Monday, December 5, 2016

Sadhana Diwas Program in Nagpur

संकुचन कभी भी ‘विस्तार’ का अंग न बनें : भानुदासजी

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय महासचिव श्री भानुदास धाक्रस ने कहा कि माननीय एकनाथजी रानडे के जीवन को अधिक निकटता से समझना है तो ‘केन्द्र प्रार्थना’ के मर्म को समझना होगा। केन्द्र प्रार्थना का प्रत्येक पद मा.एकनाथजी के जीवन संकल्प, कार्य और समर्पण को दर्शाता है। भानुदासजी 19 नवम्बर को साधना दिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

भानुदासजी ने आगे कहा कि मनुष्य का व्यक्तित्व, कृर्तत्व और नेतृत्व यह समाज से प्राप्त होता है। व्यक्ति को सम्मान, पगार और समझ भी समाज से ही प्राप्त होता है। एक अर्थों में केजी से पीजी तक समाज ही व्यक्ति के विकसित होने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए समाज को श्रेष्ठ और उदात्त जीवन मूल्यों पर आधारित होना चाहिए। इसके लिए हम सबको समाज को संगठित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि समाज को संगठित करने के लिए सबसे आवश्यक है- ‘हमारा समाज के प्रति दृष्टिकोण’। समाज के लिए कार्य करते समय हमारी भावना कैसी है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। बचपन से युवावस्था तक हम समाज से लेते हैं। समाज हमें पोषित करता है, हमें सक्षम बनाता है। इसलिए जब हम सक्षम बन जाते हैं, क्षमतावान हो जाते हैं तो हमारा दायित्व है कि हम समाज को अधिक मात्रा में प्रदान करें- “जीवने यावदादानं, स्यात् प्रदानं ततोधिकम”। केन्द्र प्रार्थना का यही संदेश है।

भानुदासजी ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के गुणों को पहचान कर देशहित में उसका उपयोग करना चाहिए। हमारे केन्द्र कार्य के व्यवस्थाओं में ‘विस्तार’ का बड़ा महत्त्व है। विस्तार में योग वर्ग, संस्कार वर्ग, केन्द्र वर्ग और स्वाध्याय वर्ग कितने चल रहे हैं, कैसे चल रहे हैं। इन वर्गों में कितने लोग शामिल होते हैं। संख्यात्मक और गुणात्मक दृष्टि से इसका आकलन होना चाहिए। यदि विस्तार में हमारी कार्यपद्धति ठीक से नहीं चल रही है। कभी कभी शुरू रहती है, कभी बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति को बदलना होगा, क्योंकि विस्तार का तात्पर्य “विस्तारित” होना है। संकुचन कभी भी विस्तार का अंग नहीं बने, इसका चिंतन प्रत्येक को करना होगा। जब अपने विस्तार में भारत विश्वगुरु बनेगा, समझिए कि भारत देश में विश्वगुरु बन रहा है। इसलिए अपने-अपने विस्तार में “विश्वगुरु भारत” का वातावरण बनाएं। यह तभी संभव है जब हम स्वामी विवेकानन्दजी के विचारों को प्रत्येक घर तक पहुंचाएंगे। आप केवल स्वामीजी के विचारों को पहुंचा दीजिए, वे स्वयं देशकार्य में लग जाएंगे। 

भानुदासजी ने जोर देकर कहा कि विश्वगुरु भारत का स्वप्न देखनेवाले प्रत्येक देशवासी को देशकार्य में अपनी भूमिका को देखना होगा। उन्होंने कहा कि अपनी भूमिका पर जब चिंतन होगा तब अपने में अधिक सुधार की संभावना रहती है। इसलिए स्वामीजी के विचार प्रकाश में अपनेआप का आकलन करना आवश्यक है। समाज के लिए कार्यरत अनेक बार अहंकार आता है कि हम देश के लिए कार्य कर रहे हैं। इसलिए नित्य अपना चिंतन होना चाहिए कि मेरा कार्य मेरा कर्तव्य है। हमारे जीवन में कर्तव्य का बोध सदैव रहे, पर कार्यकर्ता के लिए ‘कर्ता’ के भाव को त्यागना बहुत आवश्यक है।

इससे पहले कार्यकर्ताओं ने विस्तारशः केन्द्र प्रार्थना के 14 पदों पर प्रसंग नाट्य प्रस्तुत किए।

बिलासपुर में युवा प्रेरणा शिविर

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा  बिलासपुर द्वारा युवा प्रेरणा शिविर का आयोजन 25 नवंबर से 29 नवंबर तक किया गया है इसमें लगभग 80 शिविरार्थी शामिल तथा कार्यकर्ताओं को मिलाकर कुल संख्या लगभग 100  है,l

इस शिविर का उद्देश्य युवा में राष्ट्रीय चेतना का जागरण करते हुए उन्हें चारित्रिक दृष्टि से उन्नत बनाना है ताकि यह सभी युवा विवेकानंद केंद्र के मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने में यथोचित सहयोग प्रदान कर सकेlअलग-अलग महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालय से उठो जागो युवा अभियान के अंतर्गत लिखित परीक्षा एवम् युवा कार्यशाला के माध्यम से चयनित युवक - युवतियों का यह शिविर है ।

