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Tuesday, September 22, 2026

विश्व बंधुत्व दिवस कार्यक्रम का आयोजन सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी भोपाल द्वारा

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, मध्य प्रदेश प्रांत, भोपाल द्वारा सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में विश्व बंधुत्व दिवस के शुभ अवसर पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का सफल आयोजन 11 सितम्बर 2026 को किया गया। इस आयोजन में कुल 76 विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। 

इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा छात्र-छात्राओं को स्वामी विवेकानंद जी के विश्व बंधुत्व के शाश्वत संदेश से परिचित कराना तथा उन्हें राष्ट्र निर्माण एवं सकारात्मक सामाजिक सहभागिता के महत्व के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महानगर प्रमुख श्री सौरभ शुक्ल जी रहे, जिन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में युवाओं को चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और समाज कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

 इस अवसर पर यूनिवर्सिटी परिसर में “युवा भारत नेतृत्व अभियान” के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन भी किया गया और उपस्थित युवाओं को इस राष्ट्रव्यापी अभियान से जुड़कर अपना सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया गया।

विश्व बंधुत्व दिवस का आयोजन 'प्रतिज्ञा कोचिंग सेंटर' भोपाल, द्वारा

विश्व बंधुत्व दिवस के गरिमामयी अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी,मध्य प्रदेश प्रांत, भोपाल एम.पी. नगर स्थित 'प्रतिज्ञा कोचिंग सेंटर' भोपाल, में एक विशेष कार्यक्रम 11 सितम्बर 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 58 विद्यार्थियों एवं युवाओं ने सक्रियता से भाग लिया और प्रेरणादायी विचारों को आत्मसात किया। 

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद जी के सार्वभौमिक विश्व बंधुत्व के संदेश से जोड़ना तथा राष्ट्र निर्माण एवं सकारात्मक सामाजिक सहभागिता में उनकी भूमिका का बोध कराना था। 

आयोजन के दौरान प्रतिज्ञा कोचिंग सेंटर के निदेशक डॉ. अनिल द्वारा “युवा भारत नेतृत्व अभियान” के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया गया।

 इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए देश के विकास में युवाओं के नेतृत्व और नैतिक दायित्वों के महत्व पर प्रकाश डाला तथा उन्हें अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

विश्व बंधुत्व दिवस का आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, भोपाल में

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, मध्य प्रदेश प्रांत, भोपाल द्वारा विश्व बंधुत्व दिवस के पावन अवसर पर 'सरदार वल्लभभाई पटेल पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, भोपाल' में एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों व शिक्षकों सहित कुल 206 प्रतिभागियों की उत्साहजनक उपस्थिति रही।

 इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानन्द जी के विश्व बंधुत्व, चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण के विचारों से जोड़ना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रांत कार्यालय प्रमुख श्री अमिताभ श्रीवास्तव जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानन्द जी के ऐतिहासिक शिकागो भाषण और वर्तमान समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विभाग व्यवस्था प्रमुख श्री मनोज पाठक जी, श्री शिवम सिंह एवं श्री धार्मिक पंड्या जी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान आगामी “उत्तिष्ठ भारत” प्रतियोगिता के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया गया और सभी विद्यार्थियों को इस प्रतियोगिता में अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया गया।

'विश्व बंधुत्व दिवस' कार्यक्रम का आयोजन एनसीईआरटी, भोपाल द्वारा

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, मध्य प्रदेश प्रांत, भोपाल द्वारा 'विश्व बंधुत्व दिवस' के पावन उपलक्ष्य में रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एनसीईआरटी, भोपाल में एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का सफल आयोजन 11 सितम्बर 2026 को किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानन्द जी के सार्वभौमिक विश्व बंधुत्व, राष्ट्र निर्माण तथा चरित्र निर्माण संबंधी विचारों से अवगत कराना और उन्हें इन मूल्यों को जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करना था। इस आयोजन में कुल 156 विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य सहभागियों की उत्साहजनक उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रांत कार्यालय प्रमुख श्री अमिताभ श्रीवास्तव जी उपस्थित रहे, जिन्होंने स्वामी जी के शिकागो भाषण के ऐतिहासिक संदर्भ और आज के समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।


 

इसके साथ ही विवेकानन्द केन्द्र के कार्यकर्ता श्री शिवम सिंह एवं श्री धार्मिक पंड्या ने विद्यार्थियों को केन्द्र द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक गतिविधियों तथा युवा सहभागिता के आयामों से परिचित कराया। 

इस अवसर पर आगामी “उत्तिष्ठ भारत” युवा प्रतियोगिता के पोस्टर का भी औपचारिक विमोचन किया गया और सभी छात्र-छात्राओं को इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

Saturday, April 16, 2022

कन्या पूजन - विवेकानन्द केंद्र भोपाल


 विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी, शाखा : भोपाल द्वारा चैत्र नवरात्रि पर आनंदालय में आने वाली बहनों का पूजन किया।

आनंदालय के सभी भाईओ ने बहनों के पैर धोये एवम तिलक लगाकर आशीर्वाद लिया और उनको मिठाईया खिलाई ।

Wednesday, April 13, 2022

'समर्थ युवा-समर्थ भारत '- युवा विमर्श - भोपाल नगर


 समर्थ युवा-समर्थ भारत -युवा विमर्श कार्यक्रम ,विवेकानंद केंद्र  कन्याकुमारी , शाखा-भोपाल

