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Tuesday, December 29, 2015

अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य : मा. पी.परमेश्वरन

Sarthak Yuva Samarth Bharat - Groupwise Manthan by Sistersकन्याकुमारी में राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित 680 युवाओं का महाशिविर सार्थक युवा समर्थ भारत अखिल भारतीय महाशिविर का उद्घाटन आज ९ बजे विवेकानन्दपुरम में हुआ।
अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। इसके लिए प्रत्येक व्य
क्ति को अपना जीवन समर्पित करना है। ऐसा आह्वान करते हुए विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के अध्यक्ष माननीय पी.परमेश्वरन जी ने कहा कि कर्तव्य केवल एक दिन का कार्य नहीं है वरन समर्पण की नित्य साधना से ही कर्तव्य का भाव प्रगट होता है, इसलिए समर्पण की नित्य साधना प्रत्येक मनुष्य को करनी होगी। उन्होंने कहा की ऐसे समर्पण का भाव अपने भीतर विद्यमान दिव्यत्व की अनुभूति से प्रगट होता है। सारे समर्पित कार्य का स्रोत अपने हृदय की प्रेरणा ही होती है।
सार्थक युवा-समर्थ भारत महाशिविर के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए परमेश्वरनजी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्दजी के आदर्शों के अनुरूप माननीय एकनाथजी ने विवेकानन्द केन्द्र की सम्पूर्ण रचना की। चाहे वह योग हो या शिक्षा, ग्रामीण विकास हो या प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन अथवा स्वास्थ्य सेवा, इन सभी में आध्यात्मिक प्रेरणा अनिवार्य है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, इस शिविर में सम्मिलित प्रत्येक शिविरार्थी से यह अपेक्षा है कि वह अपनेआप को लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप उन्नत करें और स्वयं को भारतमाता के कार्य के लिए समर्पित कर दें।
सेवारत युवाओं के सामूहिक समर्पण पर ही भारत माँ का भविष्य निर्भर है, जो कि अंततोगत्वा विश्व का ही भविष्य है।
ज्ञात हो कि 25, 26 और 27 दिसम्बर, 1892 को स्वामी विवेकानन्दजी ने कन्याकुमारी में समुद्र के मध्य स्थित श्रीपाद शिला पर राष्ट्रचिंतन किया था। स्वामीजी को इन तीन दिनों के ध्यान से भारत को जाग्रत करने का मार्ग मिला था। इन तीन दिनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने 25 से 27 दिसंबर को इस शिविर का आयोजन किया है। इस शिविर में कश्मीर से कन्याकुमारी और अरुणाचल से गुजरात में काम से छह माह सेवारत 680 युवा, जिनमें 432 युवकों तथा 248 युवतियों का समावेश है।
इस उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भारत विकास ग्रुप के संस्थापक तथा अध्यक्ष श्री हनुमन्त गायकवाड़ तथा विवेकानन्द केंद्र के उपाध्यक्ष श्री ए.बालकृष्णन व्यासपीठ पर विराजमान थे। अबतक 65 हजार युवाओं को रोजगार देनेवाले हनुमंत गायकवाड़ ने अपने सफल व सार्थक जीवन का अनुभव बताया। साथ ही केंद्र के उपाध्यक्ष बालकृष्णनजी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत तभी जगतगुरु बनेगा जब देशवासियों के मन में त्याग और सेवा का भाव जाग्रत होगा। उन्होंने बताया कि हमें कभी हताश या निराश नहीं होना है क्योंकि हम अमृत के पुत्र हैं, ईश्वर हमारे भीतर है। हम अपने अंदर निहित शक्ति से साडी बाधाओं को पार कर सकते हैं।   

