Vivekananda Kendra Ludhiana celebrated Universal Brotherhood day at Victoria Public School, Dehlon for the students of class 10, 11th and 12th. A lecture of teachings of Swami Vivekananda was delivered as part of celebration. There was another program in Khalsa Girls college of Ludhiana, appx 100 students participated in the program. A lecture of teachings of Swami Vivekananda was delivered.
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Tuesday, December 17, 2019
Monday, December 2, 2019
गुरुपूर्णिमा कॆ उपलक्ष मॆं डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ में कार्यशाला
स्वामी विवेकानंद केंद्र ने 13 जुलाई, 2019 को चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित डीएवी कॉलेज में "शिक्षक से गुरु तक की यात्रा" पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में प्रख्यात शिक्षाविदों और शिक्षकों ने भाग लिया। चंडीगढ,पंचकुला और मोहाली के विभिन्न स्कूलों,कॉलेजों के 61प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान चंडीगढ,पंचकुला और मोहाली प्रख्यात शिक्षाविद् मौजूद थे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई. तदोपरांत शिवम् जी द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। नवीन कौशिक जी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यशाला की कार्यवाही शुरू की। कार्यशाला के पहले सत्र में प्रोफ.के एस आर्या ने एक शिक्षक और एक गुरु के बीच के अंतर को खूबसूरती से समझाया। शिक्षक और गुरु के बीच में अंतर समझते हुए आर्या जी ने सभी श्रोताओं को तीन बिंदुओं पर विशेष ध्यान कराया।
१. तन पूर्ति
२. मन पूर्ति एवं
३. आत्मा पूर्ति
उन्होंने बताया की तन पूर्ति से सुख मिलता है, मन पूर्ति से शांति मिलती है और आत्मा पूर्ति से आनंद मिलता है। एक शिक्षक सिर्फ सुख दे सकता है, परन्तु एक गुरु, सुख के साथ साथ शांति और आनंद का आभास भी देता है। यानि की एक गुरु तन, मन और आत्मा की भी तृप्ति करता है। तदुपरांत प्रोफ. सहजपाल जी ने भी उक्त विषय का उद्देश्य बताया और अपने विचार प्रकट किये जिसके साथ ही प्रथम सत्र का समापन हुआ।
दूसरे सत्र में सभी प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह को इस बात पर चर्चा करने की सलाह दी गई थी कि एक शिक्षक से एक गुरु बनाने में योगदान कैसे दिया जा सकता है। सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और अपने विचार दिए। प्रत्येक समूह को एक समूह नेता चुना गया जो समूह की संक्षिप्त चर्चा को सभी प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत कर सके।
चर्चा सत्र समाप्त होने के बाद, समूह के नेताओं को चर्चा का सारांश प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके द्वारा प्रस्तुत कुछ बिंदु निम्नलिखित थे:
1. लगभग सभी शिक्षकों ने बिगड़ते सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर दिया।
2. लगभग सभी शिक्षकों ने बिगड़ते सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर जोर दिया। यह सुझाव दिया गया था कि प्रत्येक स्कूल में एक निश्चित प्रार्थना समय, योग समय, ध्यान का समय होना चाहिए।
3. शिक्षकों ने छात्रों के बीच व्यवहार में सुधार लाने पर भी जोर दिया। यह सुझाव दिया गया था कि एक शिक्षक को एक रोल मॉडल के रूप में कार्य करना चाहिए। एक छात्र हमेशा अपने शिक्षक की नकल करता है, खासकर प्राथमिक स्तर पर।
4. कुछ शिक्षकों ने यह भी बताया कि शिक्षा विशुद्ध रूप से नौकरी उन्मुख नहीं होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य मानव निर्माण होना चाहिए न कि मशीन निर्माण । उन्होंने शिक्षा प्रणाली और नौकरी की आवश्यकताओं के बीच अंतर को पाटने के लिए भी इशारा किया।