18 अक्टूबर 2021, सोमवार शाम 6:30-7:30 बजे विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा भोपाल  द्वारा युवा विमर्श कार्यक्रम का आयोजन गूगल मीट माध्यम द्वारा आयोजित किया गया।

     भोपाल विभाग  के सह विभाग प्रमुख तथा विवेकानंद स्कूल ...के संचालक श्री संजय पवार जी ने  प्रभावशील मार्गदर्शन किया,जिसमें उपस्थित करीब 150 नगर के युवा लाभान्वित हुए ।

कार्यक्रम का शुभारंभ 3ऊँकार प्रार्थना व एक्य मंत्र से हुआ ,पश्चात् गीत बहिन स्तुति पाठक तथा विवेकवाणी भाई राजकुमार ने ली । संचालन डॉ जितेन्द्र गुप्ता जी द्वारा किया गया ।

केन्द्र परिचय श्री मनोज पाठक जी  व मुख्य वक्ता परिचय श्री जितेन्द्र गुप्ता जी द्वारा दिया गया ।

संजय जी ने कहा कि सफलता की भागदौड़ में हम सब सफल होना चाहते हैं किंतु जीवन के 2 पहलू होते हैं-1-सफलता, 2-सार्थकता ।युवाओं के साथ विमर्श करते हुए संजय जी ने दोनों पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि जीवन में सफल होना मतलब सार्थकता नहीं है अपितु सार्थकता सफलता का पर्याय है ।

संजयजी ने स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंदो तथा एपीजे कलाम साहब की समर्थ भारत तथा विश्व पटल पर भारत को विश्व गुरू के रूप मे देखने के सपने को सार्थक करने में आज के युवाओं के योगदान की बात कही। उन्होने कहा कि हमारे मनीषियों द्वारा देखे गये सपनो में हमारा अपना योगदान क्या है ? व्यक्तिगत उन्नति के साथ साथ हम क्या अपने भारत के लिये कुछ कर रहे हैं या सिर्फ स्वकेंद्रित होकर रह गये हैं, इसका युवाओं को चिंतन/मनन और आत्मावलोकन करना चाहिये ।

संजय जी ने युवाओं से राष्ट्र के विकास में जो बाधक है उसे छोड़ने तथा राष्ट्र हित के लिये कार्य करने का आह्वान किया। उन्होने कहा कि, नुकसान के बिंदु जैसे समय की बर्बादी करने वाले कार्यों पर नियंत्रण करना सीखकर व्यवस्थित उद्देश्य पूर्ण कार्यों मे मन लगाना होगा

अपनी अनियंत्रित दिनचर्या,खानपान को नियंत्रित करते हुए, योगादि के माध्यम से शरीर को मजबूत बनाना होगा। हमारे युवाओं को यह चिंतन करना होगा कि, हम एक बडे़ लक्ष्य के साथ चलते हुए स्वामी जी द्वारा मार्गदर्शित समर्थ भारत को समर्थ कैसे बनाएँ ।

वीर सावरकर जी का उदाहरण देते हुए युवा प्रमुख ने  विषम परिस्थितियों मे मनोबल बनाए रखने की बात कही व बताया कि, कैसे सावरकर जी कोल्हू का बैल चलाते हुए हताश होकर जीवन त्याग देने का विचार करने लग गये थे व गिर पडे़ थे, किंतु जैसे ही उन्हें विचार आया कि हमारी भारत माता तो बेडि़यों में जकड़ी हुई हैं और उन्हे मुक्त करना है, तत्क्षण वह पूरे मनोबल के साथ पुनः उठ खडे़ हुये। एपीजे कलाम साहब व आज के युवा खिलाडी़ (ओलंपिक) नीरज चोपडा़ का उदाहरण भी दिया ,जिन्होने राष्ट्र हित के सम्मान के लिये अपना सारी ऊर्जा उसे प्राप्त करने में लगा दी।

कार्यक्रम के समापन में आभार प्रदर्शन तथा युवाओं से लक्ष्य प्रेरित कार्य हेतु विवेकानंद केंद्र से जुड़ने का आह्वान विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत की शाखा भोपाल के नगर प्रमुख श्री सौरभ शुक्ला जी ने किया तथा  दिनाँक 24.10.2021को 45 बंगले टी टी नगर ,भोपाल मे युवाओं के लिये आयोजित आगामी "एक दिवसीय कार्यशाला" हेतु पंजीयन की सूचना दी ।

