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Saturday, April 18, 2026

Amrut Parivar Milan - Indore

 

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी  शाखा इंदौर 

नमस्कार

 अमृत परिवार मिलन समारोह मे  आप सपरिवार, इष्ट मित्रों के साथ सादर आमंत्रित हैं 

दिनांक 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार 

 समय शाम 6 बजे से 8 बजे तक

स्थान -  स्वर्ण जयंती सभागृह, SGSITS नेहरू पार्क रोड, इंदौर

       निवेदक 
CA अनुराग जोशी 
 नगर संचालक इंदौर

Tuesday, July 3, 2018

International Yoga Day VK Indore

विवेकानंद केंद्र इंदौर नगर द्वारा आंतरराष्ट्रिय योग दिवस के शुभ अवसर पर कुल 6 जगह पर आयोजन किये गए | जिसमे लगभग 450 की संख्या में रहवासियों ने भाग लिया|

आयोजन क्रमांक 01

स्थान : आय.आय. टी. इंदौर |

आय.आय. टी. इंदौर में आंतरराष्ट्रिय योग दिवस के अवसर पर सुबह 9.00 से 10.00 बजे कार्यक्रम किया गया | जिसमे कुल 150 की संख्या में प्राध्यापक, स्टाफ, पी.एच.डी छात्र एवं बी. टेक के छात्र उपस्थित थे | आयोजन के अवसर पर विशेष रूप से आय.आय. टी. इंदौर के रजिस्ट्रार, डीन ऑफ़ स्टूडेंट उपस्थित थे | आंतरराष्ट्रिय योग दिवस का आयोजन आयुष विभाग केंद्र सरकार के प्रोटोकोल के अनुसार किया गया | योग दिवस का प्रारंभ 3 ॐ एवं प्रार्थना से हुआ | प्रस्तावना में योग क्या है, योग का संक्षिप्त इतिहास एवं विकास, योग के आधारभूत तत्त्व, पारंपरिक योग संप्रदाय एवं स्वास्थ्य और कल्याण के लिए यौगिक अभ्यास यह विषय विवेकानन्द केंद्र के नगर प्रमुख श्री सोनू गुप्ता ने रखा | योग दिवस का आयोजन   विवेकानन्द केंद्र के कुल 8 कार्यकर्ता के द्वारा पूर्ण किया गया | इस अवसर पर विवेकानन्द केंद्र प्रकाशन के पुस्तकों का स्टॉल जिसमे योग से संबंधित एवं स्वामी विवेकानन्द का साहित्य उपलब्ध कराया गया |

आयोजन क्रमांक 02

स्थान : सिद्धिविनायक गणेश मंदिर, धन्वन्तरी नगर, राजेंद्र नगर विस्तार |

राजेंद्र नगर विस्तार में विवेकानन्द केंद्र के कार्यकर्ताओं द्वारा आंतरराष्ट्रिय योग दिवस का आयोजन किया गया जिसमे कुल 130 रहवासिओं ने भाग लिया | यह आयोजन सुबह 6 बजे से किया गया |  योग दिवस के आयोजन में विशेष रूप विवेकानन्द केंद्र के मा. सह नगर संचालक श्री उमेश खंडेलवाल उपस्थित थे |

आयोजन क्रमांक 03

स्थान : अष्टांग आयुर्वेदिक महाविद्यालय, लोकमान्य नगर, राजेंद्र नगर विस्तार |

आंतरराष्ट्रिय योग दिवस का आयोजन विवेकानन्द केंद्र के युवा कार्यकर्ताओ द्वार अष्टांग आयुर्वेदिक महाविद्यालय में आयोजित किया गया | यह आयोजन आयुर्वेदिक महाविद्यालय के विवेकानन्द स्टडी सर्कल के कार्यकर्ता द्वार लिया गया जिसमे 12 कार्यकर्ता आयोजन में उपस्थित थे | कार्यक्रम में कुल 70 की संख्या में प्राध्यापक एवं विद्यार्थिओं ने भाग लिया |

आयोजन क्रमांक 04,05 एवं 06

स्थान : नेहरू नगर संस्कार वर्ग, बजरंग नगर संस्कार वर्ग एवं बिजलपुर, इंदौर |

आंतरराष्ट्रिय योग दिवस का आयोजन नगर में चल रहे संस्कार वर्गों में आयोजित किया गया | यह आयोजन संस्कार वर्ग शिक्षकों द्वारा किया गया | योग दिवस में तीनो संस्कार वर्ग के कुल  150 की संख्या में परिवार उपस्थित थे |

Monday, June 12, 2017

संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर @ इंदौर ​

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी इंदौर नगर में संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर दिनांक 24 मई से 28 मई तक आयोजितकिया गया। संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर यह कार्यकर्ता के वैचारिक स्पष्टता तथा राष्ट्र निर्माण में कार्यकर्ता की भूमिका इन विषयों को लेकर आयोजित किया जाता है।

शिविर में कुल 3 बौद्धिक सत्र हुए, 1.संकार वर्ग क्यों?, 2. संस्कार वर्ग कैसे, 3. राम और कृष्ण संस्कार वर्ग के प्रणेता।  शिविर में दिनचर्या सुबह 5.00 बजे जागरण व प्रातः स्मरण से प्रारम्भ कर संस्कार वर्ग का अभ्यास, एकात्मता स्तोत्र का अभ्यास व पठन किया गया। मंथन सत्र में संस्कार वर्ग से वर्त्तमान चुनोतिया का समाधान इन विषय पर चर्चा व प्रस्तुति की गयी। अभ्यास सत्र वैदिक गणित कार्यकर्ता ने लिए। नैपुण्य वर्ग में संस्कार वर्ग रचना, सूर्यनमस्कार, कथाकथन, गीत, प्रार्थना यह विषय लिए गए। सुबह और शाम शारीरिक अभ्यास में संस्कार वर्ग लिया गया, कथाकथन में श्रद्धावान नचिकेता, वीर अभिमन्यु, सीता पुरत्र लव –कुश, भक्त प्रल्हाद, स्वामी विवेकानन्द, गुरु गोविन्द सिंह इन विषयों पर हुई। प्रेरणा से पुनरुत्थान में देवासुर संग्राम, राम रावन युद्ध, भागीरथ प्रयास इन विषयों पर कथाकथन हुआ।