Sarthak Yuva – Samarth Bharat Shibir at Kanyakumari

Sarthak Yuva Samarth Bharat at KanyakumariAn all India Residential  Youth camp – Sarthak Yuva – Samarth Bharat for 3 days is organised in Vivekananda Kendra Kanyakumari for the selected youths to mark the concluding of Birth Centenary celebration of Mananeeya Eknathji Ranade, founder of Vivekananda Rock Memorial and Vivekananda Kendra. Yuva Participants are selected through a  process  - Yuva  Samparka, Yuva Sammelan, Yuva Prashikshan and Yuva Seva.
Shibir started with Bhajans at 6.00pm on 24 Dec 2015 in Eknath Sabhangan, specially erected for the shibir in Vivekanandapuram, Kanyakumari. Sri Soumitra Pujari, Shibir Pramukh welcomed the participants. Importance of the shibir was briefed by Shri Abhay Bapatji, Shibir Adhikari. Film on Eknathji was shown. Total 646  youth from 22 states are participating in this shibir in which 239 are sisters.
Routine of first day shibir started at 6.00 am with Pratahsmaran and Yogabhyas. Formal inauguration was at 9.00 am. Kum Priyamvada lead the national song Vande mataram. Sri Abhay Bapat, Shibir Adhikari introduced the dignitaries on the dias. Sri Soumitra Pujari, Shibir pramukh felicitated the guests. Sri P Parameshwaranji, president of Vivekananda Kendra in his message to shibir participants that Seva for those who deserve is the duty of every human being. For that one has to dedicate one’s life. Such dedication should be regularly practiced. Such dedication comes from identifying ourselves as the embodiment of divinity. Upon their organised dedication depends the future of Mother India and also ultimately of the world.
 Sri Hanumant Rao Gayakwad, an enlightened successful entrepreneur from Pune shared his story of fulfilment in serving the nation. A single thought of Swami Vivekananda – Take up one idea, think of it, dream of it, leave any other idea alone, that is the way to success has inspired him to start Bharat Vikas Group during his college days. Today the trust employs more than 65,000 youth and a brand name for quality service. His message for the youth is to  serve the nation with quality work.
Mananeeya Balakrishnanji, Vice president of Vivekananda Kendra briefed the life and contribution of Mananeeya Eknathji to the participants and extended invitation to the youth to serve nation under Vivekananda Kendra banner.    Programme concluded with shanti  mantra at 11.30am.

Tuesday, November 17, 2015

विवेकानन्द केन्द्र पटना द्वारा युवा सम्मेलन का आयोजन

आज दिनांक 30/10/2015 को विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के पटना-षाखा द्वारा एक दिवसीय युवा सम्मेलन सह कार्यशाला का आयोजन पटना में बिहार प्रदेश भारत सेवक समाज, दारोगा प्रसाद राय पथ के प्रांगण में किया गया। यह कार्यशाला केन्द्र के संस्थापक माननीय एकनाथ जी के जन्मषती पर्व के उपलक्ष्य में पटना के विभिन्न महाविद्यालयों में स्वामी विवेकानन्द के विचार एवं समर्थ भारत के निर्माण में युवाओं की सकारात्मक भूमिका पर पटना के कुल 10 महाविद्यालयों में लिखित परीक्षा के आधार पर चयनित कुल 158 विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिसमें 73 छात्र एवं 85 छात्रा थे।केन्द्र के प्रांत संगठक एवं जीवनव्रती कार्यकर्ता श्री मुकेश कीर ने चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्टं निर्माण में युवाओं की सहभागिता तथा साथ ही सफलता से सार्थकता कैसे प्राप्त करनी है पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने समाज निर्माण में युवाओं को आगे आने का आवाह्न किया। पटना के नगर संगठक श्री धर्मदास जी ने विवेकानन्द के आदर्षो को अपने आचरण में अपनाकर ‘सफल जीवन समर्थ भारत’ के माध्यम से युवा अपना व्यक्तिव विकास कर समाज निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सके। इस अवसर पर विस्तार से चर्चा हुआ। युवाओं ने समूह चर्चा के पष्चात् अपने सकारात्मक विचार सबके सामने प्रकट किया। इस कार्यशाला का उद्घाटन स्वामी हरिनाराणानन्द जी ने किया।इस मौके पर प्रांत के प्रशिक्षण प्रमुख डाॅ पंकज कुमारजी उपस्थित रहे।

Friday, July 31, 2015

Safal Yuva - Yuva Bharat - Yuva Sammelan in Mysore

On the occasion of Ma. Eknathji Janmashati Celebration mysore branch of Vivekananda Kendra Kanyakumari organised  Safal Yuva- Yuva Bharat Yuva sammelana” on 26th July, 2015 morning 10 am to 1 pm at Vivekananda Kendra, Meru, 2830, 1st main, Jayanagar. Convention started by prayer by Kum. Sindhu of Maharani Science college. Sri N S Chakravarthyji, Retd. Secretary Govt of India spoke on Swami Vivekananda’s life and teachings. Sri Vinayaka Salimat, Yuva Raja college student talked on Swami Vivekananda and Society. Sri Ramesh, trainer, Survey Department training college spoke on Vivekananda Rock Memorial, Ekanathji and Vivekananda Kendra activities. Students from Maharani Science college, Sharada vilas Law and Degree college, Maharaja P U College, J S S P U College participated.