विमर्श का समापन शांति मंत्र के साथ संपन्न हुआ ।

Tuesday, April 12, 2022

विश्व बंधुत्व दिवस कार्यक्रम - भोपाल नगर


 11 सितंबर 2021 शनिवार शाम 5 बजे विवेकानंद केंद्र शाखा भोपाल  द्वारा "विश्व बंधुत्व दिवस" 45 बंगले टी टी नगर स्थित केंद्र कार्यालय में मनाया गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के उप कुलपति श्री के जी सुरेश थे तथा अध्यक्षता शिक्षा विभाग के उप संचालक डॉ. धीरेन्द्र चतुर्वेदी जी ने की. इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के प्रांत सह संचालक श्री रामभुवन सिंह कुशवाहा जी व श्री ब्रजकिशोर सांघी जी विभाग संचालक ने "श्रीफल तथा साहित्य" द्वारा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व अध्यक्ष महोदय का स्वागत किया।पश्चात् गीत भाई सौरभ ने प्रस्तुत किया ।
"हिन्दू धर्म संपूर्ण विश्व को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति की शिक्षा देता है । हम हिंदु स्वीकार्यता को धर्म मानते हैं किंतु इसकी नकारात्मक छवि बनाने का वैश्विक षडयंत्र कर विश्व को भ्रमित करने का अभियान चलाया जा रहा है।"
उपरोक्त उद्गार कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री के जी सुरेश ने  स्वामी विवेकानंद द्वारा 128 वर्ष पूर्व शिकागो की धर्म सांसद में हिंदु धर्म पर दिये गये एतिहासिक व्याख्यान की स्वर्णिम स्मृति के उपलक्ष में व्यक्त किये । उन्होने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि, हमारा धर्म सभी विचार और मत मतांतरों को स्वीकार करता है। सहिष्णुता के नाम पर इसकी नकारात्मक छवि  प्रस्तुत कर दुनिया को भ्रमित करने के वैश्विक षडयंत्र के प्रयासो पर आज भारतीय बुद्धिजीवियों को विचार करने की महती आवश्यकता है। हमे यह भी चिंतन करना होगा
न केवल अपने देश अपितु विदेशों(अमेरिका आदि)  मे भी कुछ समूह जो भारत की उभरती छवि, बढ़ते आत्मविश्वास और प्राप्त वैश्विक मान्यता से परेशान होकर तथा निहित स्वार्थ से प्रेरित होकर आज ही के दिन "हिन्दुत्व खत्म करो" जैसे विषय पर सम्मेलन कर रहे हैं वे अपने इन कुत्सित प्रयासो के द्वारा दुनिया को असल मुद्दो से  दिग्भ्रमित न कर पाएँ हमे यह भी चिंतन करना होगा ।
स्वामीजी ने कहा कि "सभी धर्म बराबर हैं तथा ईश्वर तक पहुँचने के रास्ते हैं ।" श्री सुरेश जी ने इसी भाव से उत्प्रेरित होकर प्रकाश डाला कि, हमारा धर्म सहिष्णुता की नहीं ,अपितु ,सबको स्वीकार करने का बात करता है ।उन्होने अपने उद्बोधन मे स्वामी जी के हिंदु दर्शन की चर्चा करते हुए, समसामयिक चुनौतियों जैसे 'जिहाद की मानसिकता,' आज की शिक्षा प्रणाली तथा 9 सितम्बर अमेरिका के ट्विन टॉवर पर "आतंकी हमला" आदि विषयों पर भी विमर्श किया और कहा कि, यह घटनाएँ एक तरफ जहाँ विध्वंस का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं,वही दूसरी तरफ स्वामीजी का "शिकागो मे दिया गया भाषण" आज जब विश्व 'मानवता व विश्वास' को लेकर अनेक कठिनाईयों से जूझ रहा है,सृजन का नव निर्माण का संदेश देता है ।आज सवा सौ साल बाद भी स्वामीजी के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं ,जितने उस काल मे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी जी ने स्वामीजी द्वारा दिये गये प्रेरक संदेशों व उनके जन मानस को प्रेरित करने वाले विचारों को समाज मे व्यापक रूप से प्रसारित व प्रचारित करने की बात कही, और यह भी कहा कि, हम इन नित्य अनुकरणीय महापुरूषों को सिर्फ जयंती व दिवस विशेष पर याद कर लेते हैं,फिर भूल जाते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिये ।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री पंकज पाठक जी (संपर्क प्रमुख, विवेकानंद केंद) ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन केंद्र के नगर संचालक श्री सुरेंद्र मित्तल जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन भाई धार्मिक द्वारा "शांति मंत्र व केंद् प्रार्थना" के साथ संपन्न हुआ।