शिविर में समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में विवेकानन्द केंद्र प्रान्त संपर्क प्रमुख श्री अतुल सेठ जी, सरस्वती शिशु मंदिर के सचिव श्री दंडवते जी, संस्कार वर्ग प्रशिक्षण शिविर के शिविर अधिकारी आ. श्रीमती श्रद्धाताई देशपांडे  ने कार्यकर्ताओं को आशीर्वचन दिए। श्री अतुल सेठ जी ने प्रशिक्षनार्थी और पालक वर्ग को बताया की परिवार में एक सामूहिक दिनचर्या होनी चाहिए, पालक स्वयं टी.वि., मोबाइल, से दूर रहे विवेकानन्द केंद्र की गतिविधिओं में भाग ले, परिवार में अनुशासन का कटाक्ष करे। शिविर अधिकारी श्रीमती श्रद्धाताई देशपांडे ने पलकों को संस्कार वर्ग के अभिभावक बने यह आहवाहन किया। समापन कार्यक्रम में इंदौर नगर से प्रबुद्धजन, शिविरार्थियो के पालक  भी उपस्थित थे।

शिविर में कुल 5 गण अदम्य, अभी:, तेजस, अग्निशिखा, अम्रुत्प्राणा की रचना की गयी थी , तथा कार्यालय को निष्पक्ष, अधिकारी कक्षा को निश्रेयेस, संचालन चमू कक्षा को​ अभुदय यह नाम रखे गए थे। शिविर में इंदौर नगर से 34, धार नगर से 6 संचालन चमु 15 ऐसे कुल 55 कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Monday, April 3, 2017

स्थानीक कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर, खंडवा नगर

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी इंदौर विभाग द्वारा खंडवा नगर में स्थानिक कार्यकता प्रशिक्षण शिविर दिनांक 22 मार्च से 26 तक आयोजित किया गया। कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर यह कार्यकर्ता के वैचारिक स्पष्टता तथा राष्ट्र निर्माण में कार्यकर्ता की भूमिका इन विषयों को लेकर आयोजित किया जाता है।

शिविर में कुल 6 बौद्धिक सत्र हुए, 1.राष्ट्र भक्त सन्यासी स्वामी विवेकानंद , 2. केंद्र प्रार्थना, 3. संघटित कार्य की आवश्यकता  4. मा. एकनाथजी, 5. संस्कार वर्ग क्यों और कैसे 6. गुण एवं जीवन ध्येय। शिविर में दिनचर्या सुबह 4.30 बजे जागरण व प्रातः स्मरण से प्रारम्भ कर संस्कार वर्ग का अभ्यास, कर्म योग श्लोक संग्रह का अभ्यास व पठन किया गया। मंथन सत्र में सेवा ही साधन से सुव्यवास्थित मानसिकता  अध्याय का पठन, संस्कार वर्ग से वर्त्तमान चुनोतिया का समाधान इन विषय पर चर्चा व प्रस्तुति की गयी। अभ्यास सत्र में उठो जागो अभियान, महाविद्यालय में केंद्र वर्ग एवं उत्सव के विषय कार्यकर्ता ने लिए। शाम शारीरिक अभ्यास में संस्कार वर्ग लिया गया। प्रेरणा से पुनरुत्थान में भगिनी निवेदिता की कहानी बताई गयी।

शिविर में समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के मा. प्रान्त सह संघचालकजी डॉ प्रकाश शास्त्री, खंडवा शासकीय बहुशिल्प महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ चंद्रशेखर ढबू और विवेकानंद केंद्र की प्रान्त संघटक कु. रचना दीदी  ने कार्यकर्ताओं को आशीर्वचन दिए। डॉ शास्त्रीजी ने बताया की संगठन में नेतृत्व करने वाला कार्यकरता स्पष्ट और व्यवस्थित है तो कार्य यह परिणामकारक होता है, डॉ चंद्रशेखर ढबू जी ने स्वयं पर नियंत्रण करने की बात कही, आ. रचना दीदी ने कार्यकरताओ को आहवाहन किया की यह समय अधिक कार्य करने का है अतः अपने जीवन का अधिक से अधिक समय हम दे । समापन कार्यक्रम में खंडवा नगर से प्रबुद्धजन भी उपस्थित थे। शिविर के अंतिम दिन कार्यकर्ताओं ने श्री दादाजी धूनीवाले के दर्शन किये और प्रसादी ग्रहण की ।

शिविर में कुल 4 गण त्याग, सेवा, समर्पण,श्रद्धा की रचना की गयी थी। शिविर में इंदौर नगर से 16, धार नगर से 3 और उज्जैन नगर से 9 , खंडवा नगर से 2 , संचालन चमु 10 ऐसे कुल 40 कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Friday, December 16, 2016

इंदौर में युवा विमर्श

इंदौर , तारीख 9 दिसम्बर शुक्रवार को विवेकानंद केंद्र इंदौर द्वारा युवा विमर्श का कार्यक्रम तीन जगह (जाल सभाग्रह, आई. आई. इदौर डिपार्टमेंट ऑफ़ सोशियोलॉजी एवं एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज, इंदौर) आयोजीत किया गया। इस विमर्श में श्री तुफैल अहमद जी मुख्य वक्ता थे उन्होंने “भारत में धर्म निरपेक्षता एवं अल्पसंख्यक”, "सेकुलरिज्म – इश्यूज एंड चलेंजेस", "राष्ट्रियता" ऐसे विषय पर अपना व्याख्यान दिया। श्री तुफैल अहमद भारतीय मूल के ब्रिटिश पत्रकार है और OPEN SOURCE INSTITUTE NEW DELHI के EXCECUTIVE DIRECTOR है।
धर्म निरपेक्षता एवं अल्पसंख्यक के अपने विषय पर श्री तुफैल अहमद ने अल्पसंख्यको पर अपने गहन विचारो को प्रकट किया एवं आज भारत के समाज में धर्मनिरपेक्षता को किस प्रकार राजनैतिक हितो के लिए उपयोग किया जाता है ,इस पर अपने विचार रखे।
उन्होंने बताया की "लोकतंत्र की यह खूबसूरती है की इसने एक नया प्रबुद्ध वर्ग पैदा किया, जो की वर्तमान मतदाता है जो फैसला लेता है और देश की सियासत बदलने की छोटी ही सही लेकी कोशीश करता है। १९४७ में जो हुआ सो हुआ लेकिन उसके बाद भी बटवारा थमा नहीं । कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिये धर्म निरपेक्षता का इस्तमाल सत्ता पाने के लिए करते है। मेडिकल कॉलेज, इंदौर में श्री तुफैल अहमद ने प्राध्यापक एवं विद्यार्थिओं को  चिकित्सा क्षेत्र में पूरी ईमानदारी से कम करने के लिए प्रोत्साहित किया। चिकित्सा क्षेत्र को मिशन मानते हुए पुरे ईमानदारी से कार्य करते है तो यह सबसे बड़ी राष्ट्र सेवा होगी।
कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र के प्रान्त संचालक (मध्य प्रान्त )मा.श्री मनोहर देव जी भी उपस्तिथ थे।| समाज के विभिन्न वर्गों से पधारे वरिष्ठजनो के साथ-साथ महाविध्यलायीं छात्र छात्राए भी बड़ी संख्या में उपस्तिथ थे ।

