाला के दौरान व्यक्त किए। नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने बताया कि विद्यालय के प्राचार्य अधिराज सिंह से भेंट कर विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक एकनाथ रानडे के जीवन एवं शिला स्मारक की विजयगाथा के बारे में भी बताया गया। विवेकानन्द केन्द्र के रविन्द्र जैन, कुसुम गौतम, बीना रानी, अंकुर प्रजापति, कुलदीप कुमावत तथा मयूर स्कूल से सिंधु चतुर्वेदी, रसल एन्थोनी, शीलू रामचंदानी तथा करूणा टण्डन का सहयोग रहा।

एचएमटी में जीवन कार्य संतुलन पर व्याख्यान का आयोजन

दिन के सफल नियोजन से ही सफल जीवन संभव - विवेकानन्द केन्द्र कर रहा है संपर्क कार्यक्रम में योग द्वारा जनजागरण

जीवन में सफलता अर्जित करने के लिए प्रत्येक पल महत्वपूर्ण है। समय के पूर्ण नियोजन से ही सबकुछ प्राप्त हो सकता है। विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक एकनाथ रानडे के जीवन को देखते हुए जब हम नियोजन की बात करते हैं तो यह नियोजन इस रूप में हो कि जैसे हम कभी मरने वाले ही नहीं है किंतु जब इस पर क्रियान्वयन की बात आए तब ऐसा भाव हो कि हमारे पास केवल एक ही दिन है और वह है आज। प्रत्येक घंटे के अंतराल पर नियोजन का पुनरावलोकन भी बहुत आवश्यक है। स्वामी विवेकानन्द कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता असीमित होती है लेकिन उसे पहचानना कठिन होता है। अपनी क्षमताओं की तुलना जब दूसरों होने लगती है तब हम कमजोर हो जाते हैं जबकि यह बात वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुकी है कि कठिनतम परिस्थितियों में भी व्यक्ति अपनी विलक्षण क्षमताओं का परिचय देता है किंतु यदि हम मुसीबत से घबरा जाते हैं तब वह क्षमता भी विलुप्त हो जाती है। जीवन की श्रेष्ठता के लिए कुछ बातों को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिन में सर्वप्रथम प्रातःकाल उठकर योग प्राणायाम इत्यादि करना तथा उसके बाद अपने स्वयं को अपडेट करना। जीवन में निरंतर संवाद चलता रहना चाहिए जिससे हम अपने व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का प्रगटन कर सकें। उक्त विचार विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता दीपक खैरे ने हिंदुस्तान मशीन टूल्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम में जीवन कार्य संतुलन विषय पर प्रकट किए। वे विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के शिला स्मारक के 50 वर्ष के अवसर केन्द्र की अजमेर शाखा द्वारा आयोजित  संपर्क कार्यक्रम के तहत अपना संबोधन दे रहे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एचएमटी के जनरल मैनेजर श्री नवीन जी गोखरू ने की। उन्होंने विवेकानंद केंद्र द्वारा किए जा रहे कार्य की आवश्यकता तथा स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं के समाज में प्रचार और उनसे युवाओं को प्राप्त प्रेरणा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने हेतु इंगित किया। नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने विवेकानंद केंद्र द्वारा किए जा रहे कार्यों की संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभाग संपर्क प्रमुख रविंद्र कुमार जैन, युवा प्रमुख अंकुर प्रजापति तथा कार्यालय प्रमुख कुलदीप कुमावत भी उपस्थित थे।

Tuesday, December 17, 2019

विवेकानंद केंद्र अजमेर द्वारा एक दिवसीय युवा सम्मेलन का आयोजन

अध्यात्मा प्रेरित सेवा संगठन विवेकानंद केंद्र द्वारा अजमेर के जियालाल टीटी कॉलेज में उठो जागो युवा प्रतियोगिता के आयोजन के दूसरे चरण में एक दिवसीय युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने बताया कि इस युवा सम्मेलन में 80 युवक-युवतियों ने सहभागिता की। सम्मेलन के दौरान क्रीडा योग में घूमता किला तथा हाथी घोड़ा पालकी खेल खिलाए गए ।  युवाओं को समूह चर्चा हेतु विषय दिया गया क्या अकेला चना भाड़ फोड़ सकता है और इस विषय पर समूह चर्चा करते हुए विभिन्न समूहों ने अपना प्रेजेंटेशन दिया । राष्ट्रीय कार्य के लिए एक जीवन एक ध्येय की आवश्यकता होती है और इसी पर आधारित विवेकानंद केंद्र के संस्थापक माननीय एकनाथजी रानडे के जीवन और चरित्र से जुड़े हुए प्रसंगों पर आधारित प्रेजेंटेशन विद्यार्थियों द्वारा किए गए । विभाग सह संचालक कुसुम गौतम ने बताया कि आज युवाओं को अच्छे संस्कार तथा साथ ही अध्यात्म आधारित विकास की संकल्पना समझने की महती आवश्यकता है अपने जीवन मूल्यों को स्थापित करने के लिए जिस प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है वह प्रशिक्षण विवेकानंद केंद्र अपने व्यक्तित्व विकास शिविरों के माध्यम से युवाओ को देने का प्रयास केंद्र कर रहा है  । युवा प्रमुख अंकुर प्रजापति ने आगामी 8 से 12 नवंबर को जोधपुर में आयोजित होने वाले आवासीय उठो जागो युवा प्रेरणा शिविर के पंजीकरण हेतु आह्वान किया जिसमें से 20 विद्यार्थियों ने पंजीकरण की स्वीकृति प्रदान की है । ध्यातव्य है कि पूर्व में क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान से पहले ही 30 विद्यार्थियों के रजिस्ट्रेशन शिविर हेतु हो चुके हैं युवा सम्मेलन में केंद्र के शिक्षा संस्कार प्रकल्प की कार्यकर्ता शेफाली सांखला ने भी सहयोग किया । युवा सम्मेलन के अंत में विवेकानंद केंद्र द्वारा सभी विद्यार्थियों को उठो जागो युवा प्रतियोगिता के सर्टिफिकेट बांटे गए ।

