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Thursday, September 11, 2025

विश्व बंधुत्व दिवस – छत्तीसगढ़ विभाग

विवेकानन्द केन्द्र छत्तीसगढ़ विभाग के अंतर्गत दिनांक 11 सितम्बर 2025 को कुल 18 स्थानों पर विश्व बंधुत्व दिवस का आयोजन किया गया। इन सभी आयोजनों में मिलाकर लगभग 10,000 सहभागी उपस्थित रहे।

  • बिलासपुर – 9 स्थानों पर कार्यक्रम, जिनमें लखीराम अग्रवाल सभागार में एक विशेष आयोजन हुआ। इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण दिवाकर नाथ वाजपेई मुख्य वक्ता रहे।
  • रायपुर – दुर्गा कॉलेज में आयोजन हुआ, जिसमें माननीय राज्यपाल रमेन डेका जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
  • दुर्ग – 1 स्थान पर कार्यक्रम।
  • जांजगीर-चांपा – 4 स्थानों पर कार्यक्रम।
  • पेंड्रा – 1 स्थान पर कार्यक्रम।
  • मुंगेली – 2 स्थानों पर कार्यक्रम।

इस प्रकार, छत्तीसगढ़ विभाग के विभिन्न जिलों में उत्साहपूर्ण वातावरण में कुल 18 स्थानों पर विश्व बंधुत्व दिवस मनाया गया, जिसमें स्वामी विवेकानन्द के सार्वभौमिक संदेश को जन-जन तक पहुँचाया गया।

Thursday, June 17, 2021

विवेकानंद केंद्र मध्यप्रांत द्वारा आयोजित "युवा संवाद - I"


 विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस के उपलक्ष में 12 जनवरी 2021 को सायं 5 से 6:30 "युवा संवाद" कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमे कुल 83 युवा ऑनलाइन जुड़े l युवा संवाद में छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के तथा विदेश में अध्ययन कर रहे  युवा ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से संवाद किए l इस संवाद का मुख्य उद्देश्य युवा अपने शिक्षा एवं कार्यों द्वारा देश के लिए कैसे योगदान दे रहे हैं एवं देना चाहते हैं और आगे क्या करना चाहते हैं ? इस बारे में युवाओं द्वारा किये जा रहे, वर्तमान के कार्य एवं भविष्य की इमेजिनेशन को अन्य युवाओं के साथ साझा करना था l

             सफलता से सार्थकता की ओर युवाओं को ले जाने के लिए इस कार्यक्रम में कृषि, पक्षी विज्ञान, एरो स्पेस, खेल, पत्रकारिता  आदि के जैसे  महत्वपूर्ण और रोचक विषयों पर संवाद हुआ  l इन रोचक क्षेत्रों मे अध्ययन के लिए योजना कैसे बनाये ?  स्वयं उस क्षेत्र के युवाओं से कार्यक्रम में जुड़े अन्य युवाओं ने लाइव जाना एवं अपने मन में उठ रहे प्रश्नों को भी पूछे ।

कार्यक्रम का प्रारंभ तीन ओंकार एवं प्रार्थना से हुआ जिसे राहुल जी ने लिया l तत्पश्चात गीत अरुण जी द्वारा प्रस्तुत किया गया एवं कार्यक्रम का संक्षिप्त एवं सारगर्भित भूमिका बताते हुए मोहन जी ने कहा स्वामी विवेकानंद का विश्वास आधुनिक युवा पीढ़ी में था, उसी से हमारे कार्यकर्ता निकलेंगे इसलिए यह युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया l युवा उर्जा से भरा होता है इसलिए उसे लगातार प्रेरणा की जरूरत होती है l  लक्ष्मी दीदी द्वारा विवेक वाणी बोलने के पश्चात युवाओं से संवाद प्रारंभ हुआ l

कार्यक्रम का संचालन यतेन्द्र जी ने किया l युवाओं से संवाद -  भोपाल विभाग सह युवा प्रमुख रमेश जी, सौरभ डोंगरे जी एवं  बिलासपुर शाखा नगर युवा प्रमुख आशुतोष शुक्ल जी ने किया l


संवाद के दौरान युवाओं द्वारा कही गयी बातें -


राष्ट्र प्रकाश साहू जी ने युवाओं से कहा हम अपने खेतों में गोवंश के गोबर से जैविक खेती करते हैं एवं गोमूत्र से उसका कीट नियंत्रक, गोनाइल, जो कि फिनाइल की तरह कार्य करता है इसका निर्माण एवं प्रशिक्षण का कार्य करते हैं l जिससे हमारे देश का पैसा, हमारे देश में रहेगा एवं हमें केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों से मुक्ति मिलेगी l

अर्जुन शर्मा जी हॉकी के खिलाड़ी हैं, उन्होंने कहा खेल एवं जीवन दोनों में लगन के साथ ही ईमानदारी भी जरूरी है, किसी मुकाम पर पहुंचने के लिए निरंतरता आवश्यक है, इसका कोई शॉर्टकट नहीं है l हार्ड वर्क करना पड़ता है, तभी अपना टारगेट अचीव कर पाएंगे l प्रोफेशन में फोकस जरूरी है l तन के साथ मन का भी समन्वय आवश्यक है l खेल में देश को जो प्रजेंट करना भी देश की एक बड़ी सेवा है l

तेजस जी ने बताया यू.एस. में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं इन्होंने कक्षा ग्यारहवीं से ही इसकी तैयारी की थी । उन्होंने युवाओं को कहा हमेशा सपने देखें एवं लक्ष्य ऊंचा रखें । किसी कार्य को करने से पहले मन में झिझक होती है, बाद में वह दूर हो जाती है । इनका उद्देश्य है विदेश में अच्छी से अच्छी शिक्षा प्राप्त करके देश में वापस आकर भारत के लिए कुछ कर सकूं ।

दिव्यांश द्विवेदी जी ने बताया वे आईआईटी बीएचयू में अध्ययनरत हैं, उन्होंने कक्षा दसवीं में 10 में से 10 सीजीपीए हासिल किया था एवं प्रथम प्रयास में ही आईआईटी एंट्रेंस एग्जाम क्रैक किया, उन्होंने युवाओं से कहा स्वामी विवेकानंद के संदेश को ध्यान में रखकर जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो, रुके नहीं ।

विशाल गीते जी ने बताया वे पक्षी विज्ञान की पढ़ाई कर रहे हैं l इस रोचक विषय से संबंधित विभिन्न पक्षियों के बारे में एवं उनके प्रभाव से संबंधित तथ्यों के बारे में युवाओं को बताया । उन्होंने कहा पक्षी सीधे खेतों एवं फसलों से जुड़े होते हैं, इसलिए पक्षियों की सेवा करके भी देश की सेवा की जा सकती है । अकेले का पहचान बनाने की अपेक्षा समाज में सभी लोगों के साथ चलना चाहिए l

हार्दिक दवे जी ने बताया वे पत्रकारिता से जुड़े हैं l उन्होंने कहा अनुभव जरूर पुराने लोगों के पास है किंतु नए आइडिया एवं लोगों तक तत्परता से विचार संप्रेषण की कला युवाओं के पास अधिक है । आज के समय में राष्ट्रवादी पत्रकारिता की आवश्यकता अधिक है । वर्तमान में युवाओं में भटकाव की समस्या अधिक है, जिस पर स्वामी विवेकानंद जी ने भी ध्यान दिया था, अतः सूचनाओं का सही आदान प्रदान करने की आवश्यकता है l यह काम सही पत्रकारिता से ही हो सकता है, इसलिए पत्रकारिता देश के हित को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए । अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए टीवी पर डिपेंड रहना ही जरूरी नहीं है, कई वेबसाइट, पोर्टल, सोशल मीडिया साइट, यूट्यूब, फेसबुक आदि हैं, जिनके माध्यम से हम अपने विचार लोगों तक पहुंचा सकते हैं ।
                                        युवाओं से संवाद होने के पश्चात सभी युवाओं ने अपने मन में उठ रहे प्रश्न पूछे एवं कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं द्वारा ही उसका उत्तर दिया गया l  विवेकानंद केंद्र दिल्ली के युवा प्रमुख निखिल जी युवाओं से हुए संवाद का सम-अप किये एवं संजय पवार जी ने सभी का आभार व्यक्त किया l सर्वे भवन्तु के साथ "युवा संवाद - I" कार्यक्रम का समापन हुआ l

Wednesday, December 23, 2020

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, छत्तीसगढ़ विभाग द्वारा योग सत्र


विवेकानंद  केंद्र  कन्याकुमारी, छत्तीसगढ़ विभाग द्वारा  10  दिवसीय योग सत्र का आयोजन दिनांक 24.08.2020 से 02.09.2020 तक किया गया, जिसमे कुल 327 पंजीयन हुए थे तथा नियमित 130 लोगों ने भाग लिया l दिनांक 03.09.20 से यह योग वर्ग आज दिनांक 29.09.2020 तक प्रतिदिन चल रहा है एवं आगे भी चलता रहेगा l

प्रत्येक दिन योग सत्र का प्रारम्भ तीन ओमकार एवं प्रार्थना से होता था l योग सत्र में 10 दिन तक शिथलीकरण व्यायाम (एस्थिर दौड़, मुख धोती, कमर का व्यायाम, हैण्ड रोटेशन, गर्दन का व्यायाम, व्याघ्र तनन, पवन मुक्तासन, पूर्ण शावासन), सूर्य नमस्कार, विभिन्न आसन, प्राणायाम, अष्टांग योग की संकल्पना, प्रश्नोत्त्तर,अंत में पतंजलि वंदना, एवं  शांति मंत्र होता था l

दस दिवसीय योग सत्र के दौरान प्रत्येक दिवस के संकल्पना सत्र की विस्तृत जानकरी निम्नलिखित है -  

