कार्यक्रम का संचालन प्रो. अजीत बरगले ने किया, संयोजन प्रो. निधि ओसवाल द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रसाद व्यास ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर श्री अतुल शैठ, श्री उमेश खंडेलवाल, श्री सोनू गुप्ता और श्री हितेश सोनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री लखन यादव ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि कन्याकुमारी की शिला पर 72 घंटे के ध्यान के पश्चात स्वामी जी को अपने जीवन ध्येय की स्पष्टता प्राप्त हुई। उन्होंने आर्थिक अभावों, अपरिचित वातावरण और विभिन्न चुनौतियों का धैर्यपूर्वक सामना करते हुए शिकागो में भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का परचम लहराया।
सीए अनुराग जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भारत के प्रति बनी पिछड़ी धारणा को स्वामी जी के भाषण ने बदल दिया, जिसकी सराहना अमेरिकी समाचार पत्रों ने भी की।
इस अवसर पर आगामी “उत्तिष्ठ भारत” युवा प्रतियोगिता के पोस्टर का विमोचन भी किया गया और कार्यक्रम का समापन पूर्ण वन्दे मातरम् के सुमधुर गायन के साथ हुआ।