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Monday, July 6, 2026

Vimarsha Programme on Hindu Samrajyotsava Diwas organized at Mysore

Vivekananda Kendra Kanyakumari, Karnataka Prant, Chamundeshwari Devi Vibhag, Mysore Branch organized a Vimarsha programme on 20 June 2026, from 6:00 pm to 7:00 pm. The event, centered on the topic "Chhatrapati Shivaji Maharaj-Hindu Samrajyotsava Diwas," drew a total of 35 participants, with 27 joining online and 8 attending offline.

The keynote speaker, Sri Nagesh Prabhu Ji, Vyavastha Pramukh, Chamundeshwari Devi Vibhag, delivered an insightful address tracing the glory of ancient India and its global influence. He highlighted the severe challenges external invasions posed to the nation's culture, dharma, and values, and explained how Chhatrapati Shivaji Maharaj envisioned and established Hindavi Swarajya to restore freedom, self-respect, and national pride.

Furthermore, Sri Nagesh Prabhu Ji emphasized the deep significance of Hindu Samrajyotsava, which commemorates Shivaji Maharaj’s historic coronation and the dawn of a kingdom built entirely on justice, courage, and self-rule. The inspiring discourse left the attendees motivated to emulate Shivaji Maharaj’s ideals of protecting dharma, respecting all communities, and serving society with unwavering dedication and integrity.

The programme concluded on a high note, marked by enthusiastic interaction from both the virtual and physical audiences.

Thursday, May 28, 2026

Shaping Young Minds - Vimarsha at VKV (NEC) Baragolai

Vivekananda Kendra Vidyalaya (North Eastern Coalfields), Baragolai in Assam Prant organized a highly motivating Vimarsha on the topic "Shaping Young Minds" on May 27, 2026, at 3:45 PM. The event witnessed an impressive gathering of 300 attendees, including the parents of Class X and XII students, members of the Nagar Samiti and Amrit Parivar, alongside the school's teachers and staff.

The solemn occasion was graced by several distinguished dignitaries, including Mananeeya Shri M. Hanumantha Raoji, All India Vice President of VRM&VK, Sushree Alaka Gauri Joshi Didi, Assam Prant Sangathak, and Sushree Pompha Didi, Vibhag Sangathak. Engaging deeply with the parents and teachers, the esteemed speakers shared profound, inspiring insights into leading a purposeful life, nurturing core family values, and fostering the holistic development of students.

The event concluded with the enriching interaction left the audience deeply inspired and reinvigorated in their collective educational journey. 

Saturday, April 16, 2022

विमर्श - स्वामी विवेकानन्द जयंती - बिहार-झारखण्ड प्रान्त




 

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, बिहार-झारखण्ड प्रान्त द्वारा स्वामी विवेकनन्द जयंती के सुअवसर पर रविवार, 16 जनवरी 2022 को संध्या 4:30 - 6:00 बजे ऑनलाइन गूगल मीट पर मनाया गया।  जिसमे कुल 277 लोगो ने पंजीयन कराया।  जिसमे उपस्थिति 172 की रही कुल 10 संचालन चमू की संख्या रही।  

कार्यक्रम का शुभारम्भ तीन ओमकार प्रार्थना, समर्थ भारत पर्व परिचय से हुआ।  उसके बाद गीत (भुवनमण्डले नवयुगमुदयतु ) एवं वक्ता परिचय हुआ।  मुख्य वक्ता आ. मोनिका अरोड़ा, अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली एवं सामाजिक कार्यकर्ता का मार्गदर्शन स्वदेश मंत्र के बाद हम सबको मिला।  मुख्य वक्ता के मार्गदर्शन के बाद प्रश्नोत्तरी हुआ, जिसमे सब लोगो ने अपनी जिज्ञाषा रूपी प्रश्न पूछे जिसका मुख्य वक्ता द्वारा उतर दिया गया।  उकसे बाद विवेकानन्द केन्द्र द्वारा आगमी कार्यक्रमों की सुचना दी गई।  कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं शांति मंत्र से हुआ।

विमर्श - स्वामी विवेकानन्द जयंती - रांची नगर




 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-रांची द्वारा विमर्श कार्यक्रम का  बुधवार, 12 जनवरी 2022 को दोपहर  1:00-2:30 बजे ऑनलाइन गूगल मीट पर आयोजन किया। गया कुल उपस्थिति 48 की रही। जिसमे 8 संचलन चमू का कार्यकर्ता उपस्थित रही।

 

कार्यक्रम का संचलन तीन ओमकार प्रार्थना,  केंद्र परिचय एवं गीत से हुआ।  उसके बाद विवेकवाणी एवं वक्ता परिचय के बाद मुख्य वक्ता आ. प्रबल कुमार सेन जी का मार्गदर्शन हम सब को मिला। उसके बाद प्रश्नौत्तरी हुआ; जिसमे मुख्य वक्ता द्वारा श्रोता द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर मिला। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन, आवाह्न एवं शांति मंत्र से हुआ।