योग सत्र प्रथम दिवस में  उद्घाटन सत्र हुआ, जिसमें विवेकानंद केंद्र बिलासपुर के नगर संचालक एडवोकेट श्री प्रतीक शर्मा जी का मार्गदर्शन मिला, उन्होंने कहा कि योग जो है वह मनुष्य को जोड़ने वाली एक प्रक्रिया है । और इस जोड़ने की प्रक्रिया के कारण ही हम पने मन से , हम अपने समाज से, और राष्ट्र से जुड़ रहे हैं । और इन सब से जुड़ने के कारण ही हम अपने आप को स्वस्थ रखें, यह योग का मुख्य उद्देश्य  है ।

इसके पश्चात योग की संकल्पना में विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत के कार्यालय प्रमुख आदरणीय गोविंद खांडेकर जी का मार्गदर्शन मिला । जिसका विषय था योग क्या है ? और क्या नहीं ? उन्होंने संस्कृत का सूत्र  ।। युज्यते अनेन इति योगः ।। की व्याख्या करते हुए कहा कि कहा योग का अर्थ है जोड़ना,  सर्वप्रथम अपने मन, बुद्धि, शरीर से जुड़ना, एवं अपने आप से जुड़ते हुए अपने परिवार से जुड़ना, परिवार से जुड़ते  हुए समाज से जुड़ना, और राष्ट्र से जुड़ना एवं संपूर्ण चराचर सृष्टि से एकत्व की अनुभूति  करना ही योग का मुख्य उद्देश्य है  । उन्होंने  उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार में जिस तरह से परिवार का मुखिया अपने परिवार को जोड़ने के लिए कहीं ना कहीं स्वयं का त्याग करता है , ऐसे ही हमारे जीवन में इस को जोड़ते हुए कही ना कहीं त्याग बहुत आवश्यक है  । और यहीं से ही योग प्रारंभ हो जाता है , अंत में उन्होंने अखंड मंडलाकार की व्याख्या करते हुए बताया ।। अखंड मंडलाकारं व्याप्तमं येन चराचरम्  तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरुवै नमः ।। मैं, परिवार, समाज , और संपूर्ण संपूर्ण चराचर सृष्टी से जुड़ना अखंड मंडलाकार  में बताया गया है ।

  योग सत्र द्वितीय दिवस  

 योग सत्र के दूसरे दिन का  विषय था, योगश्चित्त वृत्ति निरोधः और मनः प्रश्मनो पायः योगः इत्यभिधीयते ।। जिस पर विवेकानंद केंद्र इंदौर विभाग संगठन श्री अतुल जी गभने का मार्गदर्शन मिला , उन्होंने योग की व्याख्या करते हुए बताया कि अपना विस्तृत स्वरूप इस समाज और राष्ट्र से जुड़ना, और उसके अनुसार व्यवहार करना, योग है । हमारी जो भी गतिविधि हो इस राष्ट्र को ध्यान में रखते हुए हो , तभी हमारे जीवन में योग होगा  । उन्होंने अंतः करण चतुष्टय , जिसमे मन, बुद्धि, चित्त, और अहंकार है के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें चित्त की व्याख्या करते हुए कहा कि बाहर से आने वाले प्रभाव के कारण हमारे चित्त पर उसका प्रभाव पड़ रहा है । उस पर नियंत्रण करना आवश्यक है । भगवान राम और महर्षि वशिष्ठ के संवाद को लेते हुए मनः प्रश्मनो पायः योगः इत्यभिधीयते की व्याख्या करते हुए बताया कि मन को शांत करने का उपाय योग है ।

योग सत्र तृतीय दिवस में  योग: कर्मसु कौशलम और समत्वं योग उच्यते  विषय पर विवेकानन्द केंद्र बिलासपुर के संपर्क प्रमुख श्री कैलाश त्यागी जी का मार्गदर्शन हुआ, योग: कर्मसु कौशलम की व्याख्या करते हुए कहा कि हमारे कर्म की कुशलता तभी होगी, जब हमारे प्रत्येक कार्य में योग  होगा ।  अर्थात हमारा कार्य लोगों को जोड़ने वाला हो,  तोड़ने वाला ना हो । हमारा व्यवहार लोगों को जोड़ने वाला हो । तभी जीवन में योग है । दूसरा उन्होंने समत्वं योग उच्यते की व्याख्या करते हुए कहा कि हम को प्रत्येक परिस्थिति में सम  रहना है । चाहे हमारे जीवन में सुख हो, चाहे दुख हो ,चाहे हम जीवन की कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं , चाहे हम कितनी भी विपत्तियों में क्यों ना आ जाए । हमको सम स्थिति में ही रहना है । तभी जीवन में योग होगा ।

योग सत्र चतुर्थ दिवस का विषय था, धर्म चक्र जिस पर विवेकानंद केंद्र छत्तीसगढ़ विभाग के संचालक डॉ किरण देवरस जी का मार्गदर्शन हुआ, उन्होंने बताया कि इस  धर्म चक्र को भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया एवं इस धर्म चक्र का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है ।  यदि हम इस धर्म का पालन करते हैं , तो निश्चित ही हमारा , एवं समाज का पोषण होगा । हम इस समष्टि का पोषित करेंगे तो , यह सारे संसार को पोषित  करेगी । जिसके लिए उन्होंने पंच महायज्ञ की संकल्पना के बारे में बताया,  जो है पितृ यज्ञ , नर यज्ञ , देव यज्ञ ,ऋषि यज्ञ ,और ब्रह्म यज्ञ  । जो व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में इन 5 यज्ञों का पालन करता है , तो निश्चित ही यह समष्टि के कल्याण के लिए उपयोगी है और यह समष्टि हमारा  और संपूर्ण जीव जगत के पोषण में अपना योगदान देगी ।

योग सत्र पंचम दिवस का विषय था , अष्टांग योग के अनुसार 'यम' , जिस  पर मार्गदर्शन करने के लिए विवेकानन्द केंद्र मध्य प्रांत संगठन आदरणीय दीदी का मार्गदर्शन हुआ , उन्होंने कहा 'यम' अर्थात समाज के प्रति हमारा व्यवहार , जिसके अंतर्गत अहिंसा, सत्य, अस्तेय ,ब्रह्मचर्य ,और अपरिग्रह आते हैं  । उन्होंने 'यम' के प्रत्येक अंगो का वर्णन करते हुए कहा कि अहिंसा , अर्थात किसी के प्रति हिंसा नहीं करना । हमारा जो भी  व्यवहार हो वह समष्टि के हित में ध्यान रखकर हो और समाज के हित में व्यवहार हो, तो वह अहिंसा के अंतर्गत आती है  । सत्य, जो शाश्वत है, जिसका अस्तित्व है , उसी का ही अनुसरण करना एवं उसके अनुसार अपना व्यवहार करना । 'अस्तेय',  अर्थात चोरी नहीं करना,  जिस पर हमारा  अधिकार नहीं है , उस पर अपना आधिपत्य न जताना ही अस्तेय का पालन करना है । और 'ब्रह्मचर्य 'अर्थात अपने ध्येय की और  ध्यान देने वाला,  अपने उद्देश्य के प्रति सजग रहना ।  फिर अपने उद्देश्य में जो भी बाधा आए , उससे दूर रहना ।  अपरिग्रह  अर्थात अत्यधिक संग्रह न करना ।  उतना ही ग्रहण करना  जितना आवश्यक है । क्योंकि हम देख रहे हैं कि आज समाज में  जो असंतुलन बना हुआ , वह अपरिग्रह के अभाव के कारण  है । इसके लिए आवश्यक है , जितना आवश्यक है उतना ग्रहण करें ।

 योग सत्र षष्ट दिवस में विवेकानन्द केंद्र रायपुर के  सह नगर संचालक श्री सुयश जी शुक्ला का मार्ग दर्शन हुआ । जिनका विषय था,  अष्टांग योग के अनुसार नियम अर्थात हमारा स्वयं के प्रति व्यवहार । जिसके अंतर्गत उन्होंने शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान के बारे में बताया , जो इस प्रकार है :-

"यम वैश्विक मूल है सही बताया जितना आवश्यक हो उतना ही सोचना,एकत्रित करना। शरीर मन आत्मा को कैसे योग के माध्यम से जोड़ना है इस का महत्व बताया। योग दूसरे अंग में आत्म विकास के लिए अनुष्ठान करना,स्वयं अनुशासित होना, संतोष समर्पण से आत्म विकास करना योग साधना के लिए तैयार करने के बारे में बताया । कैसे स्वयं का दृष्टिकोण ठीक कर सकते है,शरीर को निर्मल शुद्ध व्यवस्थित रखना ,शुद्ध,सात्विक,दोष रहित आहार लेने से क्या क्या अनुभूत कर सकते है। भोजन,सुनने,देखने सभी से शुद्ध आहार अंदर तक पहुंचाएंगे वैसा ही हम देगे । अशुद्धियों को दूर करना होगा,क्या लेना है पहचानना होगा ।यदि हमें किसी के प्रति ईर्ष्या हो रही है उस समय उसी के बारे में अच्छा सोचे तो मन शुदध होगा  इसे समाहित करेगे तो आत्म शुद्धि होगी। संतोष उस समय जो संसाधन है उसमे कैसे खुश रहना,जो है उसमे प्रसन्न रहना ,अति की लालसा और समुचित जितनी आवश्यकता है उसमे बारीक लाइन को पहचाना होगा। लालसा,भोगवाद से दूर रह जो आपके पास है उसमे खुश रहना स्वीकार कर,आनंद अनुभूत करना, प्रतिकूल परिस्थिति में भी आनंद की निरंतरता बनाना,संतोष रखते हुए जो है उसमे संतुष्ट रहते हुए कार्य सतत करना और समाज को देने के भाव रखना। प्रत्येक क्षण में प्रसन्न रहना परम संतोष है। योग तप शरीर,मन,वाणी,योग में जो विकार है , दुख सहना भी योग है। मांस पेशीय भी जब खिचाव महसुस करेगी तभी बलवान होगी वैसे ही दुख सह कर हम आनंद प्राप्त कर सकते है।

स्वाध्याय नियमित  जो सुक्ष्मता बताए ऐसे शास्त्रों को पढ़े अध्ययन करें । मानव धर्म सबसे ऊपर है, हमारी संस्कृति है नियमित स्वाध्याय से कैसे आत्मसात कर सकते है। ईश्वर प्रणिधान से तनावों से मुक्त हो,  कैसे आत्मसाक्षात्कार के दर्शन होगे, अहंकार को दूर कर योग के द्वारा संगठन , एकात्म की अनुभूति कर सकते है।