Thursday, June 6, 2019

योग सत्र - अजमेर

दिनांक 31-मई को पुराना छतरी योजना उद्यान, अजमेर में चल रहे विवेकानन्द केन्द्र के योग सत्र का समापन हुआ। आज अधिकांश व्यक्ति युवाअवस्था में ही हाइपरटेंशन, मधुमेह, कमरदर्द, हृदयरोगों से ग्रस्त होता जा रहे हैं। रोगों पर हुए आधुनिक शोधों से यह सिद्ध हो चुका है कि ये सभी साइकोसोमेटिक रोगों की श्रेणी में आते हैं जिनसे मुक्ति केवल योग द्वारा ही संभव है। विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी का आवर्तन ध्यान शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर मनुष्य के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करता है तथा उसे राष्ट्र पुनरूत्थान के लिए तैयार करता है। उक्त विचार अखिल भारतीय सर्जन एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के रामकृष्ण विस्तार संचालक डाॅ0 श्याम भूतड़ा ने वैशाली नगर स्थित पुराना छतरी योजना उद्यान में दस दिवसीय योग एवं प्राणायाम प्रशिक्षण सत्र के समापन पर व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ0 स्वतन्त्र शर्मा ने सभी उपस्थित साधकों को ‘मेरा योग वर्ग मेरा स्वर्ग’ का संकल्प कराते हुए पुराने छतरी योजना उद्यान में निःशुल्क नियमित योग वर्ग की नींव रखी। 

विस्तार प्रमुख कुशल उपाध्याय ने बताया कि योग सत्र में साधकों को कमर, पीठ व गर्दन के दर्द से मुक्ति तो मिली ही है साथ ही अच्छी नींद, मानसिक तनाव से मुक्ति, भूख खुलकर आना, शरीर में हलकापन, दिनभर ताज़गी, प्रसन्नता एवं चुस्ती बने रहना जैसे अनुभव हुए हैं। सत्र के समापन पर बीना कासलीवाल, अतुल जैन, मोहिनी इसरानी, नीलू अग्रवाल, नुपुर जैन, सीमा जैन, रिद्धिमा, मीना दोषी, सुधा बोहरा, चिराग आदि ने अपने अनुभव साझा किए। सत्र का संचालन राकेश शर्मा, लक्ष्मीचंद मीणा, राखी वर्मा व मनोज बीजावत ने किया। सुनील गर्ग ने विवेकानन्द केन्द्र का आभार जताते हुए बताया कि पुराना छतरी योजना उद्यान में 1 जून से प्रातः 5.30 बजे से  6.30 बजे तक नियमित निःशुल्क योग कक्षा प्रारंभ की जा रही है।

प्रचार प्रमुख भारत भार्गव ने बताया कि विवेकानन्द केन्द्र का अगला योग सत्र 1 जून से लादूराम अग्रवाल धर्मशाला, नसीराबाद में आयोजित किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे कार्यालय (पता : "एकाक्षरं", 226-A/28, शिव मंदिर के पास, नई बस्ती, भजन गूंज, अजमेर-305001), दूरभाष 0145-2666042 / 9414259410 अथवा  ईमेल ajmer@vkendra.org पर  संपर्क  करे।

Thursday, February 21, 2019

अजमेर में योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर आयोजन

संपूर्ण राजस्थान में योग की अलख जगाने के लिए विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की अजमेर शाखा आगामी जून माह तक योग वर्ग साधकों को विशेष प्रशिक्षण देने हेतु रविवार को प्रेम प्रकाश आश्रम आदर्श नगर अजमेर में योग शिक्षक वर्ग प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया

कार्यशाला का मंतव्य स्पष्ट करते हुए प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ स्वतंत्र शर्मा ने बताया  कि  प्रशिक्षण वर्ग में योग के सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण की बारीकियां मंत्र प्रार्थना गीत क्रीड़ा योग प्राणायाम सूर्य नमस्कार आसन सूक्ष्म व्यायाम आदि का गहनता से प्रशिक्षण प्रदान किया गया । इस अवसर पर  शरीर रचना विज्ञान का प्रशिक्षण  प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ भरत सिंह गहलोत द्वारा प्रदान किया गया।

  इसके साथ ही  अष्टांग योग दर्शन एवं धर्म चक्र पंचमहाभूत यज्ञ एवं पंचकोशी विकास की अवधारणा को स्पष्ट किया गया।



डॉ शर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में सह प्रांत प्रमुख अविनाश शर्मा ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा  की  प्रत्येक जन को योग से जोड़ना एवं अधिक से अधिक योग सत्रों का आयोजन करना  ही इस प्रशिक्षण सत्र की  सार्थकता होगी ।



इस अवसर पर बोलते हुए प्रांत संगठक प्रांजलि येरिकर ने योग की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए बताया कि व्यक्ति को समाज से जोड़ना और उसे राष्ट्र कार्य में प्रेरित करना ही योग का चरम लक्ष्य है इस संकल्पना को स्पष्ट करते हुए ही हमें प्रत्येक योग सत्र का संचालन करना चाहिए



 इस प्रशिक्षण कार्यशाला में  अजमेर किशनगढ़  ब्यावर तथा भीलवाड़ा  से विवेकानंद केंद्र के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया कार्यक्रम के संचालन में नगर प्रमुख रविंद्र जैन सह नगर प्रमुख अखिल शर्मा व्यवस्था प्रमुख नितिन गोयल श्रीपाल खोजा कुलदीप कुमावत आदि का सहयोग रहा

