विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, गुजरात प्रांत, भावेणा के भविष्य किशोर–किशोरियों द्वारा उत्साहपूर्वक सूर्यनमस्कार महायज्ञ २०२६ का भव्य आयोजन किया गया। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् से की गई। मंगलाचरण में बच्चों को मिश्वा बहन द्वारा शांति पाठ कराया गया। मंच पर उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया गया। भावेणा के युवाओं ने राजा कृष्णकुमारसिंहजी के ध्येय वाक्य “मेरी प्रजा का कल्याण हो” को सूर्यनमस्कार के माध्यम से चरितार्थ किया।
कार्यक्रम में बच्चों का उत्साहवर्धन करने हेतु भावनगर स्टेट की राजकुमारी कुंवरी साहेब बृजेश्वरी गोहिल ने शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व पर अपने विचार रखे। राजकुमारी कुंवरी साहेब बृजेश्वरी जी गोहिल ने कहा कि -
“योग विद्यार्थी जीवन में अत्यंत आवश्यक है। इससे एकाग्रता बढ़ती है, जो अध्ययन के लिए बहुत जरूरी है।”
नगर प्रमुख श्री जिग्नेश भाई चौहान ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंदजी ने सन् 1892 में 25, 26 और 27 दिसंबर को ध्यान साधना की थी और उसके पश्चात भारत के युवाओं को श्रेष्ठ कार्य करने का संदेश दिया। श्री रोहन भाई ने सूर्यनमस्कार मंत्रों का उच्चारण कराया और सभी बच्चों ने मिलकर 24 सूर्यनमस्कार किए।
तुलसी बहन द्वारा सभी बच्चों को “देश हमें देता है सब कुछ…” प्रेरणादायक देशभक्ति गीत का गायन कराया गया। विभाग संचालिका आ. मंजू बहन गौड़ ने आभार प्रदर्शन किया। विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, गुजरात प्रांत के सह-प्रांत प्रमुख डॉ. चिंतनसिंह चुडासमा ने कहा —
“KYD – Know Your Duty (अपने कर्तव्य को जानो) — अनुशासन और स्वच्छता जैसे गुणों को अपनाना चाहिए।
आज समयदान की आवश्यकता है। हमें पढ़ाई के साथ-साथ यह भी गर्व होना चाहिए कि भावेणा के महाराजा कृष्णकुमारसिंहजी भारत के विलय में सर्वप्रथम अपना राज्य समर्पित करने वाले राजा थे। हम उनकी प्रजा हैं, यह हमारे लिए गौरव की बात है।”
अंत में श्री हेमेन भाई द्वारा शांति मंत्र का पाठ कराया गया।

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