Wednesday, April 13, 2022

विमर्श कार्यक्रम | रांची नगर




 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा-रांची द्वारा शनिवार, 23 अक्टूबर 2021 को संध्या 4:00-5:30 बजे तक चिन्मय मिशन आश्रम, बड़ी तलाब, रांची में आयोजन किया गया जिसमे कुल उपस्थिति 40 रही ।

कार्यक्रम का शुभ्रम्भ तीन ओमकार प्रार्थना से हुआ उसके पश्चात गीत (योगमय जीवन हमारा) उसके बाद विषय प्रवेश एवं वक्ता परिचय, विवेक वाणी के बाद "योग: कर्मसु कौशलम्‌" विषय पर माननीय हनुमंत राव जी, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष, विवेकानन्द केन्द्र का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का समापन आगमी सुचना, धन्यवाद ज्ञापन एवं शांति मंत्र से हुआ।

विमर्श कार्यक्रम | भागलपुर नगर




 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी,शाखा-भागलपुर द्वारा विमर्श कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021 को संध्या 6:00-7:30 बजे आत्मा सभागार, जिला कृषि भवन ,तिलकामांझी में आयोजित किया गया। कुल उपस्थिति 72 की रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। केन्द्र परिचय नगर संपर्क प्रमुख जी द्वारा किया गया। केन्द्र के सक्रिय कार्यकर्त्ता डॉ. कुमार सुनीत जी द्वारा केन्द्र कार्य से जुड़ने का अनुभव साझा किया गया। मुख्य अथिति डी. आई. जी. सुजीत कुमार ने जीवन की द्वंद को उद्भाषित करते हुए उन्होंने जीवन के हर पहलू, हर जीव के संदर्भ को लिया है। अनिश्चय,उहा-पोह की स्थिति से उवरने  की परिभाषा द्वंद है द्वंद दो विपरीत परिस्थितियों के बीच चलने वाले क्रिया-कलाप को उद्भाषित करता है।

मुख्य वक्ता हनुमंत राव जी,अखिल भारतीय उपाध्यक्ष, विवेकानन्द केन्द्र  ने  द्वंदता का मूलभूत कारण बाहर नहीं बल्कि अपने भीतर है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन मे दो रवैया होता है एक है श्रेयस मार्ग ,दूसरा है प्रेयस मार्ग में  इसका सरल अर्थ है। एक जीवन की सफलता और दूसरा है सार्थकता ।  कर्म प्रधान शैली  न हो तो जीवन मे द्वंद ही पलता है। जहां द्वंदता हैं वहाँ लड़ाई है ऐसा श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं । जहाँ अहंकार और ममकार है वहाँ प्रेयस और श्रेयस है। आत्म-मुक्ति के साथ जगत कल्याण की कामना जीवन जगत में हो। आशक्ति रहित काम-निष्काम भाव से कर्म करना हमारे जीवन का धेय्य होना चाहिए । द्वंदता का जन्म ,द्वंदता का बीज बाहर नहीं भीतर है । सूचनाएं नगर सह प्रमुख मिहिर मोहन मिश्र जी   द्वारा दी गई,धन्यवाद ज्ञापन नगर व्यवस्था प्रमुख बिनीत सिन्हा जी द्वारा किया गया और कार्यक्रम का संचालन विजय कुमार वर्मा ने किया। आज के विमर्श कार्यक्रम में नगर के गणमान्य जनों की बढ़ -चढ़कर उपस्थिति रही।

विमर्श कार्यक्रम | गया नगर



 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा-गया द्वारा विमर्श कार्यक्रम शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2021 को संध्या 3:30-5:00 बजे तक धर्म सभा भवन, रमण रोड, गया में आयोजन किया गया जिसमे कुल उपस्थिति 32 रही।

कार्यक्रम का शुभारम्भ तीन प्रार्थना से हुआ।  उसके बाद गीत, वक्ता परिचय, परिचय के बाद  " स्वामी विवेकानन्द के चिंतन में नारी शक्ति " विषय माननीय हनुमन्त राव जी, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष, विवेकानन्द केन्द्र का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ कार्यक्रम का समापन शान्ति मंत्र से हुआ।

'समर्थ युवा-समर्थ भारत '- युवा विमर्श - भोपाल नगर


 समर्थ युवा-समर्थ भारत -युवा विमर्श कार्यक्रम ,विवेकानंद केंद्र  कन्याकुमारी , शाखा-भोपाल

18 अक्टूबर 2021, सोमवार शाम 6:30-7:30 बजे विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा भोपाल  द्वारा युवा विमर्श कार्यक्रम का आयोजन गूगल मीट माध्यम द्वारा आयोजित किया गया।