Tuesday, August 16, 2016

धार में स्थानीक कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी इंदौर विभाग द्वारा धार केंद्र में स्थानिक कार्यकता प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर यह कार्यकर्ता के वैचारिक स्पष्टता तथा राष्ट्र निर्माण में कार्यकर्ता की भूमिका इन विषयों को लेकर आयोजित किया जाता है।

शिविर में कुल 6 बौद्धिक सत्र हुए, 1.कार्यकर्ता के लक्षण, 2. केंद्र प्रार्थना, 3. स्वामी विवेकानन्द राष्ट्र भक्त सन्यासी, 4. मा. एकनाथजी, 5. उत्सव, 6. अनुशासन। शिविर में दिनचर्या सुबह 5 बजे जागरण व प्रातः स्मरण से प्रारम्भ कर योग वर्ग का अभ्यास, नित्य कर्म योग श्लोक संग्रह का अभ्यास व पठान किया गया।  मंथन सत्र में सेवा ही साधन से अनुशासन व सुव्यवास्थित मानसिकता 1 अध्याय का वचन का चर्चा व प्रस्तुति की गयी। अभ्यास सत्र में उठो ! जागो !! युव प्रेरणा अभियान के विषय कार्यकर्ता ने लिए। शाम शारीरिक अभ्यास में संस्कार वर्ग लिया गया। प्रेरणा से पुनरुत्थान में श्री रामकृष्ण परमहंस देव की कहानी बताई गयी। शिविर में वृक्षारोपण का कार्यक्रम किया गया, वृक्षरोपण के कार्यक्रम में विशष रूप से फारेस्ट डिपार्टमेंट के रिटायर्ड रेंजर श्री जगदीश जी जोशी और प्रांत प्रमुख श्री भवरसिंह जी राजपूत के हसते किया गया।

शिविर में समापन सत्र में मुख्या अतिथि जी.डी.सी. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बी. आर. पाटिल और अध्यक्ष श्री आनंद हिन्दू अनाथ आश्रम के अध्यक्ष श्री उदय वडनेरकर जी ने कार्यकर्ताओं को आशीर्वचन दिए । समपर्ण कार्यक्रम धार नगर से प्रबुद्धजन भी उपस्थित थे।

शिविर में कुल 2 गण शाश्वत और अस्तित्व की रचना की गयी थी। शिविर में कुल इंदौर, धार और उज्जैन नगर से 21 कार्यकर्ता उपस्थित थे। शिविर में विशेष रुप से 2 दिन मध्य प्रान्त प्रमुख श्री भवरसिंह राजपूत जी उपस्थित थे।

Friday, April 15, 2016

जाग उठी है तरुणाई : इंदौर में युवा विमर्श

Yuva Vimarsh Indore 2016
इंदौर महानगर में “जाग उठी है तरुणाई” विषय पर युवा विमर्श का आयोजन हुआ. विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की इंदौर शाखा द्वारा आनंद मोहन माथुर सभागृह, इंदौर प्रेस क्लब में हुआ।
‘युवा विमर्श ‘- एक वैचारिक श्रुंखला गत वर्ष केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे की जन्म शती पर्व भारतवर्ष में मनाई गई। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष मा. निवेदिता रघुनाथ भिड़े का उद्बोधन रहा। कार्यक्रम में मा. भंवर सिंह राजपूत विशेष अतिथि  के रूप में उपस्थित थे। युवा विमर्श कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मा. निवेदिता दीदी ने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बाते बताई।
  •     प्रदीप्त युवा मन ही राष्ट्र की जीवन रेखा है ।
  •     युवा स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से झोक देता है ।
  •     युवा अतीत-भविष्य को जोड़ता है ।
  •     अतीत में ऐसा क्या जीवन रस है जिससे यह राष्ट्र हजारो वर्ष से जीवित है ।
  •     जो भी सपना जब तक पूरा नहीं होगा, तब तक रुकेंगे नहीं, यह सपना केवल युवाओ का ही हो सकता है ।
  •     परिस्थितियों से विचलित नहीं होना ही युवाओ का स्वभाव है ।
  •     परिस्थितियां कैसी भी हो, परन्तु बाह्य परिस्थितियों के शिकार नहीं हो ऐसा युवा जिस देश में है, उस राष्ट्र का कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता ।
  •     प्रत्येक युवा को अपना ध्येय निर्धारित करना ही होगा ।
  •     जीवन ध्येय ही आत्म शक्ति को जोड़ता है, जिससे युवा किसी भी परिस्थितियों में विचलित नहीं होता है ।
  •     स्वामी विवेकानंद कहते थे, संपूर्ण विश्व ही परस्पर जुड़ा हैl इसलिए समाज को ही सत्य के अनुसार चलना चाहिए ।
  •     संपूर्ण विश्व के अस्तित्व का सत्य एकात्मता ही है । हमारे देश के युवाओ को जापान के युवाओ के जीवन ध्येय  को स्मरण करते हुए कार्य करना होगा. जापान के पास कोई संसाधन नहीं था, सिवाय प्रदीप्त युवा मन के ।
  •     मैं अकेला क्या कर सकता हूँ, यह नहीं बोलना बल्कि स्वामी विवेकानंद की जीवनी को आत्मसात करना ।
  •     जीवन निर्माण में लगने वाली उर्जा व्यर्थ कार्यो में न लगे यह स्व विवेक से ही कार्यरत हो ।
  •     जीवन का आनंद राष्ट्र की संस्कृति की ही देन है ।
  •     जीवन के ध्येय के साथ जीवन के मूल्य को भी समझना होगा ।
आज स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है और परिवार से यह सहज संभव होता है, दूसरा स्वामीजी स्वयं युवा थे और उनकी अधिक अपेक्षा युवाओं से थी अतः युवा विमर्श एक वैचारिक शृंखला इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं ने जुड़कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है। कार्यक्रम में मा. निवेदिता दीदी ने युवाओ के प्रश्नों का समाधान किया I २५० की संख्या में २० महाविद्यालय से युवा, प्राचार्य तथा प्राध्यापक वर्ग व नगर के प्रबुद्ध जन कार्यक्रम में उपस्थित थे।

