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Tuesday, January 19, 2016

बिलासपुर में मनाई जा रही है विवेकानंद जयंती

Swami Vivekananda Jayanti 2016 Bilashpurविवेकानंद केंद्र बिलासपुर ईकाई के द्वारा नगर में विभिन्न स्थानों पर  विवेकानंद जयंती मनाई जा रही है । इसमें 12 जनवरी को तीन जगहों पर विवेकानंद जयंती मनाई गई प्रथम विवेकानंद उद्यान बिलासपुर में द्वितीय विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर में,  तृतीय गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर में मनाई गई है, इसके अतिरिक्त dp विप्र महाविद्यालय में भी मनाई गई l सूचना प्रतिदिन एक एक जगह विवेकानंद जयंती मनाई जा रही है ताकि समाज के हर वर्ग स्वामी जी के विचार पहुंच सके और विश्व विद्यालय तथा महाविद्यालय में स्वामी विवेकानंद जयंती मनाने से वहां के युवाओं तक जो कि हमारे देश के भविष्य उन  तक स्वामी जी के विचार पहुंच रहे हैं जिससे वह बहुत ही अधिक प्रेरित हो रहे हो हैं। बिलासपुर नगर में लगभग 10 जगह विवेकानंद जयंती मनाई जाएगी।

Tuesday, December 29, 2015

अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य : मा. पी.परमेश्वरन

Sarthak Yuva Samarth Bharat - Groupwise Manthan by Sistersकन्याकुमारी में राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित 680 युवाओं का महाशिविर सार्थक युवा समर्थ भारत अखिल भारतीय महाशिविर का उद्घाटन आज ९ बजे विवेकानन्दपुरम में हुआ।
अभावग्रस्त लोगों की सेवा करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। इसके लिए प्रत्येक व्य
क्ति को अपना जीवन समर्पित करना है। ऐसा आह्वान करते हुए विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के अध्यक्ष माननीय पी.परमेश्वरन जी ने कहा कि कर्तव्य केवल एक दिन का कार्य नहीं है वरन समर्पण की नित्य साधना से ही कर्तव्य का भाव प्रगट होता है, इसलिए समर्पण की नित्य साधना प्रत्येक मनुष्य को करनी होगी। उन्होंने कहा की ऐसे समर्पण का भाव अपने भीतर विद्यमान दिव्यत्व की अनुभूति से प्रगट होता है। सारे समर्पित कार्य का स्रोत अपने हृदय की प्रेरणा ही होती है।
सार्थक युवा-समर्थ भारत महाशिविर के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए परमेश्वरनजी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्दजी के आदर्शों के अनुरूप माननीय एकनाथजी ने विवेकानन्द केन्द्र की सम्पूर्ण रचना की। चाहे वह योग हो या शिक्षा, ग्रामीण विकास हो या प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन अथवा स्वास्थ्य सेवा, इन सभी में आध्यात्मिक प्रेरणा अनिवार्य है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, इस शिविर में सम्मिलित प्रत्येक शिविरार्थी से यह अपेक्षा है कि वह अपनेआप को लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप उन्नत करें और स्वयं को भारतमाता के कार्य के लिए समर्पित कर दें।
सेवारत युवाओं के सामूहिक समर्पण पर ही भारत माँ का भविष्य निर्भर है, जो कि अंततोगत्वा विश्व का ही भविष्य है।
ज्ञात हो कि 25, 26 और 27 दिसम्बर, 1892 को स्वामी विवेकानन्दजी ने कन्याकुमारी में समुद्र के मध्य स्थित श्रीपाद शिला पर राष्ट्रचिंतन किया था। स्वामीजी को इन तीन दिनों के ध्यान से भारत को जाग्रत करने का मार्ग मिला था। इन तीन दिनों के महत्व को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने 25 से 27 दिसंबर को इस शिविर का आयोजन किया है। इस शिविर में कश्मीर से कन्याकुमारी और अरुणाचल से गुजरात में काम से छह माह सेवारत 680 युवा, जिनमें 432 युवकों तथा 248 युवतियों का समावेश है।
इस उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भारत विकास ग्रुप के संस्थापक तथा अध्यक्ष श्री हनुमन्त गायकवाड़ तथा विवेकानन्द केंद्र के उपाध्यक्ष श्री ए.बालकृष्णन व्यासपीठ पर विराजमान थे। अबतक 65 हजार युवाओं को रोजगार देनेवाले हनुमंत गायकवाड़ ने अपने सफल व सार्थक जीवन का अनुभव बताया। साथ ही केंद्र के उपाध्यक्ष बालकृष्णनजी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत तभी जगतगुरु बनेगा जब देशवासियों के मन में त्याग और सेवा का भाव जाग्रत होगा। उन्होंने बताया कि हमें कभी हताश या निराश नहीं होना है क्योंकि हम अमृत के पुत्र हैं, ईश्वर हमारे भीतर है। हम अपने अंदर निहित शक्ति से साडी बाधाओं को पार कर सकते हैं।   