     भोपाल विभाग  के सह विभाग प्रमुख तथा विवेकानंद स्कूल ...के संचालक श्री संजय पवार जी ने  प्रभावशील मार्गदर्शन किया,जिसमें उपस्थित करीब 150 नगर के युवा लाभान्वित हुए ।

कार्यक्रम का शुभारंभ 3ऊँकार प्रार्थना व एक्य मंत्र से हुआ ,पश्चात् गीत बहिन स्तुति पाठक तथा विवेकवाणी भाई राजकुमार ने ली । संचालन डॉ जितेन्द्र गुप्ता जी द्वारा किया गया ।

केन्द्र परिचय श्री मनोज पाठक जी  व मुख्य वक्ता परिचय श्री जितेन्द्र गुप्ता जी द्वारा दिया गया ।

संजय जी ने कहा कि सफलता की भागदौड़ में हम सब सफल होना चाहते हैं किंतु जीवन के 2 पहलू होते हैं-1-सफलता, 2-सार्थकता ।युवाओं के साथ विमर्श करते हुए संजय जी ने दोनों पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि जीवन में सफल होना मतलब सार्थकता नहीं है अपितु सार्थकता सफलता का पर्याय है ।

संजयजी ने स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंदो तथा एपीजे कलाम साहब की समर्थ भारत तथा विश्व पटल पर भारत को विश्व गुरू के रूप मे देखने के सपने को सार्थक करने में आज के युवाओं के योगदान की बात कही। उन्होने कहा कि हमारे मनीषियों द्वारा देखे गये सपनो में हमारा अपना योगदान क्या है ? व्यक्तिगत उन्नति के साथ साथ हम क्या अपने भारत के लिये कुछ कर रहे हैं या सिर्फ स्वकेंद्रित होकर रह गये हैं, इसका युवाओं को चिंतन/मनन और आत्मावलोकन करना चाहिये ।

संजय जी ने युवाओं से राष्ट्र के विकास में जो बाधक है उसे छोड़ने तथा राष्ट्र हित के लिये कार्य करने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि, नुकसान के बिंदु जैसे समय की बर्बादी करने वाले कार्यों पर नियंत्रण करना सीखकर व्यवस्थित उद्देश्य पूर्ण कार्यों मे मन लगाना होगा

अपनी अनियंत्रित दिनचर्या,खानपान को नियंत्रित करते हुए, योगादि के माध्यम से शरीर को मजबूत बनाना होगा। हमारे युवाओं को यह चिंतन करना होगा कि, हम एक बडे़ लक्ष्य के साथ चलते हुए स्वामी जी द्वारा मार्गदर्शित समर्थ भारत को समर्थ कैसे बनाएँ ।

वीर सावरकर जी का उदाहरण देते हुए युवा प्रमुख ने  विषम परिस्थितियों मे मनोबल बनाए रखने की बात कही व बताया कि, कैसे सावरकर जी कोल्हू का बैल चलाते हुए हताश होकर जीवन त्याग देने का विचार करने लग गये थे व गिर पडे़ थे, किंतु जैसे ही उन्हें विचार आया कि हमारी भारत माता तो बेडि़यों में जकड़ी हुई हैं और उन्हे मुक्त करना है, तत्क्षण वह पूरे मनोबल के साथ पुनः उठ खडे़ हुये। एपीजे कलाम साहब व आज के युवा खिलाडी़ (ओलंपिक) नीरज चोपडा़ का उदाहरण भी दिया ,जिन्होने राष्ट्र हित के सम्मान के लिये अपना सारी ऊर्जा उसे प्राप्त करने में लगा दी।

कार्यक्रम के समापन में आभार प्रदर्शन तथा युवाओं से लक्ष्य प्रेरित कार्य हेतु विवेकानंद केंद्र से जुड़ने का आह्वान विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत की शाखा भोपाल के नगर प्रमुख श्री सौरभ शुक्ला जी ने किया तथा  दिनाँक 24.10.2021को 45 बंगले टी टी नगर ,भोपाल मे युवाओं के लिये आयोजित आगामी "एक दिवसीय कार्यशाला" हेतु पंजीयन की सूचना दी ।

विमर्श का समापन शांति मंत्र के साथ संपन्न हुआ ।

Tuesday, April 12, 2022

एक भारत विजयी भारत कार्यक्रम का समापन समारोह | बिहार-झारखण्ड प्रान्त




 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, बिहार-झारखण्ड प्रान्त द्वारा  "विवेकानन्द शिला स्मारक की 50 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक भारत विजय भारत कार्यक्रम का समापन समारोह" रविवार, 03 अक्टूबर 2021 को संध्या 6:00 - 7:15 बजे ऑनलाइन माध्यम से Youtube पर मनाया गया। कुल उपस्थिति 70 की रही।