Tuesday, January 22, 2019

भारत जागो विश्व जगाओ के नारों के साथ हुआ युवा शंखनाद रैली का शुभारंभ

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा अजमेर की ओर से आज शनिवार 12 जनवरी 2019 को स्वामी  विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर युवा शंखनाद रैली का आयोजन किया गया। नगर प्रमुख रविंद्र कुमार जैन ने बताया कि रैली का शुभारंभ गांधी भवन से किया गया । रैली में महाविद्यालयों विभिन्न विद्यालयों के युवाओं व विद्यार्थियों के साथ साथ सामाजिक संगठनों तथा विवेकानंद केंद्र अजमेर के कार्यकर्ताओं ने अपनी सहभागिता निभाई ।  रैली में युवाओं ए विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा स्वामी जी के अनमोल वचन लिखी हुई तख्तियां और बैनर के साथ  कौन चले कौन चले स्वामी जी के वीर चलेए भारत जागो विश्व जगाओए दाल बाटी चूरमा हम भारत के सूरमाए नारे लगते हुए शहर के प्रमुख मार्गो मदार गेट चूड़ी बाजार नया बाजार से आगरा गेट होती हुई बजरंगगढ़ चौराहा पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गई । सभा को संबोधित करते हुए केंद्र भारती के सह संपादक उमेश चौरसिया ने राष्ट्रीय युवा दिवसए  स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि वेदांत के विख्याता और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरुए युवाओं के प्रेरणा स्रोतए संपूर्ण भारतवर्ष के गौरव विवेकानंद जी के आदर्शों पर चलकर ही हम मनुष्य निर्माण और अपने देश का पुनरुद्धार कर सकता हैं । उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन की प्रेरणादाई बातों को कहानियों के रूप में उपस्थित जनसमूह को बताया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने बजरंगगढ़ चौराहे पर भारत माता के चित्र पर दीपदान किया । बजरंगगढ़ चौराहे पर विवेकानंद केंद्र अजमेर द्वारा लगाए गए स्वामीजी का चित्र सेल्फी के लिऐ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

Saturday, December 22, 2018

Yog Sangam Ajmer

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा अजमेर के रामकृष्ण विस्तार एवं विवेकानंद विस्तार में संचालित किए जा रहे योग वर्गों के साधकों का योग संगम रविवार प्रातः 7.30 बजे सुभाष उद्यान के योग पार्क में किया गया।
योग संगम की शुरुआत उद्यान परिक्रमा से हुई जिसमें बस्ती-बस्ती जाएंगे, सबको योग सिखाएंगे, योग करो-निरोग रहो जैसे नारों के साथ आमजन को योग हेतु प्रेरित किया गया। योग संगम में योगाभ्यास के अंतर्गत शिथिलीकरण व्यायाम के उपरांत सूर्य नमस्कार, शिथलीकरण व्यायाम तथा अर्धकटिचक्रासन, पादहस्तासन एवं अर्ध चक्रआसन का अभ्यास कराया गया।

क्रीड़ा योग के तहत ‘‘हम तो सीताराम कहेंगे’’, अष्टांग योग-दर्शन तथा पेंडुलम खेल खिलाये गये। इसके साथ ही एक्शन सॉन्ग में ‘‘मैं संगीतकार हूं’’ का आयोजन भी किया गया।

अजमेर योग संगम में चर्चा सत्र लेते हुए प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. स्वतंत्र शर्मा ने बताया के अजमेर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित किए जा रहे योग वर्गों के साधकों का संगम प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को सुभाष उद्यान में किए जाने का निश्चय किया गया है तथा इस योग संगम के माध्यम से जन-जन को योग के प्रति जागरुक करना तथा नए योग साधकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। डाॅ. शर्मा ने आगामी 18 दिसंबर को गीता जयंती के अवसर पर प्रत्येक योग वर्ग में भगवान कृष्ण के गीता में दिए योग के उपदेशों पर आधे घंटे का स्वाध्याय करने का भी आह्वान किया।

Wednesday, July 4, 2018

International Yoga Day Ajmer

1100 लोगों के साथ 14 स्थानों पर हुआ योग

अजमेर ! अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की स्थानीय शाखा द्वारा विभिन्न संस्थानों के सहयोग से 14 स्थानों पर योगाभ्यास के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिनमें 1100 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। मुख्य आयोजन क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान अजमेर में आयोजित किया गया जिसमें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा राज्य मंत्री श्री वासुदेव देवनानी थे तथा आदर्श नगर के विवेकानन्द विस्तार में मुख्य अतिथि महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल थीं। नगर प्रमुख रविन्द्र जैन ने बताया कि मुख्य आयोजन में 250 बच्चों द्वारा सामूहिक सूर्यनमस्कार का आयोजन किया गया। शहीद भगत सिंह उद्यान वैशाली नगर, सी ए फाउण्डेशन कोटड़ा, राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान, तबीजी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, भारत संचार निगम लि. कार्यालय, वाणिज्य कर विभाग, राजकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय, बैंक ऑफ बड़ौदा, वैशाली नगर मुख्य शाखा में विवेकानन्द केन्द्र के कार्यकर्ताओं द्वारा योगाभ्यास कराया गया। श्री जैन ने बताया कि कार्यक्रमों के आयोजन में तन्मय शर्मा, नाथूलाल जैन, रिचा शर्मा, संजीव जैन, विनीत जैन, लक्ष्मी चंद मीणा, डॉ. भरत सिंह गहलोत, डॉ. श्याम भूतड़ा, मनोज बीजावत एवं कुशल उपाध्याय का सहयोग रहा।