आदरणीय रचना दीदी मध्य प्रांत संगठक विवेकानंद केंद्र शिविर अधिकारी के रूप में इस शिविर में उपस्थित रहेंगी l इस  का उद्घाटन सत्र 25 नवंबर की संध्या को हुआ, जिसमें विवेकानंद केंद्र के वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉक्टर उल्लास वारे जी तथा संघ के विभाग संघचालक आदरणीय काशीनाथ गोरे जी मंचासीन हुए, उन्होंने अपने उद्बोधन में वैभवशाली भारत के इतिहास में प्रकाश डालते हुए भारत के 'सोने की चिड़िया' होने के पीछे वैदिक धर्म के पालन होने को बताया साथ ही उन्होंने साथ मिलकर कार्य करने पर जोर दिया l

यह शिविर बहतराइ रोड स्थित इन डोर  स्टेडियम बिलासपुर में आयोजित किया गया है जो की 29 नवंबर 2016 तक चलेगा, राष्ट्र कार्य में सहयोग हेतु युवाओं से आह्वान के साथ समापन सत्र होगा l

बिलासपुर में साधना दिवस

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा बिलासपुर द्वारा केंद्र कार्यालय में 19 नवंबर 2016 की संध्या को 5:00 बजे से 7:00 बजे तक साधना दिवस मनाया गया ।

कार्यक्रम की शुरुआत 3 ओंकार तथा प्राथना से हुई । शत शत नमन एकनाथ जी... गीत हुआ इसके उपरांत मुख्य वक्ता का उद्बोधन  हुआ, उन्होंने माननीय एकनाथ जी के जीवनी तथा कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं को बताया । विवेकानंद केंद्र की परम्परा के अनुसार दायित्वों की घोषणा की गयी जिसके अनुसार कुछ कार्यकर्ताओं के दायित्व में परिवर्तन किया गया तथा कुछ नए कार्यकर्ताओं को भी दायित्व दिया गया इसके बाद आदरणीय कुलदीप भइया नगर संगठन विवेकानंद केंद्र बिलासपुर ने कार्यकर्ताओं को दायित्वबोध के बारे में बताया तथा साथ ही करणी तथा और करणीय कार्य के बारे में भी बताया। नए दायित्वों के अनुसार अलग - अलग समूहों में बैठक हुई । पुष्पार्पण के पश्चात केंद्र प्रार्थना करके कार्यकर्ता गंतव्य की ओर प्रस्थान किये ।

Sadhana Diwas at VKV Vallioor

A mammoth procession was convened to commemorate the 102nd  birth anniversary of Mananeeya Ekanathji Ranade (Founder of Vivekananda Kendra & Rock Memorial)  at Vallioor  on 19th November 2016.

The procession started at the waving of flag by   Mr. Prabhu Baskaran, Sub Inspector of Police, Vallioor, Man. Radha Didi, Dhakshin Prant Sangatak of Vivekananda Kendra & Man. Aparna Didi, All India Vyavastha Pramuk, Vivekananda Kendra, Kanyakumari.    Shri. S.K. Subramanian, Correspondent, Vivekananda Kendra Vidyalaya was in the forefront.  The procession started from Vallioor Murugan Temple and ended at Vivekananda Kendra Vidyalaya.  The children’s band music was nice. Swami Vivekananda’s inspiring thoughts and slogans were highlighted and echoed at the procession in which nearly 900 students, parents and public participated eagerly.

We started the function at 2.30 p.m.  We have arranged the art & Science exhibition for enhancing knowledge and skills among the students.  The exhibition was inaugurated by Mr. Perumal, R.T.O., Vallioor.  He was very impressed by the presentation and he congratulated the students.  The exhibition was divided into four section.  1. Art  2. Science  3. Maths & Social   4. K.G. Section   5. Spiritual.  Rangoli of Gita Upathesh, Heart, Bharathiyar, India & Rock Memorial were superb. The paintings of Dasavatharam, Bagavath Gita’s 18 Chapters & the Quotations of Man. Eknathji Ranade were there. Many school teachers, students, parents saw the exhibition and appreciated the students.  Our correspondent Shri. S.K. Subramanian presented the memento to our chief guest. We concluded the function with Kendra prayer. 

Sadhana Diwas Celebration at Shimla

Sadhana Diwas was celebrated by Shimla Branch of Vivekananda Kendra, Kanyakumari with a Pariwar Milan & Sahbhoj on Sunday, 20th November 2016. The program was started with prayers followed shraddhanjali. With a warm welcome by Nagar Pramukh K.K.Sharma, a patriotic song followed by Parichay & varopis games like Message Passing & Srujan Dand was played in joyful environment with a message to scrutinize the bombardment of messages received through social media. After a T-break, Lifeworker Shri Hardik, gave insight of Ma. Eknathji's life and how a Karyakarta Sadhana is not only limited to himself but for entire family. The program was concluded with the Documentary Eknathji.