Sarthak Yuva – Samarth Bharat Shibir at Kanyakumari

Sarthak Yuva Samarth Bharat at KanyakumariAn all India Residential  Youth camp – Sarthak Yuva – Samarth Bharat for 3 days is organised in Vivekananda Kendra Kanyakumari for the selected youths to mark the concluding of Birth Centenary celebration of Mananeeya Eknathji Ranade, founder of Vivekananda Rock Memorial and Vivekananda Kendra. Yuva Participants are selected through a  process  - Yuva  Samparka, Yuva Sammelan, Yuva Prashikshan and Yuva Seva.
Shibir started with Bhajans at 6.00pm on 24 Dec 2015 in Eknath Sabhangan, specially erected for the shibir in Vivekanandapuram, Kanyakumari. Sri Soumitra Pujari, Shibir Pramukh welcomed the participants. Importance of the shibir was briefed by Shri Abhay Bapatji, Shibir Adhikari. Film on Eknathji was shown. Total 646  youth from 22 states are participating in this shibir in which 239 are sisters.
Routine of first day shibir started at 6.00 am with Pratahsmaran and Yogabhyas. Formal inauguration was at 9.00 am. Kum Priyamvada lead the national song Vande mataram. Sri Abhay Bapat, Shibir Adhikari introduced the dignitaries on the dias. Sri Soumitra Pujari, Shibir pramukh felicitated the guests. Sri P Parameshwaranji, president of Vivekananda Kendra in his message to shibir participants that Seva for those who deserve is the duty of every human being. For that one has to dedicate one’s life. Such dedication should be regularly practiced. Such dedication comes from identifying ourselves as the embodiment of divinity. Upon their organised dedication depends the future of Mother India and also ultimately of the world.
 Sri Hanumant Rao Gayakwad, an enlightened successful entrepreneur from Pune shared his story of fulfilment in serving the nation. A single thought of Swami Vivekananda – Take up one idea, think of it, dream of it, leave any other idea alone, that is the way to success has inspired him to start Bharat Vikas Group during his college days. Today the trust employs more than 65,000 youth and a brand name for quality service. His message for the youth is to  serve the nation with quality work.
Mananeeya Balakrishnanji, Vice president of Vivekananda Kendra briefed the life and contribution of Mananeeya Eknathji to the participants and extended invitation to the youth to serve nation under Vivekananda Kendra banner.    Programme concluded with shanti  mantra at 11.30am.