 योग सत्र सप्तम दिवस में  विवेकानन्द केंद्र भोपाल, विभाग प्रमुख श्री मनोज जी गुप्ता का मार्गदर्शन रहा, जिनका विषय था - आसन, प्राणायाम,  प्रत्याहार - उन्होंने पतंजलि योग सूत्र को लेते हुए मार्गदर्शित किया , जो इस प्रकार है :-

आसन :-  ।। स्थिरसुखमासनं ।।

किसी एक स्थिति में सुख पूर्वक बैठने का नाम आसन है ।

 ।। प्रयत्नशैथिल्यानंतसमापत्तिभ्यां ।।

शरीर के स्वाभाविक प्रयत्न है, अर्थात जो स्वाभाविक चंचलता है ,  उसे शिथिल कर अनंत के साथ चिंतन ।

 ।। ततो द्वंद्वानभिघातः ।।

इस प्रकार आसन सिद्ध होने पर , द्वंद्व परम्परा और कुछ विघ्न उत्पन्न नहीं कर सकती ।

 प्राणायाम:-  ।। तस्मिन सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेद: प्राणायाम:  ।।

 आसन में सिद्ध होने के बाद श्वास - प्रश्वास दोनों की गति को संयत करना प्राणायाम है ।

 प्रत्याहार:-  ।। स्वविषयासम्प्रयोगे चित्तस्यरूपानुकार इवेन्द्रियाणाम प्रत्याहार: ।।

हमारी इंद्रियां  अपने- अपने विषयों को छोड़कर मानो चित्त का स्वरूप ग्रहण करती हैं, प्रत्याहार कहलाता है ।
  

 योग सत्र अष्टम दिवस में विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत प्रमुख, श्री भंवर सिंह राजपूत जी का मार्गदर्शन हुआ, जिनका विषय था धारणा, ध्यान, और समाधि  । जो इस प्रकार है:-

"धारणा

चित मन को स्थिर रखना ही धारणा है , जो विषय है उसी के बारे में कई विचार का अनुसरण करना।

उदहारण  - सीप स्वाति नक्षत्र की पहली बूंद ग्रहण कर के ही मोती बना पाती है । जो वर्ष में एक बार ही होता है। सीप को जब ये आभास होता है कि रोहणी नक्षत्र आ गया है वो वैसे ही तट से समुद्र की सतह पर आ अपना मुख खोल कर पहली बूंद ले वापस तट पर जा मोती बनाने के कार्य में लग जाती है।

एक ही विषय है पर कई विचार का अनुसरण करने का बहुत ही अच्छा है ।

ध्यान :- अनेक विचारो को  दूर कर एक ही विचार को ही पकड़ना उस पर ही अमल करना* ।

उदहारण

हम हनुमान जी की मूर्ति की धारणा करते है । मूर्ति के सामने आसन पर बैठ अपने चित को बांध कर और उनके एक कार्य  उनके द्वारा राम जी के लिए किए गए कार्यों को याद करते है।

 राज योग में एक व्यक्ति काफी लंबे समय से ईश्वर प्राप्ति के लिए बैठ कर एक ही स्थान पर ध्यान करने लगे , उनको दीमक लग गया  ।तब वह से नारद जी को जाते हुए देखा तो उनसे पूछा कि आप कहा जा रहे हो? नारद जी बोले ईश्वर के पास स्वर्ग जा रहा हूं।


दूसरा प्रश्न उसने नारद जी से कहा आप ईश्वर से पूछ कर आना कि वे मुझे कब दर्शन देंगे ?

नारद जी आगे गए तब दूसरा व्यक्ति उछलता कूदता मस्ती में है वो भी नारद जी से वे दो प्रश्न पूछता है जो पहले वाले व्यक्ति ने पूछा था।

नारद जी जब स्वर्ग से लौटे तो

पहले व्यक्ति ने पूछा ईश्वर ने उसके प्रश्न का क्या उत्तर दिया तब नारद जी बोले आपको

अनेक वर्षों तक सात जन्म तक साधना करेगे तब ईश्वर दर्शन होगे।

 तब उसके मन में कुंठा जागृत हुई कि सात जन्म तक ध्यान करना होगा। बहुत ही लंबा समय होगा।

आगे जाने पर नारद जी से दूसरे व्यक्ति ने उत्तर पूछा तब नारद जी बोले आपके घर के आंगन में जो इमली का पेड़ है उस इमली के पेड़ में जितने पत्तों है उतनी तपस्या करनी होगी

तब तत्काल वो बोला बस पत्तों कि संख्या जितनी और मस्ती में झूमने लगा।

तभी आकाश से आकाशवाणी हुई की ईश्वर आपको अभी ही दर्शन देगे।

इसका अभिप्राय यह है कि एक ही विषय की ईश्वर दर्शन अनेक विचार होने के बाद भी ध्यान और ध्येय धारणा समान रही , चित स्थिर रहा ईश्वर दर्शन की कामना में।

दीमक के ढेर पर बैठे व्यक्ति का चित्त स्थिर नहीं था।

ध्यातां मै हूं ध्यान किसका? ईश्वर  कैसे प्राप्त हो? तीनों अवसर से आगे बढ़ेगा तब ही मै और ध्येय का लोप होता है तब ही हम समाधि अवस्था में पहुंचेगे।

तीनों अवस्था को एक साथ देखे एक विषय अनेक विचार ठीक वैसे ही

उदहारण - जैसे बचपन में बालक एक खेल खेलते थे लेंस को सूर्य की रोशनी में रखते थे उस पर अंकित  बिंदु को ऐसे *फोकस* करते है,  कि जैसे ही केंद्रित हो, जल जाती है। ठीक ऐसे ही योग के पांचों अंगो को करने के बाद ये तीनोंधारणा,ध्यान,समाधि को प्राप्त कर सकते है । समाधि में पहुंचने पर दो स्थिति होती है चेतन और अचेतन अवस्था।


उदहारण

भोजन ग्रहण कर रहे है पता होता है भोजन हाथ से तोड़ते उठाते है ,मुंह में डालते है,  दांत से चबा कर खाते है हर अवस्था का एहसास होता है भोजन की विभिन्न क्रियाएं हो रही है , चेतन अवस्था है ।

लेकिन जब गले के नीचे से भोजन उतरता  है,  क्या क्रियाएं चल रही है ? पता नहीं चलता ।

 ये अचेतन अवस्था है।

योग के आनंद को प्राप्त करने के लिए सभी अंगों का एक साथ अनुभव करना होगा।"

 योग सत्र नवम दिवस में  विवेकानंद केंद्र , छत्तीसगढ़ विभाग के संपर्क प्रमुख डॉ. उल्हास वारे जी द्वारा विवेकानंद शिला स्मारक विषय पर मार्गदर्शन किया गया । और  स्मारक निर्माण के समय आने वाली  चुनोतियाँ  अवसर बनी, जिसे एकनाथ जी ने अवसर के रूप में बदल दिया । उस बारे में बताया, एवं द्वितीय चरण विवेकानन्द  केंद्र की गतिविधियों से अवगत कराया गया  ।

योग सत्र दशम दिवस के समापन सत्र में  विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष , माननीय श्री हनुमंत जी राव का मार्गदर्शन रहा , उन्होंने जो कहा वह इस प्रकार है :-

पचास साल पहले आज के दिन ही विवेकानंद शिलास्मारक का उद्घाटन हुआ था। योग प्रशिक्षण  के पश्चात नियमित योग करने के लिए हम सभी प्रतिबद्ध हुए।

विवेकानंद केंद्र की योग पद्धति "अनुसंधान सहित" है। योग का नाम पद्धति सभी के तरीके अलग - अलग है । प्रशिक्षण,नियमित अनुशासित अभ्यास ही मुख्य निचोड़ है। जो दैनिक योग करेंगे, उनकी दैनिक दिनचर्या में और अधिक  सुधार परिवर्तन आएगा, आचरण, शरीर और मन दोनों उपकरणों में सुदृढ़ता, मजबूती स्वस्थ, पवित्रता,स्वछता बढ़ेगी व परिवार,परिसर,समाज,राष्ट्र,के लिए निस्वार्थ भाव से  धर्म कार्य और एक अच्छे कार्य करने के लिए तत्पर और निरंतर प्रयासरत रहे यही *मूल बिंदु* है।

 योग सत्र से जुड़ कर हम  शरीर,मन,योग इंस्ट्रक्टर से,विवेकानंद केंद्र से जुड़ स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनकर शरीर की तत्परता बढ़ाते हुए योग शास्त्र को अपने - अपने घर, अपार्टमेंट, संपर्क स्थान में योग का अनुष्ठान,प्रशिक्षण ले जाए और निश्चित रूप से *एक महान शक्ति* से जुड़े रहने व जोड़ते रहने का प्रयास  करते हुए देवीय गुणों, प्रमाणता,शक्ति ऊर्जा को प्रगट करने में सफल रहेंगे।

परिवर्तन होगा शक्ति का जागृत होना,व्यवहार,संकल्पनाओं में, विचार धाराएं,काम करने का तरीका,प्रतिक्रियाएं बदलेगी और हम पूर्णता की ओर बढ़ेंगे, हमारे जीवन में, मानसिकता में  बदलाव आएगा वो बदलाव से शरीर, मन स्वस्थ रहेगे प्राण शक्ति का प्रवाह संचार होगा।

आदमी अलग हो सकता है, विचार अलग हो सकते है, योग से सभी प्राण शक्ति केंद्रित हो एकात्मकता होती है, साइलेंट रेवोल्यूशन मूक क्रांति होता है हमारे बिना जानकारी से हमारे अंदर बदलाव के लक्षण दिखाए देते है।

आठ लक्षण बदलाव वाले जो दिखाई देते है योग अभ्यास से प्रकट उत्पन्न, अंकुरित हो प्रतिष्ठा प्राप्त करवाने में सहायक रह शरीर में लचीलापन, सुदृढ़ता,जागरूकता बढ़ेगी जिससे मुख में प्रसन्नता का प्रसार होगा,बोलने के बोल में मृदुता,  स्नेह, प्रसन्नता का संचार होगा,नयनों में निर्मलता, शांत` दिखेगी।