Friday, December 16, 2016

‘विमर्श’ : तुफैल अहमद के कई सवाल, जवाब भी उसी में

भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन में विवेकानन्द केन्द्र द्वारा ‘आतंकवाद, धर्मनिरपेक्षता व अल्पसंख्यकवाद’ पर ‘विमर्श’ नामक वैचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में बीबीसी के ख्यातनाम पूर्व पत्रकार, लेखक व विचारक श्री तुफैल अहमद ने बड़ी स्पष्टता से अपने विचारों को साझा किया। प्रस्तुत है उनके भाषण का सारांश :-
“आप चाहे बस में सफ़र कर रहे हों, अथवा ट्रेन या हवाई जहाज में, अपने सहयात्री से आम तौर पर तीन सवाल पूछते हैं - आपका नाम क्या है, कहां से आ रहे हैं, अब कहां जाएंगे। दुनिया में हर जगह यही सवाल एक दूसरे से पूछे जाते हैं। यही व्यक्तिगत सवाल आपको राष्ट्र के रूप में भी पूछना चाहिए, अपने आप से भी और दूसरों से भी। इतिहासकारों की बातों पर मत जाइए, जो कहते हैं कि हमारी सभ्यता 5000 साल पुरानी है, हमारी सभ्यता इससे कहीं बहुत अधिक प्राचीन है।
जिन दिनों मैं किंग्स कॉलेज इंग्लैंड में पढ़ रहा था, मैंने दहशतगर्दी कैसे ख़त्म हो, इसे लेकर एक पुस्तक लिखी थी। 60 के दशक में कोरिया में जंग हुई, जो बेनतीजा रही। कई बार लड़ाईयां समझ विकसित होने पर अपनेआप खत्म हो जाती हैं, जैसे कि इंडोनेशिया में हुआ। जिहादियों को वहां आयी जबरदस्त सुनामी का कहर देखने के बाद समझ में आया कि वे फिजूल लड़ रहे थे और वहां शान्ति आ गई। जबकि 1971 में हमारी बांग्लादेश युद्ध में निर्णायक विजय हुई, जो कि बहुत कम युद्धों में होती है, किन्तु युद्ध समाप्त नहीं हुआ। 1930-40 के दशक में कुछ सवाल पैदा हुए। हमारे पुरखों को लगा कि देश की जमीन का एक टुकड़ा मुस्लिमों को दे देने से जंग खत्म हो जाएगी। पर वह खत्म हुई क्या?
मक्का में गैर मुस्लिमों ने प्रोफेट मोहम्मद से कहा कि आप और हम मक्का में साथ-साथ रह सकते हैं, किन्तु मोहम्मद ने कहा यह नहीं हो सकता, आपका धर्म अलग है, रहन सहन अलग है, हम साथ नहीं रह सकते। और यहीं से द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का जन्म हुआ। वहां अब कोई जू नहीं बचे, कोई यहूदी नहीं बचे। अफगानिस्तान में, बलूचिस्तान में, पाकिस्तान में कहीं हिन्दू नहीं बचे। लाहौर सिक्ख महानगर था, अब नहीं है। वही क्रम आज भी जारी है। कश्मीर में, कैराना में, केरल में, प.बंगाल के मालदा में क्या हो रहा है? मेरे पास केवल सवाल हैं, जबाब नहीं।
हमें बताया जाता है कि 47 में, 65 में, 69 में 71 में, कारगिल में हमने पाकिस्तान को हराया। यह सफ़ेद झूठ है। फ़ौज ने लड़ाईयां जीतीं, पर राजनीतिज्ञ जीती जंग हार गए। 47 में गिलगिट, बाल्टिस्तान हमने पाकिस्तान को सौंप दिया, 65 में जीता हुआ हाजीपीर वापस कर दिया। जरा सोचिए कि ये हमारे पास होते तो हमारे ट्रक यूरोप तक फर्राटे भर रहे होते। 71 में तो 93,000 पाकिस्तानी फ़ौजी बंदी बिना बारगेन किये वापस कर दिए। मनमोहन की सरलता तो देखिए कि वे तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर स्थाई रूप से पाकिस्तान को सौंपकर शान्ति लाने को सहमत हो गए थे।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि सिकंदर, मुग़ल, डच, अंग्रेज सब आए और हमें लूटकर चले गए। हम इतने अच्छे थे कि हमने चुपचाप सबको सहन किया, कई बार तो आमंत्रित भी किया कि आओ और हमको लूटो। जरा सोचिए कि महमूद गजनवी ने हम पर सत्रह बार हमला किया, और हमने उसे पराजित किया, किन्तु क्या एक बार भी उसका पीछाकर उसे सबक सिखाया। हर बार एक हमले के बाद दूसरे हमले का इंतज़ार करते रहे। एक और सवाल? हमारे यहां गाजीपुर है, गाजियाबाद है। कभी सोचा ये गाजी क्या है? गाजी वह जो जंग में जीतता है। यह नाम क्या सिद्ध करते हैं? क्या यह गुलामी की मानसिकता नहीं है?
यह विचारों का सफ़र है, मैं कोई निर्णय नहीं दे रहा हूं, केवल सवाल उठा रहा हूं। सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो के पक्ष में फैसला दिया, वह कौनसी मानसिकता थी, जिसने अधिकांश एम.पी. को अपने कब्जे में लेकर क़ानून बदला? इस्लाम में औरत हेड ऑफ़ स्टेट नहीं हो सकती, कोई गैर मुस्लिम भी हेड ऑफ़ स्टेट नहीं हो सकता। अतः अगर पाकिस्तान या सऊदी अरब ऐसे क़ानून बनाए, तो समझ में आता है किन्तु भारत में?
आस्ट्रेलियाई अर्थशास्त्री एके हाईक ने लिखा है कि बुद्धिजीवी समाज के हिसाब से नहीं, स्वयं के हिसाब से तर्क गढ़ता है। भारतीय लोकतंत्र ने 2014 में एक नई बुद्धिजीवी जमात पैदा की, जिसने लाइन में लगकर वोट के माध्यम से एक नया तंत्र पैदा कर दिया। बस फिर क्या था पुराने बुद्धिजीवियों की हालत जमीन पर रखी हुई मछली जैसी हो गई। उनकी तड़पन देखने लायक थी, उन्होंने कहा देश में असहिष्णुता आ गई है। अवार्ड वापसी शुरू हो गई। 19 अक्टूबर को बीएसपी की लखनऊ रैली में कुरआन ख्वानी हुई। उसके पहले राहुलजी मंदिरों में, दारुल उलूम देववंद में गए। यह मानसिकता क्या है?
