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Thursday, September 13, 2012

विश्वबंधुत्व दिन समारोह - नागपुर

Universal brotherhood day at Nagpurस्वदेश, स्वधर्म, स्वाभिमान तथा स्वावलम्बन इन चार सूत्रों पर आधारित समाज व्यवस्था को सर्वोपरि मानने वाले स्वामी विवेकानन्द विश्व के आदर्शों में महानतम थे । स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि हमारा राष्ट्र देवता है और धर्म ही इसका प्राण है । इसलिए धर्म को लेकर विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि धर्म का मूल एकात्मता और सर्वसमावेशक होने के कारण धर्माधारित समाज व्यवस्था ही श्रेष्ठ है । इसलिए स्वामी विवेकानन्द के विश्वबंधुत्व की संकल्पना को सही ढंग से समझना आज विश्व के लिए अति आवश्यक है । इस बात का प्रतिपादन करते हुए दत्ता मेघे इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के उप-कुलपति डॉ. श्री वेदप्रकाश मिश्रा ने स्वामीजी के संदेशों में निहित व्यापकता को विविध उदाहरणों के माध्यम से समझाया । वे विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की नागपुर शाखा के माध्यम से आयोजित विश्वबंधुत्व समारोह के अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे ।

डॉ. मिश्रा ने धर्म की व्यापकता को समझाने के लिए रामचरितमानस के अनेक चौपाई का आधार लिया । ‘विप्र धेनु सूर संत हित, लिन्ह प्रभु अवतार ।' तथा ‘हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रगट होई मैं जाना ।' के माध्यम से ईश्वरीय अवतार तथा उसके जीवन प्रयोजन का महत्व बताया । उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने धर्म के मर्म को समझाने के लिए वैदिक शब्दावली को आधुनिक रूप दिया और अपने ज्ञान, तप और आचरण से संसार को बता दिया कि धर्म आधारित समाज व्यवस्था ही विश्व का कल्याण कर सकता है । धर्म संकुचितता, अंधविश्वास तथा अहंकार का द्योतक नहीं है वरन् धर्म विस्तार, व्यापकता, श्रद्धा और सर्वसमावेशक एकात्मता का परिचायक है । ‘जितने मत उतने पथ'  इसलिए केवल अपने ही सम्प्रदाय को श्रेष्ठ मानकर दूसरों की निंदा करना धर्म नहीं है । मतभिन्नता होने के बावजूद मतऐक्यता होना वर्तमान के लिए आवश्यक है । डॉ. मिश्रा ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में स्वामी विवेकानन्द ने भारत और हिन्दू धर्म के तत्वों को अपने तपस्वी जीवन तथा ओजस्वी वाणी में जागतिक श्रेष्ठता प्रदान की । इसलिए स्वामी विवेकानन्द दिग्विजयी संन्यासी कहलाये । स्वामी विवेकानन्द ने ही अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय का सूत्रपात किया था।

Universal brotherhood day at Nagpurइसके पूर्व समारोह के मुख्य अतिथि स्पेसवूड फर्निचर्स प्रा. लि. नागपुर के प्रबंध संचालक श्री विवेक देशपांडे ने स्वामी विवेकानन्द तथा टाटा उद्योग के संस्थापक जमशेदजी टाटा से संबंधित प्रसंग सुनाया । उन्होंने बताया कि जमशेदजी टाटा को भारत में शिक्षा, अभियांत्रिकी, उद्योग तथा अनुसंधान संस्थानों के निर्माण की प्रेरणा स्वामी विवेकानन्द ने ही दी थी । कार्यक्रम के अध्यक्ष कॉन्फीडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी. भरतिया ने अपने अध्यक्षीय भाषण में आगामी वर्ष में स्वामी विवेकानन्दजी की १५०वीं जयन्ती के प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि हमारे देश के विद्यालयीनशिक्षा प्रणाली में स्वामी विवेकानन्द के संदेशों को छात्रों तक पहुँचाने की योजना होनी चाहिए । उन्होंने शिक्षा संस्थानों के प्रबंधकों, शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की कि आगामी वर्ष में स्वामीजी के संदेशों को घर-घर पहुँचाकर ‘विवेकानन्दमयम' वातावरण बनाएँ । विवेकानन्द केन्द्र के विदर्भ विभाग प्रमुख श्री आनंद बगडिया तथा स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह, नागपुर महानगर के संयोजक श्री सोमदत्त करंजेकर समारोह के दौरान मंचासीन थे ।