हम पूरे कुटुंब, अपनों में, समाज में, राष्ट्र के प्रत्येक जीवों में  प्रेम से अच्छा चरित्र देखेगे, दिशनिर्देशन होगा सभी निरोगी रहेगे।

ये क्रियाएं करने से अपने शरीर की इंद्रियों, इच्छाओं की, विचारो की दौड़  के ऊपर पूर्णतः नियंत्रण  रहेगा साथ साथ शरीर के अंदर का ताप भी नियंत्रित रहेगा,नाडी प्रवाह संतुलित रहेगा, समग्र संतुलन रहेगा हमेशा आनंदित, प्रसन्नचित रहेगा,संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होगा,बाधाओं को आसानी से पार करने के लिए तैयार रहेगा, यश,प्रतिष्ठा का प्रवाह होगा ।

ऐसा व्यक्ति  will contribute positivity to society और यही आनंदित रहने के लिए राम बाण है।  

महर्षि पतंजलि जी की एक सुंदर प्रस्तुति  ने कहा है सुख के साथ मैत्री करिए, सुख के साथ संतुष्ट रहिए l दु:खी लोगो के प्रति करुणा होनी चाहिए,पुण्य कार्यों के साथ मुदित आनंदित रहे,बुरे कामो के साथ बुराई को दूर रखे,ऐसी मानसिकता विकसित रहेगी तो मन शांत रहेगा और कुटुंब, परिवार, मित्रो के साथ हम स्वयं हमेशा प्रसन्न, आनंदित रहेंगे।


1893 में स्वामी विेकानंद जी ने *शिकागो* में  शानदार उदघोष किया संपूर्ण विश्व में सनातन हिन्दू धर्म , भारत की संस्कृति का प्रचार हुआ, इसके माध्यम से दार्शनिक शास्त्र का दर्शन किया गया।

हम भारतीयों का मनोबल, आत्मबल, आत्म साहस, व्यक्तित्व विकास हुआ ।

आज इस *पुण्य अवसर* पर  हम प्रतिबद्ध, कर्मठ ,कटिबद्ध एवम् संकल्पित हो यथा संभव हर जगह राष्ट्र हित *सर्वोपरि* रख धर्म कार्य करेगे।

 मध्य प्रान्त संगठक आ.रचना दीदी ने बखूबी  केंद्र की  सभी गतिविधियों से अवगत करवाया l

(१) योग सत्र दस दिन का

(२) योग वर्ग  3 September 2020 सुबह 6.30 से 7.30 से नियमित योग वर्ग रहेगा

(३) Certificate course of Six month

(४) Yog  दर्शन  विमर्श सात दिन का

(५) विवेकानंद केंद्र एक पारिवारिक संगठन है। *डोनेशन राष्ट्र कार्य हेतु* जीवन पर्यन्त कार्यकर्ताओं के लिए परिपोषक योजना आर्थिक सहयोग l

(६) युवा भारती subscribe कर लेख पढ़ने मिलेगा सदस्यता की सौभाग्यता लेने बावत अवगत करवाया।

(७) योग प्रशिक्षक बनने के लिए सात दिनों का प्रशिक्षण वर्ग २३ सितंबर से ऑनलाइन होगा।

(८) १२ सितंबर को शाम ६.३० से एक दिवसीय वेबीनार के बारे में बताया जिसमें निवेदिता क डोवाल जी की उपस्तिथि रहेगी।

 डॉ. किरण देवरस जी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा - आज के दिन ही पचास वर्ष पूर्व कन्याकुमारी में विवेकानंद जी की मूर्ति का शिलन्यास हुआ था l आप सभी को इस पावन अवसर पर ढेरों शुभकामनाएं बधाईयां ।

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Friday, November 20, 2020

"किशोरी विकास कार्यशाला" विवेकानंद केंद्र, मध्य प्रांत द्वारा आयोजित

 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, मध्य प्रांत द्वारा किशोरी विकास कार्यशाला का आयोजन दिनांक 4 अक्टूबर (रविवार) को किया गया l

सुश्री रेखा चूड़ासामा जी विद्या भारती की पूर्ण कालीन कार्यकर्ता एवं अखिल भारतीय बालिका शिक्षा  संयोजक  ने उद्घाटन सत्र में आपने किशोरी अवस्था में आए बदलाव के बारे में बहुत ही सरल तरीके से प्रस्तुति दी ।

किशोरियों में  कैसे शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक बदलाव आते है उसके बारे में सटीक चीजें बतलाई,  जिसे गहराई से अध्ययन कर, समझ कर हम किशोरियों को उचित मार्गदर्शन सरलता से दे पाएंगे l उन्होंने कहा नचर्या में असुंतलन होने से क्या प्रभाव होगा बताना अति अनिवार्य है । व्यवस्थित दिनचर्या व उसके असर के बारे में बताना आवश्यक है । सुबह कब जागना, उठना,भोजन लेना, पढ़ना,सोना,कैसे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो  स्वस्थ जीवनशैली दिनचर्या अपनाना के बारे में विस्तार से बताया गया l

दायित्व बोध कराया गया - घर,बहार,शाला,समाज में क्या क्या करना चाहिए। जैसे घर पर  मेहमान आए तो नमस्कार करना ,पानी देना, जल पान पकड़वाना आदि । परिवार में मां को घरेलू कार्यों में सहायता देना,पड़ोस में कोई मदद चाहिए तो आगे बढ सहायता देना,शाला में सह पाठियों  को विषय समझने में मदद करनी चाहिए।

व्यवहार कैसा होना चाहिए के बारे में जानकारी दीं - छोटों,बड़ों,,परिवार,रिश्तेदार,पड़ोसी आदि को कैसे सकारात्मक सोच के साथ सहयोग करे।

उन्होंने आगे बताया कि हमारे देश में पर्यावरण संकट है तो पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूकता आवश्यक है ।  घर में अगर नल खुला है तो बंद करना, पंखा लाइट अनावश्यक चालू है तो बंद कर बिजली बचाना, परंपरा,पूजा,पाठ,संस्कृति को समझना, एवं अन्यों को भी सिखाना । महिलाए पुरुष के अपेक्षा ज्यादा सुसंस्कृत* होती है अतः अच्छी किशोरी अच्छी महिला अच्छी  नागरिक बनेगी l

स्वावलंबन के गुणों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा -  स्वदेशी चीजें खरीदे व उपयोग करे,आत्म निर्भर बनना,अपने कपड़े स्वयं धोना,तय करना,नाश्ता बनवाना, परोसना, स्वयं काम करना आना चाहिए।

मातृ भाषा में बात करना चाहिए l शब्दों को सोच कर सजा कर उपयोग करें l मीठा बोलें,आत्म निर्भर भारत बनाने में अपना सक्रिय योगदान दे।

उन्होंने बताया भोजन बनाने में, आहार, पाक शास्त्र की वैज्ञानिकता को समझना चाहिए , पाक शाला के गुण,भोजन बनाने की कला, चावल कूकर & भगोने दोनों में बनाना,भोजन और आहार का ज्ञान देने के बारे में जानकारी दीं ।

मेरा घर कैसे सुंदर बने, घर व्यवस्थित, स्वच्छ,सजा कर रखें ताकि घर व समान के प्रति आत्यमियता बढ़े।

स्वास्थ्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा -  किशोर अवस्था में आहार पर्याप्त मात्रा में लें एवं अपने स्वस्थ का बोध कर पौष्टिक आहार लेना, परिश्रम करना आवश्यक है । झाड़ू पोछा करना ताकि कमर पतली रहे, कपड़े धोना हांथ मजबूत होगे, स्वास्थ्य का बोध करवाना, चबा चबा कर खाना l पेट साफ रहे ये ध्यान दें l उन्होंने कहा इन सभी विषयों पर चर्चा करना चाहिए ।

उनके द्वारा सुझाव दिया गया कि व्यायाम नित्य करना, सीढ़ी से उतरे लिफ्ट का उपयोग कम करे, बाज़ार जाए तो कपड़े की थैली लेकर जाए प्लास्टिक का उपयोग ना करें l

अपने परिवार के इतिहास का गौरव का जिक्र फक्र से करना l उन्होंने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि मेरी दादी चूल्हे में कई लोगो का भोजन बनाती थी, दादा जी साइकिल से दस किलमीटर जाती थीं, मेहनती थीं, ये सभी बातें बताना तो आत्मीयता बढ़ेगी।

मितव्ययता के सम्बन्ध में एक दृष्टान्त बताते हुए उन्होंने कहा - पहले चादर के रूपों में उपयोग करें फिर पोछे के कपड़े तक उपयोग करना, पूरा उपयोग करना  l Use and Throw से बचना एवं एक चीज को बार - बार उपयोग करना। स्टील के बर्तन का प्रयोग करें, डिस्पोजल का उपयोग यथासंभव कम करें ।

 किशोरी जब नारी बनेगी तो कबाड़ से जुगाड़ करना सीखेगी। शादी की पत्रिका से नए रुपांतरण से उपयोगी वस्तुएँ बनाना, राखी घर में बनाना, अभिनंदन कर्ड बनाना आदि हमें सीखना एवं करना चाहिए ।

उन्होंने इस करोना महामारी के समय, उपयोग, मितव्यती, के बारे में बताया । वैज्ञानिक रूप से बालिका पेट से ही सक्रिय,मजबूत होती है। नैसर्गिक है, धैर्य,सहनशीलता,आत्मविश्वास,समन्वय करने का गुण, समायोजन करना,मातृत्व ,कर्तव्य,नेतृत्व क्षमता का विकास आदि बचपन से करना चाहिए। किशोरी में मातृत्व के गुण रहते है ,श्रेष्ठ विकास, कर्तव्य व नेतृत्व का विकास करना चाहिए।  घर में दस लोग है एक बाथरूम है तो कैसे उपयोग करे अर्थात उन्होंने संतुलन बनाने के बारे में बताया ।

