जिसमें टी.पी.एस. कॉलेज, बी.डी. कॉलेज और बी.एस. कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर के उद्घाटन सत्र में शिविराधिकारी व नगर सह संचालक श्री ॐ रंजन प्रसादजी ने सभी शिविरार्थियों का हार्दिक स्वागत किया, जिसके बाद मुख्य अतिथि श्री रामचन्द्र आर्य (प्रान्त कार्यालय प्रमुख, विद्या भारती) ने युवाओं को स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन से सीख लेते हुए 'सार्थकपूर्ण जीवन' जीने का बहुमूल्य मार्गदर्शन दिया।
युवाओं को मोबाइल और कोलाहल युक्त दुनिया से दूर रखकर आत्म-चिंतन और व्यक्तित्व विकास की ओर मोड़ने के उद्देश्य से शिविर की दिनचर्या को बेहद व्यवस्थित और अनुशासित रखा गया था। इसके अंतर्गत रोज़ सुबह योग अभ्यास व गीता पाठ, शाम को संस्कार वर्ग व भजन संध्या, तथा 'प्रेरणा से पुनरुत्थान' सत्र में पीपीटी और वीडियो के माध्यम से गुरु गोविन्द सिंह जैसे महापुरुषों का जीवन चरित दिखाया गया।
शिविर के माध्यम से युवाओं के बौद्धिक एवं व्यावहारिक विकास पर विशेष बल दिया गया। इसके तहत विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किए गए, जिसमें आ. ज्ञानेश्वर शर्मा जी ने 'एक जीवन एक ध्येय', श्री राम कृपाल ने 'नेतृत्व, सेवा और साहस' तथा श्री अजीत मिश्रा जी ने 'छात्र जीवन' पर प्रकाश डाला। साथ ही, आ. कमलाकांत बलियारसिंह जी द्वारा 'भारतीय संस्कृति', श्री निरंजन बारो द्वारा 'व्यवहार में राष्ट्रभक्ति, युवा भारत' और डॉ. पंकज कुमार जी द्वारा 'Shaping Today & Leading Tomorrow' जैसे प्रेरणादायी विषयों पर मार्गदर्शन किया गया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालयीन युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करना, पारंपरिक खेलकूद, योग और मंत्र-श्लोक से उनके मन को पवित्र करना तथा उन्हें भविष्य का कुशल नेतृत्वकर्ता बनाना था।
शिविर का समापन 14 जून 2026 रविवार को शाम 6 बजे केन्द्र वर्ग के साथ हुआ। विवेकानन्द केन्द्र के मूल मंत्र 'मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान' को चरितार्थ करते हुए, प्रतिभागियों को केन्द्र की कार्यपद्धति के चारों मुख्य आयामों—संस्कार वर्ग, स्वाध्याय वर्ग, योग वर्ग और केन्द्र वर्ग—का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का एक शानदार अवसर मिला।