Thursday, December 10, 2015

सफल युवा युवा भारत शिविर

Safal yuva Yuva Bharat Workshopविवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा-पटना द्वारा आयोजित 3 दिवसीय सफल युवा युवा भारत शिविर का आयोजन पटना नगर
 स्थित भगवान् जगन्नाथ आचार्य प्रशिक्षण महाविद्यालय मे दिनांक 26 नवम्बर – 29 नवम्बर 2015 तक किया गया जिसमे पटना नगर से 28 शिवरार्थी विभिन्न महाविद्यालयों से सम्मलित हुए शिविर की शुरुआत 26 नवम्बर को सायं 6:30 बजे भजन संध्या से हुई तत्पश्चात शिविर परिचय विवेकानंद  गुप्ता , शिविर  प्रमुख द्वारा दिया गया। जिसमे शिविर उद्देश्य को बताया गया। शिविर की  विधिवत शुरुआत 27 नवम्बर को 5:00 बजे  जागरण से हुई  तत्पश्चात 5:45 प्रात: स्मरण इसके पश्चात् योग वर्ग  फिर  दैनिक जीवन  में गीता पाठ हुई । तत्पश्चात अल्पाहार फिर श्रम संस्कार , श्रम परिहार फिर शिविर का उदघाटन डा. प्रो. रणजीत कु. वर्मा  प्रतिकुलपति पटना विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। फिर प्रथम सत्र “ भारतीय संस्कृति  हमारी पहचान ‘’ विषय का मार्गदर्शन  प्रो. रणजीत कु. वर्मा , प्रतिकुलपति , पटना विश्वविद्यालय, द्वारा किया गया।
तथा दिवितीय व तृतीय दिन के प्रथम सत्र क्रमशः “संगठित कार्य की आवश्यकता “ व कार्यकर्ता गुण और विकास “ का उद्बोधन आ. मुकेश कीर , प्रांत संगठक (बिहार-झरखंड), व माननीय किशोर टोकेकर , संयुक्त महासचिव , विवेकानंद केंद्र ,द्वारा किया गया। तत्पश्चात मंथन में  क्रमशः भारतीय संस्कृति की विशेषताय व संगठन को बनाये रखने के लिए आवश्यक बाते का मंथन शिवरार्थियो द्वारा प्रथम दिन व द्वितीय दिन में किया गया | तत्पश्चात 12:30 बजे भोजन व 2:00 बजे गीत/ मंत्र अभ्यास किया गया।
2:30 बजे नैपुण्य वर्ग में “संपर्क” व दुसरे दिन “आनंदालय” का क्रमशः धर्मदास राजपूत , नगर संगठक ,व विवेकानन्द गुप्ता द्वारा  प्रशिक्षण दिया गया। तत्पश्चात 3:30 बजे चाय व 3:45 बजे संस्कार वर्ग में आज्ञा अभ्यास , खेल ,कथाकथन ,जयघोष , संकल्प आदि कराया गया। तत्पश्चात 5:30 बजे द्वितीय सत्र प्रथम दिन “विवेकानंद सामान्य से आसामान्य व्यक्तित्व व “विवेकानंद केंद्र कार्य पद्धति “ का उद्बोधन क्रमशः मा. मुकेश भैया व डा. पंकज जी द्वारा किया गया। तत्पश्चात 6:45 बजे केंद्र प्रार्थना अर्थ आ. मुकेश भैया द्वारा बताया गया। तत्पश्चात 7:00 बजे भजन संध्या। 8:00 बजे भोजन व 8:45 प्रेरणा से पुनरुत्थान में अभियान गीत , खेल ,तत्पश्चात एकनाथ जी के जीवन की घटनाओं को विवेकानन्द गुप्ता द्वारा  सुनाया गया। तत्पश्चात  हनुमान  चालीसा , आत्मावलोकन , गणश : बैठक के पश्चात दिन की समाप्ति हुई।
तृतीय द्वारा शिवरार्थियो द्वारा योग वर्ग में 1 2  सूर्य नमस्कार लगाये गए। तृतीय दिन के प्रथम सत्र के बाद आनंदालय नियोजन के लिए विस्तार सह बैठक तत्पश्चात 12:15 बजे आहुति सत्र मा. मुकेश भैया द्वारा लिया गया तत्पश्चात केंद्र प्रार्थना के साथ शिविर का समापन किया गया तत्पश्चात भोजन।  शिविर में 03 शिवरार्थियो ने अंशकालिक समय दान का संकल्प लिया व पटना में विभिन्न स्थानों पर आनंदालय की योजना बनाइ गई| शिविर के सफल सञ्चालन में 15 कार्यकर्ता उपस्थित रहे जिसमे शिवराधिकारी का दायित्वा मा. किशोर भैया ,शिविर मार्गदर्शक  का दायित्व आ. मुकेश भैया व शिविर प्रमुख विवेकानंद गुप्ता व शारीरिक प्रमुख का दायित्व धर्मदास राजपूत द्वारा निर्वहित किया गया। इसके अलावा अलग – अलग कार्यकर्ताओ ने अलग – अलग दायित्वों  का निर्वहन किया शिविर में शिवरार्थियो को 3 गणों क्रमशः संस्कार वर्ग , स्वाध्याय वर्ग व योग वर्ग में विभाजित किया गया। जिसमें प्रत्येक गण में 9 शिविरार्थी शामिल हुए। शिविर के दौरान नगर समिति के सभी वरिष्ठ  कार्यकर्ता व अधिकारी गण उपस्थित रहे। जिन्होंने शिविर के सफल संचालन में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया।