Saturday, May 23, 2015

Yuva Sammelan at Lucknow

Yuva Sammelan was organised at Department of Education of University of Lucknow from 10am to 2pm on 2nd February 2015 in which 100 students of 6 various colleges and departments participated. Mananeeya Niveditadidi, Vice President of Vivekananda Rock Memorial & Vivekananda Kendra, Shivpoojanji, Prant Sangathak of Vivekananda Kendra Uttar Pradesh were there to inspire the Youth.

The Yuva sammelan was also attended by HOD of Department of Education, Dr. Alka Pandey, Dr. Nurpur Sen, Dr. Archana Agrawal, Sri Pramod Saxena, Kum. Sobhita Tandan and Amit Mishra.

MEJSP April Month Update Assam

Friday, May 1, 2015

Yuva Sammelan in Durg

Yuva Sammelan was organized in Durg/Bhilai in the series of program of Safal Yuva Yuva Bharat. There were 108 selected youth participant in the sammelan. Sammelan was started with prayer and concluded with Vivekananda Kendra Introduction. There were various session in the program like lecture, discussions and games. 

Tuesday, April 28, 2015

लक्ष्य : Vivekananda Kendra News

Eknathji : One                  Life One Mission

"एक सेनापति की तरह अपना लक्ष्य निश्चित करो और शक्त्ति, सामर्थ्य की सीमाओं पर विचार करते हुएं उसकी प्राप्ति के लिये रणनीति बनाएं तथा सर्वश्रेष्ठ मार्ग का चयन करो। तभी और तभी केवल श्रेष्ठ उपलब्धि प्राप्त हो सकती है।

- मा. एकनाथजी रानडे
News Updates from Vivekananda Kendra :
  • MEJSP activities updates - Assam :Read More
  • विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी पटना शाखा द्वारा दायित्वग्रहण का कार्यक्रम  :  विस्तृत
  • Bhumi Pujan and Foundation Stone laid ceremony of school building of VKV Borojalenga : Read More
  • New Website launched -> Work in Kashmir : "Shri Ramkrishna Mahasamelan Ashram" : http://srma.vkendra.org : Read More
  • Tale of the Vivekananda Rock Memorial Kanyakumari : Read More
  • स्मारिका : एक जीवन - एक ध्येय:  विस्तृत
  • New Video upload : Vimarsha : National Security : Chanllenges and Response at Surat : View Now
Forth coming event :

Registration open for Yoga Shiksha Shibir at Kashmir & Kanyakumari


Camp
Language
Duration
Age
Contribution
Yoga Shiksha Shibir - KanyakumariEnglish5 - 19 May 201518 to 50 YearsRs.2,000/-
योग शिक्षा शिविर - कन्याकुमारी हिन्दी५ - १९ मई २०१५ १८ से ५० सालरु.२,०००/-
योग शिक्षा शिविर - कश्मीर हिन्दी१२ - २१ जुन  २०१५ १८ से ५० सालरु.३,०००/-

अधिक जानकारी के लिए कृपया http://www.vivekanandakendra.org/camps-kanyakumariएवं http://www.vivekanandakendra.org/camps-kashmirदेखे

  1. YogaFlipKart
  2. योग
  3. Surya Namaskar
  4. Rousing Call To Hindu Nation
  5. Story Of Vivekananda Rock Memorial
  6. India's Contribution to World Thought & Culture
  7. A Comparehensive Biography of Swami Vivekananda
  8. Sadhana Of Service
  9. Eknathji - a Biographical Sketch
  10. Expression of Chirstianity with a focus on India - SoftCover
  11. Expression of Chirstianity with a focus on India - HardCover


Mananeeya Eknathji Janma Shati Parva




  • सूर्य नमस्कार महायज्ञअपने किए हुए सूर्यनमस्कार कृपया सूर्यनमस्कार घड़ी पर अवश्य जोडे ।
Please add your SuryaNamaskar in SuryaNamaskar Clock.
Please register to the SuryaNamaskar clock and daily add how many SuryaNamaskar done by your or your group.
The website has been started on Rashtra Chintan Diwas, a First day of Samartha Bharat Parva, and till now 1,288,294Suryanamskars have been registered.
The site gives various statistics like how many SuryaNamaskar done Today, This Month, This Year, with details like Total SuryaNamaskar done, by No. of Person & No. of Group.  Please spread the world and regularly add your count in the site.