उत्तर पूर्वांचल को लेकर संवाद कार्यक्रम

मा. निवेदिता दीदी, उपाध्यक्ष विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के इंदौर नगर में विवेकानंद केंद्र ने उत्तर पूर्वांचल में चल रहे केंद्र कार्य  को लेकर इंदौर महानगर के युवा उद्यमी, डॉक्टर्स, वकील, जस्टिस, मातृशक्ति, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, शिक्षा क्षेत्र केेे शिक्षाविद को लेकर नए वनवासी क्षेत्र में केंद्र कार्य का प्रारंम इस विषय को लेकर एकत्रीकरण किया गया। मा. निवेदिता दीदी ने केंद्र कार्य का उत्तर पूर्वांचल में चल रहे कार्य का अनुभव बताते हुए आहवाहन किये की इंदौर नगर के लोग इस कार्य से जुड़कर राष्ट्र निर्माण के कार्य में सहयोग करे और ऐसे कार्य के लिए खुलकर एकत्रिक आये।

Wednesday, January 13, 2016

नया भारत गढ़ों : Indore

विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में कृषि महाविद्यालय इंदौर में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा इंदौर के तत्वाधान में “नया भारत गढ़ों” विषय पर स्वामी परमात्मानंद गिरीजी महाराज ने विचार व्यक्त किये स्वामी जी ने बताया की सनातन धर्मं ही हिन्दू धर्मं है |सनातन धर्मं के अनुसार ही सबको चलना पड़ेगा | हिन्दू धर्मं कभी संकुचित नहीं रहा यह तो विरोधियो द्वारा फैलाया गया भ्रम हे यह हमें समजना है |हिन्दू जीवन दृष्टि विश्व की व्यापक दृष्टि हे |किसी भी शास्त्र में छुआछुत की बात नहीं लिखी, शास्त्र में पवित्र और अपवित्र का उल्लेख है | धर्मं पर अटूट विश्वास ही विवेकानंद जी का विशेष आग्रह था, सभी को संस्कृत पढ़ना चाहिए | श्रमिकों का राष्ट्रीयकरण करना होगा, तब नया भरत गढ़ने का स्वप्न साकार होंगा |
केंद्र के प्रान्त पर्व प्रमुख श्री रामभुवन सिंह कुशवाह जी ने केंद्र कार्य के लिए आहवाहन किया तथा मा. प्रान्त संचालक श्री मनोहर देवा जी ने आभार प्रकार किये | कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रोफेसर और युवओं ने भाग लिया |

Thursday, December 10, 2015

ईन्दोर में समीधा वर्ग

विवेकानंद केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे इनका १०० वा जन्म दिवस १९ नवम्बर २०१४ से १९ नवम्बर २०१५ मनाया गया है। अतः इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र इंदौर नगर में समिधा वर्ग का आयोजन किया गया। सम्मलेन में मुख्य रूप से मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के राष्ट्रिय उपाध्यक्ष श्री कृष्णकुमार अष्ठानाजी व माननीय मध्य प्रान्त संचालक श्री मनोहर देवजी  तथा माननीय विभाग संचालक श्री अतुल सेठजी उपस्थित थे। समिधा वर्ग के मुख्य वक्ता श्री कृष्णकुमार अष्ठानाजी ने मा. एकनाथजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुआ बताया की .......
  • मा. एकनाथजी के जीवन का केंद्र बिंदु यह स्वामी विवेकानंद थे,
  • स्वामीजी के विचारों का सारांश याने मा. एकनाथजी का जीवन था,
  • शिलास्मारक के लिए एक रूपये के माध्यम से पैसा इकट्ठा करना यह उद्देश्य नहीं था तो सभी का सहयोग हो यह भाव था,
  • मा एकनाथजी ने पुरे देश में अनुकुल वातावरण निर्माण किया, नेहरूजी के सन्देश को समझने वाले श्री भक्त्वत्सलम को भी इस कार्य के लिए तैयार किया,
  • प्रबुद्ध देश की सोच रखते है और युवा देश का इतिहास बदलते है,
  • हमारे राष्ट्र के समक्ष चुनौतिया बहुत बढ़ी है और इसीलिए कार्यकर्ता ने संगठन के माध्यम से मेरी भूमिका इस राष्ट्र कार्य में क्या है यह तय करना है,
  • जीवन एक ध्येय होने से कोई भी कार्य कठिन नहीं होता,
  • मा. एकनाथजी के लिए स्वामीजी थे और कार्यकर्ता के लिए मा. एकनाथजी है,

अंत में आवाहन किया की सभी कार्यकर्ता अपना आवश्यक समय दे और स्वामीजी के स्वप्न और मा. एकनाथजी के मिशन को पूर्ण करने में अपनी शक्ति लगाये। मा प्रान्त संचालक श्री मनोहर देवजी ने इंदौर नगर का कार्य और दृढ़ करे ऐसा आवाहना किया तथा श्री अतुल सेठजी ने केंद्र का परिचय दिया। सम्मलेन में कुल ७० कार्यकर्ता ने भाग लिया।

Friday, November 13, 2015

इंदौर में परिपोषक सम्मलेन

विवेकानंद केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे इनका १०० वा जन्म दिवस १९ नवम्बर २०१४ से चल रहा है, इस पर्व को केंद्र मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के नाम से मना रहा है। अतः इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र राजेंद्र नगर विस्तार में परिपोषक सम्मलेन का आयोजन किया गया। सम्मलेन में मुख्य रूप से विवेकानंद केंद्र के माननिय प्रान्त प्रमुख श्री भवरसिंह राजपूत व माननिय प्रान्त संचालक श्री मनोहर देव उपस्थित थे। श्री राजपूत जी ने मुख्य उद्बोधन में परिपोषक योजना की संकल्पना को स्पष्ट करते हुए बताया की भारत यह राष्ट्र के रूप में खड़ा होना है अतः उसके लिए मा. एकनाथजी ने बताये हुए आदर्श समाज रचना की और प्रयास रत रहना होगा अतः केंद्र कार्य यह इस सामूहिक प्रयास एक अंग है। महाभारत के भीष्म पर्व का उल्लेख करते हुए व्यवस्थाओं का निर्माण कैसे हुआ यह बताया। मंथन सत्र में कार्यकर्ताओं ने अपने क्षेत्र में संस्कार वर्ग को कैस प्रारंभ कर सकते है इस पर चर्चा हुयी तथा संस्कार वर्ग और उसकी आवश्यकता पर चिंतन हुआ। खेल सत्र में सृजन दंड, हाथी घोडा पालकी और बाधाये यह खेले गए। समापन सत्र में माननीय प्रान्त संचालक श्री मनोहर देवजी ने संस्कार वर्ग का आवाहन किया।
सम्मलेन में कुल ५० परिवार ने भाग लिया। कन्याकुमारी में होने वाले शिविर आध्यात्मिक शिविर, योग शिविर तथा इंदौर नगर में योग सत्र की जानकारी से अवगत काराया गया। सम्मलेन में साहित्य का लाभ सभी कार्यकर्ताओं ने लिए व सहभोज के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया।