Saturday, September 19, 2015

“सफल युवा युवा भारत” अभियान उद्घाटन

११ सितम्बर स्वामी विवेकानंद का विश्व बंधुत्व दिवस (शिकागो व्याख्यान) विवेकानंद केंद्र द्वारा प्रति वर्ष  मनाया जाता है। इस वर्ष विवेकानंद केंद्र के संस्थापक मा. एकनाथजी रानडे इनका १०० वा जन्म दिवस १९ नवम्बर २०१४ से चल रहा है, इस पर्व को केंद्र मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के नाम से मना रहा है। अतः  इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र इंदौर में युवाओं के बिच महाविद्यालयों में “युवा विमर्श एक वैस्चारिक शृंखला इस कार्यक्रम का उदघाटन किया गया। कार्यक्रम में मा. एकनाथजी के व्याख्यानों का संग्रह Spiritualizing Life इस पुस्तक का विमोचन विवेकानंद केंद्र के मध्य प्रान्त संचालक श्री मनोहर  देव व मुख्या अतिथि डॉ मुकेश मोढ, होलकर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चतुर्वेदीजी, कला व वाणिज्य के प्राचार्य डॉ एस.एल.गर्ग जी के हस्ते किया गया। युवा विमर्श कार्यक्रम के मुख्या वक्ता डॉ मुकेश मोढ जी अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बाते बतायी
  • लक्ष निर्धारित होने से जीवन में सार्थकता का अनुभव होता है,
  • लक्ष की स्पष्टता होने से विषम परिस्थिति में विजय प्राप्त की जाती है,
  • स्वामी विवेकानंद युग प्रवर्तक थे, उन्होंने १९९१ में घोषण की थी आने वाले ५० वर्षों तक   भारत माता ही अपनी आराध्य दैवत है और ठीक ५१ वर्ष बाद भारत स्वतंत्र हुआ,
  • कोई  भी बड़े कार्य के लिए छोटा मार्ग नहीं होता है,
  • महान बनने किए लिए स्वामीजी ने पांच बाते बताई है
  • 1. निष्ठा, २.उदयम शक्ति, ३. धैर्य, ४. निश्चय और ५. सातत्य

और फिर तब भारत को कोई नहीं रोग पायेगा।
आज स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है और परिवार से यह सहज संभव होता है, दूसरा स्वामी स्वयं युवा थे और उनकी अधिक अपेक्षा युवाओं से थी अतः युवा विमर्श एक वैचारिक शृंखला इस कार्यक्रम के अंतर्गत युवाओं ने जुड़कर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है। श्री मनोहर देव जी ने विवेकानंद केंद्र का परिचय देकर केंद्र से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करने का आवाहन किया। विवेकानंद केंद्र के होलकर महावद्यालय के प्रभारी प्राध्यापक  श्री धीरजजी शर्मा ने कार्यक्रम का सञ्चालन किया। कार्यक्रम में ३५० की संख्या में  युवा, प्राध्यापक व नगर के प्रबुद्ध वर्ग उपस्थित थे।