उनका कहना था कि हम अपने घरों में -  स्वयं,परिवार, घर,समाज, राष्ट्र के विकास के लिए छोटी - छोटी चीजें बताए । सामाजिक कार्य में भी नेतृत्व का महत्व बताए ।



उन्होंने कर्तव्य के बारे में बताते हुए कहा कि किशोरियों को हम विकास के आयाम, बोलने, समझने, अच्छा व्यवहार,आचरण,सब को लेकर चलना, कैसे अपने कर्तव्य से स्वयं,परिवार,समाज राष्ट्र हित के लिए कार्य करना है, इन सब के बारे में बताएं, जिससे संपूर्ण चहुंमुखी विकास हो सके।

उन्होंने बोला चर्चा सत्र होना चाहिए जिसमें सभी बोले,सुने,समझे कोई जिज्ञासा हो तो परामर्श ले। देश में किशोरियां ने हर क्षेत्र में संघर्षों का, चुनौतियों का सामना कर नाम कमाया,धैर्य ,साहस से आगे बढ़ी, अपने मेहनत से मुकाम हासिल किए l उनके उदहारण भी बताए ।

बालिका विकास में ध्यान दे l बालिका बालक की नकल करती है, उन्हें बताए ऐसा ना करें - वो ज्यादा शक्तिशाली,सहनशील है, सृजनशीलता है  ऐसे गुण जगाए विकसित करें । आज की किशोरी कल की मां है ये गौरव उत्पन्न करें।

उन्होंने चार प्रकार के संयम - अर्थ संयम, स्वाद संयम, इन्द्रिय संयम,समय संयम का महत्व विस्तृत में बताया । उन्होंने कहा - विभिन्न प्रतियोगिता रखे, गतिविधियाँ करना,शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूक करें, स्वयं, परिवार, समाज,राष्ट्र के हित की सोचे स्वयं और राष्ट्र को एक माने ऐसे विचार विकसित करें।

उक्त कार्यशाला में खेल एवं परिचर्चा द्वारा  53 बहनों की सहभागिता रही l

Thursday, November 19, 2020

विवेकानंद केंद्र मध्य प्रान्त द्वारा विश्व बंधुत्व दिवस पर विमर्श का आयोजन


 कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के पचास वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विवेकानंद केंद्र मध्य प्रान्त ने विमर्श का आयोजन किया। इसका प्रसारण विवेकानंद केन्द्र की  यू ट्यूब चैनल पर 11 सितम्बर 2020 को सायं सात बजे से किया गया।

विवेकानंद केंद्र की राष्ट्रीय उपाधाक्ष्या पद्मश्री आदरणीया निवेदिता दीदी इस विमर्श में मुख्यवक्ता थीं। उन्होंने कन्याकुमारी से अपने उद्वोधन में विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के पचास वर्ष पूरे होने के महत्त्व को बताया। उन्होंने कहा कि शिला स्मारक का निर्माण स्वामी जी के 11 सितम्बर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के सन्देश से कई प्रकार से जुड़ा हुआ है।

पहली बात यह है कि स्वामी जी के 11 सितम्बर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के सन्देश के समान ही शिला स्मारक का निर्माण भी सर्व समावेशकता का उदाहरण है। इसीलिए माननीय एकनाथ जी ने उसी तिथि को शिला स्मारक के उद्घाटन के लिए चुना था। दीदी ने बताया कि शिला स्मारक के निर्माण में माननीय एकनाथ जी का दृष्टिकोण ‘संघर्ष नहीं सर्व सम्मति’ का था। उन्होंने इस कार्य के लिए 323 सांसदों से समर्थन प्राप्त किया था चाहे वह किसी राजनैतिक विचारधारा, क्षेत्र या धर्म के रहे हों। लगभग सभी राज्य सरकारों ने शिला स्मारक ने निर्माण में आर्थिक सहयोग किया और 85 लाख रूपये तो पूरे देश के सामान्य जन के एक - दो रूपये के योगदान से प्राप्त हुए थे। सही अर्थों में यह एक राष्ट्रीय स्मारक है और सर्वसमावेशकता का मूर्त रूप है।

दीदी ने बताया कि दूसरी बात जो शिला स्मारक को स्वामी जी के विश्व धर्म सम्मेलन के सन्देश से जोड़ती है वह यह है कि स्वामी जी ने वहां से भारत के पुनरुत्थान का कार्य प्रारंभ किया था और विवेकानंद शिला स्मारक उसी कार्य का एक मूर्त रूप है। भारत पर विदेशी आक्रमणों के बाद यह पहला नूतन निर्माण कार्य है जो अपने धर्म और परम्परा से जुड़ा है।

तीसरी बात है, स्वामी जी ने शिकागो के अपने व्याख्यानों में कहा था विश्व बंधुत्व का कार्य भारत के द्वारा होना है और वह आत्मीयता और निष्काम सेवा के द्वारा होगा। इसी संकेत को लेते हुए माननीय एकनाथ जी ने स्मारक निर्माण के पश्चात् ‘विवेकानंद केंद्र – एक अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन’ का निर्माण किया।

चौथी बात है, जिस प्रकार स्वामीजी शिकागो में भारत की सभी आध्यात्मिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे उसी प्रकार यह स्मारक और विवेकानंद केंद्र भी सभी आध्यात्मिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है।

दीदी ने अपने उद्बोधन के अंत में सभी से अपना निश्चित समय और ऊर्जा राष्ट्र कार्य में लगाने का आह्वान किया।

विमर्श के प्रारंभ में मध्य प्रान्त के संचालक माननीय श्री मनोहर देव जी स्वागत भाषण दिया एवं विमर्श की भूमिका रखी। उन्होंने कहा कि  ‘एक भारत विजयी भारत’ अभियान में माननीय एकनाथ जी की ही तरह हम सभी को जोड़ कर व्यापक संपर्क अभियान दुगनी शक्ति के साथ करना चाहेंगे। विमर्श के अंत में मध्य प्रान्त संपर्क प्रमुख श्री अतुल सेठ जी ने सभी का आभार व्यक्त किया, केंद्र की गतिविधियाँ संक्षेप में साझा कीं और ‘एक भारत - विजयी भारत’  से सभी को जुड़ने का आव्हान किया।

विमर्श का सञ्चालन मध्य प्रान्त प्रमुख श्री भंवर सिंह राजपूत ने किया। विदिशा नगर संगठक पूर्णिमा दीदी ने गीत और भोपाल विभाग संपर्क प्रमुख मनोज गुप्ता ने विवेक वाणी प्रस्तुत की। सम्पूर्ण कार्यक्रम का तकनिकी कार्य बीना नगर के कार्यकर्त्ता श्री रीतेश रस्तोगी द्वारा किया गया।

इस विमर्श को आज 12 सितम्बर 2020 दोपहर तक यू ट्यूब चैनल पर 1000 से अधिक व्यक्तियों द्वारा देखा गया है। इसे केंद्र के विभिन्न फेसबुक पेज पर भी लाइव किया गया था जिस पर 2000 से अधिक व्यक्तियों द्वारा देखे जाने का अनुमान है।

 

https://youtu.be/tR9S2od1uRU

Saturday, December 7, 2019

रायपुर में विवेकानंद शिला स्मारक के 50 वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान

 रायपुर। विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी एवं विवेकानंद विद्यापीठ कोटा रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद शिला स्मारक के 50 वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित व्याख्यान में आज सन्ध्या डॉक्टर ओम प्रकाश वर्मा ने कहा भारत का प्राण 5000 वर्ष पहले भी धर्म था, आज भी है। भारत एक जीवंत राष्ट्र है।  विश्व की अन्य सभ्यता आई व चली भी गई, कभी यूनान का परचम कभी रूस का परचम लहराया। वे दुनिया में छा भी गए किंतु कम समय के लिए। वर्तमान में उनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया । स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी के शिला पर 3 दिन, तीन रात चिंतन किए तथा भारत को दुर्दशा से मुक्ति हेतु चिंतन एवम् योजना लेकर निकले। उनका कार्य आज भी रामकृष्ण मिशन के माध्यम से चल रहा है। पद्मश्री माननीय निवेदिता दीदी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष – विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी संस्थान ने अपना अनुभव साझा किया, कि एक विजयी भारत बनाने के लिए देश के संपूर्ण नागरिकों को श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा । मेरा परिवार ही मेरा है इस सोच से आगे निकलना होगा। मेरा परिवार तो देश है ही, यह समाज भी मेरा है । यह देश भी मेरा है यह सोच लाना होगा । कन्याकुमारी के शिला  पर स्मारक निर्माण बेहद कठिन परिस्थितियों में हुआ था। तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री भक्त वत्सलम 
स्मारक निर्माण के सख्त खिलाफ थे, परंतु एकनाथ ने चातुर्य एवं कौशल का प्रयोग करते हुए 3 दिन में ही 323 सांसदों की सहमति पत्र ले आए। तत्पश्चात पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री के माध्यम से नेहरू तक यह बात पहुंची। तब उन्हे लगा कि 323 सांसदों की सहमति अर्थात पूरा देश स्मारक चाहता है। फिर उन्होंने मुख्यमंत्री को निर्देश दिया कि स्मारक का कार्य शुरू हो।
अन्ततोगत्वा कन्याकुमारी का शिला स्मारक आपके सामने है। कार्यक्रम के दौरान एक पुस्तक का विमोचन हुआ जिसका नाम शाश्वत प्रेरणा स्त्रोत शिलास्मारक, जिसके माध्यम से सम्पर्क अभियान चलाया जायेगा तथा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों हेतु प्रतियोगिता आयोजित किया जायेगा |  कार्यक्रम मे मात्र छाया के संचालक सुधाकर कोंडापुरकर का सम्मान भी किया गया  कार्यक्रम का संचालन विवेकानंद केंद्र के विभाग प्रमुख एवं प्रोफेसर सुभाष चंद्राकर जी ने किया। कार्यक्रम के समापन में मावजी भाई पटेल द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
 