Saturday, September 19, 2015

“सफल युवा युवा भारत” अभियान उद्घाटन

११ सितम्बर स्वामी विवेकानंद का विश्व बंधुत्व दिवस (शिकागो व्याख्यान) विवेकानंद केंद्र द्वारा प्रति वर्ष  मनाया जाता है। इस वर्ष विवेकानंद केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे इनका १०० वा जन्म दिवस १९ नवम्बर २०१४ से चल रहा है, इस पर्व को केंद्र मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के नाम से मना रहा है। अतः  इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र इंदौर में युवाओं के बिच महाविद्यालयों में “युवा विमर्श एक वैस्चारिक शृंखला इस कार्यक्रम का उदघाटन किया गया। कार्यक्रम में मा. एकनाथजी के व्याख्यानों का संग्रह Spiritualizing Life इस पुस्तक का विमोचन विवेकानंद केंद्र के मध्य प्रान्त संचालक श्री मनोहर  देव व मुख्या अतिथि डॉ मुकेश मोढ, होलकर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चतुर्वेदीजी, कला व वाणिज्य के प्राचार्य डॉ एस.एल.गर्ग जी के हस्ते किया गया। युवा विमर्श कार्यक्रम के मुख्या वक्ता डॉ मुकेश मोढ जी अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बाते बतायी
  • लक्ष निर्धारित होने से जीवन में सार्थकता का अनुभव होता है,
  • लक्ष की स्पष्टता होने से विषम परिस्थिति में विजय प्राप्त की जाती है,
  • स्वामी विवेकानंद युग प्रवर्तक थे, उन्होंने १९९१ में घोषण की थी आने वाले ५० वर्षों तक   भारत माता ही अपनी आराध्य दैवत है और ठीक ५१ वर्ष बाद भारत स्वतंत्र हुआ,
  • कोई  भी बड़े कार्य के लिए छोटा मार्ग नहीं होता है,
  • महान बनने किए लिए स्वामीजी ने पांच बाते बताई है
  • 1. निष्ठा, २.उदयम शक्ति, ३. धैर्य, ४. निश्चय और ५. सातत्य

और फिर तब भारत को कोई नहीं रोग पायेगा।
आज स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है और परिवार से यह सहज संभव होता है, दूसरा स्वामी स्वयं युवा थे और उनकी अधिक अपेक्षा युवाओं से थी अतः युवा विमर्श एक वैचारिक शृंखला इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं ने जुड़कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है। श्री मनोहर देव जी ने विवेकानंद केंद्र का परिचय देकर केंद्र से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करने का आवाहन किया। विवेकानंद केंद्र के होलकर महावद्यालय के प्रभारी प्राध्यापक  श्री धीरजजी शर्मा ने कार्यक्रम का सञ्चालन किया। कार्यक्रम में ३५० की संख्या में  युवा, प्राध्यापक व नगर के प्रबुद्ध वर्ग उपस्थित थे।

Tuesday, September 15, 2015

Activities at VK Indore

GuruPoornima Utsava : Indore, 01.08.2015. Gurupoornima, the festival dedicated to spiritual and academic teachers was celebrated by Vivekananda Kendra, Indore at Ram Mandir, Rajendra Nagar. Around 50-60 karyakartas and well wishers were present during the celebration.
The programme was started with Shanti Mantra and a patriotic song. The importace of the relation between Guru-Shishya and Omkar was narrated by Manisha Tiwari Didi. An inspiring story of Guru-Shishya was told by Tapasvi Kaka. The ceremony ended with Shanti path and  swalpahar was distributed.
Van Vihar : On 25.07.2015. Fifteen karyakartas went to Ralamandal Abhyaranya for Van Vihar. Despite of heavy rainfall and shivering cold weather the Karyakartas continued the journey and had a successful and memorable trip. We had lunch there followed by a patriotic song and discussion on the importace of self confidence and upcoming programmes  to be held. It was also decided that this type of van vihar will be organized once in four months.
Aanandalaya : Aanandalaya is organized once a week i.e., on Sunday in a nearby village at Indore. It is specially designed for the childrens of age group 8 to 16. Vivekananda Kendra, Indore is running the Aanandalaya project in two villages or colonies at Indore. One at Chitawad and another at Rajendra Nagar. The Programme runs according to the objectives of Kendra. The main aim of the activity is to connect with children and lead them in the right path It starts with prayer  followed by valuable speech and interesting games. Inspirational stories are also told to the childrens. Other activies involved in this programme are patriotic song and Yoga. Study session is likely to start soon. The session ends with Shanti Mantra.
Swadhyaya Varga : Swadhyaya Varga is organized once every week. It is held every Sunday evening at 4 PM. In this meeting, karyakartas gather together and discuss on the book chosen. Last month we discussed on the book “Naya Bharat Gado” which has been completed successfully. The book was read thoroughly and discussed. ‘Pustak Samapan Karyakram’ was organized on 16 August, 2015 in the presence of Aadarniya Sheetal Didi.
Former Indian President Dr. APJ Abdul Kalam who passed away on 27 July 2015 was paid homage by karayakartas on 28 July 2015. A special program was organised in which all the karyakartas were present. Programme was started with 3 Omkar and prayers. Dr. Kalam’s contributions and life history was highlighted by Mukesh Bhaiya and aadharniya Sharadji Vajpeyi.  The ceremony concluded with shanti paath and offering of flowers.
Kendra Varga : The weekly meeting of karyakartas is held on every Thursday. A rest house owned by Shri Manoharji Dev located near Shubh Karaj Marriage Garden, Rajiv Gandhi Chauraha is fixed for the purpose of Kendra Varga. Atleast 8-15 karyakartas use to attend the meeting every week. It starts with prayers followed by games and discussions on topic relating life of great persons and inspirational books. Various activities of Kendra is also discussed. A pranayama is also practiced in every session of Kendra Varga. The session ends with prayers.

