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Monday, August 10, 2026

गुरु पूर्णिमा उत्सव जबलपुर शाखा द्वारा

hगुरु केवल ज्ञान नहीं देते, वे जीवन को दिशा देते हैं; और दिशा ही व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र का भविष्य निर्धारित करती है। इसी उदात्त और दूरगामी विचार के साथ विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की जबलपुर शाखा द्वारा गुरु पूर्णिमा उत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। जबलपुर में 29 जुलाई 2026 को आयोजित इस विशेष समारोह ने उपस्थित संभ्रांत जनों एवं साधकों को भारतीय संस्कृति, गुरु-परंपरा तथा राष्ट्र निर्माण के गहन संदेश से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम का गरिमामय शुभारंभ तीन बार पवित्र ॐकार ध्वनि, सामूहिक प्रेरणादायी गीत एवं ओजस्वी विवेकवाणी के पावन पाठ के साथ हुआ। मुख्य वक्ता श्री इन्द्रजीत चौहान ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि भारतीय उत्सव केवल मनोरंजन के अवसर नहीं होते, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा, परिवार, समाज और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ संपूर्ण सृष्टि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम हैं।


उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन, गुरु-शिष्य परंपरा का सुदृढ़ीकरण, पुराणों की रचना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को सुरक्षित एवं व्यवस्थित करने का महान कार्य किया।

 

उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण रहा है। विवेकानंद केंद्र द्वारा ॐकार को गुरु स्वरूप स्वीकार करना इस बात का प्रतीक है कि श्रद्धा के साथ प्रत्येक व्यक्ति, परिस्थिति और प्रकृति से सीखते हुए आत्मविकास एवं राष्ट्र निर्माण के पथ पर अग्रसर होना ही सच्ची गुरु-भक्ति है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय सनातन संस्कृति, जीवन-मूल्यों एवं संस्कारों से जोड़कर "मनुष्य निर्माण से राष्ट्रीय पुनरुत्थान" के केंद्र के ध्येय को साकार करने में अपना योगदान दें।


इसके पश्चात विभाग संचालक श्री वेद प्रकाश जी ने अपने प्रेरणादायी शुभकामना संदेश में कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मविकास और गुरु-परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का स्मरण कराते हुए कहा कि राष्ट्र का उत्थान संस्कारित, चरित्रवान और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तियों के निर्माण से ही संभव है।


उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से विवेकानंद केंद्र के ध्येय "मनुष्य निर्माण से राष्ट्रीय पुनरुत्थान" को अपने दैनिक जीवन में उतारने, समाज के प्रत्येक वर्ग तक भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों का संदेश पहुँचाने तथा विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को केंद्र की गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता अपने आचरण, सेवा, अनुशासन और समर्पण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।


इसके उपरांत उपस्थित कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए तथा गुरु-परंपरा, विवेकानंद केंद्र के कार्यों एवं समाज जीवन में अपने अनुभवों को सभी के साथ साझा किया।

कार्यक्रम का संचालन श्री अभिषेक श्रीवास्तव जी ने किया।

अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने ॐकार एवं गुरु-परंपरा के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए सामूहिक रूप से पुष्पांजलि अर्पित की तथा राष्ट्र, समाज और संस्कृति की सेवा के संकल्प को पुनः दोहराया। तत्पश्चात स्वल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। 

Wednesday, April 9, 2025

बाल व्यक्तित्व विकास शिविर - जबलपुर

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारीशाखा जबलपुर द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकाससांस्कृतिक जागरण तथा नैतिक मूल्यों की शिक्षा के उद्देश्य से एक विशेष व्यक्तित्व विकास शिविर का आयोजन किया गया है। यह कार्यशाला से 14 वर्ष की आयु के बालकों एवं बालिकाओं के लिए विजयनगर स्थित कॉम्पटीशन जी एस मंत्रा में आयोजित की जा रही है।

शिविर के प्रथम दिन का शुभारंभ भारत माता वंदन और ओंकार प्रार्थना से हुआजिससे वातावरण में एक अद्भुत दिव्यता और ऊर्जा का संचार हुआ। मुख्यवक्ता श्री अभिनेष कटेहा 'अटल' ने संवादात्मक प्रश्नोत्तर शैली में बच्चों को पुण्यभूमित्यागभूमिऔर कर्मभूमि भारत की अवधारणाओं से परिचित कराया। उन्होंने समझाया कि भारत केवल एक भौगोलिक सीमा नहींबल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक शक्ति हैजिसने पूरी दुनिया को अध्यात्मसेवात्याग और सहिष्णुता का मार्ग दिखाया है।