कार्यक्रम की शुरूआत दीपप्रज्जवलन से हुई । प्रारंभ में कु. वेदवती खेर तथा दीप्ति पिकले ने ‘सदा विवेकानन्दमयम' नामक संस्कृत गीत प्रस्तुत किया । अतिथियों के स्वागत के पश्चात् ‘ब्रेल लिपि' में प्रकाशित ‘कथा विवेकानंदांच्या' नामक पुस्तक का विमोचन मंचासिन अतिथियों के करकमलों द्वारा किया गया ।

सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ठ सेवाकार्य के लिए सिकलसेल सोसायटी ऑफ इंडिया, नागपुर के  श्री सम्पतराव रामटेके तथा जीवन आश्रम वृद्धाश्रम संस्था, नागपुर के श्री विकासजी शेंडे का इस अवसर पर स्वामीजी की प्रतिमा एवं साहित्य प्रदानकर उन्हें सेवाव्रती सम्मान से सम्मानित किया गया । साथ ही विवेकानन्द केन्द्र में कार्यरत १२वीं तथा १०वीं के गुणवन्त  छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जिनमें सौमित्र दाभोलकर (१२वीं), ऋषभ अग्रवाल (१२वीं), कु. प्रियंका शिरखेडकर (१०वीं) तथा ओंकार लपालकर (१०वीं) शामिल थे ।

कार्यक्रम की प्रस्तावना श्रीमती अर्चना लपालकर तथा श्रीमती गितांजली केलकर ने संचालन किया । श्री आनंद बगडिया ने आभार व्यक्त किया तथा सुश्री पल्लवी गाडगील के वन्देमातरम् से कार्यक्रम का समापन हुआ । 

Wednesday, July 18, 2012

Declamation Training Camp at Mumbai

Declamation Training Camp at MumbaiSecond Declamation Training Camp (वक्ता प्रशिक्षण शिबिर) was Organized at Vile Parle, mumbai on 15th July 2012,  as a preparatory camp for 'Wake up Bharat Enlighten the world' with 55 participants.

In this Sri. Arvind KulkarniJi delivered talk on “Swami Vivekananda - Need of hour”. In that he highlighted the points that how Swamiji's life and teachings is role model for students, youth considering his concentration, curiosity, scientific approach and Rashtrabhakti. Man making education is the only solution for today's challenges. By giving examples of Swamiji life he highlighted the point that Hinduism is Nationalism.
Declamation Training Camp at Mumbai
Swamiji's Pictures was delivered by Shri. Kishor Jawale. He emphasized on fact that, we should not consider swamiji as God, and become free from our responsibilities but learn from his life, how a common man can become VishwaManav. He throw light on the concept of 'Spirituality'. Spirituality lies only in renounciation and selfless work. This session was followed by Manthan. Four groups discussed on the topics-1. Vivekananda's Childhood 2. How I like Vivekananda 3. Vivekananda- Patriotic monk  4. Vivekananda- Need of hour.


The camp was concluded by Shri. Abhay Bapat, Maharashtra Pranta Sanyojak. He told that success of the oratory lies in the character of the orator. He appealed the participants to work for स्वामी विवेकानंद सार्ध शती समारोह (150th birth anniversary of Swami Vivekananda). 

Tuesday, July 17, 2012

PARIKSHA DE HASTE HASTE in Maharastra

Pariksha de hasta hasta in MaharastraIn last two months a team of 10karyakartas have taken a Special Module of Yoga named "PARIKSHA DE HASTE HASTE" for the children studying in schools.


In the "PARIKSHA DE HASTE HASTE" children learn about preparing self scientifically for the exam, with the smile on face & without any worry  or fear.