Thursday, April 16, 2015

इंदौर में युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा इंदौर की और से मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के अंतर्गत सफल युवा युवा भारत अभियान का युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर दिनांक ९ अप्रैल से १२ अप्रैल २०१५ को इन्दौरे नगर में मानव सेवा ट्रस्ट में आयोजित किया गया। शिविर में चिंतन युवा सेवा के विषयों को लेकर किया गया।
शिविर में मा. एकनाथजी के गुणों को लेकर गण के नाम दिए गए थे – १. दृढ़ता, २. सातत्य, ३. निष्ठा, ४. संगठन।
शिविर की दिनचर्या सुबह जागरण से प्रारंभ होकर प्रार्थना, योग, परिसर स्वछता, बौद्धिक सत्र, गट चर्चा, प्रस्तुति, नैपुण्य वर्ग, गीत व मंत्र अभ्यास, शारीरिक अभ्यास, भजन संध्या, प्रेरणा से पुनरुत्थान कर हनुमान चालीसा का पाठ कर रात्रि समाप्त होती थी। प्रेरणा से पुनरुत्थान में मा. एकनाथजी का जीवन सभी शिविरार्थियो तक पहुचाया गया। शिविर के समापन सत्र में शिविर अधिकारी श्री शरदजी वाजपेयी व मानव सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री विष्णुजी गोयल उपस्थित थे, समापन में शिविर अधिकारीजी ने आव्हान किया की सेवा का पक्ष मातृभूमि के प्रति समर्पित होना होगा, जिससे राष्ट्र का निर्माण हो यही हमारा एकमेव भाव मन में रख कर सेवा करनी है। स्वामीजी का जीवन, मा एकनाथजी का जीवन यह सेवा कार्य का हमारा आधार हो।
शिविर में कुल ११ महाविद्यालय से ७० विद्यार्थिओं ने भाग लिए, जिसका संचालन कुल २० कार्यकर्ताओं ने किया।
बौद्धिक सत्र
सत्र १ 
१ स्वामी विवेकानंद की दृष्टी – हे भारत उठो जागो और अपनी आध्यात्मिकता से सारे विश्व को आप्लावित कर दो यह सत्र आ. विभाशजी उपाध्याय द्वारा लिया गया ...
 * स्वामी विवेकानंद का चित्र देखते ही लगता है की उनसे हमारा जन्म जन्मान्तर का सम्बन्ध है।
 * ईश्वर को देखने की इच्छा का अर्थ है ह्रदय की पवित्रता।
 * प्रत्यक्ष देखना याने दो आँखों से देखना, और दूसरा याने मन की आँखों से देखना।
 * भगवदप्राप्ति यह मनुष्य को प्राप्त ही करना है।
 * ठाकुरजी कहते है नरेन्द्र आया नही मै लेकर आया हु।
 * स्व का बोध न होने के कारण व आत्मा विस्मृती के कारण से राष्ट्र का पतन हुआ।
 * स्वामीजी का मूल मंत्र है व्यक्ति निर्माण और उसका अधिष्ठान है वेदांत।
 * भगवान का साक्षात्कार करने से पुनर्जन्म में आना जाना बंद हो जाता है।
 * अपनी बात को सही ठहराने का प्रयास करना याने अज्ञान।
 * स्वामीजी का पश्चिम में जाना यह विश्व में आध्यात्मिक जागरण का पुनः प्रारंभ है।
 * पश्चिम के चार तत्व जिसने मूल से हानि पहुचायी जिसको स्वामी विवेकानंद समज गए थे ,
   १ जो श्रेष्ठ है वह जीवित है।
   २ जीवन यह संघर्ष है – अपने को जीवित रहना है तो संघर्ष करो ,
   ३ प्रकृति मनुष्य के लिए बनायीं है जितना भोग कर सकते हो करो
   ४ मनाव अधिकार – अपने अधिकार की चिंता करना
    स्वामीजी ने इसके समाधान यह पश्चिम को बताये
   १ सर्वे भवन्तु सुखिनः ,
   २ संघर्ष होता ही नहीं है जो संघर्ष दिखता है वह माया है – सूर्य व बादल दिखने के लिए बादल है परन्तु उसके पीछे सूर्य है,
   ३ मनुष्य यह प्रकृति का अंग है न की वह प्रकृति का राजा  ,
   ४ कर्तव्य बोध
 * सत्य को जानने के लिए मन के परे जाना होगा उसका मार्ग है आध्यात्मिकता,
 * धर्म का प्रगटीकरण यह आध्यात्मिक आचरण का व्यवहारिक पक्ष है,
 * भीतर की शक्ति को जागृत कर बाहर प्रकट करो,
 * आत्मनो मोक्षार्थं जगत हितायच....
सत्र २
विवेकानंद केंद्र – विलक्षण व परिभाषा
आ. सुब्रतो गुहा
 * सृष्टि का प्रथम राष्ट्र होने का गौरव यह भारत को है।
 * जो अपने क्षेत्र में ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करता है उनसे ही ईश्वर प्रसन्न होते है और मिलते है।
 * सामान्य से असामान्य बनाने के लिए एक दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। मा. एकनाथजी का जीवन।
सत्र ३
सेवा की संकल्पना – आध्यात्मिक सेवा
आ. विकासजी दवे
* स्वामीजी ने हमेशा सेवा का ही आग्रह किया।
* सेवा भाव के लिए सम्पूर्ण सृष्टि से एकाकार होना आवश्यक है।
  उदा . ठाकुरजी – गाय को मार रहे है परन्तु दर्द ठाकुरजी को हो रहा है ....(सिया राम मय सब जग जानी)
* सेवा की उत्पत्ति यह आत्मीयता से निर्माण होती है | सेवा में बाधाये आती है परन्तु आत्मीयता होने से वह दूर होती है।
* पुण्य केवल सेवा से ही प्राप्त होता है।
* वास्तव में सेवा वृत्ति सभी में होती है।
* अपने आप को जलाने वाले ही प्रकाश दे सकते है।
* सेवा करते समय अहंकार का भाव नही आने देना।
* सेवा याने सभी के प्रति ह्रदय में अनुभूति।
* सेवा का आग्रह स्वयं से करे।
* सेवा का भाव आचरण से स्पष्ट होना चाहिए।
* जिनका जीवन सेवा से परिपूर्ण है उनके जीवन को पढ़े।
* अन्यों की वेदना ही मेरी वेदना बने यही सेवा की संकल्पना है।
* सेवा करते समय हमेशा हमारी गर्दन निचे होनी चाहिए।
सत्र ४
सेवा कार्य के परिणाम – जो दिखते नही समजने पढ़ते है
आ. नंदनजी जोशी
* मोक्ष की व्याख्या सेवा से प्रारंभ होता है।
* निस्वार्थ सेवा का परिणाम – शिलास्मार्क तीर्थ क्षेत्र।
* निस्वार्थ से याने अपने ही पास के लोगों की सेवा करना।
* स्वार्थ पूर्ण सेवा यह क्षणिक होती है।

