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Monday, June 30, 2014

युवा भारत में अब गूंजेगा विवेकानन्द शिलास्मारक की गाथा

नागपुर, जून 15: विवेकानन्द शिलास्मारक निर्माता और विवेकानन्द केन्द्र के संस्थापक श्री एकनाथजी रानडे की जन्म शती पर्व के नियोजन के लिए विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की अखिल भारतीय अधिकारी बैठक यहां सम्पन्न हुई। 14 और 15 जून, 2014 को सम्पन्न हुए इस बैठक में ‘माननीय एकनाथजी जन्म शती पर्व’ के अवसर पर वर्षभर चलाए जानेवाले अभियानों की रूपरेखा निर्धारित की गई। गौरतलब है कि विवेकानन्द केन्द्र के नेतृत्व में गत वर्ष स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह का आयोजन सम्पूर्ण भारत में किया गया था।   

युवा केन्द्रित अभियान:
2014-2015 इस अवधि में चलनेवाले इस जन्मशती पर्व का उपक्रम युवा केन्द्रित है। ‘सफल युवा – युवा भारत’ इस नाम से यह उपक्रम देशभर चलाया जाएगा। इस उपक्रम के चार चरण होंगे – युवा सम्पर्क, युवा संग्रह, युवा प्रशिक्षण और युवा सेवा। इन चार चरणों के माध्यम से 1 लाख युवाओं को सफल जीवन के लिए कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ज्ञात हो कि कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द शिलास्मारक के निर्माण के लिए श्री एकनाथ रानडे ने अनेक गतिरोध को अवसर में परिणत कर विरोधियों को भी अपना बना लिया था। श्री एकनाथ रानडे एक कुशल संगठक के साथ ही कार्य को समयबद्ध और परफेक्शन से पूर्ण करनेवाले व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। श्री एकनाथजी की जीवनी और विवेकानन्द शिलास्मारक की गाथा को अधिकाधिक महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं तक पहुंचाने के लिए सम्पूर्ण देश में हजारों युवा सम्मलेन, सैंकड़ो युवा प्रेरणा शिविर तथा कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।

ज्ञात हो कि इस बैठक में अरुणाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर तथा कर्नाटक से कुल 130 प्रतिनिधि सहभागी हुए। बैठक में विवेकानन्द केंद्र के अखिल भारतीय उपाध्यक्षा बी. निवेदिता तथा ए.बालकृष्णन, महासचिव भानुदास धाक्रस, कोषाध्यक्ष एम. हनुमन्त राव, संयुक्त महासचिव त्रय रेखा दवे, प्रवीण दाभोलकर तथा पर्व संयोजक किशोर टोकेकर प्रमुखता से उपस्थित थे।

गौरतलब है कि विवेकानन्द शिलास्मारक के निर्माता श्री एकनाथ रानडे का जन्म विदर्भ में टीमटाला नामक छोटे से गांव में 19 नवम्बर, 1914 को हुआ था। उनका बचपन बचपन और युवा काल नागपुर में गुजरा। श्री एकनाथ रानडे ने राष्ट्रकार्य की शुरुवात नागपुर से ही की थी।