Tuesday, June 26, 2018

अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग अभ्यास क्रम का विमोचन अजमेर

स्वामी विवेकानन्द ने योग एवं वेदांत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया तथा अपने दर्शन के माध्यम से मुक्ति के चार मार्ग कर्म, ज्ञान, भक्ति एवं राजयोग का संपूर्ण मानव जाति को संदेश दिया।  योग से केवल शारीरिक ही नहीं मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास संभव है। विवेकानन्द केन्द्र विगत 46 वर्षों से योग के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक माननीय एकनाथजी रानडे ने योग को विवेकानन्द केन्द्र का प्राण स्वर कहा है। यह भी सुखद संयोग ही है कि एकनाथजी के जन्मशताब्दी वर्ष में ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा की गई थी। उक्त विचार शिक्षा राज्य मंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर तैयार किए गए योग अभ्यास क्रम फोल्डर के विमोचन के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों को योग अभ्यास का उचित क्रम बताने में यह फोल्डर उपयोगी सिद्ध होगा।

केन्द्र के नगर प्रमुख रविन्द्र जैन ने बताया कि विमोचन के अवसर पर विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के प्राचार्य प्रो. जी. विश्वनाथप्पा थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादमी राजस्थान के सदस्य उमेश कुमार चौरसिया  ने की। इस अवसर पर केन्द्र के प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा, सह नगर प्रमुख अखिल शर्मा, योग प्रमुख अंकुर प्रजापति, व्यवस्था प्रमुख नितिन गोयल, लक्ष्मीचंद मीणा, राकेश शर्मा, अमरेन्द्र त्रिपाठी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। जैन ने बताया कि योग दिवस के अवसर पर यह अभ्यासक्रम सभी योग साधकों को निःशुल्क दिया जा रहा है।

YOGA PRASHIKSHAN SATRA

अजमेर ! उत्साह, साहस, धैर्य, तत्वज्ञान एवं दृढ़निश्चय योग के साधक तत्व माने गए हैं और इनसे ही योग की साधना संभव है। आलस्य, व्याधि, संशय, प्रमाद, अविरति, भ्रांति दर्शन ये सभी योग के विक्षेप कहे जाते हैं। यदि योग साधक दीर्घकाल तक निरंतरता के साथ एवं श्रद्धापूर्वक योगाभ्यास हेतु तत्पर होता है तभी उसका अभ्यास दृढ़ हो सकता है तथा इसी से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास संभव है। उक्त विचार भारत सरकार के आयुष मंत्रालय एवं योग गुणवत्ता परिषद् से मान्यता प्राप्त योग शिक्षक एवं विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी राजस्थान प्रान्त के प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ. स्वतन्त्र शर्मा द्वारा नसीराबाद रोड स्थित मनुहार समारोह स्थल पर योग प्रशिक्षण देते हुए प्रकट किए। डाॅ. शर्मा ने योग साधकों को कब्ज के निराकरण के लिए विशेष क्रियाओं की जानकारी दी तथा शिथिलीकरण के अभ्यासों के साथ विश्राम की आई आर टी एवं डी आर टी विधि का भी अभ्यास कराया।

युवा मैथिल ब्राह्मण जागृति मंच अजमेर के आलोक मिश्रा ने बताया कि योग प्रशिक्षण के लिए सेवा राम चैहान द्वारा मनुहार समारोह स्थल निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है। 

Saturday, June 23, 2018

Sanskaar Varga Prashikshan Shibir - Ajmer

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी एक आध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन है जो अपनी विशिष्ठ कार्यपद्धति योग, स्वाध्याय और संस्कार के माध्यम से ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान’ के कार्य में अपनी 874 शाखाओं के साथ अखिल भारतीय स्तर पर सक्रिय रुप से विगत 46 वर्ष से कार्य कर रहा है। विवेकानन्द केन्द्र की स्थापना माननीय एकनाथ जी रानडे ने 1972 में की जो कन्याकुमारी में स्थित श्रीपाद शिला पर विवेकानन्द शिला स्मारक निर्माण होने के पश्चात् विकास का दूसरा चरण है।

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी अजमेर विभाग द्वारा 10 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के बालक और बालिकाओं के लिए संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर 22 मई से 27 मई तक शहीद अविनाश माहेश्वरी आदर्श विद्या निकेतन भगवान गंज अजमेर में आयोजित किया गया। इस शिविर में कुल 116 छात्र छात्राओं में अपना पंजीकरण कराया तथा इस शिविर के संचालन में 26 कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से सहयोग किया।

शिविरार्थियों में किशनगढ,़ ब्यावर, नसीराबाद तथा अजमेर के भैया और बहन सम्मिलित हुए।

दिनांक 22 मई को सांय 7.00 बजे से भजन संध्या के साथ ही शिविर का प्रारंभ हुआ। उसके पश्चात परिचय सत्र में शिविरार्थियों एवं शिविर कार्यकर्ताओं का आपस में परिचय हुआ। परिचय के तुरंत बाद ही सभी विद्यार्थियों को विभिन्न गणों में बांट दिया गया। भाईयों के गणों के नाम नचिकेता, आरूणी, उपमन्यु, सत्यकाम रखे गए तथा बहनों के गण मैत्रेयी तथा गार्गी थे। प्रतिभागियों ने रात्रिकालीन ‘प्रेरणा से पुनरुत्थान’ सत्र में खेलों का आनंद लिया। 23 तारीख की प्रातः 4.45 पर शिविरार्थियों के जागरण के साथ ही प्रतिदिन की दैनिक दिनचर्या सुनिश्चित कर दी गई। इस दिन चर्या में प्रातः 5.30 बजे प्रातः स्मरण में आदि शंकराचार्य विरचित प्रातः स्मरण श्लोक, ऐक्य मंत्र का अभ्यास कराना और उसके पश्चात 6.00 बजे से 7.00 बजे तक प्रतिदिन योगाभ्यास, सूर्य नमस्कार, व्यायाम आदि और उसके उपरांत प्रतिदिन 7.00 बजे से 7.30 बजे तक बच्चों में परीक्षा के भय को दूर करने के लिए परीक्षा दे हंसते-हंसते योग प्रतिमान का आयोजन सम्मिलित था। इसके उपरांत प्रतिदिन गीता पठन के अभ्यास के साथ ही बच्चों 7.45 से 8.30 बजे तक अल्पाहार का समय रहता था।