Friday, March 20, 2015

ईन्दोर में युवा सम्मेलन

मा एकनाथजी जन्म शती पर्व के अंतर्गत् सफल युवा - युवा भारत में द्वितीय चरण युवा सम्मेल्लन २ महाविद्यालय गुजराती होमियोपेथी एवं होलकर विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित किया गया। इस युवा सम्मेल्लनों  में  गुजराती इनोवेटिव, गुजराती प्रोफेशनल, गुजराती होमियोपेथी, DAVV, होलकर विज्ञान महाविद्यालय के छात्र कुल ६२ की संख्या में उपस्तिथ थे। युवा सम्मलेन में  ३ ओमकार और प्रार्थना के साथ प्रारंभ करते हुए युवाओं को प्रस्तावना में एकनाथजी का दिया हुआ संदेश, केंद्र के सेवा भाव का अर्थ और अभियान के चरणों का उद्देश्य बताया गया। इसके बाद २ गणों में पूर्णता, आत्मविश्वास की रचना  करके परिचय और नाम एवं आदर्श महापुरुषों का खेल खेले गये। युवा सम्मलेन में श्री अतुल सेठजी, विभाग संचालक के द्वारा “में कौन हूँ ? सफलता का मापदंड और उधेश्य पूर्ण जीवन” इस विषय पर उद्बोधन हुआ। इसके उपरान्त मै कौन ? सफलता के मापदंड ? व उद्देश्य पूर्ण जीवन? इन  विषयों पर गट चर्चा एवं “आओ कहानी गाडो” खेल हुआ और मोदीजी का सफलता से सार्थक जीवन का दृश्य दिकाया गया था। समापन में केंद्र कार्यकर्ता द्वारा केंद्र परिचय एवं आवासीय शिबिर का आह्वान देते हुए इच्छुक छात्रों का पंजीकरण करवाया गया।

Friday, January 16, 2015

सामूहिक सूर्यनमस्कार महायज्ञ १०० युवाओं द्वारा १०८ सूर्यनमस्कार

विवेकानंद केंद्र द्वारा इंदौर महानगर में स्वामी विवेकानंद के जयंती के अवसर पर १० महाविद्यालय, छात्रावास से १०० युवाओं में १०८ सूर्यनमस्कार लगाकर स्वामी विवेकानंद के समक्ष आहुति अर्पण की कार्यक्रम में मंच पर विवेकानंद केंद्र के विभाग संचालक श्री अतुल सेठ व कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ श्री राजपुत उपस्थित थे | श्री अतुल सेठ जी ने मुख्या उद्बोधन में बताया की आज का दिन व यह वर्ष हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है क्यूंकि आज स्वामी विवेकानंद की १५१ वी जयंती है और विवेकानंद केंद्र के संस्थापक श्री एकनाथजी रानडे इनका १०० वा जन्म दिवस वर्ष चल रहा है | भारत को आज शक्ति की उपासना करना है, शक्ति है तो राष्ट्र आगे बढेगा और वह आध्यात्मिकता से विश्व का नेतृव करेंगा | स्वामी विवेकानंद ने बताया की हे भारत उठो जागो और अपनी आध्यात्मिकता से विश्व को आप्लावित कर दो और इसी को पूर्ण करना प्रत्येक युवा का दायित्व है | सूर्यनमस्कार यह शक्ति की उपासना का सबसे महत्वपुर्ण अंग है जिसे सभी को प्रतिदिन करना है | युवाओं में  ध्येयनिष्ठ रहते हुए अपने ध्येय को परखते है |

कार्यक्रम कृषि महाविद्यालय के प्रांगण में हुआ | कार्यक्रम में कुल १५० की संख्या में लोग उपस्थित थे |

Wednesday, October 22, 2014

इंदौर में सफल युवा युवा भारत का उद्घाटन


११ सितम्बर स्वामी विवेकानंद का विश्व बंधुत्व दिवस (शिकागो व्याख्यान) विवेकानंद केंद्र द्वारा प्रति वर्ष  मनाया जाता है | इस वर्ष विवेकानंद केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे इनका १०० वा जन्म दिवस १९ नवम्बर २०१४ से प्रारंभ होने जा रहा है, इस पर्व को केंद्र मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के नाम से मना रहा है | अतः  इस अवसर पर पुरे देश में केंद्र युवाओं के बिच महाविद्यालयों में “सफल युवा युवा भारत” इस अभियान के तहत संकल्प और सफलता यह विषय कथा विवेकानंद शिला स्मारक के माध्यम से पहुचायेंगा |

कार्यक्रम में “सफल युवा युवा भारत” पुस्तक का विमोचन विवेकानंद केंद्र के मध्य प्रान्त संचालक श्री मनोहर  देव व मुख्य अतिथि डॉ सुब्रतो गुहा जी के हस्ते किया गया | डॉ सुब्रतो गुहा जी अपने उद्बोध में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए बताया की स्वामी विवेकानंद ने पश्चिम में मुख्य रूप से 4 बिन्दुओं पर विचार प्रकट किए थे जो की आज की मूल आवश्यकत बन गयी है |

१.विज्ञान के कुठाराघात का सामना, 

२. भौतिक वाद का सामना, 

३. नीतिओं की समस्या को सुलझाना, 

4.धार्मिक अपवर्जित एवं विवादस्पद विचारों को रोकना |

नरेन्द्र से विवेकानंद का प्रवास याने मानव से महामानव का प्रवास है |
स्वामीजी हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि करने शिकागो गए थे क्यों की व विश्व धर्म सम्मलेन था |
सबसे बड़ा ऐश्वर्य यह भारत के पास में है और वह है आध्यात्मिकता |

भौतिक रूप से स्वामीजी का निधन हुआ है परन्तु वे आज और आने वाले दिनों में भी साथ रहेंगे |