बिलासपुर में एक भारत विजयी भारत विमर्श

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा बिलासपुर द्वारा 12 अगस्त 2019 को एक भारत विजयी भारत विषय में विमर्श का आयोजन किया गया l कार्यक्रम की मुख्य वक्ता विवेकानंद केंद्र की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े (पद्मश्री से सम्मानित)  रही, वे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि स्थानों में अपना वक्तव्य दे चुकी है एवं शिक्षा के क्षेत्र में एशिया का प्रतिनिधित्व की किया है उत्तर पूर्वांचल क्षेत्र में आपने जनजातियों के विकास उत्थान एवं सामंजस्य हेतु विशिष्ट कार्य किए हैं । कार्यक्रम की अध्यक्षता विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक अधिवक्ता प्रतीक शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि तखतपुर विधायक श्रीमती रश्मि आशीष सिंह रही l तीन ओमकार एवं सहनाववतु प्रार्थना से कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ.  अभ्यागतों का स्वागत स्मृति चिन्ह एवं पौधों से किया गया। विभाग संपर्क प्रमुख डॉ उल्हास वारे ने इस अवसर पर सभी मोचित पुस्तिका एक भारत विजयी भारत विषय से संबंधित सिलाई स्मारक सास्वत प्रेरणा स्त्रोत्र नामक पुस्तिका के विषय में संक्षिप्त जानकारी दी जो हमारी मुख्य वक्ता के द्वारा संकलित है एवं श्री वारे में अतिथियों का परिचय भी दिया।
नगर प्रमुख डॉ संजय आयदे ने  विवेकानंद केंद्र का परिचय बताते हुए बिलासपुर शाखा के कार्य पद्धतियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से  बताया जिसमें प्रमुख रुप से संस्कार वर्ग योग वर्ग स्वाध्याय वर्ग तथा केंद्र वर्ग का भी उल्लेख किया गया एवं वर्तमान में विवेकानंद की 1000 से अधिक शाखाएं एवं प्रकल्प देश में सेवा कार्य कर रही है । एकल गीत श्रीमती सरिता दीदी ने सुमधुर आवाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा  कार्यपद्धती प्रमुख विवेक पांडे द्वारा विवेक वाणी की प्रस्तुति के बाद मुख्य वक्ता का उद्बोधन एवं
मार्गदर्शन प्राप्त हुआ शिला स्मारक के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में आगामी सितंबर माह से 31 अगस्त 2020 तक महा संपर्क अभियान के दौरान लोक संपर्क लोक संग्रह लोक संस्कार और लोक व्यवस्था को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु विस्तार से बताया जिसका उद्घाटन आगामी 1 सितंबर 2019 को माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा होना है सिलाई स्मारक के निर्माण में आई बाधाओं में सिलाई स्मारक समिति से तत्कालीन सचिव श्री एकनाथ जी रानाडे की कुशलता एवं एक निष्ठा से संबंधित विभिन्न उदाहरणों से श्रोता अवगत हो सके । आरंभिक बाधाओं को 3 दिन में 323 सांसदों के हस्ताक्षर करा कर एक राष्ट्रीय स्मारक घोषित हुआ तत्कालीन राष्ट्रपति श्री वी वी गिरी एवं प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने स्मारक की पूर्णता उपरांत उद्घाटन सितंबर 1970 में किया । उद्घाटन सत्र की प्रक्रिया आगामी 2 माह तक चलती रही । स्मारक निर्माण हेतु सिर्फ कुछ लोगों से धनराशि ना लेते हुए पूरे भारत से एक एवं दो रुपए स्वेच्छा से दिया गया l जनमानस को जोड़ते हुए जीवंत स्मारक का निर्माण को पत्थर में प्रकटे प्राण से भी संबोधित किया जाता है । विशिष्ट अतिथि
श्रीमती रश्मि आशीष सिंह ने अपने मधुर स्मृतियों को सुनाते हुए मुख्य वक्ता द्वारा बताए गए मार्गग को अपनेेेे जीवन में उतारने का प्रयास करूंगी कहा । इस कार्यक्रम मेंं उन्होंने एक अलग अनुभूति को स्पर्श किया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने कहा सभी को जोड़ते हुए राष्ट्रहित में कार्य करना ही हमारे संगठन का प्रमुख उद्देश्य एवं लक्ष्य है तथा सभी का आभार प्रदर्शन करते हुए धन्यवाद ज्ञापन भी किया । कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र की प्रांत संगठन सुश्री रचना जानी का विशेष सहयोग रहा इस अवसर पर जेष्ठ नागरिक संघ के डॉक्टर प्रकाश देवराज एवं गोरे जी का भी सम्मान किया गया । कार्यक्रम का संचालन रश्मि द्वारा किया गया ।व्यवस्था प्रमुख अनिल साहू नगर संपर्क प्रमुख कैलाश त्यागी महामाया
विस्तार प्रमुख डॉक्टर संतोष ठाकुर कार्यपद्धती प्रमुख विवेक पांडे तथा बिलासा विस्तार प्रमुख राकेश पांडे तथा कार्यालय प्रमुख प्रभाकर लिडबिङे संरक्षक डॉ एस पी सिंह विभिन्न संगठनों से आए हुए गणमान्य नागरिक भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे नगर सह संपर्क प्रमुख टिकेश्वर कौशिक गौरीशंकर कौशिक के साथ समस्त दायित्व वान कार्यकर्ताओं के माध्यम से इस कार्यक्रम को पूर्णता प्रदान किया गया । संपूर्ण कार्यक्रम विवेकानंद केंद्र के विभाग संचालक डॉ किरण देवरस के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

Wednesday, November 27, 2019

International Day Of Yoga 2019 Celebrated at Madhya Pradesh & Chhatishgarh


Vivekananda Kendra Kanyakumari, Madhya Pradesh & Chhatishgarh organized fifth International Day Of Yoga on 21st June 2019 at 18 places of Madhya Pradesh & Chhatishgarh, in which 2,402 people participated. The programs have been organized in five Vibhag of Vivekananda Kendra Kanyakumari, Madhya Pradesh & Chhatishgarh.
In Indore Vibhag 5 places International Day Of Yoga has been organized in which 504 participants, in Bhopal Vibhag 8 Places - International Day Of Yoga has been organized in which 1,118 participants, in Gwalior Vibhag 1 Place - International Day Of Yoga has been organized in which 80 participants, in Jabalpur Vibhag 2 Places - International Day Of Yoga has been organized in which 200 participants and in Raipur and Bilaspur Vibhag 2 Places - International Day Of Yoga has been organized in which 500 participants.

Saturday, December 22, 2018

गीता जयंती के उपलक्ष्य में फुटबॉल प्रतियोगिता

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा -रायपुर द्वारा गीता जयंती के उपलक्ष्य में फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया  l इस प्रतियोगिता में तीन टीमों ने भाग लिया, साथ ही प्रत्येक टीम द्वारा भगवत गीता का श्लोक अर्थ सहित प्रस्तुत किया गया, इसके पश्चात स्वामी triyambakananda  जी का मार्गदर्शन हुआ उन्होंने कहा स्वामी विवेकानंद के विचारों को लेते हुए सर्वप्रथम हमारे युवकों को बलवान बनना होगा। शरीर में तेजस्वी रक्त होने पर ही तुम श्री कृष्ण की महान शक्ति और प्रतिभा को अच्छी तरह समझ सकोगे जिस समय तुम्हें अपने पौरुष का भान होगा उस समय तुम उपनिषद और आत्मा की महिमा को भली-भांति समझ सकोगे हम बहुत सी बातें तोते के समान बोलते हैं, उसके अनुसार आचरण नहीं करते निरर्थक बातें करना हमारी आदत हो गई है, इसका कारण है शारीरिक दुर्बलता । इस प्रकार दुर्बल मस्तिष्क कुछ नहीं कर सकता हमें अपने मस्तिष्क को बलवान बनाना होगा हमें खून में तेज और स्नायुओं में बल की आवश्यकता है, लोहे की भुजाएं और फ़ौलाद का शरीर चाहिए न कि दुर्बलता लाने वाले निरर्थक विचार।  इस प्रतियोगिता में बच्चो द्वारा भगवत गीता का श्लोक अर्थ सहित बताया गया। इसी आधार पर उन्हें प्रथम , द्वितीय, तृतीय पुरस्कार दिए गए। इस कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक श्री मावजी भाई पटेल तथा अन्य सभी कार्यकर्ता उपस्थित थेI

Friday, July 21, 2017

गुरुपूर्णिमा उत्सव बिलासपुर

1) विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा बिलासपुर द्वारा 09/07/2017 को गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह 10 बजे से 11:30 तक गुरु पूर्णिमा उत्सव का आयोजन विवेकानंद केंद्र कार्यालय शांति नगर बिलासपुर में किया गया था l उल्लेखनीय है क़ि बिलासपुर शाखा 2013 से विभिन्न आयोजनो के माध्यम से व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण में लक्ष्य को ध्यान में रख कर कार्य कर रही है । यूं तो वर्ष भर में कई पूर्णिमा आते हैं परंतु आषाढ़ मास के इस पूर्णिमा का गौरवशाली इतिहास है इसे गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है l विवेकानंद केंद्र की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम का प्रारंभ तीन ओंकार व मंगलाचरण से हुआ, तत्पश्चात गुरु पर आधारित भजन  कोमल दीदी ने लिया । विवेकानंद केंद्र के विस्तार प्रमुख डॉ. संजय आयदे जी ने  संक्षिप्त में गुरु पूर्णिमा पर प्रकाश डाला तथा बताया कि हम सभी एकात्मा भाव से ओम को गुरु के रुप में मानते हैं ।  तत्पश्चात विवेकानंद केंद्र के विभाग संपर्क प्रमुख आदरणीय उल्हास वारे जी ने अपने विस्तृत उद्बोधन में बताया गुरुपूर्णिमा उत्सव संगठन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है l उन्होंने केंद्र प्रार्थना में निहित ज्ञान के तत्वों को सरल शब्दों में व्याख्या कर समझाया एवं व्यक्तित्व निर्माण में आवश्यक एवम् कार्यकर्ता के विकास हेतु करणीय बातो को बताते हुए कार्यों की प्राथमिकता तय कर जरूरी कार्य को पहले करना आवश्यक बताया । कार्यक्रम का सञ्चालन  आशुतोष शुक्ल ने किया । कार्यक्रम में कुल लगभग 30 लोग,  दायित्ववान कार्यकर्ता तथा  नगरवासी, प्रबुद्धजन आदि उपस्थित थे ।