47 के पहले तक आजादी की लड़ाई में हिन्दू मुसलमान साथ-साथ थे। हामिद दलवई राष्ट्रवादी मुसलमानों में अग्रणी थे, किन्तु दुर्भाग्य से अल्पायु में ही उनका निधन हो गया। सर सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ में मुसलमानों के लिए वैज्ञानिक शिक्षा का खाका खींचा, किन्तु बाद में दोनों मामलों में अलगाववाद पनप गया। 1960 से 80 के दशक तक कांग्रेस दंगे करवाती रही। फिर औरत की चर्चा शुरू हुई। मुस्लिम को एंगेज करके रखा गया। क्या यही है अल्पसंख्यकवाद और धर्म निरपेक्षता?
कहा जाता है कि जिसकी संख्या कम वह अल्पसंख्यक, किन्तु यह सही नहीं है। दक्षिण अफ्रीका में काले बहुसंख्यकों पर हुकूमत गोरे अल्पसंख्यक करते हैं। 1950 में हमारे यहां पार्लियामेंट पद्धति शुरू हुई। 52 के पहले चुनाव में ही 65 प्रतिशत सांसदों को 50 प्रतिशत से कम वोट मिले। इसके बाद के चुनावों में तो 25 प्रतिशत और 17 प्रतिशत वोट पाकर भी लोग चुनाव जीतते रहे। यही कारण है, जिसके चलते माइनोरिटी का विचार बढ़ता जा रहा है। माइनोरिटी का आधार होना चाहिए केवल गरीबी। जब देश के सभी कोलेजों में मुस्लिम आजादी से पढ़ सकते हैं, तो फिर उनके लिए अलग अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय क्यों? प्रत्येक राजनीतिक दल को भी अपने-अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ समाप्त कर देने चाहिए। सिक्ख अपनेआप को माइनोरिटी नहीं मानते, पारसी नहीं मानते। मुस्लिमों में यह मानसिकता राजनीति ने पैदा की है।
सेक्यूलरिज्म का अर्थ क्या? धर्म के प्रभाव को न्यून कर वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना। हमारे संविधान के अनुसार कहें तो भारतीय राज किसी मजहब को सपोर्ट या अपोज नहीं करेगा। तीसरा आज का व्यवहारिक राजनीतिक सोच कि हर मुसलमान पाकिस्तानी है। नीतीश कुमार चुनाव पूर्व पाकिस्तान जाते हैं, बिहार के मुसलामानों को यह जताने के लिए कि, देखो मैं पाकिस्तान जा रहा हूं, तुम पाकिस्तानी हो, इसलिए मुझे वोट देना। और आंकड़े बताते हैं कि 84 प्रतिशत मुस्लिम वोट उन्हें मिले। 
मुम्बई में पाकिस्तानी गायक गुलाम अली का कार्यक्रम शिवसेना नहीं होने देती तो अखिलेश यादव और केजरीवाल उन्हें बुलाते हैं। वे हिन्दुस्तानी ए.आर. रहमान को नहीं बुलाएंगे। ममता बैनर्जी खौफनाक उर्दू बोलती हैं, लेकिन बांग्लादेशी तसलीमा नसरीन के पक्ष में आवाज नहीं निकालती। ये लोग केवल पाकिस्तानी हैं बांग्लादेशी भी नहीं हैं। यह मानसिकता भारतीय मुसलमानों के लिए भी खतरे की घंटी है। परिवर्तन केवल नए विचारों के संपर्क में आने पर ही आता है। मेरी गोवा में ‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’ के मौलाना महमूद मदनी से बातचीत हुई। मैंने कहा कि इस्लाम नहीं बदलेगा, शरीया भी नहीं बदलेगी, लेकिन मुसलमान बदल सकता है। ट्रिपल तलाक मुद्दा नहीं है, मुद्दा है औरतों के साथ होने वाली नाइंसाफी। मैंने उनसे कहा, यूनीफोर्म सिविल कोड अर्थात सभी भारतीयों के लिए समान क़ानून। वह क़ानून आप स्वयं सुझाएं कि क्या होना चाहिए। वे उसके लिए भी तैयार नहीं हुए। इसे क्या कहा जाए? बिना सोचे समझे विरोध।
हमारे यहां की दहशतगर्दी के तीन प्रमुख कारण हैं -
- जब तक पाकिस्तान ज़िंदा है, तब तक वहां की फ़ौज आतंक को समर्थन जारी रखेगी।
- बांग्लादेश से भी हमें ऐसी ही चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
- मिडिल इस्ट (मध्य-पूर्व) से प्रभावित युवा, इससे निबटने के उपाय खोजने होंगे।
- हिन्दू, मुसलमान भारतीय बनकर रह सकें, ऐसी व्यवस्था बनानी होगी।
- जिनके पास बीपीएल कार्ड उन सबके बच्चों को नि:शुल्क उच्च शिक्षा।
- हम कौन हैं, इसे बताने वाली पाठ्यपुस्तकों की शृंखला का निर्माण, जिनमें हर धर्म की जानकारी हो। बच्चों के दिमाग का विस्तार होगा।
लगभग सवा अरब की भारतीय आबादी में 55 प्रतिशत युवा हैं, जिन्होंने न आजादी की लड़ाई देखी है और न ही आपातकाल की विभीषिका। ये वे लोग हैं, जिन्होंने खुली आजादी की हवा में सांस ली है। हम लोग मैकाले की शिक्षा पद्धति को दोष देते हैं। लेकिन जरा सोचिए कि अगर मैकाले कर सकता था तो ‘भारतीय लोकतंत्र’ शिक्षा पद्धति में बदलाव लाकर उससे अच्छा क्यों नहीं कर सकता?”
कार्यक्रम का प्रारम्भ वन्दे मातरम से तथा समापन शान्तिपाठ से हुआ। विवेकानन्द केन्द्र के नगर प्रमुख सौरभ शुक्ला ने विवेकानन्द केन्द्र के कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश सरकार के मन्त्री लालसिंह आर्य ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। अध्यक्षीय भाषण व आभार प्रदर्शन विवेकानन्द केन्द्र के सह प्रांत संचालक व वरिष्ठ पत्रकार रामभुवन सिंह कुशवाह ने किया।