स्वामीजी का विचार यह भौगोलिक सीमाओं तक सिमिति नहीं हो सकता व तो विश्व के व मानव जाती के कल्यांण के है |
भारत ने कभी भी अन्य भूमि पर राज्य नहीं किया तो वह हमेशा से लोगों के रुदय जितने का काम करता रहा है |
स्वामीजी ने कहा की गर्व से कहो हम हिन्दू है आज इसके सन्दर्भ को समजने कि आवश्यकता है और वह है की जो व्यक्ति अपने धर्म पर गर्व करता है उसे कोई गुलाम नहीं बना सकता |आज स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है और परिवार से यह सहज संभव होता है, दूसरा स्वामी स्वयं युवा थे और उनकी अधिक अपेक्षा युवाओं से थी अतः सफल युवा युवा भारत इस अभियान के अंतर्गत युवाओं ने जुड़कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है | श्री मनोहर देव जी ने विवेकानंद केंद्र का परिचय देकर केंद्र से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करने का आवाहन किया | विवेकानंद केंद्र के नगर प्रमुख श्रीमती सुनयना बुग्दे ने मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व की योजना बताई | कार्यक्रम का संचलन कु. रश्मि दीदी ने किया | विवेकानंद केंद्र का परिचय पि.पि.टी. द्वार डॉ. रविजी ने दिया |

Friday, May 3, 2013

स्वामी विवेकानन्द के आदर्श और आज का युवा

05/07/2013 18:00
Asia/Calcutta
अभ्यास मंडल, इन्दौर द्वारा आयोजित ५४वीं ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला, जाल सभागृह, दक्षिण तुकोगंज, इन्दौर में ३ से १० मई तक आयोजित की जा रही हैं।
इस व्याख्यानमाला अंतरगत मंगलवार, ७ मई, २०१३ को सायं ६ बजे "स्वामी विवेकानन्द के आदर्श और आज का युवा" विषय पर माननीय निवेदिता दीदी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, का व्याख्यान आयोजित किया गया है।

Tuesday, July 17, 2012

ॐ कार यह सभी पंथो में सर्व मान्य है

aum the universal symbolविवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा इन्दौर की और से गुरुपूर्णिमा उत्सव मनाया गया | स्वामी विवेकानंदजी के vision को मा. एकनाथजी ने mission के रूप में रखा| स्वामीजी ने कहा था " मै ऐसे मंदिर का निर्माण करना चाहता हु जिसके अंतर्गत सभी पन्थो के लोग एकत्रित हो और ॐ कार यह सभी पंथो में सर्व मान्य है |”इसी विचार को लेकर मा. एकनाथजी ने केंद्र में गुरु के स्थान पर ॐ कार की स्थापना की | कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री अतुल शेठजी (नगर प्रमुख विवेकानन्द केन्द्र शाखा इन्दौर) ने बताया की अपनी भावनाओं को पुन: एक मन से एकत्रिक करने का कार्यकर्ता के लिये यह है | हमारे  यहा गुरु याने जिसने राष्ट्र के लिये चिंतन कर विश्व के लिये कार्य किया जिसे हम ऋषि कहते है | श्री अतुल शेठ जी ने की ज्ञान के पाच आयाम बताये जो हमारे ऋषि ने हमे दिये है |
१. ज्ञान (ज्ञान को अर्जीत करना पडता है)
२. साहस(ज्ञान के साथ आवश्यक है साहस)
३. दिक्षा (दिक्षा अर्थात दक्षता, ज्ञान के प्रती दक्षता )
४. प्रसाद(ज्ञान को प्रसाद भाव से ग्रहण करना है और प्रसाद भाव से ही वितरित करना चाहिये)
५. दान(ज्ञान के दान मे हमारा विकास होना है)

साथ ही बताया की हमारे कार्य मे निरंतरता रहनी चाहिये, ऋषि मुनियों के दिनचर्या मे सबसे अधिक स्थान निरंतरता को था | अवतार यह हमारे में से निर्माण होगे उसके लिये हमे संगठित होकर प्रयास करना होंगा. विश्व के कल्याण के लिये हमे हमारे ऋषियों ने जो जिवन पद्धती दि है उसे अपनाना होंगा |
            कार्यक्रम मे विवेकानन्द केन्द्र के दायित्ववान कार्यकर्ता तथा शुभचिंतक उपस्थित थे |   

Monday, April 2, 2012

रचनात्मकता द्वारा नई शताब्दी की ओर... भारत जागो। विश्व जगाओ।।

Sense impression March 2012 - the creativity of the new century ... Wake up India. Wake the Worldविवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमरी शाखा इन्दौर कि और से व्याख्यान   रचनात्मकता द्वारा नई शताब्दी की ओर... भारत जागो। विश्व जगाओ।।  व्याख्यान २८ मार्च २०१२ को इन्दौर मे रखा गया ।  मुख्य वक्ता मा. श्री मुकुलजी ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन कि घटनाओं को रखते हुए बताया कि भारत जागो याने भारत को समर्थ बनाना होंगा, भारत सभी {¨त्र मे मार्गदर्शन करे और इसिलिये स्वामी विवेकानन्द का सार्ध शती समारोह वर्ष (१५० वी जयंती) हमारे लिये अवसर है. मुकुलजी ने यह भी बताया कि आज विश्व जिस द्रुष्टी से भारत को  देख रहा है उसे भारत को समझना होंगा, पश्चिम का प्रारंभ यह भौतिक्तासे हुआ और आज उसका अंत यह आध्यत्मिक्ता से होंगा, विश्व तो जगा है हमे अभी स्वयं को जगाना है, भारत मे सबसे अधिक वर्ग मध्यम वर्गी है और वह सांस्क्रुतिक रक्षा करता है,। उन्होंने यहभी बतायाकी भारत ने हमेशा युनिटी  कि बात कि है न कि युनिफ़ोर्मीटी, स्वामीजी के लाहोर  के व्यख्यान का उल्लेख करते हुये मुकुलजी ने बताया कि किस तरह स्वामीजी ने सभी पथों के लोगों को संघटीत किया और उसी विचार को लेकर विवेकानन्द सार्ध शती समारोह वर्ष को मनया जायेगा अर्थात बिखरी हुई आध्यात्मिक शक्ति को एकत्रित करना होगा।

Sense impression March 2012 - the creativity of the new century ... Wake up India. Wake the Worldकार्यक्रम मे मुख्य अतिथी के रुप मे इन्दौर झोन के पुलिस महानिरिक्षक अनुराधा शंकर उपस्थित थी साथ हि विवेकानन्द केन्द्र इन्दौर के संचालक श्री मनोहर देव जी उपस्थित थे. कार्यक्रम मे विवेकनन्द केन्द्र का परिचय श्री अतुल जी शेठ नगर प्रमुख इन्दौर ने दिया. व्याख्यान मे १५० कि संख्या मे शहर के गण्मान्य उपस्थिति थे.