Friday, April 24, 2015

MEJSP activities updates - Assam

Yuva Sammelan in Bilaspur

Yuva Samelan was organized on 12 april at Guru Ghasidas Central university. In Yuva Samelan chief guest as Prof. S. P. Singh (VC of GGV) was present along with Shri Ullas Wareji (Nagar Pramukh of Bilashpur), Prof S. N. Choubeyji (Rajistar of GGV), Prof S.V.S. Chauhan (DSW of GGV). Games, lecture, group discussion, songs were the part of the samelan. Main aim of the samelan is organized the youth for the service of society.

Thursday, April 16, 2015

इंदौर में युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा इंदौर की और से मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के अंतर्गत सफल युवा युवा भारत अभियान का युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर दिनांक ९ अप्रैल से १२ अप्रैल २०१५ को इन्दौरे नगर में मानव सेवा ट्रस्ट में आयोजित किया गया। शिविर में चिंतन युवा सेवा के विषयों को लेकर किया गया।
शिविर में मा. एकनाथजी के गुणों को लेकर गण के नाम दिए गए थे – १. दृढ़ता, २. सातत्य, ३. निष्ठा, ४. संगठन।
शिविर की दिनचर्या सुबह जागरण से प्रारंभ होकर प्रार्थना, योग, परिसर स्वछता, बौद्धिक सत्र, गट चर्चा, प्रस्तुति, नैपुण्य वर्ग, गीत व मंत्र अभ्यास, शारीरिक अभ्यास, भजन संध्या, प्रेरणा से पुनरुत्थान कर हनुमान चालीसा का पाठ कर रात्रि समाप्त होती थी। प्रेरणा से पुनरुत्थान में मा. एकनाथजी का जीवन सभी शिविरार्थियो तक पहुचाया गया। शिविर के समापन सत्र में शिविर अधिकारी श्री शरदजी वाजपेयी व मानव सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री विष्णुजी गोयल उपस्थित थे, समापन में शिविर अधिकारीजी ने आव्हान किया की सेवा का पक्ष मातृभूमि के प्रति समर्पित होना होगा, जिससे राष्ट्र का निर्माण हो यही हमारा एकमेव भाव मन में रख कर सेवा करनी है। स्वामीजी का जीवन, मा एकनाथजी का जीवन यह सेवा कार्य का हमारा आधार हो।
शिविर में कुल ११ महाविद्यालय से ७० विद्यार्थिओं ने भाग लिए, जिसका संचालन कुल २० कार्यकर्ताओं ने किया।
बौद्धिक सत्र
सत्र १ 
१ स्वामी विवेकानंद की दृष्टी – हे भारत उठो जागो और अपनी आध्यात्मिकता से सारे विश्व को आप्लावित कर दो यह सत्र आ. विभाशजी उपाध्याय द्वारा लिया गया ...
 * स्वामी विवेकानंद का चित्र देखते ही लगता है की उनसे हमारा जन्म जन्मान्तर का सम्बन्ध है।
 * ईश्वर को देखने की इच्छा का अर्थ है ह्रदय की पवित्रता।
 * प्रत्यक्ष देखना याने दो आँखों से देखना, और दूसरा याने मन की आँखों से देखना।
 * भगवदप्राप्ति यह मनुष्य को प्राप्त ही करना है।
 * ठाकुरजी कहते है नरेन्द्र आया नही मै लेकर आया हु।
 * स्व का बोध न होने के कारण व आत्मा विस्मृती के कारण से राष्ट्र का पतन हुआ।
 * स्वामीजी का मूल मंत्र है व्यक्ति निर्माण और उसका अधिष्ठान है वेदांत।
 * भगवान का साक्षात्कार करने से पुनर्जन्म में आना जाना बंद हो जाता है।
 * अपनी बात को सही ठहराने का प्रयास करना याने अज्ञान।
 * स्वामीजी का पश्चिम में जाना यह विश्व में आध्यात्मिक जागरण का पुनः प्रारंभ है।
 * पश्चिम के चार तत्व जिसने मूल से हानि पहुचायी जिसको स्वामी विवेकानंद समज गए थे ,
   १ जो श्रेष्ठ है वह जीवित है।
   २ जीवन यह संघर्ष है – अपने को जीवित रहना है तो संघर्ष करो ,
   ३ प्रकृति मनुष्य के लिए बनायीं है जितना भोग कर सकते हो करो