Thursday, January 23, 2014

गुरू पूर्णिमा उत्सव : भोपाल

Guru-Poornima%20%280%29विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी शाखा भोपाल द्वारा गुरू पूर्णिमा उत्सव का आयोजन अ.भा.वि.प. के सभागार में किया गया ! इस आयोजन में “स्वामी विवेकानन्द और विश्व गुरू भारत” विषय पर व्याख्यान रखा गया था वक्ता के रूप मे रा.स्व.से.संघ के क्षेत्र प्रचारक माननीय रामदत्त जी चक्रधर का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ ! रामदत्त जी विषय का आरम्भ करते हुए बताया कि यदि आज हम भारत को विश्व गुरू के पद पर प्रतिष्ठित करने हेतु संकल्पित है तो निश्चित रूप से यह पूर्व में विश्व गुरू रहा है यह सिद्ध होता है इसलिए जिन कारणों से भारत की यह प्रतिष्ठा थी उन्हें जानने का प्रयास करना होगा, यूनान , मिस्र और रोम यदी इस जहां से मिटे है तो इसका क्या अर्थ है क्या वहां का भूगोल समाप्त हो गया या वहां लोग नहीं हैं किन्तु ऐसा नहीं वे अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति को खो बैठे है और इतनी चुनौतियों का प्रतिसाद करता भारत यदि आज भी खड़ा है तो उसका मूल कारण यहाँ की संस्कृती ही है !

स्वामी विवेकानंद ने कहा है भारत को अपने स्वत्व के बल पर उठाना होगा वह स्वत्व है यहाँ का धर्म यहाँ की आध्यात्मिकता ! रामदत्त जी ने कहा भारत में शांति स्थापित करने के लिए ईसाई मिशनरी , स्लाम एवं साम्यवाद जैसे अनेक प्रयास हुए किन्तु सेवा के नाम पर धर्म परिवर्तन अपने क्षुद्र स्वार्थ के कारण ये सब विफल रहे ! हिंदुत्व ही शांति स्थापना में सफल रहा इसी बात पर स्वामी जी को गर्व था वे कहते थे गर्व से कहो में हिन्दू हूँ ........ !

विदेशियों की छाती पर खड़े होकर उन्होंने हिंदुत्व की प्रतिष्ठा की ११ सितम्बर १८९३ से पूर्व और उसके बाद के इतिहास का अध्ययन करें तो स्वयं हमें
अंतर दीख पड़ेगा कैसे अपने स्वत्व के बोध की ताकत से स्वामी जी ने आत्मविश्व जाग्रत किया था ! अर्थात आत्मबोध, हिंदुत्व का भान , और सकारात्मक कार्यों की क्षमता में वृद्धि यही वे मार्ग है जिससे वर्तमान की नैतिक पतन से जुडी सभी चुनौतियों से लड़ सकते है !

कार्यक्रम का आरम्भ ॐ प्रार्थना से हुआ, प्रस्तावना में संक्षिप्त केंद्र व उत्सव परिचय दिया गया ! आभार प्रांत प्रमुख श्री रामभुवन जी ने माना ! आगामी सार्धशती समारोह के कार्यक्रमों की सूचना ,सर्वे भवन्तु .... से कार्यक्रम का समापन हुआ ! सभी केंद्र कार्यकर्ताओं के साथ नगर के प्रबुद्ध जन उपस्थित थे.

Thursday, July 18, 2013

Vimarsh : Uttarakhand Trasadi : Ek Chintan

Vimarsh-Uttarakhand-Trasadi-Ek-Chintan-%281%29
विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शााखा भोपाल द्वारा आयोवित “विमर्श” एक वैचारिक जाागरण श्रुंखला दिनांक 13 जुलाई 2013 को संपन्न हुआ I समारोह वर्ष के दौरान प्रबुद्ध  वर्ग गोष्ठी के रूप में यह आयोजन किया गया था I “उत्तराखंड त्रासदी : एक चिंतन” विषय पर दुष्यंत कुमार पाण्डुलिपि संग्रहालय भोपाल में आयोजित इस मंथन मे नगर के चिन्तक  जन उपस्थित रहे, ज्वलंत विषय होने के कारण लोगों की श्रेष्ठ एवं जागरूक सहभावगता रही I इस घटनाक्रम से संबंधित अनेक तथ्यात्मक बिन्दुओं पर चर्चा हुई, इसी वर्ष उत्तराखंड की यात्रा करने वाले केन्द्र कायशकताश भी उपवथथत थे विन्हंने तत्कालीन
परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस भयावह स्थिति का अंदेशा वहां के सामान्य लोगों को हो गया था I इसके अतिरिक्त राजनैतिक असंवेदनशीलता, मानवीय धर्म, मानवीय कर्तव्यों को लेकर भी अनेक बिन्दु विमर्श मे आये, हमारे ही धार्मिक स्थलों के प्रति बदलता हुआ हमारा दृष्टिकोण इस तरह की परिस्थितियों को न्योता देता है अस्तु आपदा प्राकृतिक नहीं मानवीकृत ही है I  जब जब हम अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से विमुख हुए है तब तब प्रकृति ने हमें संकेत दिया है I

चार धाम यात्रा भी अमरनाथ यात्रा की तरह प्रमुख है इसलिए इसके प्रबंधन व नियोजन हेतु कोई निश्र्चित कदम उठाये जाने चाहिए जैसे यात्रियोंका पंजीयन, प्रति वर्ष यात्रियों की संख्या का निर्धारिकरण इत्यादी I चर्चा का समापन करते हुए प्रान्त प्रमुख श्री रामभुवन सिंहजी ने बताया कि "धर्म भारत की आत्मा है" और यदि किसी भी रूप से अपने क्षुद्र स्वार्थ हेतु इस आत्म तत्व पर प्रहार हुआ तो यह देश इस तरह की चुनौतियों से जूझता रहेगा I श्री रामभुवन जी ने सेना के कार्य की सराहना करते हुए सादर कृतज्ञता व्यक्त की I नगर प्रमुख श्री मनोज पाठक जी ने विमर्श की प्रस्तावना रखी, कायक्रम का संचालन नगर स्वाध्याय प्रमुख श्री सौरभ शुक्ला जी ने किया I प्रान्त संगठक आ.शीतल दीदी एवं अन्य सभी दायित्ववान कायकर्ता कार्यक्रम में सहभागी हुए I