Friday, July 31, 2015

Safal Yuva - Yuva Bharat - Yuva Sammelan in Mysore

On the occasion of Ma. Eknathji Janmashati Celebration mysore branch of Vivekananda Kendra Kanyakumari organised  Safal Yuva- Yuva Bharat Yuva sammelana” on 26th July, 2015 morning 10 am to 1 pm at Vivekananda Kendra, Meru, 2830, 1st main, Jayanagar. Convention started by prayer by Kum. Sindhu of Maharani Science college. Sri N S Chakravarthyji, Retd. Secretary Govt of India spoke on Swami Vivekananda’s life and teachings. Sri Vinayaka Salimat, Yuva Raja college student talked on Swami Vivekananda and Society. Sri Ramesh, trainer, Survey Department training college spoke on Vivekananda Rock Memorial, Ekanathji and Vivekananda Kendra activities. Students from Maharani Science college, Sharada vilas Law and Degree college, Maharaja P U College, J S S P U College participated.

Friday, May 1, 2015

Yuva Sammelan in Durg

Yuva Sammelan was organized in Durg/Bhilai in the series of program of Safal Yuva Yuva Bharat. There were 108 selected youth participant in the sammelan. Sammelan was started with prayer and concluded with Vivekananda Kendra Introduction. There were various session in the program like lecture, discussions and games. 

Tuesday, April 28, 2015

लक्ष्य : Vivekananda Kendra News

ॐ
Eknathji : One                  Life One Mission

"एक सेनापति की तरह अपना लक्ष्य निश्चित करो और शक्त्ति, सामर्थ्य की सीमाओं पर विचार करते हुएं उसकी प्राप्ति के लिये रणनीति बनाएं तथा सर्वश्रेष्ठ मार्ग का चयन करो। तभी और तभी केवल श्रेष्ठ उपलब्धि प्राप्त हो सकती है।" 

- मा. एकनाथजी रानडे
News Updates from Vivekananda Kendra :
  • MEJSP activities updates - Assam :Read More
  • विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी पटना शाखा द्वारा दायित्वग्रहण का कार्यक्रम  :  विस्तृत
  • Bhumi Pujan and Foundation Stone laid ceremony of school building of VKV Borojalenga : Read More
  • New Website launched -> Work in Kashmir : "Shri Ramkrishna Mahasamelan Ashram" : http://srma.vkendra.org : Read More
  • Tale of the Vivekananda Rock Memorial Kanyakumari : Read More
  • स्मारिका : एक जीवन - एक ध्येय:  विस्तृत
  • New Video upload : Vimarsha : National Security : Chanllenges and Response at Surat : View Now
Forth coming event :

Registration open for Yoga Shiksha Shibir at Kashmir & Kanyakumari


Camp
Language
Duration
Age
Contribution
Yoga Shiksha Shibir - KanyakumariEnglish5 - 19 May 201518 to 50 YearsRs.2,000/-
योग शिक्षा शिविर - कन्याकुमारी हिन्दी५ - १९ मई २०१५ १८ से ५० सालरु.२,०००/-
योग शिक्षा शिविर - कश्मीर हिन्दी१२ - २१ जुन  २०१५ १८ से ५० सालरु.३,०००/-

अधिक जानकारी के लिए कृपया http://www.vivekanandakendra.org/camps-kanyakumariएवं http://www.vivekanandakendra.org/camps-kashmirदेखे

  1. YogaFlipKart
  2. योग
  3. Surya Namaskar
  4. Rousing Call To Hindu Nation
  5. Story Of Vivekananda Rock Memorial
  6. India's Contribution to World Thought & Culture
  7. A Comparehensive Biography of Swami Vivekananda
  8. Sadhana Of Service
  9. Eknathji - a Biographical Sketch
  10. Expression of Chirstianity with a focus on India - SoftCover
  11. Expression of Chirstianity with a focus on India - HardCover