2) संस्कार वर्ग में गुरुपूर्णिमा: बिलासपुर के राजेंद्र नगर के साप्ताहिक संस्कार वर्ग में 8/7/17 को गुरुपूर्णिमा उत्सव मनाया गया । कुल " उपस्थिति लगभग 80" (अस्सी) रही । संस्कार वर्ग के प्रारम्भ में गुरु पूर्णिमा मनाई गयी, जिसका प्रारम्भ ॐ की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्ज्वलित करके 3 ओमकार व मंगलाचरण से हुआ । इसके उपरांत संस्कार वर्ग का मासिक गीत बच्चे अच्छे से लयपूर्वक गाये । इसके बाद युगल भैया के पीछे बच्चों ने "गुरुस्तोत्र" की तीन पंक्तिया  दोहराया । गुरुपूर्णिमा का महत्व बताते हुए आशुतोष भैया ने कहा संगठन में हम दिव्य भाव से ॐ को गुरु मानते हैं साथ ही केंद्र परिचय बताकर ॐ रूपी "एक प्रतीकात्मक गुरु" की आवश्यकता समझाया l इसके बाद सामान्य रूप से हर बार की तरह संस्कार वर्ग चला जिसमे आज्ञा अभ्यास, खेल, गीत, कहानी हुआ ।

3) आगामी -- संस्कार वर्ग में आगामी गुरुवार 13 जुलाई को संध्या 5:30 से 6:30 बजे तक गुरु पूर्णिमा मनायी जायेगी ।

4) आगामी -- नया कार्य स्थान कोरबा में 21 जुलाई को सम्भावित समय संध्या 7 - 8 बजे मनायी जायेगी, जिसमे मध्य प्रान्त संगठक मा. सुश्री रचना दीदी की विशेष गरिमामयी उपस्थिति एवम मार्गदर्शन प्राप्त होगा तथा विभाग सम्पर्क प्रमुख आ. डॉ. उल्हास वारे जी का भी सानिध्य प्राप्त होगा ।

Wednesday, June 28, 2017

योग दिवस बिलासपुर में

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा बिलासपुर द्वारा विश्व योग दिवस के उपलक्ष में 21 जून 2017 को संध्या 5:30 से 7:00 बजे तक योग अभ्यास एवं परिचर्चा का आयोजन केंद्र कार्यालय शांति नगर बिलासपुर में किया गया था. जिसमें प्रन्द्रह दयित्ववान कार्यकर्ताओ की उपस्थिति रही ।

योगाभ्यास का प्रारंभ विवेकानंद केंद्र की गौरवशाली परंपरा के अनुसार 3 ओंकार एवं सहना ववतु से हुआ, प्राणायाम का अभ्यास कराया गया । इसमें विभिन्न लोगों ने भाग लिया केंद्र के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं विभाग संपर्क प्रमुख डॉक्टर उल्हास वारे ने योग के चार प्रकारों को बताया कर्मयोग, ज्ञान योग, भक्ति योग तथा क्रिया योग चारों प्रकार उनकी सुव्यवस्थित तथा सारगर्भित व्याख्या के उपरांत उन्होंने कहा अपने अंदर छुपी शक्तियों को उभारने के लिए इन चारो का उचित समन्वयन आवश्यक है तथा यह एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है । व्यवस्था प्रमुख प्रभाकर लिडबिडे जी ने कहा विद्यार्थियों के लिए योग अत्यंत लाभप्रद है, इससे विद्यार्थियों की एकाग्रता पड़ती है तथा उनकी कार्य कुशलता में वृद्धि होती है इसलिए हर विद्यार्थी को एक घंटा योग अवश्य करना चाहिए । संचालक एडवोकेट प्रतीक शर्मा जी ने बताया वर्तमान में योग का प्रचलन बहुत अधिक बढ़ गया है इसका प्रमुख कारण यही है कि योग करने से सिर्फ फायदे ही होते हैं इसका कोई भी साइड इफेक्ट अथवा नुकसान नहीं है इसलिए इसकी जनसामान्य में स्वीकार्यता बढ़ गई है । विस्तार प्रमुख डॉक्टर संजय आयदे  जी ने कहां के लोग भारत की ही देन है एवं विश्व स्तर पर इसके स्वीकार्यता हमारे लिए गर्व का विषय है आज लगभग 200 देशों में योग किया गया, विदेशी न्यूज चैनल पर भी योग करते हुए लोग दिखाई थी जो कि इसकी पुष्टि करता है । विस्तार प्रमुख डॉक्टर धनंजय मिश्रा ने वृक्ष का उदाहरण देते हुए योग की महत्ता का प्रतिपादन किया तथा कहा जिस प्रकार का वृक्ष के लिए जड़ अत्यंत महत्वपूर्ण है उसी प्रकार मनुष्य के शरीर के लिए उसका मस्तिष्क में अत्यंत महत्वपूर्ण है , उन्होंने विज्ञान की भाषा में भी विभिन्न चीजों को समझाये । योग लेते समय ही व्यवस्था प्रमुख आशुतोष शुक्ल ने योग में आवश्यक सावधानी बताते हुए योग को व्याधि से समाधि की यात्रा कह कर   विभिन्न रोगों में इससे होने वाले फायदों के बारे में बताया तथा योग रोग उपचार का साधन मात्र ना होकर एक "जीवन पद्धति" होने की बात कही ।

सर्वे भवंतु सुखिन: के साथ समापन हुआ, तत्पश्चात केंद्र प्रार्थना कर के लोग अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किये । 

Tuesday, May 30, 2017

संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर @ ​रायपुर

राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण आज की आवश्यकता है। बालकों में संस्कारों का सिंचन कर उनमें राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण किया जा सकता है। उक्त विचार व्यक्त करते हुए  डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना​ (आरएसएस प्रान्त सहसंघचालक)​ ने कहा कि बिना पराक्रम के कुछ भी प्राप्त नहीं होता। डॉ.​ पूर्णेन्दु ​सक्सेना विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा रायपुर की ओर से आयोजित तीन दिवसीय आवासीय "संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर" के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर नगर के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ.विवेक चौबे तथा केन्द्र के नगर संचालक मावजीभाई पटेल मंच पर विराजमान थे।

डॉ.पूर्णेन्दु ने कहा कि धर्म प्रत्येक मनुष्य के हृदय में विद्यमान है, इसी के बल पर व्यक्ति उचित-अनुचित, सही-गलत के बीच के अंतर को समझता है। उन्होंने कहा कि आज्ञापालन और अनुशासन यदि हमारे जीवन में है तो हम निश्चित रूप से सफल होंगे। उन्होंने सद्गुरु कबीर साहब, चाणक्य, गुरु गोविन्द सिंह तथा स्वामी विवेकानन्द के जीवन प्रसंग व विचारों के आधार पर नैतिक मूल्यों के महत्व को बताया।

इस अवसर पर डॉ.विवेक चौबे ने कहा कि संस्कार हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण भाग है। हमारी संस्कृति हमें संस्कारित करती है। जब हम पूरी निष्ठा व ईमानदारी से कार्य करेंगे तो हमारी प्रतिभा निखरेगी। हम हर कार्य में निपुण होंगे। उन्होंने कहा कि प्रतिभावान व चरित्रवान लोगों से ही राष्ट्र का विकास होता है।

इससे पूर्व "राष्ट्र की जय चेतना का गान वन्दे मातरम्" यह शिविर गीत प्रस्तुत किया गया। शिविर की प्रस्तावना केन्द्र के सहनगर प्रमुख रूपेश अवधिया ने रखी तथा संचालन नमन शुक्ला ने किया।

Saturday, February 18, 2017

बिलासपुर में राष्ट्रिय युवा दिवस

"स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था मुझे 100 युवाओं की आवश्यकता है और आज हमारे सामने हजारों युवा हैं अब समाज में सकारात्मक परिवर्तन का उत्तम समय आ गया है; युवाओं को सही मार्ग दिखाने की आवश्यकता है मैं आज इस स्थिति में हूं इसके पीछे सही मार्गदर्शन ही है" यह उद्गार बिलासपुर कलेक्टर श्री अन्बलगन पी ने विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा बिलासपुर द्वारा आयोजित स्वामी विवेकानंद जयंती पर व्यक्त किए l इस अवसर पर मंच में कलेक्टर महोदय अम्बलगन पी. ; संघ के मा. काशीनाथ गोरे, तथा विवेकानंद केंद्र के डॉ प्रतीक शर्मा, डॉ देवरस, डॉ ओम माखीजा व डॉ उल्हास वारे थे l अतिथियों को डॉ माखीजा द्वारा विवेकानंद के विचार लिखित फ्रेम से सम्मानित किया गया । संघ के काशीनाथ गोर जी ने कहा स्वामी जी अनेक लोगो के प्रेरणा स्तोत्र है जिसमे स्टील बनाने वाली टाटा कंपनी भी शामिल है l समस्त कार्यक्रम का नियोजन नगर संगठक बिलासपुर मा. कुलदीप जी द्वारा किया गया, उल्लेखनीय है कि विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की बिलासपुर शाखा सन 2013-14 से सक्रिय है एवं विवेकानंद जयंती के अवसर पर विवेकानंद उद्यान कंपनी गार्डन में शहर के मध्य उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था; जिसमें विवेकानंद केंद्र के प्रान्त सम्पर्क प्रमुख उल्हास वार जी; नगर संगठक कुलदीप जी; नगर प्रमुख गौरीशंकर जी; व्यवःथा प्रमुख भरत पखमोडे जी;विस्तार प्रमुख डॉ संजय आयदे जी तथा विवेक पांडे जी; लिडबिडे जी; नगर व्यवस्था प्रमुख आशुतोष शुक्ल आदि की प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष सहभागिता रही l मुक्त वि.वि. के कुलसचिव राजकुमार जी; केंद्रीय वि वि के प्रो एस एस ठाकुर जी; पुजारी जी व नगर के अन्य नागरिक भी काफी संख्या मे उपस्थित रहे l उद्घाटन कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर अम्बलग्न जी व काशीनाथ जी ने विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित "चलित रथ" का उद्घाटन स्वामी विवेकानंद जी के प्रतिमा पर पुष्पार्पण करके किया । यह रथ बिलासपुर नगर में भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुचा जिसमे उसलापुर; नेहरू चौक, तिफरा कालीमंदिर; रेलवे स्टेसन, हेमुनागर, राजकिशोर नगर, देवरीखुर्द आदि स्थानी पर गया l इसके अतिरितक स्थानीय कार्यक्रम के प्रमुख स्थान मंगला, पारिजात कॉलोनी,सरकंडा,पुराना बस स्टेण्ड,मंदिर चौक,कोनी,चौबी कालोनी, बहतराई, गुरुघासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, साइंस कॉलेज, आईटीआई कोनी, कोनी थाना परिसर, कोटा आदि स्थानों पर पुष्पर्पण के माध्यम से मनाया गया । बिलासपुर में विवेकानंद केंद्र के नेर्तित्व में सभी छोटे बड़े कार्यक्रम कुल मिलाकर 51 से अधिक जगह विवेकानंद जयंती मनाई गयी |