कार्यक्रम का शुभ्रम्भ तीन ओमकार, शांति पाठ से हुआ। उसके बाद विडियो क्लिप के माध्यम से केंद्र परिचय, गीत (जिनके ओजस्वी वचनों से) एवं वक्ता परिचय से बाद मुख्य वक्ता श्रीमती अनीता बोस, अंतर्राष्ट्रीय पुरातत्ववेता सह स्वंत्रत शोधकर्ता का मार्गदर्शन मिला। विवेक वाणी के पश्चात कार्यक्रम की अध्यक्षीयता कर रहे मा. प्रवीण दाभोलकर, अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी का मार्गदर्शन हम सबको मिला। कार्यक्रम का समापन आगामी सुचना, धन्यवाद् ज्ञापन एवं शांति पाठ से हुआ।

आप इस कार्यक्रम को  Youtube पर इस लिंक के माध्यम से देख सकते है - https://youtu.be/Zlh3ndaTkDc

विमर्श | विश्वबंधुत्व दिवस | रांची नगर




 विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-रांची द्वारा रविवार, 12 सितम्बर 2021 संध्या 4:00-5:30 बजे  विश्वबंधुत्व दिवस के सुअवसर पर विमर्श का आयोजन ऑनलाइन Google Meet पर किया गया। कुल उपथिति 65 रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ तीन ओमकार शान्ति पाठ से हुआ। उसके बाद Video के माध्यम से केंद्र परिचय कराया गया। उसके बाद गीत (जिनके ओजस्वी वचनों से),विषय प्रवेश, विवेक वाणी, वक्ता परिचय, एवं  विमर्श का विषय - "स्वामी विवेकानंद का हिंदुत्व एवं विश्व बंधुत्व' पर मुख्य वक्ता श्री प्रफुल केतकर, एवं मुख्या अथिति - डॉ. डी. पी. खेतान, वरिष्ठ चिआर्गेनाइजर पत्रिका के संपादक का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।   उसके बाद प्रश्नों उत्तरी, धन्यवाद् ज्ञापन, पर्तिवेदन प्रस्तुति एवं शांति पाठ हुआ।

आप इस लिंक के माध्यम से मुख्य वक्ता का उद्बोधन देख सकते है - https://youtu.be/5uPSdBgC3bI

Wednesday, November 24, 2021

विमर्श - विश्वबंधुत्व दिवस कार्यक्रम - भागलपुर नगर



 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-भागलपुर द्वारा विश्वबंधुत्व दिवस के सुअवसर पर विमर्श का आयोजन रविवार,05 सितम्बर  2021 को संध्या 5:00 - 6:15 बजे ऑनलाइन गूगल मीट पर आयोजन किया गया। कुल उपस्थिति 102 रही।

 कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण से किया गया बाँका नगर कार्यलय प्रमुख द्वारा केन्द्र परिचय में संचालित गतिविधयों की जानकारी दी गई। मुख्य वक्ता डॉ. रमाशंकर दुबे, कुलपति केंद्रीय विश्वद्यालय, गांधीनगर, गुजरात ने विषय पर मार्गदर्शन करते हुए कहा -

    "विवेकनन्द शिलास्मारक : एक भारत-विजयी भारत' के एक मात्र ऐसा उदाहरण बन गया है; जहां ग्रेनाइट स्मारक ने एक जीवित संगठन को जन्म दिया है।
    आगे उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 11 सितम्बर 1893 को धर्म संसद में विश्व को शांति को संदेश  दिया था जब हम स्वतंत्रा दिवस के 75 वर्ष पूरे होने का समारोह मना रहे हैं तो हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि 2047 तक भारत स्वतंत्रा के 100 वर्ष पूर्ण करेगा। उस समय भारत की आत्मा सभी क्षेत्रों में प्रकट होगी। भारत विश्व का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करेगा। स्वामी विवेकानंद का दृष्टिकोण जो कहता है कि प्रत्येक धर्म अपने अनुयायियों के लिए सही है दुनिया में शांति ल सकता है। यह दृष्टिकोण समावेशी द्रष्टिकोण है । इएलिये प्रत्येक राष्ट्र या धर्म, पुरुष,महिला,परिवार या समुदाय को दूसरों को न केवल सहन करना चाहिए अपितु स्वीकार करना चाहिए और सभी की भलाई के लिए योगदान देना चाहिए।


विमर्श - विश्वबंधुत्व दिवस कार्यक्रम - पटना नगर


 विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-पटना द्वारा जे. डी. विमेंस कॉलेज, पटना में शुक्रवार, 03 सितम्बर 2021 दोपहर 12:00- 1:30 बजे विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुल उपथिति 90 रही; जिसमे शिक्षकगण, केंद्र कार्यकर्ता एवं छात्राओं उपस्थिति रही।