During "PARIKSHA DE HASTE HASTE" the interaction with children done by play-way method and interactive way during Presentation. The Yogasana & Pranayam has been thought and patriotic song & games. Special TRATAKA practic was thought for improving concentration.
Pariksha de hasta hasta in MaharastraA glimpse of "PARIKSHA DE HASTE HASTE" presentation at http://www.vivekanandakendra.org/pariksha-de-haste-haste, if you want to arrange the same in your school children  please contact nearest Branch of Vivekananda Kendra or drop an email to webmaster [at] vkendra.org

Friday, June 15, 2012

विवेकानन्द केन्द्र द्वारा व्यक्तित्व विकास शिविर का समापन

residencial pdc samapan programmeविवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा नागपुर की ओर से नागपुर से 65 किमी पर स्थित स्वामी विवेकानन्द विद्यालय (देवालापार) सुरम्य परिसर में दिनांक 5 से 9 जून 2012 की अवधि में विद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिये व्यक्तित्व विकास शिविर (निवासी) किया गया | इसमें 70 शिविरार्थियों ने भाग लिया। इस चार दिवसीय निवासी व्यक्तित्व विकास शिविर में बच्चों के बौद्धिक विकास के लिये भारत जागो-विश्व जगाओ, स्वामी विवेकानन्द की भारत भक्ति, ऐसे बनें हम भी, संस्कार वर्ग क्यों और कैसे ? इन विषयों पर श्री लखेशजी, सुश्री प्रियंवदाताई पांडे, सौ. क्षमाताई दाभोड़कर, डॉ. श्री मोरेश्वरजी इन विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। मंथन में शिविरार्थियों ने भारत का भारत से परिचय, हमारी भारतभक्ति, मैं नहीं हम आदि विषय पर शिविरार्थियों ने विमर्श किया। सृजन सत्र में शिविरार्थियों ने वारली पेंटिग और अभिनय कला सीखी। शिविरार्थियों के शारीरिक विकास हेतु योगाभ्यास, श्रमसंस्कार और विविध प्रकार के खेल लिये गये। भावनात्मक और अध्यात्मिक विकास के लिये भजन संध्या, गीत सत्र ली गई जिसमें शिविरार्थियों नें अनेक भजन और देशभक्ति गीत भी सीखे। रात्रिकालीन सत्र में प्रेरणा से पुनरूत्थान के अंतर्गत शिविरार्थियों ने कृतिगीत सीखे, विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक श्री एकनाथजी रानडे के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भी कहानी के माध्यम से शिविरार्थियों ने आनंद लिया | प्रेरणादायी विडियो क्लिपिंग के साथ ही हनुमान चालिसा का नियमित पठन का भी इसमें समावेश था |
इस शिविर का समापन दिनांक 9 जून 2012 को शिवाजी नगर नागरिक मंडल हॉल, शिवाजी नगर, नागपुर में हुआ | शिविर के समापन में शिविरार्थियों ने विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया । शिविर की शुरूवात 3 ओमकार प्रार्थना से हुई । बच्चों ने अपने अनुभव कथन किया | संगठित होकर कार्य करना, अनुशासन, आज्ञापालन, राष्ट्रभक्ति, सृजनशीलता तथा संभाषण कला के गुण शिविरार्थियों को सिखने को मिली। इस कार्यक्रम में विवेकानन्द केन्द्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता तथा महाराष्ट्र प्रान्त संगठक श्री विश्वासजी लापलकर ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि इस शिविर के माध्यम से बच्चों को अनेक अच्छी आदतें लगी है और उन आदतों का संवर्धन करना तथा समाज सेवा के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना भी आवश्यक है | बच्चों को अपने कार्य स्वयं करने दें । वे अपने जीवन में आदर्श का पालन करेंगे तो यह समाज भी आदर्श बनेगा। स्वामीजी के संदेशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति इस समाज का अभिन्न अंग है और उसमें अनेक क्षमताएँ

होती हैं, वह अपने आप में अद्वितीय है। उन्होनें कहा कि हमारा समाज सोया हुआ है और स्वामी विवेकानन्दजी के विचारों को घर-घर पहुँचाकर इस समाज को हमें जगाना है तभी भारत विश्वगुरू के पद को प्राप्त कर पाएगा। स्वामी विवेकानन्द की 150 t;arh अर्थात सार्ध शती समारोह 2013-2014 में विश्वभर बड़ी धूमधाम से मनाई जाएगी | इसी अवसर पर उपस्थितों को आह्वान किया कि वे समय का दान देकर या आर्थिक सहायता प्रदान कर इस राष्ट्रयज्ञ में अपना भूमिका निभाएं | इस कार्यक्रम में 225 लोग उपस्थित थे।