सभी प्रतिभागियों के विचार प्रकट कर लेने पर श्री पियूष पुंज जी, प्रोफ. नंदिता सिंह ने पूरी चर्चा का समापन किया। चर्चा समापन के बाद श्री भानुदास जी, (अखिल भारतीय महासचिव, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी) ने समापन मार्गदर्शन प्रस्तुत किया। समापन मार्गदर्शन में उन्होंने भी कार्यशाल के उद्देश्य पर काफी रौशनी डाली। दूसरे सत्र की समापन के पश्चात् तीसरे सत्र में अलका गौरी जी ने सुक्ष्म व्यायाम एवं ओमकार ध्यान कराया। ओमकार ध्यान के पश्चात् कर्नल कौशल जी कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई. तदोपरांत शिवम् जी द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। नवीन कौशिक जी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यशाला की कार्यवाही शुरू की। कार्यशाला के पहले सत्र में प्रोफ.के एस आर्या ने एक शिक्षक और एक गुरु के बीच के अंतर को खूबसूरती से समझाया। शिक्षक और गुरु के बीच में अंतर समझते हुए आर्या जी ने सभी श्रोताओं को तीन बिंदुओं पर विशेष ध्यान कराया।
१. तन पूर्ति
२. मन पूर्ति एवं
३. आत्मा पूर्ति
उन्होंने बताया की तन पूर्ति से सुख मिलता है, मन पूर्ति से शांति मिलती है और आत्मा पूर्ति से आनंद मिलता है। एक शिक्षक सिर्फ सुख दे सकता है, परन्तु एक गुरु, सुख के साथ साथ शांति और आनंद का आभास भी देता है। यानि की एक गुरु तन, मन और आत्मा की भी तृप्ति करता है। तदुपरांत प्रोफ. सहजपाल जी ने भी उक्त विषय का उद्देश्य बताया और अपने विचार प्रकट किये जिसके साथ ही प्रथम सत्र का समापन हुआ।
दूसरे सत्र में सभी प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह को इस बात पर चर्चा करने की सलाह दी गई थी कि एक शिक्षक से एक गुरु बनाने में योगदान कैसे दिया जा सकता है। सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और अपने विचार दिए। प्रत्येक समूह को एक समूह नेता चुना गया जो समूह की संक्षिप्त चर्चा को सभी प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत कर सके।
चर्चा सत्र समाप्त होने के बाद, समूह के नेताओं को चर्चा का सारांश प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके द्वारा प्रस्तुत कुछ बिंदु निम्नलिखित थे:
1. लगभग सभी शिक्षकों ने बिगड़ते सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर दिया।
2. लगभग सभी शिक्षकों ने बिगड़ते सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर जोर दिया। यह सुझाव दिया गया था कि प्रत्येक स्कूल में एक निश्चित प्रार्थना समय, योग समय, ध्यान का समय होना चाहिए।
3. शिक्षकों ने छात्रों के बीच व्यवहार में सुधार लाने पर भी जोर दिया। यह सुझाव दिया गया था कि एक शिक्षक को एक रोल मॉडल के रूप में कार्य करना चाहिए। एक छात्र हमेशा अपने शिक्षक की नकल करता है, खासकर प्राथमिक स्तर पर।
4. कुछ शिक्षकों ने यह भी बताया कि शिक्षा विशुद्ध रूप से नौकरी उन्मुख नहीं होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य मानव निर्माण होना चाहिए न कि मशीन निर्माण । उन्होंने शिक्षा प्रणाली और नौकरी की आवश्यकताओं के बीच अंतर को पाटने के लिए भी इशारा किया।
सभी प्रतिभागियों के विचार प्रकट कर लेने पर श्री पियूष पुंज जी, प्रोफ. नंदिता सिंह ने पूरी चर्चा का समापन किया। चर्चा समापन के बाद श्री भानुदास जी, (अखिल भारतीय महासचिव, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी) ने समापन मार्गदर्शन प्रस्तुत किया। समापन मार्गदर्शन में उन्होंने भी कार्यशाल के उद्देश्य पर काफी रौशनी डाली। दूसरे सत्र की समापन के पश्चात् तीसरे सत्र में अलका गौरी जी ने सुक्ष्म व्यायाम एवं ओमकार ध्यान कराया। ओमकार ध्यान के पश्चात् कर्नल कौशल जी कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी का धन्यवाद किया।
Labels:
Guru Purnima,
Hariyana,
Punjab
Location:
Punjab, India