 कार्यक्रम का शुभ्रम्भ तीन ओमकार शान्ति पाठ से हुआ। उसके पश्चात् दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम को आगे बढाया गया। उसके पश्चात केन्द्र परिचय एवं गीत के बाद विमर्श के विषय -"एक भारत विजयी भारत के संदर्भ में विश्व बंधुत्व और स्वामी विवेकानंद' विषय पर मुख्य वक्ता आ. डॉ. मधु वर्मा, अरविंद महिला कॉलेज की पूर्व प्राचार्य एवं विवेकानंद केंद्र शुभचिंतक एवं आदरणीय शिखा सिंह परमार, पटना उच्च न्यायालय की अधिवक्ता एवं विवेकानंद केंद्र पटना की नगर संचालक का मार्गदर्शन प्राप्त हो गए। शान्ति मंत्र से कार्यक्रम का समापन किया गया।

Tuesday, November 9, 2021

Vimarsh - Savitri - Sri Aurobindo's vision of Integrated India




 विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी जयपुर विभाग द्वारा रविवार 8 अगस्त 2021 को विमर्श का आयोजन किया गया। इस आयोजन के मुख्य वक्ता डॉक्टर अश्विन कपड़िया (पूर्व कुलपति, दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय) रहे। जिन्होंने "सावित्री- संगठित भारत हेतु श्री अरविंद की दृष्टि" विषय पर सभी का मार्गदर्शन किया। इस आयोजन में कुल उपस्थिति 74 रही।  

यूट्यूब लिंक - https://youtu.be/qSAdySaOTcM

Saturday, July 31, 2021

VK-AICYAM 7th International Yoga Day




 Due to the dire circumstances of the COVID-19 Pandemic VK-AICYAM has celebrated 7th International Yoga Day on 19th and 20th June 2021 in a virtual mode. Webinar On 19th June topic was "YOGA IN PANDEMIC SITUATION".

Speaking on the Topic “Yoga a way of life” as the first speaker of this webinar Dr Subash Chandra Dash, Associate professor, Head Department of Sanskrit, Utkal University, said “The land of India is a sacred since time immemorial and Yoga is the greatest contribution to the world. The world has learned a lesson in this pandemic and has acknowledged Yoga as a way of life. Dr. Dash mentioned the three kinds of sorrows adhyātmika, adhibhautika and adhidaivika. He also explained the six  SadhakaTattwa on the Path of Yoga- Enthusiasm (Utsah, Courage (Sahas), Perseverance (Dhairya), Discriminative knowledge (Tattvajnana), Determination (Nischaya), Aloofness from company (Janasanghaparityaga).

The Second speaker Professor Rabindranath Pati, department of anthropology Mekelle University East Africa, on the Topic “Yogic way of Energy balancing” mentioned about on Chakasand Ajapa Japa meditation.

The third speaker Dr.SANJIB KUMAR PATRA, Associate professor Yoga, Central University, Rajastahan on the topic“Yoga and Stress management” said “Stress is a threat to ourbody’s homeostasis. He discussed the sources of stress, fight and flight condition, stress hormones, how to identify the stress and manage the stress through Yoga”.

The 2nd day webinar was on 20thJune.Mananiya Sri Hanumantha Rao ji, All India Vice President of Vivekananda Rock Memorial and Vivekananda Kendra Kanyakumari has delivered lecture on “Yoga a Path towards Man-making”. Speaking on the topic Hanuji said “Yoga is the only path for man making because we can get good samskar through yoga. Man making is what is shown outside, should be what we are inside. Freedom from negative emotions e.g.  Kama (lust/craving), Krodha (anger), Lobha (greed), Moha (delusion), Mada (arrogance, vanity) and Matsarya (jealousy) is man making. Vrittis are the cause of our problems. MaharshiPatanjali point out how to transformation the vrittis. ChittaVrittinirodha is man making. Man making need a long time practice (dirgha kala nairantarya) with tapas (which will reduce our comforts), Asana (for bring stability in body and mind) and Pranayama (for capable the mind to remain focus our activity, work and attitude). Man making means develop the positive qualities, attitude and guna by inculcating four primary virtues i.e. Maitri (Friendship) ; Karuna (Compassion) Mudita (Joy) and Upekshanam (Indifference). As per Bharatiya sanatana Samskritithe world is one family (Vasudhaiva Kutumbakam) and human being is a part of creation. So for the benefits of others through Seva yoga is Man making. Swami Vivekananda who is a Nabayuga Patanjali says Each soul is potentially divine. The goal is to manifest this divinity by controlling nature, external and internal. Do this either by work, or worship, or psychic control, or philosophy - by one, or more, or all of these - and be free. This is man making.”

The two days’ live webinar witnessed  through youtube over  600 viewers. Prof. Dr. Basudev Chhatoi gave well come address, Prof. Dr. Nirmal Chandra Das presented the concluding remark with vote of thanks and Sri Ajaya Kumar sahoo co-ordinated the two-days webinar.

