Monday, March 23, 2026

योग विमर्श : आयोजन वि.के.वयम् पुणे द्वारा

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, वेदांतिक एप्लीकेशन ऑफ योग एंड मैनेजमेंट, महाराष्ट्र प्रांत, पुणे के तत्वावधान में 22 मार्च 2026 को एक विशेष 'योग विमर्श' व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य विषय "जीवनदर्शक उपनिषद: कल, आज और कल" था, इस प्रेरणादायी व्याख्यान में कुल 85 प्रतिभागियों की सक्रिय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का सफल संचालन एक सुव्यवस्थित टीम द्वारा किया गया। श्रीमती शुभांगी ताई कुलकर्णी ने प्रस्तावना रखी, सुश्री वैशाली ताई वाघीरकर ने वक्ता का परिचय कराया।

"जीवनदर्शक उपनिषद: कल, आज और कल" पर श्रीमती माधवी जोशी, पुणे ने अत्यंत विद्वत्तापूर्ण एवं सरल भाषा में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने रेखांकित किया कि उपनिषदों का दस हजार वर्ष पुराना ज्ञान त्रिकालबाधित है और आज के युग में भी उतना ही प्रासंगिक है। ऋषियों ने अपने तप और सूक्ष्म चिंतन से वेदों की रचना की, जिसका अंतिम भाग 'उपनिषद' है। श्रीमती माधवी जोशी जी ने समझाया कि उपनिषद आत्म-साक्षात्कार और सत्य की खोज की वह कुंजी है, जिसका सार 'श्रीमद्भगवद्गीता' में मिलता है। उन्होंने सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार तिल में तेल, फूलों में सुगंध, दूध में मक्खन, गन्ने में गुड़, लकड़ी में आग दिखाई नहीं देता पर विद्यमान रहता है, वैसे ही शरीर में आत्मा का अस्तित्व है, जिसे पहचानना ही जीवन का लक्ष्य है।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने जीवन जीने के व्यावहारिक सूत्रों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि "मैं" और "मेरा" के अहंकार को त्यागकर ही आत्म-तत्त्व को जाना जा सकता है। उपनिषद हमें सिखाते हैं कि उपभोग भी त्यागपूर्वक होना चाहिए और लेने के बजाय देने की वृत्ति विकसित करनी चाहिए। श्रीमती माधवी जोशी जी ने शरीर की तुलना एक रथ से करते हुए बताया कि इसका चालक 'आत्मा' है, परंतु मन की लगाम 'बुद्धि' के हाथ में होनी चाहिए। विज्ञान चाहे कितनी भी प्रगति कर ले, लेकिन पंचमहाभूतों का महत्व और उपनिषदों का अध्यात्म दर्शन सदैव मानव जाति का मार्गदर्शन करता रहेगा।

मीरा ताई ने प्रार्थना का नेतृत्व किया और पूरे कार्यक्रम का सूत्रसंचालन सौ. मृणालिनी ताई पंडित ने कुशलतापूर्वक किया।

सत्र के अंत में श्रीमती माधवी जोशी ने उपस्थित श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया, जो अंततः आध्यात्मिक बोध के साथ संपन्न हुआ।