अल्पाहार के उपरांत  8.30 बजे से 9.15 बजे तक श्रम संस्कार के समय बच्चे इस पूरे परिसर में मैदान, काॅरीडोर, अपने कमरों, स्नानागार एवं टॉयलेट आदि सब जगह साफ-सफाई करते और उसके पश्चात श्रम परिहार अर्थात स्नान इत्यादि करते थे।

प्रातः 10 बजे एवं सांय 4.15 पर दो बौद्धिक सत्रों का आयोजन किया जाता था। प्रातः 11 बजे सत्र समाप्ति के साथ ही मंथन सत्र एवं प्रस्तुतिकरण होता। भोजनोपरांत रचनात्मक सत्र के तहत बच्चों ने वैदिक गणित का अभ्यास श्रीमती पूजा गोयल एवं साक्षी चैहान के सान्निध्य में सीखा। सांयकालीन अल्पाहार के उपरांत शिविरार्थी संस्कार वर्ग में खेलों का आनन्द लेते जिनमें अनेक नए खेलों को बच्चों ने खेलना सीखा। समूह खेलों में मेंढक दौड़, सुरंग दौड, स्कंध युद्ध, फलों का राजा, भाई तुम कौन, टैंक युद्ध, हर हर महादेव, घूमता किला, मतीरे की फांक, डमरू दौड़, चंदन जैसे खेलों का आयोजन किया जाता और फिर 7.00 बजे भजन संध्या के पश्चात् रात्रिकालीन भोजन कराया जाता था। भोजनोपरांत प्रेरणा से पुनरूत्थान सत्र में प्रेरक जीवन एवं अनुभवों पर आधारित चलचित्रों एवं बौद्धिक खेलों के माध्यम से ज्ञानवर्द्धन व क्षमतावर्द्धन का प्रयास किया जाता था। रात्रि 9.30 पर हनुमान चालीसा के उपरांत दिनभर के किए कार्यों का आत्मावलोकन होता एवं उसके पश्चात् डायरी लेखन करके रात्रि 10.00 बजे निशास्वस्ति की जाती।

दिनांक 23 मई को प्रातः 10.15 बजे शिविर का औपचारिक उद्घाटन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि अजमेर के मेयर श्री धर्मेंद्र गहलोत तथा कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विद्या भारती संगठन के प्रांत अध्यक्ष श्री राम प्रकाश जी बंसल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवेकानंद केंद्र के केंद्र भारती मासिक पत्रिका के सह संपादक श्री उमेश जी चैरसिया ने की।

उद्घाटन सत्र में महापौर जी ने बच्चों को संस्कारवान होने की प्रेरणा दी तथा बताया कि विवेकानंद केंद्र ने जो यह प्रयास किया है इससे हमें एक साथ खाने पीने सोने उठने और साथ रहने का अवसर प्राप्त होगा तथा हम अत्याधुनिक सुविधाओं से दूर रहकर एक ऋषि परंपरा और गुरुकुल परंपरा का पालन करते हुए अपने ये पांच दिन अपने जीवन के एक नए अध्याय के रूप में जोड़ेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को धैर्यपूर्वक इस शिविर में सुविधा और असुविधा के साथ तालमेल बिठाते हुए अच्छे से अच्छा सीखने का प्रयास करने की शिक्षा दी। विशिष्ट अतिथि श्री रामप्रकाश जी बंसल ने कहा कि संस्कार क्या है, उसे स्वीकार करना तथा समझना क्योंकि आज के समय की व्यस्त दिनचर्या, पाठ्यक्रम पूरा कराने की व्यस्तता तथा गृह कार्य आदि के कारण माता-पिता, गुरु जन संस्कार निर्माण पर उतना समय नहीं दे पाते हैं। अतः शिविर के दिनों में हमें कई कार्यों को करने से रोका-टोका जाएगा और कई कार्यो को करने के लिए कहा जाएगा। हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए जो सिखाया जाए उसे सीखना चाहिए तथा वह जीवन में उतार कर जाएं। श्री बंसल ने बच्चों को इस कठिन तप के लिए अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया। श्री उमेश जी चैरसिया के अध्यक्षीय उद्बोधन एवं आभार ज्ञापन के साथ ही उद्घाटन सत्र संपन्न हुआ।