Friday, July 30, 2021

अमृत परिवार कार्यक्रम - बिहार-झारखण्ड प्रान्त




विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, बिहार एवं  झारखंड प्रांत द्वारा रविवार, 27 जून 2021  को संध्या 4:30 से 6:00 बजे "अमृत परिवार : समृद्ध भारत का आधार" विषय पर ऑनलाइन Youtube पर  विमर्श का आयोजन हुआ । वर्तमान परस्थिति को देखते हुए विवेकानन्द केन्द्र ने पूरे भारत मे अमृत परिवार प्रकल्प का आयोजन होना है  बिहार-झारखंड में इस विमर्श के माध्यम से अमृत परिवार प्रकल्प का शुभारंभ किया है । विमर्श कार्यक्रम में कुल 367 परिवारों ने पंजीयन किया जिसमे 200 परिवार कार्यक्रम में सहभागी हुए ।

कार्यक्रम की शुरुआत तीन ओमकार शांति पाठ से की गई उसके पश्चात्  गीत, केंद्र परिचय, विवेक वाणी हुआ । विवेक वाणी के पश्चात् कार्यक्रम की मुख्य वक्ता माननीय निवेदिता रघुनाथ भिड़े ,अखिल भारतीय उपाध्यक्ष ,विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी का "अमृत परिवा"र पर उद्बोधन हुआ । उन्होंने कहा -

  • भारत राष्ट्र में हजारों वर्षों से अनेकों आक्रमण हुए, फिर भी ,इन आक्रमणों के बावजूद भी सनातन धर्म नष्ट नहीं हुआ। भारत ने अपने संस्कार और पहचान को नहीं खोया और भारत का तत्वज्ञान भी नष्ट नहीं हुआ । वह म्यूजियम का विषय नहीं बना l  सनातन धर्म अमृत तत्व का विषय है ,यह अनुभूति का मार्ग दिखाता है। 
  • भगवत गीता में भी भगवान श्री कृष्ण ने सनातन धर्म को अमृत धर्म बताया है। 
  • फिर उन्होंने कहा परिवार में दादा _दादी ,माता _पिता बच्चों के भविष्य के लिए सारा जीवन लगा देते हैं  कि हमारे बच्चों का भविष्य अच्छा होना चाहिए ,सुख _सुविधा युक्त होना चाहिए। ऐसा करके क्या बच्चों को हम सही दिशा दे पाते हैं ,शायद नहीं l आज बच्चों के ऊपर अनेक प्रकार के वैज्ञानिक आक्रमण हो रहे हैं । हम सोचते हैं बच्चे हमारे परंपरा को आगे लेकर जाएंगे लेकिन होता क्या है बच्चे बाहर जाते हैं और ड्रग्स एवं अन्य व्यसनों  के  शिकार हो जाते हैं जिससे वे धर्म से कटने वाले दुराग्रही बन जाते हैं तथा अपने परंपरा से कटने लगते हैं।
  • उन्होंने कहा  इन सभी चीजों से बच्चों को लैमिनेट करना होगा ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी उस पर किसी भी प्रकार का कोई दुषप्रभाव ना पड़े।

 कार्यक्रम के अंत में प्रश्नों उत्तरी ,आगामी सुचना तद पश्चात् शांतिमंत्र से कार्यक्रम का समापन हुआ । सुसंगठित परिवार से राष्ट्र समृद्ध की संकल्पना को साकार करने के लिए विवेकानंद केन्द्र ने अमृत परिवार प्रकल्प का शुभ्रम्भ किया है यह कार्यक्रम इस प्रकल्प का शुभ्रम्भ है। आए हम केन्द्र के गतिविधियों में भाग लेते हुए अपने परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व को समृद्ध बनाएं।

Saturday, July 24, 2021

Mind your DNA - Fusion of Science and Meditation


 Vivekananda Kendra, Telugu Praant organized Vimarsha on Sunday,20 June 2021.


The topic was Mind your DNA ~ Fusion of Science and  Meditation. The talk was organized on the eve of the International Day of Yoga. The speaker was Smt. Anandi Ravinath, a Post-graduate in Bio-technology, from IIT Bombay who had also worked in the Pharma sector and is a practitioner of Meditation for over two decades.
Smt. Anandi explained in detail how the DNA is a huge power house and how the mind can harness this energy for inner calm and bring about harmony outside. The talk was followed by interaction ranging from meditation practices to physics and genetics.