Tuesday, May 15, 2012

कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

सदा विवेकानन्दमयम्


कार्यकर्ताओं के कौशल्य का विकास एवं संगठनात्मक कार्य के वृद्धि हेतु विवेकानन्द केन्द्र, शाखा-नागपुर द्वारा स्थानिय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया । शिविर स्वामी विवेकानन्द की १५० वीं जयन्ती (स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती) के उपलक्ष्य में "सदा विवेकानन्दमयम" के विषय पर आधारित था ।
कार्यकर्ताओं के सर्वांगीण विकास हेतु शिविर में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया । जिसमें कार्यकर्ताओं के शारीरिक विकास हेतु योगासन, प्राणायम, खेल आदि के सत्र हुए जिसके माध्यम से कार्यकर्ताओं का शारीरिक विकास के लिए आवश्यक कौशल्य से सम्बंधित बातें बताई गई । इसी प्रकार वैचारिक स्पष्टता एवं बौद्धिक क्षमता के विकास हेतु विभिन्न विषयों पर बौद्धिक सत्र हुए, जिसमें स्वामी विवेकानन्द राष्ट्रभक्त संन्यासी, एकनाथ जी एवं शिलास्मारक, कार्यकताओं के विशेष गुण, केन्द्र प्रार्थना, हमारे उत्सव प्रमुख विषय थे । इसी प्रकार केन्द्र कार्य से सम्बंधित विषयों कार्यपद्धति एवं कार्यप्रणाली, व्यवस्था, कार्यक्रम पूर्व नियोजन, पूर्ण नियोजन पर भी अभ्यास सत्र लिया गया । शिविर में स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह के विषय में श्री धनंजय सूर्यवंशी जी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया । शिविर में एक दिन विशेष अतिथि के रूप में डॉ. रामगोपाल जी, जो की (DRDO)  के पूर्व संचालक एवं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ पोखरण में कार्य किया, ने विजन २०२० पर प्रकाश डाला  एवं कार्यकर्ताओं के प्रश्नों के रोचक उत्तर दिये ।
 कार्यकर्ताओं में वक्तृत्व क्षमता एवं वैचारिक स्पष्टता हेतु व्यक्तिचरित्र, कार्यकर्ता के गुण विशेष, केन्द्र प्रार्थना, दायित्व बोध आदि विषयों पर मंथन एवं उनका प्रस्तुतीकरण किया गया । शिविर में ३८ कार्यकर्ता सहभागी हुए । शिविर के अन्तिम दिन सम्पर्क कौशल के प्रत्यक्ष अनुभव के लिए शिविर स्थल के समीप कॉलोनी के घरों में कार्यकर्ताओं साहित्य विक्री के लिए भेजा गया । स्वामी विवेकानन्द के विचारो को घर-घर तक पहुंचाने वाले इस साहित्य सेवा अभियान का सभी ने आनंद लिया । सम्पर्क के प्रत्यक्ष अनुभव से कार्यकर्ताओं को उत्साह एवं शक्ति मिली एवं उन्होंने अपने अनुभव को अपने शब्दों में प्रकट किया ।
शिविर का समापन आहुति सत्र से हुआ । कार्यकर्ताओं ने स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती के अवसर पर अपने दायित्व का व्यवस्थित निर्वहन का संकल्प लिया और अनुवर्तन के रूप में अनिवासी व्यक्तित्व विकास शिविर के आयोजन का नियोजन किया, जो कि अब विस्तारश: प्रारम्भ हो चुका है । शिविर अधिकारी के रूप में आदरणीय गौरी ताई उपस्थित थी।

Monday, March 5, 2012

Parama Poojaniya Sri Gurui Purasakar

Parama Poojaniya Sri Gurui Purasakar Parama Poojaniya Sri Gurui Purasakar given to Vivekananda Kendra for its work in "Samaj Prabodhan" by Rashtriya Swayamsevak Sangh Jankalyan Samiti Maharashtra Prant on 19 February 2012. Some of the photos. For this some of Pranta Adhikaris of Maharashtra and from Aurnagabad were also present.