पुष्पांजली ,रैली ,भाषण,प्रतियोगिता,रथ कुल 51 कार्यक्रम मनाये गये जिसमे कुल उपस्तिथि 5582 ।

1) बिलासपुर :33-2452

2) पेण्ड्रा ,गौरेला : 8-330

3) मुंगेली : 4-2050

4) पथरिया : 2-400

5) कर्गी रॉड कोटा : 3-300

6 ) रायगढ़ : 1-100

कुल कार्यक्रम :51 - 5582

* स्कुल - 17

* कॉलेज - 03

* विश्वविद्यालय - 02

* छात्रावास - 02 .

* रैली। 02

* विवेकानन्द रथ 02.

संस्कार बिना शिक्षा अधूरी : "बनो और बनाओ" युवा नेतृत्व कार्यशाला सम्पन्न

रायपुर, फरवरी 05 : विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा रायपुर की ओर से रविवार को युवा नेतृत्व कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला "बनो और बनाओ" इस थीम पर केन्द्रित थी। युवाओं को सम्बोधित करते हुए विवेकानन्द केन्द्र के कार्यकर्ता लखेश्वर चन्द्रवंशी ने कहा कि शिक्षा व संस्कार दोनों ही मनुष्य जीवन का आधार है। संस्कार के बिना शिक्षा अधूरी है। इसलिए समाज में शिक्षा युक्त वातावरण की निर्मिति करनी होगी। चंद्रवंशी ने आगे कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने संस्कार के लिए Be and Make (बनो और बनाओ) का सूत्र दिया है। स्वामीजी ने Be and Make कहा है, लेकिन कई बार हम इसे Be than Make समझ लेते हैं। यह ठीक नहीं। बनने और बनाने की प्रक्रिया साथ-साथ होती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नगर के विभिन्न स्थलों पर संगठित होकर संस्कार वर्ग चलाएं जिससे कि बालकों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास हो सके।

इस कार्यशाला में चपलतावर्धक, तितिक्षावर्धक, बलवर्धक व एकाग्रतावर्धक मैदानी खेल का प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर केन्द्र के नगर संगठक बलबीर कुशवाह ने वीर सावरकर व मदनलाल धींगरा के प्रेरक जीवन प्रसंग को कथाकथन के माध्यम से प्रस्तुत किया। आयोजन की सफलता के लिए देवेन्द्र नगर गर्ल्स कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ.मनीषा गर्ग तथा स्थानीय कार्यकर्ता प्रेमानन्द साहू, नंदिनी तांडी, देवश्री साहू, अखिलेश नामदेव व नमन शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला के दौरान केन्द्र के सहनगर रूपेश अवधिया, सहव्यवस्था प्रमुख विष्णु महोबिया, नटवरलाल टाक प्रमुखता से उपस्थित थे।

Monday, January 2, 2017

Geeta Jayanti Bilaspur

हर्ष का विषय है की इस वर्ष भी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा - बिलासपुर द्वारा ‘गीता जयंती’ मनायी गयी l मंच पर श्री प्रभाकर लिडबिड़े जी (पूर्व व्यवस्था प्रमुख वि.के.) तथा मुख्या वक्ता डा. संतोष तिवारी जी (आचार्य संस्कृत एवं योग विशेषज्ञ) विराजमान रहे l उत्सव का प्रारम्भ वि.के. की परम्परा के अनुसार ओमकारा नाद तथा प्रार्थना से की गयी, आ. कुलदीप जी (नगर संगठक) गीत लिए तत्पश्चात उदबोधन हुआ l यह कार्यक्रम केंद्र कार्यालय में १०/१२/२०१६ को संध्या ०६:०० से ०७:३० तक मनाया गया, जिसमे नगर के अनेक महानुभाव, युवा तथा केंद्र कार्यकर्ता सभी परिवार के साथ उत्सव में 65 लोग  उपस्थित रहे, मख्य वक्ता  द्वार ‘गीता’ पर दिए गये व्यक्तव्य का लाभ लिए l

Friday, December 16, 2016

रायपुर में गीता जयंती का कार्यक्रम

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा –रायपुर द्वारा गीता जयंती के उपलक्ष्य में परिवार मिलन का कार्यक्रम रखा गया।
इस कार्यक्रम में संस्कार वर्ग के बच्चों द्वारा दैनिक जीवन में गीता का हिंदी में प्रस्तुतीकरण हुआ।  तथा कर्मयोग श्लोक संग्रह का पठन किया गया।  केंद्र की व्यवस्था प्रमुख श्रीमती अल्पना मोहदिवाले द्वारा मेसेज पास खेल खिलाया गया।  एवं विजेता टीम को पुरुस्कार रूप में पुस्तक भेंट की गयी। इस कार्यक्रम में मुख्या वक्ता के रूप में पंडित संतोष जी महाराज का विशेष मार्गदर्शन रहा , उन्होंने कहा कि  गीता के माध्यम से हममे त्याग की भावना आती है अतः हम आसक्ति रहित होकर कर्म करे जिस तरह से कीचड़ में कमल रहते हुए भी कीचड़ उस पर नही लगता उसी तरह संसार में कमल की भांति हम भी रहे। उन्होंने कहा की जब मनुष्य की कामना की पूर्ति नही होती तो व्यक्ति क्रोधित होता है एवं पतन की और गिरता है। हम सभी पर दया का भाव रखे किन्तु मोह बिलकुल न करे ।  अंत में उन्होंने कहा की अगर हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म हमारी रक्षा करेगा। कार्यक्रम का समापन शांति मन्त्र एवं केंद्र प्रार्थना के साथ किया गया।

Monday, December 5, 2016

बिलासपुर में युवा प्रेरणा शिविर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा  बिलासपुर द्वारा युवा प्रेरणा शिविर का आयोजन 25 नवंबर से 29 नवंबर तक किया गया है इसमें लगभग 80 शिविरार्थी शामिल तथा कार्यकर्ताओं को मिलाकर कुल संख्या लगभग 100  है,l

इस शिविर का उद्देश्य युवा में राष्ट्रीय चेतना का जागरण करते हुए उन्हें चारित्रिक दृष्टि से उन्नत बनाना है ताकि यह सभी युवा विवेकानंद केंद्र के मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने में यथोचित सहयोग प्रदान कर सकेlअलग-अलग महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालय से उठो जागो युवा अभियान के अंतर्गत लिखित परीक्षा एवम् युवा कार्यशाला के माध्यम से चयनित युवक - युवतियों का यह शिविर है ।

आदरणीय रचना दीदी मध्य प्रांत संगठक विवेकानंद केंद्र शिविर अधिकारी के रूप में इस शिविर में उपस्थित रहेंगी l इस  का उद्घाटन सत्र 25 नवंबर की संध्या को हुआ, जिसमें विवेकानंद केंद्र के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉक्टर उल्लास वारे जी तथा संघ के विभाग संघचालक आदरणीय काशीनाथ गोरे जी मंचासीन हुए, उन्होंने अपने उद्बोधन में वैभवशाली भारत के इतिहास में प्रकाश डालते हुए भारत के 'सोने की चिड़िया' होने के पीछे वैदिक धर्म के पालन होने को बताया साथ ही उन्होंने साथ मिलकर कार्य करने पर जोर दिया l

यह शिविर बहतराइ रोड स्थित इन डोर  स्टेडियम बिलासपुर में आयोजित किया गया है जो की 29 नवंबर 2016 तक चलेगा, राष्ट्र कार्य में सहयोग हेतु युवाओं से आह्वान के साथ समापन सत्र होगा l

बिलासपुर में साधना दिवस

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा बिलासपुर द्वारा केंद्र कार्यालय में 19 नवंबर 2016 की संध्या को 5:00 बजे से 7:00 बजे तक साधना दिवस मनाया गया ।

कार्यक्रम की शुरुआत 3 ओंकार तथा प्राथना से हुई । शत शत नमन एकनाथ जी... गीत हुआ इसके उपरांत मुख्य वक्ता का उद्बोधन  हुआ, उन्होंने माननीय एकनाथ जी के जीवनी तथा कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को बताया । विवेकानंद केंद्र की परम्परा के अनुसार दायित्वों की घोषणा की गयी जिसके अनुसार कुछ कार्यकर्ताओं के दायित्व में परिवर्तन किया गया तथा कुछ नए कार्यकर्ताओं को भी दायित्व दिया गया इसके बाद आदरणीय कुलदीप भइया नगर संगठन विवेकानंद केंद्र बिलासपुर ने कार्यकर्ताओं को दायित्वबोध के बारे में बताया तथा साथ ही करणी तथा और करणीय कार्य के बारे में भी बताया। नए दायित्वों के अनुसार अलग - अलग समूहों में बैठक हुई । पुष्पार्पण के पश्चात केंद्र प्रार्थना करके कार्यकर्ता गंतव्य की ओर प्रस्थान किये ।