Participation: 139. (Webex: 79; YouTube: 60)
YouTube link: https://youtu.be/iOwWRSNrdxY

Thursday, December 24, 2020

भगिनी निवेदिता की भारत भक्ति



 विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी,शाखा-भागलपुर एवं श्री रामकृष्ण पाठ् चक्र के संयुक्त तत्वाधान में भगिनी निवेदिता जयंती के शुभ अवसर पर भगिनी निवेदिता की भारत भक्ति विषय पर विमर्श का आयोजन किया गया कार्यक्रम में प्रो.अमिता मोइत्रा जी ने विषय प्रवेश करते हुए भगिनी निवेदिता को महान देशभक्त सन्तान की व्याख्या दी।
मुख्य वक्ता स्वामी भावात्मानंद जी  सचिव रामकृष्ण मिशन मुजफ्फपुर ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगिनी निवेदिता ने भारतीय जीवन पद्धति से शिक्षा का प्रचार प्रसार किया। साथ ही जब देश की स्वतंत्रता जी बात आई उसमें भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी।  वह देश के विभन्न संगठन गरम  दल और नरम दल  सभी के साथ सामान्य रूप से जुड़ी थी और वो अपने को रामकृष्ण मां शारदा के उद्देश्यों के अनुरूप अपने जीवन को डालने का प्रयास करती रही। स्वामी विवेकानन्द की गुरु भक्ति एवं राष्ट्रभक्ति की तरह ही भगिनी निवेदिता भी पूर्ण रूप से गुरु पथ गामिनी थी भगिनी निवेदिता का आदर्श हम भारतीयों के लिए अनुकरणीय है।

Thursday, November 19, 2020

विवेकानंद केंद्र मध्य प्रान्त द्वारा विश्व बंधुत्व दिवस पर विमर्श का आयोजन


 कन्याकुमारी में विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के पचास वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विवेकानंद केंद्र मध्य प्रान्त ने विमर्श का आयोजन किया। इसका प्रसारण विवेकानंद केन्द्र की  यू ट्यूब चैनल पर 11 सितम्बर 2020 को सायं सात बजे से किया गया।

विवेकानंद केंद्र की राष्ट्रीय उपाधाक्ष्या पद्मश्री आदरणीया निवेदिता दीदी इस विमर्श में मुख्यवक्ता थीं। उन्होंने कन्याकुमारी से अपने उद्वोधन में विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के पचास वर्ष पूरे होने के महत्त्व को बताया। उन्होंने कहा कि शिला स्मारक का निर्माण स्वामी जी के 11 सितम्बर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के सन्देश से कई प्रकार से जुड़ा हुआ है।

पहली बात यह है कि स्वामी जी के 11 सितम्बर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के सन्देश के समान ही शिला स्मारक का निर्माण भी सर्व समावेशकता का उदाहरण है। इसीलिए माननीय एकनाथ जी ने उसी तिथि को शिला स्मारक के उद्घाटन के लिए चुना था। दीदी ने बताया कि शिला स्मारक के निर्माण में माननीय एकनाथ जी का दृष्टिकोण ‘संघर्ष नहीं सर्व सम्मति’ का था। उन्होंने इस कार्य के लिए 323 सांसदों से समर्थन प्राप्त किया था चाहे वह किसी राजनैतिक विचारधारा, क्षेत्र या धर्म के रहे हों। लगभग सभी राज्य सरकारों ने शिला स्मारक ने निर्माण में आर्थिक सहयोग किया और 85 लाख रूपये तो पूरे देश के सामान्य जन के एक - दो रूपये के योगदान से प्राप्त हुए थे। सही अर्थों में यह एक राष्ट्रीय स्मारक है और सर्वसमावेशकता का मूर्त रूप है।

दीदी ने बताया कि दूसरी बात जो शिला स्मारक को स्वामी जी के विश्व धर्म सम्मेलन के सन्देश से जोड़ती है वह यह है कि स्वामी जी ने वहां से भारत के पुनरुत्थान का कार्य प्रारंभ किया था और विवेकानंद शिला स्मारक उसी कार्य का एक मूर्त रूप है। भारत पर विदेशी आक्रमणों के बाद यह पहला नूतन निर्माण कार्य है जो अपने धर्म और परम्परा से जुड़ा है।

तीसरी बात है, स्वामी जी ने शिकागो के अपने व्याख्यानों में कहा था विश्व बंधुत्व का कार्य भारत के द्वारा होना है और वह आत्मीयता और निष्काम सेवा के द्वारा होगा। इसी संकेत को लेते हुए माननीय एकनाथ जी ने स्मारक निर्माण के पश्चात् ‘विवेकानंद केंद्र – एक अध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन’ का निर्माण किया।

चौथी बात है, जिस प्रकार स्वामीजी शिकागो में भारत की सभी आध्यात्मिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व कर रहे थे उसी प्रकार यह स्मारक और विवेकानंद केंद्र भी सभी आध्यात्मिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है।

दीदी ने अपने उद्बोधन के अंत में सभी से अपना निश्चित समय और ऊर्जा राष्ट्र कार्य में लगाने का आह्वान किया।