मुख्य अतिथि श्रीमती प्रीति सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि हम परिवारसमाज और अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हैंतो जीवन की अनेक जटिलताओं से सहज रूप से उबर सकते हैं। उन्होंने बच्चों को अच्छे संस्कारों को आत्मसात करने और अपने कर्तव्यों को समझने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला के दौरान बच्चों को स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणादायक जीवन प्रसंग कहानियों और गतिविधि आधारित विधियों द्वारा प्रस्तुत किए गएजिससे उनमें देशभक्ति और कृतज्ञता की भावना जागृत हुई। साथ ही टीम बिल्डिंग और स्मरण शक्ति बढ़ाने वाले खेलों का भी आयोजन किया गया।

आगामी दिनों में शिविर के अंतर्गत बच्चों को स्वस्थ एवं स्वच्छ जीवनशैलीमोबाइल की लत से मुक्तिमानसिक और शारीरिक विकासऔर परिवार में सकारात्मक संवाद जैसे जीवनोपयोगी विषयों पर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा। इन सत्रों का संचालन अनुभवी प्रशिक्षकोंबाल मनोवैज्ञानिकों और प्रेरक व्यक्तित्वों द्वारा किया जाएगा।

साथ ही बच्चों को स्वामी विवेकानन्दसिस्टर निवेदिताअरुणिमा सिन्हाऔर रानी दुर्गावती जैसे महान व्यक्तित्वों की कहानियाँ रोचक शैली में सुनाई जाएँगीजिनसे वे आत्मबलसेवासमर्पण और साहस की प्रेरणा प्राप्त करेंगे। खेलकहानियाँऔर गीतों के माध्यम से बच्चों में नेतृत्वअनुशासनसहयोगऔर आत्मविश्वास जैसे गुणों का विकास किया जाएगा।

शिविर के समापन दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगाजिसमें बच्चे अपनी सीखी गई बातों की प्रस्तुति देंगे और अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

यह कार्यशाला विवेकानन्द केन्द्र के मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास हैजिससे भावी पीढ़ी को संस्कारितजागरूक और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों के रूप में तैयार किया जा सके।

Tuesday, April 18, 2023

समाजशाला कार्यक्रम - जबलपुर

 

G20 के अंतर्गत C20 में Diversity Inclusion and Mutual Respect विषय पर आधारित "समाजशाला कार्यक्रम" विवेकानंद केंद्र जबलपुर की शाखा द्वारा आयोजित किया गया जिसमें कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री लक्ष्मण सिंह मरकाम(अति.सचिव सी.एम.कार्यालय म. प्र.शासन) ने अपने उद्बोधन में बताया कैसे पश्चिम (यूरोपियनस) ने Diversity Inclusion and Mutual Respect की अवधारणा को क्षति पहुंचाई थी, अमरीका में ही अकेले मात्र 300 वर्ष के अंदर वहां की मूल जनजातियों का समूल नाश कर दिया था। भारत ही एकमात्र विश्व में ऐसा देश है जहां Diversity Inclusion and Mutual Respect की अवधारणा जीवित है । भारत में "विविधता में एकता" के दर्शन होते हैं विश्व की सबसे ज्यादा जनजातियां यहां मिल जुलकर रहती है। भारत की संस्कृति, विरासत Diversity Inclusion and Mutual Respect के मूल मंत्र को चरितार्थ करती है और विश्व को शांति का मंत्र भी देती है।

कार्यक्रम की अगले क्रम में वर्कशॉप का आयोजन हुआ जिसमें नगर के प्रबुद्धजन, बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में Diversity Inclusion and Mutual Respect विषय पर गहन चिंतन किया गया, उस वर्कशॉप  के निष्कर्ष में धर्म परिवर्तन को पूर्णरूप से प्रतिबंधित करना चाहिए क्योंकि जहां जहां धर्म परिवर्तन हुआ वहां यह देखने में आया Diversity Inclusion and Mutual Respect की अवधारणा समाप्त हो गई क्योंकि उन जनजातियों में धर्म परिवर्तन के बाद आपस में संघर्ष शुरू हो गया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी श्री हनुमंत राव जी ने अपने उद्बोधन में " एकम सत विप्रा बहुधा वदंती " के मूल मंत्र का महत्व बताया  Diversity Inclusion and Mutual Respect के लिए आवश्यक बताया, conversion is violence, diversity is not division it is a expression of manifestation बताया, विविधता का आदर ही विश्व में शांति को पूर्णरूप से स्थापित कर सकता है, भारत के बिना विश्वशांति की कल्पना नहीं की जा सकती है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के ख्यातिलब्ध 48 प्रबुद्ध नागरिकों ने कार्यशाला में सहभागिता ली |
विवेकानन्द केन्द्र जबलपुर के नगर संचालक वेदप्रकाश जी ने कार्यक्रम का संयोजन किया |