उद्घाटन सत्र के पश्चात् राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के योग शिक्षक श्री महबूब हुसैन ने बच्चों को व्यक्तित्व विकास की भारतीय संकल्पना पर आधारित वेद, वेदांत, उपनिषद और भारतीय संस्कृति के मूल में छिपे हुए गुणों को बहुत व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करते हुए बच्चों का मार्ग दर्शन किया। अपनी संगीत कला से खेल खेल में ही श्री हुसैन ने बच्चों को मंत्रों का सही उच्चारण एवं अर्थ भी समझाया। अपरान्ह् के सत्र में  विभाग सह संचालक श्रीमती कुसुम गौतम ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और संदेश को उनके प्रेरणादायक प्रसंगों से  बच्चों को लाभान्वित किया। 24 मई को प्रथम सत्र विवेकानंद केंद्र की प्रांत संगठक सुश्री प्रांजलि येरिकर ने संस्कार वर्ग के महत्व के विषय में लिया जिसमें उन्होंने बताया कि आज भारत में राष्ट्र का चिंतन करने वाली पीढ़ी की आवश्यकता है। जहाँ आज का विद्यार्थी केवल अपने कैरियर और अर्थ का चिंतन करने में लगा है वहीं प्राचीन भारत में धर्म को ही अर्थ और काम का आधार बताया गया है। जीवन को धर्माधारित जीने का एक मात्र आधार संस्कार वर्ग है। हमारे देश में भगवान कृष्ण, समर्थ गुरू रामदास, शिवाजी महाराज जैसे उच्च चरित्रवान महापुरूषों ने समाज को संस्कारित करने का कार्य किया है। श्रीकृष्ण की गोपमण्डली, समर्थ रामदास के मठ, प्रवचन और व्यायामशालाएं ये सभी राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण का स्थल थे। आज बच्चों को इस बारे में जानना चाहिए और इसके लिए संस्कार वर्गों के प्रशिक्षण शिविरों की आवश्यकता है।

सांयकालीन सत्र में केन्द्र के सह नगर प्रमुख अखिल शर्मा ने आदर्श दिनचर्या विषय पर बच्चों से संवाद किया और उन्हें आदर्श दिनचर्या के विषय में बताया।

25 मई को विवेकानंद केंद्र की कार्यालय प्रमुख बीना रानी जी ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।  इसी दिन द्वितीय सत्र में विवेकानंद केंद्र के रामकृष्ण विस्तार के विस्तार संचालक एवं जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय अजमेर के वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉक्टर श्याम जी भूतड़ा ने बच्चों से संवाद किया। उन्होंने बताया कि विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक एकनाथ रानडे ने कार्यकर्ताओं को जीवन का एक मात्र सूत्र जो दिया वह था समय पालन। स्वामी विवेकानन्द के राष्ट्रीय स्मारक के निर्माण का उत्तरदायित्व जब एकनाथजी के कंधों पर आया तब उन्होंने न केवल उसे समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया अपितु स्वामी विवेकानन्द के जीवन्त स्मारक विवेकानन्द केन्द्र की स्थापना कर पूरे भारत में उसकी शाखाएं खोलने का बीड़ा उठाया। एक जीवन एक ध्येय का मंत्र साकार करते हुए उन्होंने साधारण जीवन जीते हुए भी असाधारण कार्य कर दिया। उन्होंने बच्चों को एकनाथ जी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को सुनाते हुए उनकी निडरता, समय बद्धता, कार्यकुशलता, आज्ञापालन एवं कार्य को पूर्ण कुशलता से करने के गुणों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एकनाथ जी रानडे के बचपन के संस्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने साथ जुड़े लोगों से आत्मीय संबंध बनाते हुए उनके मनोभावों को बदलने की क्षमता भी रखते थे।

अगले दिन 26 मई को विवेकानंद केंद्र के केंद्र भारती के सह संपादक उमेश कुमार चैरसिया ने भारत भक्ति विषय पर प्रथम सत्र लिया जिसमें उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में उत्कृष्टता का मानदण्ड निर्धारित करने वाले कारक चरित्र व्यवहार और संस्कार ही होते हैं। हम चाहे अच्छे वकील, डाॅक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बन जाएं किंतु इस भारत भूमि का कर्ज उसी प्रकार नहीं भूलना चाहिए जैसे एक बेटा अपने माँ के ऋण से उऋण नहीं हो सकता। स्वामी विवेकानन्द ने अपने जीवन के द्वारा भारत से प्रेम, भारत की सेवा और भारत की आराधना करने का उद्घोष किया। स्वामी विवेकानन्द के उक्त विचारों से ही प्रेरित होकर भारत को बालगंगाधर तिलक, सुभाष चन्द्र बोस, ए.पी.जे अब्दुल कलाम और एकनाथ रानडे जैसे महापुरूष मिले जिन्होंने अपने महान कार्यों द्वारा भारत माँ का सच्चा सपूत होने का कर्ज अदा किया। आज हमारे विद्यार्थी जीवन में स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं को मूर्त रूप देने का जरिया अपने मोहल्ले का संस्कार वर्ग बन सकता है जिससे घर घर में संस्कारों का बीजारोपण हो सकगा और हमें इसके लिए पूर्ण प्रयत्नशील रहना होगा। द्वितीय सत्र में निखिल शर्मा द्वारा राजस्थान के गौरवमयी इतिहास परंपरा का यशोगान से शिविरार्थियों को परिचय कराया। इसी दिन प्रेरणा से पुनरूत्थान में केन्द्र कार्यकर्ता डाॅ0 भरत सिंह गहलोत द्वारा शिविरार्थियों को सामान्य स्वास्थ्य एवं उसकी जाग्रति हेतु बहुत ही रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

आज 27 मई को बच्चों द्वारा प्रातः 51 सूर्यनमस्कारों का अभ्यास किया गया तथा इसके उपरांत आहूति सत्र का आयोजन जगदीश भैया ने लिया जिसमें उन्होंने बच्चों को अपने मौहल्लों में संस्कार वर्ग खड़े करने के तरीकों तथा नए भैया व बहनों में संस्कारों के निरूपण पर चर्चा की।

नए संस्कार वर्गों के गठन एवं पुराने संस्कार वर्गों के दृढ़ीकरण के लिए आयोजित बैठक का आयोजन जगदीश टवरानी के मार्गदर्शन में हुआ।