विमर्श के प्रारंभ में मध्य प्रान्त के संचालक माननीय श्री मनोहर देव जी स्वागत भाषण दिया एवं विमर्श की भूमिका रखी। उन्होंने कहा कि  ‘एक भारत विजयी भारत’ अभियान में माननीय एकनाथ जी की ही तरह हम सभी को जोड़ कर व्यापक संपर्क अभियान दुगनी शक्ति के साथ करना चाहेंगे। विमर्श के अंत में मध्य प्रान्त संपर्क प्रमुख श्री अतुल सेठ जी ने सभी का आभार व्यक्त किया, केंद्र की गतिविधियाँ संक्षेप में साझा कीं और ‘एक भारत - विजयी भारत’  से सभी को जुड़ने का आव्हान किया।

विमर्श का सञ्चालन मध्य प्रान्त प्रमुख श्री भंवर सिंह राजपूत ने किया। विदिशा नगर संगठक पूर्णिमा दीदी ने गीत और भोपाल विभाग संपर्क प्रमुख मनोज गुप्ता ने विवेक वाणी प्रस्तुत की। सम्पूर्ण कार्यक्रम का तकनिकी कार्य बीना नगर के कार्यकर्त्ता श्री रीतेश रस्तोगी द्वारा किया गया।

इस विमर्श को आज 12 सितम्बर 2020 दोपहर तक यू ट्यूब चैनल पर 1000 से अधिक व्यक्तियों द्वारा देखा गया है। इसे केंद्र के विभिन्न फेसबुक पेज पर भी लाइव किया गया था जिस पर 2000 से अधिक व्यक्तियों द्वारा देखे जाने का अनुमान है।

 

https://youtu.be/tR9S2od1uRU

बदलते समाज के लिए प्रकृति शाश्वत मूल्य :- डॉ. मनीष सिंघल

 विमर्ष कार्यक्रम का विषय "बदलते समाज के लिए शाश्वत मूल्य" था। जिसके मुख्य वक्ता :- डॉ. मनीष सिंघल जी, प्राध्यापक XLRI, जमशेदपुर थे।


• सर्व प्रथम उन्होंने विवेकानन्द शिलास्मारक की 50वें वर्ष में चल रहे संपर्क कार्यक्रम विवेकानन्द शिलास्मारक :- एक भारत विजयी भारत" चर्चा किया।
• फिर उन्होंने पूरे कार्यक्रम में कैसे जुड़े रहे उन बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
• बाहर के बदलती प्रस्थिति के अनुसार अपने अंदर की प्रस्थिति को बदलना पड़ेगा।
• भारतवर्ष में नवरस की संकल्पना है।
• प्रत्येक कार्य के लिए भावना होना आवश्यक है। आप कहीं भी चाहे, आपकी दुकान हो, घर हो या कोई संग़ठन बिना भावना के आप काम नही कर सकते।
•  उन्होमे अपने उद्बोधन में कोरोना काल की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रकृति पहले भी नही बदली थी और अभी भी नही बदली है। न सूर्य की दूरी की दूरी  में परिवर्तन हुआ है ना, चंद्रमा की दूरी में।
•  हमे अपने समाज को भी संगठित करने ले लिए अपना बहुमूल्य समय देना चाहिए।
• भावना भी सकारात्मक और नाकारात्मक होती है। जैसे प्रेम सकारात्मक भावना है और घृणा नाकारात्मक भावना है।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और शान्तिमन्त्र के साथ हुआ। कार्यक्रम में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, बिहार-झारखंड प्रान्त के अधिकारी श्री सतेंद्र कुमार शर्मा, दयाशंकर पांडेय, ओर श्री मुकेश कीर जी समलित हुए। विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा- रांची के संयोजक, डॉ शिवशंकर प्रशाद जी और अन्य समर्पित कार्यकर्ता उपस्थित हुए।

 




 

Tuesday, October 13, 2020

Universal Brotherhood Day Celebration at Gaya, Bihar


 Vivekananda Kendra Kanyakumari, Branch-Gaya celebrated  Universal Brotherhood Day on 11 sept. On this occasion a Vimarsh was organised on the topic "Bhartiya Sanskrit me Vishwa Vandhutwa ki Avdharna aur iski prasangikta".  Programme started with 3 Omkaras and Shanti path followed by patriotic song. Dr V K Karan Nagar Sanchalak welcomed all present and introduced Dr Radhanand Singh the main speaker. Prof Arun kr Prasad Say Nagar Sanchalak gave Introductory lecture on the  topic. Later on The chief speaker Dr Radhanand Singh, eminent scholar and literature  elaborated in detail the topic of the day and quoting Upanishads and lectures of Swami ji at Chicago world Parliament of religions on 11th September and later on by his total 6 lectures stressed the relevance of concept of Vadudhaiv Kutumbakam even today.  Vote of thanks was given by SMT Veena Gupta Nagar Pramukh. Programme concluded with shanti mantra.