Friday, June 24, 2016

जबलपुर में अंतरराष्टीय योग दिवस का आयोजन

International Day of Yoga in Jabalpur 2016विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी शाखा जबलपुर द्वारा अंतरराष्टीय योग दिवस के उपलक्ष्य  में श्री राम इंस्टीटूट ऑफ टेकनोलोजी के १२३ छात्रों के साथ  योग अभ्यास  का आयोजन किया गया , जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में प्राचार्य अतुल दुवे जी एवं NCC के प्रभारी राहुल पाठक जी उपस्थित थे।  कार्यक्रम में स्वसन व्यायाम , सूर्यनमस्कार , आसन व प्रायाणाम का अभ्यास कराया गया।  कार्यक्रम में केन्द्र की जानकारी के साथ  उठो ! जागो ! युवा ! प्रतियोगिता  के लिए भी आह्वान किया  गया। 

Thursday, December 4, 2014

जबलपुर में गीता जयंती का आयोजन


विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी, शाखा -जबलपुर द्वारा दिनांक ३० नवंबर २०१४ को माँ नर्मदा तट पर स्थित ब्रम्हर्षि बावरा नर्मदा विद्यालय परिसर में गीता जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कार वर्ग के ४२ बच्चे, ८ युवा कार्यकर्ता व १० वरिष्ट कार्यकर्तायों  का सहभाग रहा।
कार्यक्रम : 

१. मुख्य उदबोधन: पूजनीया साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने भगवदगीता की महानता को रेखांकित करते हुए बच्चों को इस महान ग्रन्थ से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाने हेतु मार्गदर्शन दिया।
२. संस्कार वर्ग के बच्चों का प्रशिक्षण व  बच्चों द्वारा सूर्यनमस्कार, योगासन, खेल, आज्ञा अभ्यास, गीत अभ्यास एवं गीता श्लोकों का सामूहिक पाठ किया गया।

३. कार्यक्रम का समापन में MEJSP के विभाग पर्व प्रमुख डॉ अखिलेश गुमाश्ताजी ने स्वामी विवेकानंद के बचपन के रोचक प्रसंगों को बच्चों को बताया तथा भगवदगीता के तथ्यों  एवं स्वामीजी के प्रेरणादायी  जीवन से छात्र जीवन को किस प्रकार उत्तम बनाया जा सकता है इस पर प्रकाश डाला।

Friday, November 21, 2014

Mananeeya Eknathji Ranade Janmasatapdi Parva : Jabalpur


विश्व प्रसिद्द विवेकानंद शिला स्मारक, कन्याकुमारी  और स्वामी विवेकानंद के दिव्य विचार "मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है " एवं, राष्ट्रीय आदर्श "त्याग और सेवा" पर आधारित विवेकानन्द केंद्र  के संस्थापक माननीय एकनाथजी की जन्मशती  दिनांक १९ नवंबर २०१४ से १९ नवंबर २०१५ तक देश भर में, एक पर्व के रूप में, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की ८१३ शाखाओं द्वारा मनाई जा रही है. माननीय एकनाथजी की निर्भीकता, सत्य के प्रति अनूठी निष्ठां और कार्य प्रबंध की उनकी  अद्भुत योग्यता का परिचय पाकर भारत के " लौह पुरुष " सरदार बल्लभ भाई पटेल ने एकनाथजी को  "फौलादी पुरुष" की संज्ञा दी थी। विदित हो कि वर्ष भर मनाये जाने वाले माननीय एकनाथजी जन्मशती पर्व का औपचारिक उदघाटन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी द्वारा नई  दिल्ली के विज्ञानं भवन  में  दिनांक   ९ नवंबर २०१४ को किया गया है । दिनांक १९ नवंबर २०१४ से एक वर्ष तक समस्त देश में समाज के विभिन्न वर्गों विशेषकर यूवाओं के लिए अनेक कार्यक्रमों की योजना विवेकानंद केंद्र के मुख्यालय जो कि कन्याकुमारी में है, ने बनाई है।