अपरान्ह् 11 बजे से शिविर का समापन समारोह आरंभ हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के कुलपति प्रो0 विजय श्रीमाली थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध उद्योगपति एवं मोटिवेशनल स्पीकर श्री राधे एस चोयल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर प्रमुख रविन्द्र जैन ने की। समापन समारोह से पूर्व कुलपति महोदय ने शिविरार्थियों द्वारा शिविर में बनाई गई पेंटिंग्स का अवलोकन किया। समारोह की प्रारंभिक औपचारिकताओं के साथ ही कुलपति जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कार निर्माण का कार्य केवल पांच दिन के शिविर तक सीमित न रहे बल्कि यह एक अनवरत प्रक्रिया के रूप में चलता रहे। प्रत्येक भारतीय को हिन्दू होने पर गर्व होना चाहिए तथा समाज को उन्नत बनाने की दिशा में प्रत्येक कार्यकर्ता को निष्काम भाव से अपने धर्म और समाज की सेवा करनी चाहिए। विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी एक राष्ट्रीय स्मारक है और यही वह केन्द्र है जिसकी ऊर्जा भारत के प्रत्येक कोने में प्रवाहित होती है। प्रत्येक भारतीय का यह कर्तव्य होना चाहिए कि एक बार कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द शिला के दर्शन अवश्य करके आए। विवेकानन्द केन्द्र के संस्कार वर्ग प्रशिक्षण में भाग लेने वाला प्रत्येक बालक विचारवान है। उन्होंने शिविरार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का अवलोकन करते हुए कहा कि पर्यावरण पर काफी चित्रों का निर्माण बच्चों ने किया है किंतु पर्यावरण के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी व्यक्त होगी जब हम पेड़ लगाएं और उनकी देखभाल करें। प्रो. श्रीमाली ने अपने बचपन में विद्यालय के अनुभव साझा करते हुए गुरू गोविंद सिंह के जीवन से जुड़ी घटनाओं से जुड़े गीत गाकर शिविरार्थियों को सुनाए।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्योगपति एवं मोटिवेशनल स्पीकर राधे एस चोयल ने बच्चों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारे माता पिता के चरणों में स्वर्ग होता है। शिविर में बच्चों को मंत्र सिखाए गए हैं क्योंकि मंत्रों से मस्तिष्क को साधा जा सकता है और इससे शक्ति का संचार होता है। शक्ति के कारण ही आत्मविश्वास प्रबल होता है किंतु अतिआत्मविश्वास से हमें बचना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामथ्र्य से बढ़कर देने का भाव रखना चाहिए तथा बच्चों को अपने देश के खिलाफ कुछ भी न सुन सकने की क्षमता पैदा करनी चाहिए।

इससे पूर्व शिविर प्रमुख लाजवंती भारद्वाज ने शिविर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। शिविर अधिकारी नितिन गोयल ने बताया कि समापन समारोह में शिविरार्थियों द्वारा भजन, सूर्यनमस्कार, संस्कार वर्ग चलें, वैदिक गणित तथा गीता पठन की प्रस्तुतियाँ दी गईं। शिविरार्थी लक्षित यादव, हेमेन्द्र, जितेन्द्र, ऋषि खारोल, अंजलि तथा लक्षिता ने अपने अनुभव साझा किए।

श्री गोयल ने बताया कि समापन समारोह के अवसर पर नगर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे जिनमें क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के प्राचार्य प्रो0 जी विश्वनाथप्पा, डीन शिक्षा प्रो. नागेन्द्र सिंह, डाॅ. बी एस गहलोत, विद्या भारती संगठन के प्रान्त अध्यक्ष राम प्रकाश बन्सल, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक रैफरी डाॅ. अतुल दुबे, विश्वविद्यालय के योग शिक्षक डाॅ. लारा शर्मा, साहित्य अकादमी के सदस्य उमेश कुमार चैरसिया, विवेकानन्द केन्द्र की विभाग सह संचालक कुसुम गौतम, कुशल उपाध्याय, मनोज बीजावत सहित सभी कार्यकर्ता भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रान्त प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ. स्वतन्त्र कुमार शर्मा ने किया।

समारोह के उपरांत सभी शिविरार्थियों, अतिथियों, अभिभावकों एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक भोज का आनन्द लिया। इसके उपरांत सिंहावलोकन बैठक के उपरांत सभी कार्यकर्ता एवं शिविरार्थी अपने अपने नगरों को रवाना हो गए।

Tuesday, December 19, 2017

विवेकानन्द केन्द्र द्वारा एकनाथजी फिल्म का क्रिस्टल पार्क में प्रदर्शन

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा-भागलपुर द्वारा दिनाँक 26 नवम्बर  को सुन्दरवती महिला महाविद्यालय में युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी कुल उपस्थिति 40 रही | दिनाँक 27 नवम्बर  को भागलपुर विभाग के नौगछिया जिले के गौरीपुर सत्यदेव महाविद्यालय में युवा सम्मेलन सम्पन्न हुआ जिसकी कुल उपस्थिति 30 रही...! दिनाँक 28 नवम्बर  को भागलपुर विभाग के मुंगेर केन्द्र द्वारा 2 स्थानों GRS कॉलेज मुंगेर और BRM कॉलेज में युवा सम्मेलन का आयोजन किया जिसकी कुल उपास्थिति 70 रही!