Mananeeya Eknathji Janma Shati Parva




  • सूर्य नमस्कार महायज्ञअपने किए हुए सूर्यनमस्कार कृपया सूर्यनमस्कार घड़ी पर अवश्य जोडे ।
Please add your SuryaNamaskar in SuryaNamaskar Clock.
Please register to the SuryaNamaskar clock and daily add how many SuryaNamaskar done by your or your group.
The website has been started on Rashtra Chintan Diwas, a First day of Samartha Bharat Parva, and till now 1,288,294Suryanamskars have been registered.
The site gives various statistics like how many SuryaNamaskar done Today, This Month, This Year, with details like Total SuryaNamaskar done, by No. of Person & No. of Group.  Please spread the world and regularly add your count in the site.

Thursday, April 16, 2015

इंदौर में युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा इंदौर की और से मा. एकनाथजी जन्म शती पर्व के अंतर्गत सफल युवा युवा भारत अभियान का युवा सेवा प्रशिक्षण शिविर दिनांक ९ अप्रैल से १२ अप्रैल २०१५ को इन्दौरे नगर में मानव सेवा ट्रस्ट में आयोजित किया गया। शिविर में चिंतन युवा सेवा के विषयों को लेकर किया गया।
शिविर में मा. एकनाथजी के गुणों को लेकर गण के नाम दिए गए थे – १. दृढ़ता, २. सातत्य, ३. निष्ठा, ४. संगठन।
शिविर की दिनचर्या सुबह जागरण से प्रारंभ होकर प्रार्थना, योग, परिसर स्वछता, बौद्धिक सत्र, गट चर्चा, प्रस्तुति, नैपुण्य वर्ग, गीत व मंत्र अभ्यास, शारीरिक अभ्यास, भजन संध्या, प्रेरणा से पुनरुत्थान कर हनुमान चालीसा का पाठ कर रात्रि समाप्त होती थी। प्रेरणा से पुनरुत्थान में मा. एकनाथजी का जीवन सभी शिविरार्थियो तक पहुचाया गया। शिविर के समापन सत्र में शिविर अधिकारी श्री शरदजी वाजपेयी व मानव सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री विष्णुजी गोयल उपस्थित थे, समापन में शिविर अधिकारीजी ने आव्हान किया की सेवा का पक्ष मातृभूमि के प्रति समर्पित होना होगा, जिससे राष्ट्र का निर्माण हो यही हमारा एकमेव भाव मन में रख कर सेवा करनी है। स्वामीजी का जीवन, मा एकनाथजी का जीवन यह सेवा कार्य का हमारा आधार हो।
शिविर में कुल ११ महाविद्यालय से ७० विद्यार्थिओं ने भाग लिए, जिसका संचालन कुल २० कार्यकर्ताओं ने किया।
बौद्धिक सत्र
सत्र १ 
१ स्वामी विवेकानंद की दृष्टी – हे भारत उठो जागो और अपनी आध्यात्मिकता से सारे विश्व को आप्लावित कर दो यह सत्र आ. विभाशजी उपाध्याय द्वारा लिया गया ...
 * स्वामी विवेकानंद का चित्र देखते ही लगता है की उनसे हमारा जन्म जन्मान्तर का सम्बन्ध है।
 * ईश्वर को देखने की इच्छा का अर्थ है ह्रदय की पवित्रता।
 * प्रत्यक्ष देखना याने दो आँखों से देखना, और दूसरा याने मन की आँखों से देखना।
 * भगवदप्राप्ति यह मनुष्य को प्राप्त ही करना है।
 * ठाकुरजी कहते है नरेन्द्र आया नही मै लेकर आया हु।
 * स्व का बोध न होने के कारण व आत्मा विस्मृती के कारण से राष्ट्र का पतन हुआ।