Wednesday, November 27, 2019
Monday, December 3, 2018
चण्डीगढ़ में कार्यक्रम विश्वबन्धुत्व दिवस
आज BCM college for education चण्डीगढ़ मार्ग पर विश्वबन्धुत्व दिवस पर कार्यक्रम हुआ। इसमें सभी 140 विद्धार्थीयों ने भाग लिया। इसमे विवेकानंद केन्द्र की तरफ से श्री पंकज गाबा ने स्वामी विवेकानंद के शिक्षा पर विचारों को लोगों के सामने रखा तथा विशाल शर्मा ने विश्व बन्धुत्व के विचार को प्रस्तुत किया। इसके बाद दिये गये वक्तव्यों में से विद्धार्थीयों को प्रश्न पूछे गये तथा सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को उपहार में पुस्तकें दी गयीं। प्रधानाचार्य के धन्यवाद भाषण से कार्यक्रम का समापन किया गया।
Monday, November 6, 2017
Inter-college declamation competition at Ludhiana
Inter-college declamation competition is organized on the occasion of universal brotherhood day at Vivekananda Kendra Ludhiana, Lord Mahavir homeopathic college, on 13th oct. 9 students participated in the competition. Dr Vinay Sofat chaired and chief judicial magistrate was the chief guest of the program. Principal of LMC was the special guest.
Monday, December 5, 2016
Geeta Jyanti Program in Ludhiana
Vivekananda Kendra Ludhiana organized fourth Geeta Jyanti Program.It was organized in Vishwanath mandir, metro road, Jamalpur, Ludhiana. Appx 50 people gathered there. Today, What is Bhagwat Geeta, who should study Geeta, why/how should we study Bhagwat Geeta, was discussed along with introduction of Vivekanand kendra.
At last keertan mandali agreed to chant 5 shloks of Geeta every Tuesday. Our team member Ms Richa and Mr. Mohit will be touch with them regularly.
Tuesday, September 15, 2015
विमर्श : धर्मों रक्षति रक्षित: @ पंचकूला
धर्मों रक्षति रक्षित: विषय पर एक विमर्श का आयोजन आज भवन विघालय सेक्टर 15 पंचकूला मे किया गया। हरियाणा और पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक माननीय श्री कप्तान सिंह सोलंकी इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित रहे। विवेकानंद शिला स्मारक समिति एवं केन्द्र की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कु निवेदिता जी कार्यक्रम की मुख्य वक़्ता रही। इस अवसर पर बोलते हुए कु निवेदिता जी ने कहा की "धर्म भारतवर्ष की आत्मा है। भारत की अवनती का कारण धर्म नहीं बल्कि हमने धर्म का अर्थ नहीं समझा और उसे सही रूप मे हमने अपने जीवन मे नहीं उतारा इसलिए हमारी अवनती हुई।
व्यक्ति का विकसित रूप परिवार, परिवार का विकसित रूप समाज, समाज का विकसित रूप राष्ट और राष्ट का विकसित रूप सारी सृष्टि है। अपने बड़े विकसित रूप के लिए त्याग करना ही धर्म है।
विवेकानंद केन्द्र पंजाब प्रांत के मार्गदशर्क श्री चंद्रशेखर तलवार जी ने स्वागत और परिचय किया। पंचकुला शाखा के संयोजक डां सुविक्रम ज्योति जी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का सूत्र संचालन श्री नवीन कौशिक जी ने किया? Trinity के बुद्धिजीवी वर्ग और मान्यवर लोगों ने बड़ी संख्या मे कार्यक्रम मे भागीदारी की। कार्यक्रम मे प्रश्नोत्तर भी हुए, जिनका समाधान मुख्य वक़्ता सुश्री निवेदिता भिड़े जी ने किया।
विवेकानंद शिला स्मारक समिति एवं केन्द्र के संस्थापक श्री एकनाथ रानाडे जी के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर चल रहे देशव्यापी कार्यक्रमों की कड़ी मे विवेकानंद केन्द्र की पंचकूला ईकाई ने इस विमर्श का आयोजन किया। माननीय कप्तान सिंह सोलंकी जी ने इस अवसर पर श्री एकनाथ जी के जीवन पर चरित्र पर प्रकाश डाला।
Location:
Haryana, India
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