Monday, September 17, 2012

"विवेक सन्देश" भोपाल के महाविद्यालयोमें

Vivek sandesh in colleges of bhopalविश्व बन्धुत्व दिवस के परिप्रेक्ष्य मे मध्य प्रान्त के महाविद्यालयीन अभियान "विवेक सन्देश" का प्रथम कार्यक्रम दिनांक ५ सितम्बर को महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय भोपाल मे संपन्न हुआ। उदघाटन संस्था प्राचार्य एवं प्रान्त प्रमुख आ.रामभुवन जी द्वारा किया गया, विवेकानन्द केन्द्र के १२ कार्यकर्ता कार्यक्रम व्यवस्थामें रहे। बड़े उत्साह के साथ  विद्यार्थियों के द्वारा पोस्ट कार्ड लेखन एवं साहित्य क्रय किया गया I  और आगामी संपर्क हेतु सभीने साथ मिलके स्वामी विवेकानन्द के विचारोको घर-घर पहुंचानेका संकल्प के अपना नाम-पता विवेकानन्द केन्द्र को दर्ज करवाया।

Thursday, June 21, 2012

शक्ति ही संवर्धिनी

Samvardhini 20 June 2012भोपाल, 20 जून। विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष सुश्री निवेदिता भिड़े ने आज यहाँ कहा है कि स्त्री परिवार समाज और राष्ट्र की मुख्य धुरी होती है, उसके बिना विकास की कल्पना ही निरर्थक है। माँ के रूप में वह बालक को जो संस्कार देती है उन्हीं से बालक महान, तेजस्वी और युगनिर्माता बनते है।
सुश्री निवेवेदिता जी आज यहाँ स्वामी विवेकानन्द सार्ध-शती समारोह के प्रांतीय कार्यालय में नगर की महिलाओं को संबोधित किया। उन्होने कहा कि सार्ध-शती समारोह की शृंखला में एक आयाम ‘संवर्धिनी’ का है जिसमें भारतीय नारी की विधायी शक्ति का उपयोग“भारत जागो : विश्व जगाओ” धेय की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि नारी स्वातंत्र्य अथवा अपने अधिकारों की माँग आदि जैसे नारे पश्चिमी सोच का परिणाम है जिसके नकारात्मक परिणाम यूरोप और अमेरिका आज भी भुगत रहा है। वहीं भारतीय सोच इस दिशा में सदैव सकारात्मक रहा है, भारत में स्त्री को माँ, बहन, भार्या और पुत्री जैसा श्रद्धेय स्थान दिया गया है। हमारे यहाँ प्रारम्भिक काल में महिलाएँ पुरुष से कन्धे से कन्धा मिला कर समाज के उन्नयन के लिए कार्य करतीं थीं। वे शास्त्रज्ञ, दार्शनिक और गुरु जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वाहन करतीं थीं परंतु बीच के काल में विदेशी सांस्कृतिक हमलों के कारण वह मात्र भोग्या बन कर रह गई। पर अब समय आ गया है कि उसे उसका खोया दर्जा व सम्मान पुन: प्राप्त करना है। इसके लिए महिलाओं को स्वयं सक्षम व समर्थ बनना होगा।
सुश्री निवेदिता दीदी ने कहा कि महिलाओं को देखने की दृष्टि में जब तक योग्य और उचित परिवर्तन नहीं होगा तब तक समाज और राष्ट्र का कल्याण की संकल्पना ही निरर्थक है। उन्होने कहा कि भारत के मौलिक विचार एकात्म की अवधारणा पर केंद्रित है जिसे अब विज्ञान भी स्वीकारने लगा है। व्यक्ति – परिवार – समाज - राष्ट्र - श्रष्टि के बीच परस्पर निर्भरता, पूरकता और सम्बद्धता जिस स्वाभाविक प्रक्रिया से स्थापित है उसका अन्य कोई विकल्प संभव ही नहीं है। उन्होने कहा कि स्वामी विवेकानन्द की सार्ध-शती संपूर्ण मानवता के लिये एक अपूर्व अवसर है और यह अवसर भारत ही उसे प्रदान करने वाला है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती उषा चतुर्वेदी ने कहा कि विचार के सकारात्मक परिवर्तन से ही वांछित परिणाम लाये जा सकते हैं। उन्होने कहा कि स्वामी जी स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे और उनके विचारों और संकल्प को हमें घर-घर तक पहुँचने की आवश्यकता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक के निर्वृत्तमान सरसंघ चालक श्री के. सी. सुदर्शन भी मौजूद थे।

Monday, March 26, 2012

विवेक विचार : आंतरिक सुरक्षा : बढ़ते ख़तरे और हमारी तैयारियाँ

Shri Dipak Chakravarty, MD, NRL inaugurating the NRL Conference Hall at the VKICआई.बी. के पूर्व प्रमुख तथा विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउण्डेशन के निदेशक श्री अजीत ङोवाल ने कहा है कि आज आंतरिक सुरक्षा देश के लिये प्रमुख समस्या बन गई है पर उससे निपटने के लिए हमारी जैसी तैयारियां होनी चाहिए उसका अभाव है उन्होने कहा कि सांस्कृतिक एवं एतिहासिक जड़ों पर कुठाराघात करके न तो देश को सुरक्षित किया जा सकता है और न ही सबल राष्ट्र की संकल्पना की जा सकती है ।