किशनगढ़ । आज विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे सेवा कार्य जहां स्वार्थ पर आधारित हैं वही हिंदू धर्म विश्व में एकमात्र ऐसा माध्यम है जो निस्वार्थ भाव से सेवा करता है तथा जिसका मूलमंत्र ही सर्वे भवन्तु सुखिनः है। स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका में वेदांत को बहुत साधारण शब्दों में समझाते हुए कहा था कि नर सेवा ही नारायण सेवा होती है। भारत में रंतिदेव, स्वामी अखंडानंद और ऐसे अनेकों संतों ने अपने जीवन को सेवा के लिए समर्पित कर दिया। एकनाथ जी स्वामी विवेकानंद के हनुमान कहे जाते हैं। एकनाथ जी के जीवन पर आधारित फिल्म केवल मनोरंजन करने का साधन नहीं है अपितु कार्य में जुट जाने की प्रेरणा लेने के संकल्प का माध्यम है। आज किशनगढ़ नगर का यह सौभाग्य है कि जिस नगर ने स्वामी विवेकानंद की चरण धूलि प्राप्त की थी वहीं आज उनके नाम पर बने कन्याकुमारी में शिला स्मारक के निर्माता एकनाथ जी के जीवन का चित्रण यहां किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद युवाओं का आव्हान करते हुए कहते थे कि आगामी 50 वर्षों के लिए यदि समस्त देवी-देवताओं को छोड़ कर केवल भारत मां के स्वरूप की ही पूजा की जाए और उसकी ही वंदना हो तो भारत फिर से विश्वगुरु बन सकता है। एकनाथ जी ने यह सिद्ध कर दिया केवल चित्र की पूजा ना करके श्रेष्ठ चरित्र का अनुसरण एवं आचरण की आज आवश्यकता है। बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम गीत में त्वं ही दुर्गा कहते हुए भारत मां के स्वरूप को ही सब कुछ माना है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह श्री हनुमान सिंह राठौड़ ने विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा किशनगढ़ द्वारा आयोजित क्रिस्टल पार्क सिनेमा में एकनाथजी फिल्म के प्रदर्शन के अवसर पर उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

इस अवसर पर किशनगढ़ के विधायक श्री भागीरथ चौधरी ने बोलते हुए कहा कि विवेकानंद केंद्र संपूर्ण भारतवर्ष में मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान के लिए कार्य कर रहा है। किशनगढ़ में विवेकानंद केंद्र का कार्य सराहनीय है और इसे जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। विवेकानन्द केन्द्र की विद्यालय संपर्क प्रमुख मृदुला व्यास ने इस अवसर पर क्रिस्टल पार्क सिनेमा को इस फिल्म हेतु निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए ललित हासानी एवं एवं अजय विशनानी का विशेष आभार व्यक्त किया। संयोजक राजेंद्र सिंह खंगारोत ने बताया कि इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी राजस्थान प्रांत के प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. स्वतंत्र शर्मा सहित शहर के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में मोहन कृष्णानी, लाजवंती भारद्वाज, हेमराज, अंकित सोनी, विष्णु मालाकार सहित केन्द्र के सभी कार्यकर्ताओं ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन दीपाली शर्मा ने किया।

Friday, September 1, 2017

केंद्र परिचय वर्ग अजमेर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा अजमेर द्वारा कार्यकर्ताओं के लिए आयोजित केंद्र परिचय वर्ग का आयोजन अंगीरा आश्रम में रविवार को किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य प्रतिपादित करते हुए विवेकानंद स्टडी सर्किल की संयोजिका विश्वा शर्मा ने बताया कि विवेकानंद केंद्र का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान का संकल्प है और इसे केंद्र अपनी विशिष्ट कार्यपद्धति योग, स्वाध्याय एवं संस्ेकार के द्वारा पूर्ण करता है। इस विषय की स्पष्टता को जानने के लिए प्रतिभागियों ने मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान विषय पर मंथन किया तथा मंथन प्रस्तुति के पश्चात् इसकी संकल्पना को स्पष्ट करते हुए प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. स्वतंत्र शर्मा ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता ने मनुष्य निर्माण की प्रक्रिया में केवल विषय का अध्ययन, स्वाध्याय एवं उसका अनुशीलन ही पर्याप्त नहीं माना है अपितु कार्य सिद्धि के लिए तन-मन प्राणपन से कार्य में लग जाना ही भारत को विश्व गुरु बना सकता है। इसके लिए प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने कर्म क्षेत्र में उतरना पड़ेगा। कर्म क्षेत्र की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में डॉ शर्मा ने बताया कि विवेकानंद केंद्र अगले माह विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए उठो जागो युवा प्रेरणा प्रतियोगिता का आयोजन विभिन्न महाविद्यालय में करने जा रहा है। इसके लिए महाविद्यालय संपर्क करने के लिए उपस्थित कार्यकर्ताओं ने टीम बनाकर कार्य करने का संकल्प भी लिया।

 केंद्र परिचय वर्ग में ‘धर्म के लिए जिएं’ गीत की प्रस्तुति नगर प्रमुख रविंद्र जैन द्वारा की गई। क्रीड़ा योग के रूप में हाथी घोड़ा पालकी, महापुरुष श्रंखला, नचिकेता, पोस्ट ऑफिस खेल क्षितिज तोषनीवाल द्वारा खिलाए गए। केन्द्र परिचय वर्ग में भोजन मंत्र की संकल्पना नितिन गोयल द्वारा स्पष्ट की गई तथा भोजन करने का तरीका एवं उससे जुड़ा हुआ भाव भी बताया गया।

विवेकानंद केंद्र के इस परिचय वर्ग में श्री शिवराज शर्मा प्रांत सह संचालक, श्री सत्यदेव शर्मा विभाग संचालक, श्रीमती कुसुम गौतम विभाग सह संचालक, अंकुर प्रजापति योग प्रमुख, राजरानी कुशवाहा कार्यालय प्रमुख तथा विवेकानंद विस्तार, राम कृष्ण विस्तार, एवं पृथ्वीराज विस्तार से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं ने भी सहभागिता की। केंद्र प्रार्थना से परिचय वर्ग का समापन हुआ।