 * स्वामीजी का मूल मंत्र है व्यक्ति निर्माण और उसका अधिष्ठान है वेदांत।
 * भगवान का साक्षात्कार करने से पुनर्जन्म में आना जाना बंद हो जाता है।
 * अपनी बात को सही ठहराने का प्रयास करना याने अज्ञान।
 * स्वामीजी का पश्चिम में जाना यह विश्व में आध्यात्मिक जागरण का पुनः प्रारंभ है।
 * पश्चिम के चार तत्व जिसने मूल से हानि पहुचायी जिसको स्वामी विवेकानंद समज गए थे ,
   १ जो श्रेष्ठ है वह जीवित है।
   २ जीवन यह संघर्ष है – अपने को जीवित रहना है तो संघर्ष करो ,
   ३ प्रकृति मनुष्य के लिए बनायीं है जितना भोग कर सकते हो करो
   ४ मनाव अधिकार – अपने अधिकार की चिंता करना
    स्वामीजी ने इसके समाधान यह पश्चिम को बताये
   १ सर्वे भवन्तु सुखिनः ,
   २ संघर्ष होता ही नहीं है जो संघर्ष दिखता है वह माया है – सूर्य व बादल दिखने के लिए बादल है परन्तु उसके पीछे सूर्य है,
   ३ मनुष्य यह प्रकृति का अंग है न की वह प्रकृति का राजा  ,
   ४ कर्तव्य बोध
 * सत्य को जानने के लिए मन के परे जाना होगा उसका मार्ग है आध्यात्मिकता,
 * धर्म का प्रगटीकरण यह आध्यात्मिक आचरण का व्यवहारिक पक्ष है,
 * भीतर की शक्ति को जागृत कर बाहर प्रकट करो,
 * आत्मनो मोक्षार्थं जगत हितायच....
सत्र २
विवेकानंद केंद्र – विलक्षण व परिभाषा
आ. सुब्रतो गुहा
 * सृष्टि का प्रथम राष्ट्र होने का गौरव यह भारत को है।
 * जो अपने क्षेत्र में ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करता है उनसे ही ईश्वर प्रसन्न होते है और मिलते है।
 * सामान्य से असामान्य बनाने के लिए एक दृढ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है। मा. एकनाथजी का जीवन।
सत्र ३
सेवा की संकल्पना – आध्यात्मिक सेवा
आ. विकासजी दवे
* स्वामीजी ने हमेशा सेवा का ही आग्रह किया।
* सेवा भाव के लिए सम्पूर्ण सृष्टि से एकाकार होना आवश्यक है।
  उदा . ठाकुरजी – गाय को मार रहे है परन्तु दर्द ठाकुरजी को हो रहा है ....(सिया राम मय सब जग जानी)
* सेवा की उत्पत्ति यह आत्मीयता से निर्माण होती है | सेवा में बाधाये आती है परन्तु आत्मीयता होने से वह दूर होती है।
* पुण्य केवल सेवा से ही प्राप्त होता है।
* वास्तव में सेवा वृत्ति सभी में होती है।
* अपने आप को जलाने वाले ही प्रकाश दे सकते है।
* सेवा करते समय अहंकार का भाव नही आने देना।
* सेवा याने सभी के प्रति ह्रदय में अनुभूति।
* सेवा का आग्रह स्वयं से करे।
* सेवा का भाव आचरण से स्पष्ट होना चाहिए।
* जिनका जीवन सेवा से परिपूर्ण है उनके जीवन को पढ़े।
* अन्यों की वेदना ही मेरी वेदना बने यही सेवा की संकल्पना है।
* सेवा करते समय हमेशा हमारी गर्दन निचे होनी चाहिए।
सत्र ४
सेवा कार्य के परिणाम – जो दिखते नही समजने पढ़ते है
आ. नंदनजी जोशी
* मोक्ष की व्याख्या सेवा से प्रारंभ होता है।
* निस्वार्थ सेवा का परिणाम – शिलास्मार्क तीर्थ क्षेत्र।
* निस्वार्थ से याने अपने ही पास के लोगों की सेवा करना।
* स्वार्थ पूर्ण सेवा यह क्षणिक होती है।