   ४ मनाव अधिकार – अपने अधिकार की चिंता करना
    स्वामीजी ने इसके समाधान यह पश्चिम को बताये
   १ सर्वे भवन्तु सुखिनः ,
   २ संघर्ष होता ही नहीं है जो संघर्ष दिखता है वह माया है – सूर्य व बादल दिखने के लिए बादल है परन्तु उसके पीछे सूर्य है,
   ३ मनुष्य यह प्रकृति का अंग है न की वह प्रकृति का राजा  ,
   ४ कर्तव्य बोध
 * सत्य को जानने के लिए मन के परे जाना होगा उसका मार्ग है आध्यात्मिकता,
 * धर्म का प्रगटीकरण यह आध्यात्मिक आचरण का व्यवहारिक पक्ष है,
 * भीतर की शक्ति को जागृत कर बाहर प्रकट करो,
 * आत्मनो मोक्षार्थं जगत हितायच....
सत्र २
विवेकानंद केंद्र – विलक्षण व परिभाषा
आ. सुब्रतो गुहा
 * सृष्टि का प्रथम राष्ट्र होने का गौरव यह भारत को है।
 * जो अपने क्षेत्र में ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करता है उनसे ही ईश्वर प्रसन्न होते है और मिलते है।
 * सामान्य से असामान्य बनाने के लिए एक दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। मा. एकनाथजी का जीवन।
सत्र ३
सेवा की संकल्पना – आध्यात्मिक सेवा
आ. विकासजी दवे
* स्वामीजी ने हमेशा सेवा का ही आग्रह किया।
* सेवा भाव के लिए सम्पूर्ण सृष्टि से एकाकार होना आवश्यक है।
  उदा . ठाकुरजी – गाय को मार रहे है परन्तु दर्द ठाकुरजी को हो रहा है ....(सिया राम मय सब जग जानी)
* सेवा की उत्पत्ति यह आत्मीयता से निर्माण होती है | सेवा में बाधाये आती है परन्तु आत्मीयता होने से वह दूर होती है।
* पुण्य केवल सेवा से ही प्राप्त होता है।
* वास्तव में सेवा वृत्ति सभी में होती है।
* अपने आप को जलाने वाले ही प्रकाश दे सकते है।
* सेवा करते समय अहंकार का भाव नही आने देना।
* सेवा याने सभी के प्रति ह्रदय में अनुभूति।
* सेवा का आग्रह स्वयं से करे।
* सेवा का भाव आचरण से स्पष्ट होना चाहिए।
* जिनका जीवन सेवा से परिपूर्ण है उनके जीवन को पढ़े।
* अन्यों की वेदना ही मेरी वेदना बने यही सेवा की संकल्पना है।
* सेवा करते समय हमेशा हमारी गर्दन निचे होनी चाहिए।
सत्र ४
सेवा कार्य के परिणाम – जो दिखते नही समजने पढ़ते है
आ. नंदनजी जोशी
* मोक्ष की व्याख्या सेवा से प्रारंभ होता है।
* निस्वार्थ सेवा का परिणाम – शिलास्मार्क तीर्थ क्षेत्र।
* निस्वार्थ से याने अपने ही पास के लोगों की सेवा करना।
* स्वार्थ पूर्ण सेवा यह क्षणिक होती है।

Saturday, April 11, 2015

राजस्थान प्रांत की गतिविधियाँ

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा - भीलवाड़ा: 20 मार्च को मेवाड़ चेम्बर डवलमेन्ट ट्रस्ट एवं विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा - भीलवाड़ा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता माननीय निवेदिता दीदी ने भीलवाड़ा शहर के प्रसिद्ध युवा उद्योगपतियों के बीच में ‘व्यावहारिक जीवन में आध्यात्मिक दृष्टिकोण’ इस विषय पर बोलते हुए बताया कि अगर जीवन में (1) समत्व यानि आत्मभाव में स्थित रहना, भावनात्मक से भी अधिक आध्यात्मिक बनना। (2) सन्तोष अर्थात् आनन्द प्राप्त करना। (3) सर्वसमावेशक अर्थात् सबको जोड़ने वाला एवं पूर्णत्व की ओर जाने वाला। (4) संयम अर्थात् फायदे के लिए देश, समाज को नुकसान न पहुँचाना। (5) सेवा करना, जहाँ आवश्यक है वहाँ तुरन्त पहुँचना, आध्यात्मिकता के आधारित अक्षय विकास पर काम करना।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पी.एम. बेसवाल जी एवं अध्यक्ष आर.एन. नौलखा जी ने सभी का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।