इस अवसर पर, विवेकानंद केंद्र की जबलपुर शाखा ने दिनांक १९. नवंबर २०१४को सायंकाल ५ बजे महाराष्ट्र हायर सेकेंडरी स्कूल, राईट टाउन के प्रेक्षागृृह में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया. माननीय एकनाथजी के महान कार्यों पर संकलित पुस्तक "सफल युवा-युवा भारत" का विमोचन नगर के ख्याति प्राप्त  चिकित्सक एवं समाज सेवी डॉ जीतेन्द्र जामदार जो कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता थे , के कर कमलों से कराया गया। विवेकानंद केंद्र,जबलपुर के नगर सह संचालक श्री रवि नौग्रहिआ ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्यात चिकित्सक एवं समाज सेवी डॉ अखिलेश गुमाश्ता ने की। डॉ गुमाश्ता माननीय एकनाथ जयंती पर्व के जबलपुर विभाग पर्व प्रमुख है।

मुख्य अतिथि एवं  मुख्य वक्ता डॉ जामदारजी ने अपने उदबोधन  में माननीय एकनाथजी के जीवन से जुड़े संस्मरणों को विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण की पृष्टभूमि  से जोड़ कर संस्कारधानी से एकनाथजी के अभिन्न संबंधों का भी उल्लेख किया।

विभाग पर्व प्रमुख डॉ गुमाश्ताजी ने माननीय एकनाथजी द्वारा स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और स्मृति पर निर्मित भव्य शिला  स्मारक की आध्यात्मिकता का उल्लेख करते हुए सभी से विवेकानंद केंद्र से जुड़ने और समाज में सेवा भाव को और भी अधिक प्रसारित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में पूर्व सांसद  व एकनाथ जी की सहयोगी  श्रीमती जयश्री बनर्जी , श्रीमती कमला ताई रामदासी, श्री प्रशांत पोल , श्री एस एन समद्दर , श्री एवं श्रीमती सप्रे की विशेष उपस्थिति रहे।

Thursday, April 18, 2013

अनुशासित और नियमबद्ध जीवन जीने से सफलता मिलती है

100_1485स्वामी विवेकानन्द जी की 150वीं जयंती के वर्षभर में चलने वाले समारोहों की श्रृंखला में जबलपुर महानगर के कालेज छात्र-छात्राओं हेतु एक दिवसीय ‘‘युवा प्रेरणा शिविर‘‘ का आयोजन विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी, शाखा जबलपुर द्वारा दिनांक 11 अप्रेल 2013 को सरस्वती शिशु मंदिर, शास्त्री पुल के पास, नॅपियर टाउन में प्रातः 8:30 बजे से किया गया। जबलपुर से आर.आई.एम.टी. कालेज, खालसा इंजिनियरिंग कालेज, ज्ञानगंगा इन्स्टीट्युट आफ टेक्नोलाजी कालेज, ग्लोबल इंजिनियरिंग कालेज, मानकुंबर बाई महिला महाविद्यालय, महाकौशल कालेज, आई.टी.आई आदि से कुल 70 छात्र-छात्राओं नें इसमें सहभाग लिया।
शिविर का उद्घाटन विवेकानन्द केंद्र शाखा जबलपुर के विभाग प्रमुख नारायणचन्द्र घोष जी नें किया। अपने उद्घाटन सत्र में उन्होनें युवाओं से कहा कि जीवन को सफल बनाने के लिये हमारे अंदर स्वामी विवेकानन्द की तरह दृढ़ इच्छाशक्ती की आवश्यकता है। शिविर में बौद्धिक और शारिरीक खेल, बौद्धिक सत्र, राष्ट्रभक्ती गीत, मंथन और प्रस्तुतीकरण हुआ। खेल, गीत और कहानी के माध्यम से युवाओं ने त्याग, संगठन शक्ती, राष्ट्रभक्ती , युवाशक्ती के महत्व को समझा। स्वामी विवेकानन्द के जीवन संदेश को पी.पी.टी और विडियो क्लिप के माध्यम से युवाओं तक पहुचाया गया।
समापन सत्र में विवेकानन्द केंद्र की मध्यप्रांत की प्रांत संगठक शीतल जोषी दिदी नें कहा कि व्यक्तित्व का विकास सकारात्मक विचारशक्ती पर निर्भर है व्यक्तित्व का विकास का आधार बाह्य नहीं अपितु आंतरिक जीवन शक्ती से है। चुंबक में आकर्षण इसिलिये है क्योंकि उसके एक-एक कण आपस में बहुत ही व्यवस्थित, अनुशासित और नियमबद्ध है हमारे व्यक्तित्व में आकर्षण ऐसे ही अनुशासित, नियमबद्ध जीवन जीने से आता है। इस शिविर को संपन्न और सफल बनाने हेतु नगर समिती के सदस्य मनीष नाजवालजी , ड़ा. अखिलेष गुमाष्ता जी, हेमंत मोघे जी, रवि नौग्रहरिया जी, विक्रम सिंह, मोहन चक्रवैष्य, महेष गुप्ता आदि ने सहयोग किया।