श्री ङोवाल कल यहां शहीद भवन में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा भोपाल द्वारा ”आंतरिक सुरक्षा; बढ़ते खतरे और हमारी तैयारियाँ विषय पर आयोजित "विवेक विचार" को सम्बोधित कर रहे थे । उन्होने कहा कि आज हम सामान्यतः जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर संकट मानते है वह प्रमुख रूप से राज्य की सुरक्षा पर संकट होता है जो चाहे आंतकवाद के रूप में पैदा या किसी दुर्घटना से या फिर कुपोषण या गरीबी से, मरते तो लोग ही हैं और परिणाम भी समान होते है ।  राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा राष्ट्र की संकल्पना के आधार पर तय होनी चाहिये, वे उपाय जिससे हमारा राष्ट्र शक्तिशाली और सक्षम बनकर विश्व के कल्याण में अपना योगदान दे सके ।

उन्होने कहा कि विश्व कल्याण भारत का सर्वोच्च लक्ष्य रहा है और इसी के कारण भारत की पहचान है, परन्तु हमने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी विदेशी विचारों के आधार पर ही व्यवस्था का आधार बनाया जिसके कारण सर्वत्र विभ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई और चारो और विभिन्न प्रकार के खतरो से हम घिर गए हैं । उन्होने उदाहरण देते हुए बताया कि स्वतंत्रता के पूर्व भारत में भाई-बहिन ओर पति-पत्नी के बीच प्रेम की मिसाल दी जाती थी अब कानून ऐसे बनाये जा रहे हैं जिससे भारतीय परिवार बुरी तरह टूट रहे है ।

श्री ङोवाल ने कहा कि आजकल बाह्य और आंतरिक खतरों में भेद करना मुश्किल है अफगानिस्तान और वियतनाम का उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि युद्ध बहुत खर्चीला हो गया है और युद्ध जीतने के बाद भी राजनैतिक उद्देश्यों की प्राप्ति की कोई आश्वस्ति नहीं है ।  इसी कारण अधिकतर देश छद्म युद्ध का रास्ता अपना रहे हैं । पाकिस्तान, बंग्लादेश और चीन द्वारा छेड़े गये छद्म युद्ध से उत्पन्न भारत में आंतरिक सुरक्षा के खतरो पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्होने कहा कि इससे समग्र रूप से निपटने के लिए देश में प्रबल राष्ट्रवाद की भावना जाग्रत करने की जरूरत है उन्होने कहा कि मुगल शासनकाल में मुसलमान अल्पसंख्यक होते हुए भी अल्पसंख्यक नहीं माना जाता था और अब उनकी संख्या निरन्तर बढ़ने के बाद भी अल्पसंख्यक माना जा रहा है । पंथ निरपक्षता की भारत में कभी आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि हमने इस आधार पर कभी भेद नहीं किया । जातिवाद और क्षेत्रवाद भी खतरे के रूप में हमारे सामने है ।

Shri Dipak Chakravarty, MD, NRL inaugurating the NRL Conference Hall at the VKICश्री ङोवाल ने कहा कि राष्ट्र एक निरन्तर संकल्पना है जिसमें अतीत के अनुभव एवं वर्तमान की परिस्थितियों पर विचार करते हुए भावी पीढ़ी का हित समाहित होता हैं । इस संकल्पना के जागरण के लिए विवेकानन्द केन्द्र जैसे सामान विचारों के संगठनों को प्राथमिकता से महत्व देने की आवश्यकता है ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय पुलिस अकादमी हैदराबाद के पूर्व निदेशक डा. महेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आतंरिक सुरक्षा की आश्वस्ति के लिए प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता और सहभागिता आवश्यक है । उन्होने कहा कि आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है ।  पुलिस जिस दबाव और परिस्थितियों में काम करती है उससे इस दिशा में बहुत अधिक अपेक्षा नहीं की जा सकती ।

इससे पूर्व विवेकानन्द केन्द्र के भोपाल नगर संगठक श्री अभिनेश कटेहा ने विवेकानन्द केन्द्र और सार्ध शती समारोह के बारे में विस्तार से जानकारी दी । अन्त में नगर संचालक श्री बी.के. सांघी ने आभारी व्यक्त किया कार्यक्रम का संचालन नगर प्रमुख श्री मनोज पाठक ने किया ।

Saturday, March 24, 2012

विवेक विचार : आंतरिक सुरक्षा : बढ़ते ख़तरे और हमारी तैयारियाँ

विवेकानन्द केंद्र शाखा भोपाल द्वारा अति महत्वपूर्ण व्याख्यान "विवेक विचार" वार्षिक विशेषांक आगामी 24 मार्च शनिवार को शहीद भवन ( विधायक विश्राम गृह के पास ) भोपाल में सायं 5 बजे  आयोजित किया गया है।

"आंतरिक सुरक्षा : बढ़ते ख़तरे और हमारी तैयारियाँ" विषय पर आई. बी. के पूर्व निदेशक और विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउंडेशन ,नई दिल्ली के निदेशक श्री अजीत दोभल का विचारोत्तेजक व्याख्यान ,कार्यक्रम कि अध्यक्षता डॉ. महेंद्र शुक्ल ,पूर्व निदेशक ,नेशनल पुलिस अकेडमी करेंगे।