22 मार्च को माननीय एकनाथजी जन्मशती पर्व पर ‘दानदाता सम्मेलन’ का आयोजन माननीया निवेदिता दीदी एवं माननीया रेखा दवे की अध्यक्षता में किया जिसमें ‘राष्ट्र निर्माण में योगदान’ इस विषय पर प्रश्नोत्तर के जवाब में माननीया दीदी ने बताया कि केन्द्र आज देशभर में 836 शाखाओं और प्रकल्पों के माध्यम से देश में जागरण का कार्य हो रहा है, कार्यक्रम में माननीय एकनाथजी पर बनी फिल्म को दिखाया गया। कार्यक्रम में कुल 86 लोग उपस्थित रहे।

माण्डलगढ़: 24 मार्च को विवेकानन्द केन्द्र की ओर से भारतीय संस्कृति की प्रासंगिकता पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मा. निवेदिता दीदी ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द के अमेरिका में सभा संबोधन से पूर्व आई समस्याओं से भागे बिना आत्मविश्वास के साथ भाग लेने को तत्पर रहने से सभा संबोधन के बाद पूरे विश्व द्वारा वाहवाही करने का विस्तार से विवरण पेश किया। साथ ही सभी को उठो जागो, आगे बढ़ो की तर्ज पर जीवन यापन करने के लिए प्रेरित किया। सभी को भारतीय संस्कृति, गोमाता, धरती माता का संरक्षण करने में अग्रणी भूमिका निभाने, ईश्वर को सर्वत्र व्याप्त मानते हुए सफल सेवा भाव अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में विवेकानन्द के आदर्शों पर आधारित एक फिल्म केमाध्यम से लोगों को दिखाया गया। कार्यक्रम मेंमाननीया रेखा दीदी व भगवानसिंह भी उपस्थित रहे।

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा - जयपुर: 19 मार्च को केन्द्र कार्यकर्ताओं के साथ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष माननीया निवेदिता दीदी ने संवाद में बताया कि कार्यकर्ता का स्वाध्याय कृतिशील होना है, जिसमें सप्ताह/महीने में एक दिन को ऐसे स्ािान पर सफाई या ऐतिहासिक स्थान पर स्वाध्याय करना चाहिए। केन्द्र वर्ग में सभी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रहें इस पर जोर देना है। कार्यक्रम में 16 कार्यकर्ता प्रेरित हुए।

फुलेरा: 20 मार्च को विवेकानन्द केन्द्र की ओर से ‘परिवार स्नेह मिलन’ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य उद्बोधन केन्द्र की राष्ट्रीय उपाध्यक्षा माननीया निवेदिता दीदी का रहा। दीदी ने बताया कि अपने परिवार में प्रेम और बचत के कारण अर्थतंत्र में कितनी भी मुश्किलें आने पर भी हमारे बच्चे सर्वश्रेष्ठ कार्य करते हैं। बच्चों को जीवन का उद्देश्य बताना, साथ ही स्वयं के भीतर ईश्वर पर विश्वास करना सीखाना, जिसमें 47 परिवार प्रेरित हुए।

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा - कोटा : वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय एवं विवेकानन्द केन्द्र शाखा कोटा के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला आयोजित की गई। ‘सफल युवा समृद्ध भारत’ विषय पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. विनय पाठक ने कहा कि विवेकानन्द को जानना जितना जरूरी है उतना ही उसके आदर्शों पर जीना भी जरूरी है। मुख्य अतिथि प्रमुख उद्यमी गोविन्दराम मित्तल ने भारत के बढ़ते औद्योगिक विकास में युवाओं के लिए अवसरों के बारे में बताया। केन्द्र की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष माननीया निवेदिता दीदी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द गरीबों का जीवन स्तर प्रदान करने के लिए तत्पर थे। वे देश को विश्व पटल पर स्थापित करने के प्रेरक माने जाते हैं। कार्यशाला संयोजक प्रो. वी.के. शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।